राजनीति
बीजेपी ने गांवों तक खड़ा किया डिजिटल नेटवर्क
भारतीय जनता पार्टी ने सूचना और तकनीक के मामले में दूसरी पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है। गांवों तक पार्टी डिजिटल नेटवर्क खड़ी करने में सफल रही है। आज गांवों के हर बूथ पर बनी टीम में बीजेपी आईटी सेल का एक प्रतिनिधि है, जिससे सभी दिशा-निर्देशों को पार्टी रियल टाइम में बूथ लेवल तक पहुंचाने में सफल हो रही है। यह बीजेपी का डिजिटल नेटवर्क है जो आज दिल्ली के केंद्रीय मुख्यालय से लेकर प्रदेश मुख्यालयों पर बैठे नेता बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं से भी रूबरू होने में सफल हो जाते हैं।
भाजपा आईटी सेल के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि पार्टी ने कोरोना काल में इस डिजिटल नेटवर्क को और बड़ा रूप दिया ताकि बूथ लेवल तक वर्चुअल रैलियों व मीटिंग से बात पहुंचाई जा सके। पार्टी ने प्रदेश संगठनों के चुनाव के दौरान यह निर्देश दिया था कि बूथ पर बनने वाली टीम में एक ऐसा सदस्य जरूर होना चाहिए, जिसके पास बेहतर स्मार्ट फोन हो और वह तकनीक की जानकारी रखने वाला हो। पार्टी के निर्देश पर हर बूथ और सेक्टर लेवल पर आईटी सेल के एक सदस्य को रखा गया है।
पदाधिकारी ने कहा कि जब लॉकडाउन लगने पर संवाद की समस्या खड़ी हुई तो आईटी सेल ने बूथ लेवल तक के कार्यकर्ताओं को जूम आदि ऐप के इस्तेमाल की जानकारी दी। जिससे पार्टी लाखों कार्यकर्ताओं तक अपनी बात पहुंचाने में सफल रही। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बीते दिनों सेवा कार्यो की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को बताया था कि कोरोना काल में करीब 700 ऑडियो ब्रिज से 70 लाख से अधिक पार्टी कार्यकर्ताओं से पार्टी नेताओं ने संपर्क किया।
पार्टी के सेवा कार्यो की समीक्षा के दौरान ही उत्तर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया था कि डिजिटल अभियान के दौरान 75 साल के त्रिवेणी राम को भी डिजिटल फ्रेंडली बनाया गया। आज वह वीडियो काल पर बात करते हैं। पार्टी के निर्देश पर इस बार सभी प्रदेश, जिला और मंडल इकाइयों की ओर से व्हाट्सअप ग्रुप बनाकर सेवा कार्यो की निगरानी की गई।
भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने आईएएनएस से कहा कि कोरोना काल में पार्टी ने डिजिटल मोड में आकर काम किया। सेवा कार्यो का संचालन और कारगर मानीटरिंग इससे संभव हो सकी। लॉकडाउन में जब सब कुछ थम गया था, तब ऑडियो-वीडियो कांफ्रेंसिंग से पार्टी ने शहर लेकर ग्रामीण इलाके के कार्यकर्ताओं से संवाद कायम किया।
गांव-गांव डिजिटल नेटवर्क खड़ा करने में बीजेपी के अत्याधुनिक कार्यालयों ने खास भूमिका निभाई। प्रदेश ही नहीं बीजेपी के सभी जिला कार्यालय भी ऑडियो-वीडियो कांफ्रेंसिंग सुविधाओं से लैस हैं। कोरोना काल में कार्यकर्ताओं और आम आम जनता से संवाद करने में पार्टी ने अहम भूमिका निभाई। करीब सात सौ जिलों में पार्टी ने अपने जिला कार्यालयों को डिजिटल फ्रेंडली बनाया है। पार्टी ने 11 हजार फिट ऊंचाई पर स्थित लद्दाख के प्रदेश मुख्यालय को भी हाईटेक बनाया है। जिससे लद्दाख के पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क साधना और आसान हुआ है।
महाराष्ट्र
भारत के संविधान ने दबे-कुचले लोगों और मुसलमानों की रक्षा की है। अबू आसिम आज़मी

मुंबई: संविधान ने दबे-कुचले लोगों और मुसलमानों को उनके अधिकार दिए हैं। रिजर्वेशन के ज़रिए डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने कमज़ोर और ताकतवर के बीच का फर्क खत्म किया है। उन्होंने संविधान में सभी को बराबर अधिकार दिए हैं। आज डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे विचार आज अंबेडकर जयंती पर सांसद अबू आसिम आज़मी ने ज़ाहिर किए। उन्होंने कहा कि आज डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का संविधान ही वह आधार है जिस पर देश का सबसे कमज़ोर इंसान भी देश के ताकतवर लोगों के खिलाफ़ आवाज़ उठा सकता है, लेकिन इस संवैधानिक अधिकार को दबाने की कोशिश की जा रही है। जब भी कोई दिक्कत होती है, तो रूलिंग पार्टी और अपोज़िशन के प्रति दोधारी तलवार अपनाई जाती है। यह पूरी तरह से गलत है। संविधान ने हमें बराबरी और बराबरी का पाठ पढ़ाया है। हम संविधान की सुरक्षा और विकास को पक्का करने के लिए अपने खून की आखिरी बूंद तक लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने हमें संविधान और डेमोक्रेटिक वैल्यूज़ को बनाए रखने का हुनर भी दिया है और उन्होंने सभी को बराबर का दर्जा दिया है। लेकिन बदकिस्मती से आज सरकार रिज़र्वेशन खत्म करने की साज़िश कर रही है और इसी वजह से देश में गैर-बराबरी पैदा हुई है। कम्युनलिज़्म बढ़ रहा है और इसी वजह से देश में नफ़रत का माहौल है। देश में संविधान ने कभी भेदभाव नहीं किया, लेकिन आज सत्ता में बैठे लोग संवैधानिक मूल्यों को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
विदेश मंत्री जयशंकर ने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष पेनी वोंग से वेस्ट एशिया के हालात पर की चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया की अपनी समकक्ष पेनी वोंग से फोन पर बात की और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई, जब क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति काफी तनावपूर्ण है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सकी है।
बातचीत के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आज ऑस्ट्रेलिया की सीनेटर पेनी वोंग के साथ पश्चिम एशिया के हालात पर अच्छी बातचीत हुई, उनके साथ विचारों का आदान-प्रदान सराहनीय रहा।”
आठ अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बनी थी। यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान में हमले किए थे, जिसमें ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई बड़े सैन्य अधिकारी मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और अमेरिका के सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
पिछले कुछ हफ्तों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर कई देशों के विदेश मंत्रियों से बात कर चुके हैं। भारत लगातार इस क्षेत्र के देशों और अपने अहम साझेदारों के साथ संपर्क में बना हुआ है।
इससे पहले एस. जयशंकर ने इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार से भी फोन पर बात की। दोनों के बीच पश्चिम एशिया के हालात और होर्मुज स्ट्रेट पर चर्चा हुई थी।
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि उन्होंने जयशंकर से कहा कि अमेरिका का सख्त रुख बहुत जरूरी है, ताकि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हमेशा की तरह एक अच्छी बातचीत हुई। हमने ईरान, होर्मुज स्ट्रेट और लेबनान पर चर्चा की।
इजरायल के विदेश मंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, “मैंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए शर्तों पर अमेरिका का सख्त रुख (ईरान में कोई संवर्धन नहीं, संवर्धित सामग्री को ईरान से हटाना) पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने आगे कहा, “मैंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आर्थिक आतंकवाद के जरिए नुकसान पहुंचाना ऐसे कदमों की मांग करता है, जो सभी देशों (जिसमें भारत और हमारे खाड़ी के मित्र भी शामिल हैं) के लिए नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करें।”
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और इसके जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।
राजनीति
नीतीश कुमार ने 20 साल के शासन में बिहार को दिलाई अलग पहचान

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को बिहार के लोक भवन पहुंचकर राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद अब बिहार में एनडीए की नई सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार , उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री विजय चौधरी के साथ मुख्यमंत्री आवास से निकले और लोक भवन पहुँचे। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया।
इस बीच, कहा जा रहा है कि बिहार में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है। हालांकि अब तक मुख्य्मंत्री के नाम को घोषणा नहीं हुई है। भाजपा के प्रदेश कार्यलाय को सजाया गया है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी की भी विधायक दल की बैठक होगी। भाजपा ने अभी तक भले ही अगले मुख्यमंत्री के लिए अपने उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को प्रमुख दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
नीतीश कुमार के इस इस्तीफे के साथ बिहार में नीतीश युग के समाप्त होने की बात कही जा रही है। पिछले साल नवंबर महीने में विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिले बहुमत के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर चार दशकों का है। हाल ही में उनके राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद से ही कयास लगाये जाने लगे थे वे अब बिहार का मुख्यमंत्री का पद त्याग कर दिल्ली की राजनीति करेंगे।
इस बीच उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफा दिया था। उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1985 में जनता दल से हुई थी, जब उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। 1994 में, नीतीश ने लालू प्रसाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण विद्रोह में भाग लिया, जिसमें 14 सांसदों ने जॉर्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में दल-बदल कर जनता दल (जॉर्ज) बनाई, जो बाद में समता पार्टी में तब्दील हो गई।
यह नीतीश कुमार के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ था, क्योंकि उन्होंने लालू से अलग होकर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनने का पहला दौर 2000 में हुआ था, लेकिन गठबंधन में संख्याबल की कमी के कारण उनकी सरकार सात दिन के भीतर गिर गई। 2005 में उनकी शानदार वापसी हुई, जब उन्होंने लालू प्रसाद यादव के 15 साल के शासन को समाप्त किया और बिहार में ‘नए दौर’ की शुरुआत की। नीतीश कुमार ने लगभग दो दशक तक बिना किसी गंभीर राजनीतिक चुनौती के शासन किया।
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