राजनीति
भाजपा नेता ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कहा- समान नागरिक संहिता से होंगे 11 लाभ
भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर समान नागरिक संहिता बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि आज ही के दिन 23 नवंबर 1948 को विस्तृत चर्चा के बाद संविधान में अनुच्छेद 44 जोड़ते हुए सरकार को निर्देश दिया गया कि वह देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करे। लेकिन अनुच्छेद 44 लागू करने के लिए कभी भी गंभीर प्रयास नहीं किया गया। आजतक ‘भारतीय नागरिक संहिता’ का एक मसौदा भी नहीं बनाया गया। परिणामस्वरूप इससे होने वाले लाभ के बारे में बहुत कम लोगों को ही पता है। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने समान नागरिक संहिता बनने पर 11 तरह के लाभ गिनाए हैं। उन्होंने कहा है कि यह विषय मानव अधिकार से सम्बन्धित हैं जिनका न तो धर्म या मजहब से संबंध है और न तो इन्हें धार्मिक मजहबी व्यवहार कहा जा सकता है फिर भी आजादी के 73 साल बाद भी धर्म-मजहब के नाम पर भेदभाव जारी है। हमारे संविधान निमार्ताओं ने अनुच्छेद 44 के माध्यम से ‘भारतीय नागरिक संहिता’ की कल्पना की थी ताकि सबको समान अधिकार मिले और देश की एकता और अखंडता मजबूत हो लेकिन वोटबैंक की राजनीति के कारण भारतीय नागरिक संहिता आजतक लागू नहीं किया गया। यदि गोवा में एक समान नागरिक संहिता सबके लिए लागू हो सकती है तो देश के सभी नागरिकों के लिए एक ‘भारतीय नागरिक संहिता’ क्यों नहीं लागू हो सकती है?
अश्विनी उपाध्याय के मुताबिक, इससे होने वाले 11 लाभ इस प्रकार हैं :
1- देश के सभी नागरिकों के लिए एक ‘भारतीय नागरिक संहिता’ लागू करने से देश और समाज को सैकड़ों जटिल कानूनों से मुक्ति मिलेगी।
2- वर्तमान समय में अलग अलग धर्म के लिए लागू अलग अलग ब्रिटिश कानूनों से सबके मन में हीन भावना पैदा होती है इसलिए सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक ‘भारतीय नागरिक संहिता’ लागू होने से सबको हीन भावना से मुक्ति मिलेगी।
3- ‘एक पति-एक पत्नी’ की अवधारणा सभी भारतीयों पर एक समान रूप से लागू होगी और बाझपन या नपुंसकता जैसे अपवाद का लाभ सभी भारतीयों को चाहे वह पुरुष हो या महिला, हिंदू हो या मुसलमान, पारसी हो या इसाई, एक समान रूप से मिलेगा।
4- न्यायालय के माध्यम से विवाह-विच्छेद करने का एक सामान्य नियम सबके लिए लागू होगा। विशेष परिस्थितियों में मौखिक तरीके से विवाह विच्छेद करने की अनुमति भी सभी नागरिकों को होगी, चाहे वह पुरुष हो या महिला, हिंदू हो या मुसलमान, पारसी हो या इसाई।
5-पैतृक संपति में पुत्र-पुत्री तथा बेटा-बहू को एक समान अधिकार प्राप्त होगा और संपति को लेकर धर्म जाति क्षेत्र और लिंग आधारित विसंगति समाप्त होगी, चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, पारसी हो या इसाई।
6- विवाह-विच्छेद की स्थिति में विवाहोपरांत अर्जित संपति में पति-पत्नी को समान अधिकार होगा, चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, पारसी हो या इसाई।
7-वसीयत, दान, धर्मजत्व संरक्षकत्व बंटवारा, गोद इत्यादि के संबंध में सभी भारतीयों पर एक समान कानून लागू होगा, चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, पारसी हो या ईसाई। धर्म जाति क्षेत्र लिंग आधारित विसंगति समाप्त होगी।
8-राष्ट्रीय स्तर पर एक समग्र एवं एकीकृत कानून मिल सकेगा और सभी नागरिकों के लिए समान रूप से लागू होगा, चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, पारसी हो या ईसाई।
9- जाति धर्म क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग कानून होने से पैदा होने वाली अलगाववादी मानसिकता समाप्त होगी और एक अखण्ड राष्ट्र के निर्माण की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।
10-अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग कानून होने के कारण अनावश्यक मुकदमेबाजी में उलझना पड़ता है। सबके लिए एक नागरिक संहिता होने से न्यायालय का बहुमूल्य समय बचेगा।
11- मूलभूत धार्मिक अधिकार जैसे पूजा, नमाज या प्रार्थना करने, व्रत या रोजा रखने तथा मन्दिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा का प्रबंधन करने या धार्मिक स्कूल खोलने, धार्मिक शिक्षा का प्रचार प्रसार करने या विवाह-निकाह की कोई भी पद्धति अपनाने या मृत्यु पश्चात अंतिम संस्कार के लिए कोई भी तरीका अपनाने में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होगा।
राजनीति
दीया मिर्जा के दीपावली वीडियो पर सियासी घमासान, शिवसेना ने किया विरोध तो एनसीपी आई सपोर्ट में

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा अभिनेत्री दीया मिर्जा का पर्यावरण-अनुकूल और पटाखा-मुक्त दीपावली को बढ़ावा देने वाला जागरूकता वीडियो हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। एक ओर शिवसेना के नेता आनंद दुबे ने वीडियो का विरोध किया है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो अभिनेत्री दीया मिर्जा के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं।
शिवसेना प्रवक्ता आनंद दुबे ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि कलाकार लोगों को ज्ञान देने के बजाय टेलीविजन पर अपनी कला का प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा, “देखिए, सनातन इतना महान है कि उसे दीया मिर्जा या किसी से जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। दीपावली का पावन पर्व सभी हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा त्योहार होता है। हमें दीपावली का पर्व कैसे और किस तरह से मनाना है, ये किसी और से जानने की जरूरत नहीं है। हमें अच्छी तरह से अपनी संस्कृति के बारे में पता है और यह भी पता है कि पर्यावरण की किस तरह से रक्षा करनी है।”
उन्होंने कहा कि कलाकार टेलीविजन पर अपनी कला का प्रदर्शन करें, हम अपना काम कर लेंगे। हम अपनी परंपरा, आदर्शों और मूल्यों को हमेशा आगे रखकर चलते हैं। तो हमें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है कि किस तरह से त्योहार मनाना चाहिए।”
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र परिवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो का कहना है कि दीया मिर्जा ने हाई कोर्ट के आदेशों का पालन किया है। उन्होंने कहा, “दीया मिर्जा ने खुद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर वीडियो जारी नहीं किया है, बल्कि बीएमसी के किसी इंचार्ज ने उन्हें वीडियो बनाने के लिए अप्रोच किया था और दीया मिर्जा ने वीडियो बना दी, तब कहीं जाकर बीएमसी के हैंडल पर वीडियो डाली गई। जब दीया मिर्जा को अप्रोच किया जा रहा था, तब बीएमसी की मेयर ऋतु रावडे को इस बात की जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने उस समय कुछ भी क्यों नहीं कहा था? इसका मतलब है कि बीएमसी में भी अलग-अलग ग्रुप बन रहे हैं, जो मेयर को कुछ बताते नहीं हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “इसी तरह का वीडियो माधुरी दीक्षित और अजिंक्य रहाणे ने भी बनाया था। दोनों ने भी वही बात कही थी। इस वीडियो को लेकर बेवजह विवाद बढ़ाया जा रहा है। देखिए, दीपावली का त्योहार हम सभी मनाते हैं। यह खुशी का पर्व है, तो जब भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस तरह की बातें कही जाती हैं, तो यह गलत है। दीया मिर्जा ने कोई गलती नहीं की, उन्हें सिर्फ बताया गया था कि ये हाई कोर्ट के आदेश हैं। बीएमसी ने वही बात दीया मिर्जा समेत सभी कलाकारों से कहलवाई, लेकिन भाजपा बात का बतंगड़ बना रही है।”
राजनीति
तमिलनाडु में नई तमिल फिल्मों को बड़ी राहत, रिलीज के पहले हफ्ते में रोजाना 6 शो की मंजूरी

तमिलनाडु सरकार ने फिल्म उद्योग को बड़ी राहत देते हुए नई तमिल फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला किया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य के सभी सिनेमाघरों में नई रिलीज होने वाली तमिल फिल्मों के लिए रिलीज की तारीख से एक सप्ताह तक प्रतिदिन छह शो (सुबह 6:00 बजे से अगले दिन सुबह 2:30 बजे के बीच) चलाने की अनुमति देने के आदेश जारी किए हैं।
यह फैसला तमिल फिल्म एक्टिव प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, तमिल फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन और तमिलनाडु थिएटर एवं मल्टीप्लेक्स ओनर्स एसोसिएशन की मांगों पर विचार करने के बाद लिया गया। संगठनों ने सरकार से नई फिल्मों के प्रदर्शन के लिए शो की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया था।
वर्तमान में तमिलनाडु सिनेमा (विनियमन) नियम, 1957 के तहत सिनेमाघरों को जारी ‘सी’ फॉर्म लाइसेंस की शर्तों के अनुसार प्रतिदिन चार शो प्रदर्शित करने की अनुमति है, हालांकि राज्य सरकार पहले से ही नई तमिल फिल्मों को रिलीज के बाद सात दिनों तक प्रतिदिन पांच शो चलाने की विशेष अनुमति दे रही थी। इसके अलावा स्थानीय त्योहारों, सार्वजनिक अवकाशों तथा सप्ताहांत पर भी पांच शो के प्रदर्शन की व्यवस्था लागू थी।
फिल्म उद्योग की मांग पर विचार-विमर्श के बाद मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु सिनेमा (विनियमन) नियमों में संशोधन का प्रस्ताव मंजूर किया। इसके तहत अब नई तमिल फिल्मों को रिलीज की तारीख से सात दिनों तक प्रतिदिन सुबह 6 बजे से अगले दिन सुबह 2:30 बजे तक अधिकतम छह शो प्रदर्शित किए जा सकेंगे।
इससे पहले तमिलनाडु की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री विजय ने उच्चस्तरीय समिति के गठन का आदेश दिया। यह समिति पूर्व पुलिस महानिदेशक जेके त्रिपाठी, आईपीएस (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य जेलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना और उसे और अधिक मजबूत बनाने के लिए सिफारिशें देना है। यह फैसला थेनी जिला जेल से हाल ही में 17 कैदियों के फरार होने की घटना के बाद लिया गया है।
राष्ट्रीय समाचार
मध्य प्रदेश: राज्यसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार का नामांकन खारिज

मध्य प्रदेश में 12 नवंबर को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए मंगलवार को जांच के दौरान कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का नामांकन खारिज कर दिया गया। इससे भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को चुनौती देने की विपक्षी दल की कोशिश को बड़ा झटका लगा है।
राजकुमार लोहानी ने नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन, सोमवार को कांग्रेस विधायकों के समर्थन से अपने नामांकन पत्र दाखिल किए थे।
लोहानी का नामांकन इसलिए खारिज कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने अनिवार्य ‘फॉर्म 26’ हलफनामा जमा नहीं किया था। इस हलफनामे में उम्मीदवार की संपत्ति, देनदारियों, शैक्षणिक योग्यता और यदि कोई आपराधिक रिकॉर्ड हो तो उसका विवरण देना होता है।
लोहानी ने कमियों को सुधारने का मौका मांगा। उन्होंने झारखंड में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी का उदाहरण दिया, जिन्हें अपने नामांकन पत्रों में सुधार करने की अनुमति दी गई थी।
कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे, जो लोहानी के प्रस्तावकों में से एक थे, ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने पुरी के नामांकन हलफनामे पर भी आपत्तियां जताईं।
कटारे ने मंगलवार को तीन आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री की पत्नी का नाम न बताने, विदेशी मुद्रा में कुछ विदेशी संपत्तियों की घोषणा करने और हलफनामे के नोटरीकरण में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए।
कटारे ने प्रेस से बात करते हुए कहा, “हमने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने इन तीनों बिंदुओं पर आपत्तियां जताई हैं। हमें बहुत उम्मीद तो नहीं है, लेकिन देखते हैं कि रिटर्निंग ऑफिसर क्या फैसला लेते हैं।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुरी के हलफनामे में जिनेवा में एक अपार्टमेंट और विदेशी बैंक खातों का विवरण ठीक से नहीं दिया गया है।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के कारण जरूरी हो गया था।
भाजपा ने 28 अक्टूबर को पुरी को अपना उम्मीदवार घोषित किया। उन्होंने 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव और राज्य भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया।
230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं। इससे चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को संख्या बल के लिहाज से काफी बढ़त हासिल है।
उपचुनाव के लिए मतदान 12 नवंबर को होना है और उसी दिन वोटों की गिनती भी की जाएगी।
नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख 5 नवंबर है।
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