राष्ट्रीय समाचार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कब्रिस्तान के स्थान विवाद का हवाला देते हुए पुणे दरगाह में उर्स समारोह पर रोक लगाई
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पुणे के देहू रोड स्थित हजरत सलामती पीर दरगाह पर वार्षिक उर्स समारोह पर रोक लगा दी है। यह दरगाह भाजपा नेता और महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष हाजी अरफात शेख के पिता की मजार है।
अदालत ने कहा कि दरगाह एक कब्रिस्तान में है जहाँ समारोह आयोजित नहीं किए जा सकते। सलामती पीर एक सूफी उपदेशक थे जिनका असली नाम हज़रत सूफी ख्वाजा शेख आलमगीर शाह कादरी अल चिश्ती इफ्तेखारी था। मुंबई निवासी शेख ने कहा कि वह, दरगाह ट्रस्ट और वक्फ बोर्ड के साथ, इस आदेश के खिलाफ अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि अदालत के समक्ष तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने बताया कि दरगाह ईदगाह की ज़मीन पर बनी है जिसका इस्तेमाल नमाज़ और सभाओं के लिए किया जाता है, न कि कब्रिस्तान में। उन्होंने कट्टरपंथी संप्रदायों के सदस्यों पर हिंदू रीति-रिवाजों को अपनाने के लिए सूफियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। हज़रत सलामती पीर का जन्मदिन 15 अगस्त को है।
सलामती पीर का जन्म 15 अगस्त, 1947 को हुआ था। सूफी संत का वार्षिक उत्सव, उर्स, वर्ष में दो बार आयोजित किया जा सकता है, जिसमें इस्लामी पवित्र महीने रमज़ान के दौरान एक बार आयोजित किया जाना भी शामिल है। 31 जुलाई को, अदालत ने कहा कि मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं पर प्रशासनिक अधिकार रखने वाली वैधानिक संस्था, वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने 25 अप्रैल, 2018 के एक आदेश में पुलिस को दरगाह संरचना के निर्माण के लिए पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा, “हम यह समझने में असमर्थ हैं कि वक्फ बोर्ड ने कानून के किस प्रावधान के तहत ऐसी शक्तियाँ प्राप्त कीं और पुलिस सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश जारी किए।”
न्यायमूर्ति एमएस सोनक और न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन की पीठ ने वक्फ बोर्ड को आज से दो हफ्ते के भीतर इस मामले में हलफनामा दाखिल करने को कहा। वक्फ बोर्ड को यह भी पता लगाने को कहा गया कि क्या कब्रिस्तान में ऐसे स्मारक बनाने की अनुमति किसी व्यक्ति को दी जा सकती है।
अदालत ने कहा कि मामले में याचिकाकर्ताओं ने बताया है कि इस ढांचे में कुछ उत्सव आयोजित किए जाने हैं, जो प्रथम दृष्टया अवैध प्रतीत होता है।
तदनुसार, अगले आदेशों तक, हम प्रतिवादियों, विशेष रूप से प्रतिवादी संख्या 3 सहित, को कब्रिस्तान के भीतर निर्मित इन स्मारकों पर कोई भी उत्सव आयोजित करने से रोकते हैं। वक्फ बोर्ड, जो कब्रिस्तान को नियंत्रित करता है, को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस आदेश का पालन किया जाए, अन्यथा, उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया जाएगा।
शेख ने कहा कि उनके पास नक्शे और दस्तावेज़ हैं जो साबित करते हैं कि दरगाह का निर्माण सभी क़ानूनी ज़रूरतों को पूरा करने के बाद किया गया था। शेख ने पूछा, “यह न तो कब्रिस्तान में है और न ही किसी जंगल में। मैं चरमपंथी समूहों के निशाने पर रहा हूँ जिन्होंने मुझ पर गैर-मुसलमानों को दरगाह में प्रवेश देने के लिए पाखंड का आरोप लगाया है। जिस ज़मीन पर दरगाह बनी है, वहाँ सार्वजनिक समारोह और धार्मिक आयोजन होते रहे हैं। क्या किसी कब्रिस्तान में ऐसे आयोजन हो सकते हैं?”
“मैं इस आदेश के ख़िलाफ़ अपील करूँगा। तथ्यों को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया और हमारे वकील सही तथ्य पेश नहीं कर सके। उर्स रोकने से संत के लाखों अनुयायियों की धार्मिक भावनाएँ आहत होंगी।”
राष्ट्रीय समाचार
एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर रैडिसन ब्लू दिल्ली के संचालक, फ्लिपकार्ट और बिगबास्केट को जारी किए नोटिस

खाद्य नियामक ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ (एफएसएसएआई) ने शुक्रवार को बताया कि उसने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में एक ‘रेडिसन ब्लू होटल’ के संचालक और ई-कॉमर्स कंपनियों ‘फ्लिपकार्ट’ तथा ‘बिगबास्केट’ को नोटिस जारी किए हैं।
नई दिल्ली में रेडिसन ब्लू होटल चलाने वाली एबी होटल्स को दिए नोटिस में एफएसएसएआई ने कहा कि परिसर और उपकरणों का रखरखाव खराब पाया गया। इसमें जंग लगी मशीनरी, फ्रीजर से रिसाव और रेफ्रिजरेशन, तापमान की निगरानी, वेंटिलेशन, फर्श और लाइटिंग में कमियां शामिल थीं।
इसमें अपर्याप्त सफाई और स्वच्छता, रुके हुए पानी, जल निकासी और खाद्य अपशिष्ट संबंधी समस्याएं, साथ ही तिलचट्टे और मक्खियों की मौजूदगी सहित कीट नियंत्रण में कमियां पाई गईं।
नियामक ने कहा कि खाद्य पदार्थों की खरीद और प्राप्ति की जांच अपर्याप्त पाई गई, जिसमें फफूंद से प्रभावित और खराब हो चुके फल और सब्जियां प्राप्त होना, अनुमोदित विक्रेताओं के रिकॉर्ड और ट्रेसबिलिटी में कमियां शामिल हैं।
एफएसएसएआई ने यह भी बताया कि खाना पकाने वाले तेल की उपयुक्तता की जांच नियमानुसार नहीं की गई थी, और एनवाईसी किचन में ऐसे तेल का इस्तेमाल हो रहा था, जिनका टीपीसी मान 31 और 24.4 था।
जांच में पाया गया कि कच्चे और पके हुए खाने, शाकाहारी और मांसाहारी चीजों को सही ढंग से अलग-अलग नहीं रखा गया था। साथ ही, खाना बनाने वाले कर्मचारी बिना दस्ताने और हेयरनेट पहने काम कर रहे थे और उन्होंने गहने पहन रखे थे तथा उनके नाखून भी लंबे थे।
एफएसएसएआई ने ऑपरेटर को तुरंत सुधार के कदम उठाने और एक विस्तृत ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (एटीआर) जमा करने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें एफएसएसएआई लाइसेंस को सस्पेंड करना भी शामिल है।
एक अलग नोटिस में, एफएसएसएआई ने ‘फ्रीडम कुकिंग राइस ब्रैन ऑयल’ के बारे में भ्रामक दावे करने के लिए जेमिनी एडिबल्स एंड फैट्स इंडिया लिमिटेड, इनोवेटिव रिटेल कॉन्सेप्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (बिगबास्केट) और फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया है।
नियामक ने बताया कि इस प्रोडक्ट का प्रचार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर ऐसे दावों के साथ किया जा रहा था, जैसे कि ‘यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखता है या बढ़ाता है’ और इसमें ‘10,000प्लस पीपीएम नेचुरल ओरिजानोल’ है। इन दावों के जरिए इसके सेवन को कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट और हृदय स्वास्थ्य से जोड़ा जा रहा था।
नियामक के अनुसार, ‘एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स रेगुलेशंस, 2018’ के तहत खाद्य वनस्पति तेलों के लिए इस तरह के दावे करने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, जेमिनी एडिबल्स अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट के जरिए ऐसे प्रोडक्ट बेच रही थी, जबकि उसके पास ई-कॉमर्स गतिविधियों के लिए कोई वैध सेंट्रल लाइसेंस नहीं था।
संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
एक अन्य कार्रवाई में, नियामक ने डीएनवी फूड प्रोडक्ट्स लिमिटेड का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। जांच में पाया गया कि वहां खाद्य पदार्थों का निर्माण, पैकिंग और भंडारण बहुत ही अस्वच्छ परिस्थितियों में किया जा रहा था। वहां मक्खियां थीं, पानी जमा था और जाले लगे हुए थे; यहां तक कि पापड़ के ऊपर एक मक्खी भी बैठी हुई मिली।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत-ब्रिटेन ने मिलकर जो हासिल किया, उस पर गर्व है: लिंडी कैमरन

भारत में ब्रिटेन की निवर्तमान उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें भारत और ब्रिटेन ने मिलकर दोनों देशों के लोगों के लिए जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उन पर गर्व है। उन्होंने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर भी उत्साह जताया।
भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ते संबंधों का उल्लेख करते हुए कैमरन ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया है। वहीं, ‘विजन 2035’ के रोडमैप ने रक्षा, शिक्षा, नवाचार, जलवायु और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत किया है।
भारत में ब्रिटिश उच्चायोग की ओर से शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कैमरन ने कहा, “नमस्कार भारत, यह कितना शानदार सफर रहा। यहां सेवा देना मेरे लिए असाधारण सम्मान की बात रही है। मुझे लगता है कि भारत जैसा कोई दूसरा देश नहीं है। मुझे उन सभी उपलब्धियों पर गर्व है, जिन्हें हमने अपने दोनों महान देशों के लोगों के लिए मिलकर हासिल किया है। मुक्त व्यापार समझौते के जरिए अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने से लेकर भविष्य पर केंद्रित विजन 2035 तक, हमने रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, नवाचार और जलवायु के क्षेत्र में भारत-ब्रिटेन साझेदारी को मजबूत किया है।”
उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों के पीछे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उन लोगों की है, जिन्होंने दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।
कैमरन ने भारत में अपने कार्यकाल के दौरान सरकार, कारोबार, शिक्षा और नागरिक समाज से जुड़े लोगों से मुलाकात के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि इन सभी लोगों की भारत-ब्रिटेन संबंधों को आगे बढ़ाने की साझा महत्वाकांक्षा रही है।
उन्होंने कहा, “भारत के अलग-अलग हिस्सों में मुझे सरकार, कारोबार, शिक्षा और नागरिक समाज से जुड़े लोगों से मिलने का अवसर मिला। इन सभी की इस रिश्ते को आगे बढ़ाने की साझा महत्वाकांक्षा है। आप सभी ने भारत-ब्रिटेन संबंधों को मजबूत करने और दोनों देशों के लोगों तथा कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा करने में मदद की है।” लंदन में नई जिम्मेदारी संभालने के लिए भारत से विदा होने जा रहीं कैमरन ने कहा कि भारत हमेशा उनके दिल में एक विशेष स्थान रखेगा।
उन्होंने कहा, “मैं यहां से इस गर्व के साथ जा रही हूं कि हमने मिलकर बहुत कुछ हासिल किया है। साथ ही, आगे क्या होने वाला है, इसे लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं। भारत-ब्रिटेन संबंधों में असाधारण गति है। मेरे शानदार डिप्टी बेन मिलर कार्यवाहक उच्चायुक्त के रूप में यह जिम्मेदारी संभालेंगे और मुझे भरोसा है कि यह रिश्ता सुरक्षित हाथों में है। आपकी मित्रता, सहयोग और कड़ी मेहनत के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आप सभी के साथ काम करना वास्तव में सम्मान की बात रही है।”
अपने संदेश के अंत में कैमरन ने कहा, “फिर मिलेंगे इंडिया, हम जल्द दोबारा मिलेंगे।” लिंडी कैमरन को ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय (एफसीडीओ) में नए स्थायी अवर सचिव (पीयूएस) के रूप में नियुक्त किया गया है। वह इस पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला हैं।
ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने 10 सितंबर को उनकी नियुक्ति की घोषणा करते हुए कहा था कि कैमरन के पास कूटनीति, विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्रों में व्यापक अनुभव है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। भारत में उच्चायुक्त के रूप में उनकी हालिया भूमिका भी इसी अनुभव का हिस्सा रही है।
मिलिबैंड ने कहा था कि कैमरन ऐसे एफसीडीओ का नेतृत्व करेंगी, जो ब्रिटेन के मूल्यों और हितों को आगे बढ़ाने के लिए अपने समर्पित और अनुभवी कर्मचारियों की पूरी क्षमता का उपयोग करेगा। उन्होंने अंतरिम स्थायी अवर सचिव के रूप में काम करने वाले निक डायर के योगदान के लिए भी उनका आभार जताया।
राजनीति
सीएमआरएल-एक्सालॉजिक घोटाला: विजयन के मामले में कांग्रेस में मतभेद, सीएम को विरोध का सामना करना पड़ रहा

सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में राज्य सरकार के रुख को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर गहरे मतभेद सामने आए हैं। विधायक मैथ्यू कुझलनादन के कड़े विरोध के बावजूद मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने पिनाराई विजयन के खिलाफ जल्दबाजी में मामला दर्ज न करने के फैसले का बचाव किया है।
कांग्रेस विधायक दल की एक बैठक में कुझलनादन ने सवाल उठाया कि विजयन को वह न्याय क्यों मिलना चाहिए, जिससे एलडीएफ सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी को वंचित रखा था।
इस बहस से उन लोगों के बीच का मतभेद सामने आ गया, जो तुरंत कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे थे। वहीं, पार्टी नेतृत्व इस बात पर जोर दे रहा है कि इस मामले को कानूनी और राजनीतिक सूझबूझ के साथ संभाला जाना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, सतीशन ने बैठक में कहा कि कुझलनादन युवा जोश में ऐसा कर रहे हैं और सही राजनीतिक तरीका यह है कि किसी मामले में जल्दबाजी न की जाए। दोनों के बीच लंबी बहस हुई, जिसमें गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला, स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन और बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने मुख्यमंत्री का समर्थन किया।
यह टकराव तब हुआ जब कुझलनादन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार के रुख की सार्वजनिक रूप से आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के बाद सरकार को अपना रुख बदलना चाहिए और सरकार को मिली कानूनी सलाह पर भी सवाल उठाए।
कुझलनादन ने कहा कि उन्होंने ‘एक्सलॉजिक’ मामले को काफी हद तक अकेले ही लड़ा है और इसके कारण उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जिसमें विजिलेंस जांच भी शामिल है। उन्होंने सरकार के इस रवैये का विरोध करते हुए गृह मंत्री को पत्र भी लिखा था।
चेन्नीथला ने जवाब दिया कि इस मुद्दे पर वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि कुझलनादन इस मामले को आगे बढ़ा रहे हैं। अगर उनसे सलाह ली जाती, तो वे ऐसा न करने की सलाह देते।
सतीशन ने तर्क दिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के किसी संचार के आधार पर जल्दबाजी में कोई कदम उठाना राजनीतिक रूप से नासमझी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पहले की गई कानूनी कार्रवाइयों से विजयन को ही फायदा हुआ है।
इस विवाद ने कांग्रेस के उस रुख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे उसने अप्रैल के विधानसभा चुनावों में अपने प्रचार का एक बड़ा मुद्दा बनाया था।
सत्ता में आने से पहले, यूडीएफ नेसीएमआरएल-एक्सालॉजिक से जुड़े आरोपों को लेकर पिछली सरकार को कई बार निशाना बनाया था। इस घटनाक्रम से पार्टी के कुछ धड़ों में असंतोष पैदा हो गया है। नेतृत्व के सतर्क रवैये को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस पिछली सरकार पर लगाए गए अपने मुख्य आरोपों में से एक से पीछे हट रही है। इस बीच, यह मुद्दा फिर से तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विजयन ने हाई कोर्ट के निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है।
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