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Friday,19-June-2026
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बिहार: पितृपक्ष के पूर्व ‘मोक्षस्थली’ गया में सन्नाटा, ऑनलाइन पिंडदान के विरोध में पंडासमाज

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Gaya

 पितृपक्ष में पितरों को मोक्ष दिलाने की कामना के साथ बिहार के गया आने वाले पिंडदानी इस पितृपक्ष में यहां नहीं पहुंच पाए। सरकार द्वारा कोरोना काल में धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने भी भी इस साल पितृपक्ष मेले पर रोक लगा दी है।

इस साल दो सितंबर से शुरू होने वाले पितृपक्ष के एक दिन पहले तक ‘वष्णुनगरी’ गया में पिंडदानियों के नहीं पहुंचने के कारण सन्नाटा पसरा है।

बता दें कि पुरखों (पूर्वजों) को पिंडदान करने के लिए पितृपक्ष में देश, दुनिया के श्रद्घालु यहां पहुंचते हैं।

पितृपक्ष प्रारंभ होने के एक दिन पहले पुनपुन नदी में तर्पण, पिंडदान कर श्रद्घालु यहां पहुचते हैं और पितृपक्ष प्रारंभ होने के साथ विभिन्न पिंडवेदियों पर पिंडदान करते हैं। इस बार मेले को रद्द करने के बाद प्रशासन तीर्थयात्रियों को गया पहुंचने के लिए मना कर रहा है।

इधर, गया के पंडों ने ऑनलाइन पिंडदान का भी विरोध करते हुए इसका बहिष्कार कर दिया है। तीर्थ और वृत्ति सुधारिणी सभा के अध्यक्ष गजाधर लाल कटियार ने आईएएनएस को बताया कि मोक्षस्थली गया में पिंडदान ना कभी रुका है और ना कभी रुकेगा।

उन्होंने कहा, श्रद्घा से ही श्राद्घ की उत्पति हुई है। ऑनलाइन पिंडदान की कई संस्थाओं ने व्यवस्था की है, लेकिन हमलोगों ने इसका विरोध किया है।

उन्होंने बताया, “धर्मशास्त्र में कहीं भी ऑनलाइन की व्यवस्था का उल्लेख नहीं है। पिंडदान पुत्रों द्वारा पितृऋण से मुक्ति का मार्ग है, लेकिन जब पुत्र ही उपस्थित नहीं होगा तो फि र यह तो धोखा है।”

इधर, गया पंडा समाज के पंडा महेश लाल गायब कहते हैं कि ऑनलाइन और ई पिंडदान रोकने के लिए पंडा समाज के लोगों द्वारा 21 सदस्यीय कमिटी का गठन किया गया है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि करीब 700 ऑनलाइन बुकिंग रद्द कर दी गई है।

उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पिंडदान आस्था के साथ धोखा है। पिंडदान के लिए पिंडवेदियों पर आना होगा, तभी पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होगी।

हिन्दु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों की आत्मा की शांति एवं मुक्ति के लिए पिंडदान अहम कर्मकांड है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष को ‘पितृपक्ष’ या ‘महालय पक्ष’ कहा जाता है, जिसमें लोग अपने पुरखों का पिंडदान करते हैं।

मान्यता है कि पिंडदान करने से मृतात्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। ऐसे तो पिंडदान के लिए कई धार्मिक स्थान हैं परंतु सबसे उपयुक्त स्थल बिहार के गया को माना जाता है।

उल्लेखनीय है कि पितृपक्ष मेले को राजकीय मेले का दर्जा मिला हुआ है। इस मेले में कर्मकांड का विधि-विधान कुछ अलग प्रकार का है। श्रद्घालु एक दिन, तीन दिन, सात दिन, 15 दिन और 17 दिन तक का कर्मकांड करते हैं। कर्मकांड करने आने वाले श्रद्घालु यहां रहने के लिए तीन-चार महीने पूर्व से ही इसकी व्यवस्था कर चुके होते हैं।

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नीट पेपर लीक मामला : दिल्ली की अदालत ने आरोपी शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई

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नई दिल्ली, 6 जून। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनार को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 13 मई को सीबीआई ने शुभम खैरनार को नासिक से गिरफ्तार किया था।

आरोपी शुभम खैरनार की शनिवार को न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद उसे राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई।

शुभम खैरनार, महाराष्ट्र के नासिक जिले के नंदगांव का रहने वाला है। उसने मध्य प्रदेश की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से बीएएमएस (आयुर्वेद) की पढ़ाई की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का आरोप है कि उसने पुणे के एक संदिग्ध से यह पेपर 10 लाख में खरीदा और इसे हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख में बेच दिया।

बता दें कि नीट पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जानकारी सामने आई कि सीबीआई अधिकारियों ने शुक्रवार को कल्याण के म्हारल क्षेत्र में रहने वाली एक छात्रा से भी पूछताछ की।

सूत्रों ने बताया कि जांच टीम ने म्हारल इलाके में छात्रा के घर पहुंचकर उसका बयान दर्ज किया। सूत्रों का दावा है कि संबंधित छात्रा नाशिक की एक अन्य छात्रा के संपर्क में थी, जिसकी जांच के दौरान उसका मोबाइल नंबर जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में आया। इसी आधार पर सीबीआई ने उससे पूछताछ की है। हालांकि, सीबीआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। एजेंसियों की शुरुआती जांच में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। इसी आधार पर परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया और अब इसे नए सिरे से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी।

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कथित बांग्लादेशियों के जाली और फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों की जांच शुरू; किरीट सोमैया के आरोपों के बाद मुंबई पुलिस हरकत में।

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मुंबई: भाजपा नेता किरीट सौम्या ने मुंबई में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था, जिसके बाद मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच भी एक्शन में आ गई है। मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट के मामलों में कार्रवाई करने के लिए एक एसआईटी टीम बनाने को मंजूरी दे दी है और एक आदेश भी जारी किया है। किरीट सौम्या ने पहले इस मामले की जांच की मांग की थी। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने अब एक आदेश जारी कर यह जिम्मेदारी मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी को दी है, जो इन मामलों की जांच करेगी। मुंबई शहर से अब तक एक हजार से ज्यादा बांग्लादेशी अप्रवासियों को निकाला जा चुका है, इसके बावजूद किरीट सौम्या ने आरोप लगाया है कि शहर में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रहते हैं और यह देश की अखंडता के लिए खतरा है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में धार्मिक नफरत फैलाना भी शुरू कर दिया है। मुंबई मुंबई पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बर्थ सर्टिफिकेट और शिकायत की जांच के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी बनाई है। इस एसआईटी के बारे में डिपार्टमेंटल ऑर्डर जारी करते हुए मुंबई पुलिस कमिश्नर ने साफ किया है कि इस टीम को जॉइंट पुलिस कमिश्नर क्राइम लक्ष्मी गौतम हेड करेंगी, जबकि एडिशनल कमिश्नर क्राइम मुंबई, एडिशनल कमिश्नर स्पेशल ब्रांच, डीसीपी डिटेक्शन क्राइम और असिस्टेंट कमिश्नर क्राइम इस टीम का हिस्सा हैं। ऑर्डर में कहा गया है कि यह एसआईटी टीम बड़े पैमाने पर फर्जी डॉक्यूमेंट्स और बर्थ सर्टिफिकेट में फर्जी सर्टिफिकेट की शिकायतें सामने आने के बाद बनाई गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का मकसद डॉक्यूमेंट्स की जांच करके जरूरी एक्शन लेना है। यह ऑर्डर मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने जारी किया है।

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नासिक: जालसाज अशोक खराट की जांच में अहम नतीजा, कई जगहों पर छापेमारी के दौरान जानवरों के अवशेष और महिलाओं के बाल बरामद, बली देने का संदेह

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मुंबई: नासिक के धोखेबाज अशोक खरात की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और SIT ने कई जगहों पर छापेमारी की है। SIT को यहां से जानवरों के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन SIT ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या ये सच में जानवरों के अवशेष हैं या फिर मानव बलि का मामला है। इस मामले में SIT ने अवशेषों को अपने कब्जे में भी ले लिया है, वहीं शक है कि अशोक खरात अघोरी करता था और इसी प्रथा के चलते उसने मानव बलि भी दी होगी। इस बारे में SIT की जांच सही दिशा में जा रही है। नासिक के धोखेबाज अशोक खरात मामले में SIT की जांच में कई अहम नतीजे भी निकले हैं। SIT टीम की हेड तेजस्वी सतपोवे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर काम कर चुकी हैं और उनकी जांच कर चुकी हैं। इसी तरह अब नासिक मामले में भी जांच चल रही है। तेजस्वी सतपोवे की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता किसान हैं। वह अहमदनगर के शेगांव की रहने वाली हैं। तेजस्वी सतपोवे ने अब खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अशोक खरात के कई बड़े नेताओं और अफसरों से भी कनेक्शन थे। महिला आयोग की हेड रूपाली चाकणकर से भी उनके कनेक्शन थे, इसी आधार पर रूपाली को इस्तीफा देना पड़ा था। SIT जांच में जानवरों के अवशेषों के साथ महिलाओं के बाल भी मिले थे। अब SIT टीमें पता लगा रही हैं कि ये बाल किसके हैं, क्या ये एक महिला के बाल हैं या कई महिलाओं के बाल हैं।

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