राजनीति
छत्तीसगढ़ सरकार आज पेश करेगी बजट: विकास, सुरक्षा और बस्तर पर विशेष नजर
रायपुर, 24 फरवरी : छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट आज दोपहर 12:30 बजे पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री ओपी चौधरी विष्णुदेव साय सरकार का तीसरा बजट सदन में रखेंगे। शुरुआती संकेतों के मुताबिक यह बजट तेज विकास, मजबूत बुनियादी ढांचे और समावेशी वृद्धि की दिशा में अहम माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार का बजट सत्र 23 फरवरी को कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के साथ शुरू हो गया था।
सूत्रों के अनुसार केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की प्राथमिकताओं के अनुरूप राज्य सरकार सुरक्षा और विकास के संतुलित मॉडल पर जोर दे सकती है। खासकर बस्तर और आसपास के इलाकों में सड़क, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़े प्रावधानों पर मुख्य फोकस रहने की संभावना जताई जा रही है।
अनौपचारिक संकेत यह भी हैं कि स्टार्टअप और एमएसमई को बढ़ावा देने, युवाओं के लिए रोजगार अवसर बढ़ाने और रायपुर को मेट्रो सिटी की तर्ज पर विकसित करने से जुड़े कदम बजट का हिस्सा बन सकते हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं को भी गति मिल सकती है।
सरकार का जोर गुड गवर्नेंस, औद्योगिक निवेश और गरीब कल्याण योजनाओं को और प्रभावी बनाने पर बना रह सकता है। माना जा रहा है कि यह बजट विकास की रफ्तार बनाए रखने के साथ दूरस्थ क्षेत्रों तक उसके लाभ पहुंचाने की दिशा में ठोस संदेश देगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स पर लिखा है, “सुशासन से समृद्धि की ओर…विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला का बजट। आज हमारी सरकार का तीसरा बजट नवीन विधानसभा में प्रस्तुत होने जा रहा है। यह बजट हमारी सरकार के समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को केंद्रित करते हुए हमारी सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। किसानों, गरीबों, युवाओं, मातृशक्ति और आदिवासी समाज के सशक्तीकरण को हमने प्राथमिकता दी है। हमारा पूरा विश्वास है इस बजट से हमारे ‘सुशासन से समृद्धि’ के मॉडल को एक मजबूत आधार मिलेगा। निस्संदेह वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत होने वाला आज का बजट प्रदेश के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। हमारी सरकार ‘विकसित छत्तीसगढ़’ बनाने के अपने संकल्प पर दृढ़ है। आज के बजट से हमारे संकल्प को और बल मिलेगा। हमारा छत्तीसगढ़ आत्मनिर्भरता व समृद्धि के नए दौर में प्रवेश करेगा।”
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होकर 20 मार्च तक चलेगा। 25, 26 और 27 फरवरी 2026 को सत्र चलने के बाद 28 फरवरी से 8 मार्च तक कोई बैठक नहीं होगी। 25, 26 और 27 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्यय पर चर्चा होगी। पिछले साल 3 मार्च 2025 को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का एक लाख 65 हजार करोड़ रुपए का बजट प्रस्तुत किया था, जो कि वर्ष 2024-25 के बजट एक लाख 47,500 करोड़ रुपए से अधिक था।
अपराध
नासिक के बाद मुंबई में यौन उत्पीड़न के मामलों में लव जिहाद और कॉर्पोरेट जिहाद करने की साजिश, आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने कॉर्पोरेट जिहाद की बात से किया इनकार

ARREST
मुंबई; नासिक टीसीएस के बाद अब मुंबई में सेक्सुअल असॉल्ट केस को कॉर्पोरेट और धार्मिक रंग देने की कोशिश की गई है। यहां, मुंबई के अग्रीपारा पुलिस स्टेशन ने 19 साल की टेलीमार्केटर को परेशान करने के मामले में अशरफ सिद्दीकी नाम के 25 साल के युवक को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस अब इस केस की जांच कर रही है, लेकिन पीड़ितों के परिवार इसे कॉर्पोरेट जिहाद और लव जिहाद भी कहने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पुलिस ने इससे भी इनकार किया है। एक बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी में थर्ड-पार्टी टेलीमार्केटर के तौर पर काम करने वाली महिला सहकर्मी को अश्लील मैसेज भेजने के आरोप में अग्रीपारा पुलिस स्टेशन में अशरफ नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस 75, 78(2) और 70 और आईटी एक्ट 2000 के सेक्शन के तहत केस दर्ज किया गया है। पीड़िता के बयान और पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने न सिर्फ उसे सेक्सुअल इंटरकोर्स के लिए कई मैसेज भेजे, बल्कि अपनी महिला सहकर्मियों के बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए अश्लील तस्वीरें भी भेजीं। पुलिस को दिए अपने बयान में पीड़िता ने कहा कि जब उसने अशरफ को बताया कि वह हिंदू है, तो उसने जवाब दिया, “आजकल हिंदू लड़कियां मुस्लिम लड़कियों को पसंद करती हैं।” इसके बाद पीड़िता के परिवार ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही, उसके रिश्तेदारों ने मांग की है कि यह लव जिहाद का मामला है, इसलिए इसकी एसआईटी जांच होनी चाहिए और साथ ही आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में एआई इंजीनियरिंग भर्तियां 59.5 प्रतिशत बढ़ी, छोटे शहरों में मांग ने पकड़ी रफ्तार

भारत में एआई इंजीनियरिंग भर्तियों में सालाना आधार पर 59.5 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है। यह यूएस,यूके, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में एआई इंजीनियर्स की भर्तियों से ज्यादा है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
लिंक्डइन ने एक रिपोर्ट में बताया कि बेंगलुरु और हैदराबाद एआई हायरिंग में शीर्ष पर बने हुए हैं। हालांकि, विजयवाडा जैसे शहरों में भी एआई भर्तियों में तेजी देखी जा रही है।
एआई इंजीनियरिंग भर्तियों में सालाना आधार पर हैदराबाद में 51 प्रतिशत और विजयवाडा में 45.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लघु एवं मध्यम आकार के व्यवसायों (एसएमबी) के बीच सबसे तेजी से विकसित हो रहे एआई कौशल में एआई एजेंट, एआई उत्पादकता और एज्योर एआई स्टूडियो शामिल हैं, जो व्यावहारिक और निष्पादन-केंद्रित क्षमताओं की बढ़ती मांग को दर्शाते हैं।
मैन्युफैक्चरिंग जैसे उद्योगों में, एआई एजेंट और एआई प्रॉम्प्टिंग रोजगार क्षमता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कौशल के रूप में उभर रहे हैं।
सभी आकार के संगठनों में एआई को तेजी से अपनाने के कारण एआई इंजीनियरिंग में भर्ती में वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े उद्यम बुनियादी ढांचे, शासन और बड़े पैमाने पर तैनाती में निवेश कर रहे हैं, जिसके चलते वे एआई प्रतिभाओं को सबसे अधिक संख्या में नियुक्त कर रहे हैं।
वहीं, छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ता जा रहा है, विभिन्न उद्योगों में एआई प्रतिभाओं की आपूर्ति भी बढ़ रही है। विनिर्माण क्षेत्र में, भारत में एआई इंजीनियरिंग प्रतिभाओं की संख्या चार गुना बढ़कर 2025 में कार्यबल का 2 प्रतिशत हो गई है।
लिंक्डइन इंडिया इंजीनियरिंग के प्रमुख मलाई लक्ष्मणन ने कहा, “हम एआई एजेंटों और उत्पादकता उपकरणों जैसे व्यावहारिक एआई कौशल में मजबूत वृद्धि देख रहे हैं, जो सीधे वास्तविक दुनिया में उपयोग से जुड़े हैं।”
लक्ष्मणन ने आगे कहा, “इंजीनियरों के लिए, यह एक स्पष्ट संकेत है कि वे व्यावहारिक, प्रायोगिक क्षमताओं के निर्माण और एआई को रोजमर्रा के कार्यप्रवाह में एकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित करें। जैसे-जैसे सभी आकार के उद्योगों और संगठनों में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, प्रयोग से क्रियान्वयन की ओर बढ़ने वाले लोग इस अवसर का लाभ उठाने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में होंगे।”
राजनीति
पश्चिम बंगाल एसआईआर मामला: चुनाव ड्यूटी पर तैनात अफसरों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं

नई दिल्ली, पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को इस मामले में दाखिल 65 अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
दरअसल, चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर शिकायत की थी कि उनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना था कि वे अपने मताधिकार से वंचित हो रहे हैं, जबकि वे स्वयं चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को पहले इस मुद्दे को संबंधित अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष उठाना चाहिए। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में विस्तृत तथ्यात्मक जांच और सुनवाई की आवश्यकता होती है, जो अपीलीय मंच पर अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह उचित होगा कि याचिकाकर्ता पहले उपलब्ध वैधानिक उपायों का इस्तेमाल करें। इसके तहत वे संबंधित अपीलीय ट्रिब्यूनल के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जहां उनके मामले की विस्तार से सुनवाई संभव है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट एमआर शमशाद ने दलील दी कि 65 याचिकाकर्ता चुनाव ड्यूटी पर तैनात हैं और स्थिति विडंबनापूर्ण है क्योंकि जो व्यक्ति चुनाव करा रहा है, वही मतदान नहीं कर पा रहा है जबकि उनके ड्यूटी आदेशों में दर्ज ईपीआईसी नंबर अब हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बिना कारण बताओ नोटिस के नाम हटाना प्रथमदृष्टया मनमाना है।
इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिससे फिलहाल चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को कोई तत्काल राहत नहीं मिल सकी है। अधिकारियों को अब अपनी शिकायत के निस्तारण के लिए अपीलीय प्राधिकरण का रुख करना होगा।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जिन व्यक्तियों की अपील 21 या 27 अप्रैल तक स्वीकार हो जाती है, उन्हें संबंधित चरण में मतदान की अनुमति दी जाए लेकिन केवल अपील लंबित होने से मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा।
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