राजनीति
बिहार : दूसरे चरण का मतदान जारी, पहले 2 घंटे में 8 फीसदी मतदान
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत मंगलवार को सुबह सात बजे से 17 जिलों के 94 विधानसभा क्षेत्रों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान जारी है। मतदान के लिए सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। कोरोना काल में हो रहे चुनाव को लेकर पूरी व्यवस्था की गई है। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, पहले दो घंटे में 8.05 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने-अपने मताधिकार का प्रयेाग कर चुके हैं। सुबह मतदान केंद्र पर मतदाताओं की संख्या कम है, लेकिन आयोग के अधिकारियों का मानना है कि दिन चढ़ने के बाद काफी संख्या में मतदाता मतदान केंद्र पहुचंेगे।
चुनाव आयोग के मुताबिक, इस चरण में 1,463 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होना है, इनमें से 1316 पुरूष, 146 महिला और एक थर्ड जेंडर शामिल है। इस चरण के चुनाव में महाराजगंज विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 27 प्रत्याशी हैं जबकि दरौली विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम चार प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।
सामान्य विधानसभा क्षेत्रों में सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक जबकि कई इलाकों में सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक ही मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। सभी मतदान केन्द्रों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
राष्ट्रीय समाचार
डिजिटल अरेस्ट केस: सीबीआई ने देश भर में 80 ठिकानों पर एक साथ मारा छापा

‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम को बढ़ावा देने वाले साइबर क्राइम नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने ‘ऑपरेशन चक्र-वीआई’ के तहत 60 स्पेशल टीमें बनाईं और 16 राज्यों – पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा – में 80 से ज्यादा जगहों पर एक साथ छापेमारी की।
यह छापेमारी एक चल रही जांच का हिस्सा थी, जिसका मकसद ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम के 200 से ज्यादा मामलों में शामिल एक नेटवर्क को खत्म करना था। इस दौरान चेन्नई और कोलकाता से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर शेल कंपनियां बनाने और ‘म्यूल’ बैंक अकाउंट खोलने और चलाने में शामिल होने का आरोप है। बताया जाता है कि इन अकाउंट्स का इस्तेमाल अपराध से जुड़ी लगभग 2 करोड़ रुपए की संदिग्ध रकम को लॉन्डर करने (अवैध पैसे को वैध दिखाने) के लिए किया गया था।
सीबीआई ने हाल ही में एक फर्जी वेबसाइट का पता लगाया, जिसका यूआरएल भारत के सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट जैसा ही था। धोखाधड़ी करने वालों ने कथित तौर पर इस फर्जी डोमेन का इस्तेमाल ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को धोखा देने के लिए किया। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से मिली शिकायत के आधार पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की और मामले की जांच शुरू की।
एडवांस्ड फॉरेंसिक टूल्स और तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए सीबीआई ने भारत और विदेश में चल रहे आपराधिक नेटवर्क के अहम हिस्सों की पहचान की। जांच से पता चला है कि अपराधियों ने अपनी धोखाधड़ी वाली गतिविधियों को भरोसेमंद दिखाने के लिए जाली और मनगढ़ंत दस्तावेज अपलोड किए थे, जिनमें अदालतों और अलग-अलग कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा जारी किए गए आदेशों जैसे दिखने वाले फर्जी आदेश भी शामिल थे।
छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फोन और बैंक ट्रांजेंक्शन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए। इन चीजों की बारीकी से फॉरेंसिक जांच और विश्लेषण किया जा रहा है। सीबीआई को ऐसे सबूत भी मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि भारतीय नागरिकों के अलावा, कई दूसरे देशों के नागरिकों को भी इसी नेटवर्क ने धोखा दिया हो सकता है। संबंधित देशों की कानून लागू करने वाली एजेंसियों को सही माध्यमों से सूचित किया जा रहा है।
सीबीआई साइबर क्राइम नेटवर्क को खत्म करने और ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम समेत साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजनीति
सीएम मोहन यादव पर सचिन पायलट ने साधा निशाना, राम मंदिर चंदा प्रकरण पर केंद्र को घेरा

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी और वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान भारतीय जनता पार्टी और विभिन्न सरकारों पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार से जुड़े कथित भूमि खरीद मामले, राम मंदिर चंदा प्रकरण, कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर और इमरजेंसी को लेकर प्रतिक्रिया दी।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा उज्जैन में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदने के कथित खुलासे पर सचिन पायलट ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। अब इतना बड़ा खुलासा सामने आया है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों का नाम जमीन से जुड़े बड़े मामले में सामने आ रहा है।
सचिन पायलट ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब बात नैतिकता, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की आती है, तब भाजपा दोहरे मापदंड क्यों अपनाती है। उन्होंने कहा कि अखबारों में सामने आए इस कथित खुलासे पर अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के पुराने नारे “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” का जिक्र करते हुए कहा कि लगाए गए आरोपों को देखकर अब स्थिति इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
राम मंदिर चंदा विवाद पर भी सचिन पायलट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के चंदे के नाम पर चोरी या गड़बड़ी से बड़ा कोई पाप नहीं हो सकता। सरकार को निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, चाहे आरोप किसी भी दल के व्यक्ति पर लगे हों। यदि राजनीतिक दल भगवान के नाम पर वोट मांगने में संकोच नहीं करते, तो भगवान के नाम पर हुए कथित चंदा घोटाले या धन के दुरुपयोग की जांच कराने में भी कोई हिचक नहीं होनी चाहिए। सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि अब तक न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार ने इस मामले में कोई जांच कराई है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के लिए चल रहे प्रशिक्षण शिविर पर सचिन पायलट ने कहा कि भाजपा नेताओं को कांग्रेस की चिंता छोड़कर अपनी पार्टी और जनता से किए गए वादों की चिंता करनी चाहिए। कांग्रेस 135 साल पुरानी पार्टी है और नए जिला अध्यक्षों को भाजपा की साजिशों, झूठे वादों और जनता को गुमराह करने वाली राजनीति को उजागर करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
वहीं, एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में इमरजेंसी से जुड़ा नया अध्याय शामिल किए जाने और भाजपा द्वारा संविधान हत्या दिवस तथा काला दिवस मनाए जाने पर भी पायलट ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इतिहास को हर कोई अपने नजरिए से देख सकता है। जब भी भाजपा की सरकार किसी राज्य या केंद्र में बनती है, तो वह इतिहास, साहित्य और पाठ्य पुस्तकों को अपने तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश करती है।
राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा कि यह भाजपा सरकार का उद्देश्य हो सकता है, लेकिन देश को आज लोकतंत्र के सामने खड़ी मौजूदा चुनौतियों पर भी ध्यान देना चाहिए। स्वतंत्र भारत के इतिहास में लोकतंत्र जिस तरह की चुनौतियों का सामना आज कर रहा है, वैसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई।
महाराष्ट्र
महायुति सरकार के अत्यधिक खर्च से महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था पर संकट: शिवसेना (यूबीटी)

शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को दावा किया कि 2026-27 के वार्षिक बजट के महज तीन महीने बाद महायुति सरकार द्वारा 97,706.40 करोड़ रुपए की पूरक मांगें पेश करने का कदम महाराष्ट्र के वित्तीय अनुशासन में आई गिरावट को उजागर करता है।
पार्टी ने कहा कि सार्वजनिक ऋण लगभग 11 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने, 60,000 करोड़ रुपए के वार्षिक ब्याज बोझ और राज्य के खजाने से मनमाने ढंग से खर्च किए जाने के कारण महाराष्ट्र सरकार की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है।
शिवसेना (यूबीटी) ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में कहा कि वर्तमान स्थिति उस अर्थशास्त्र के छात्र की तरह है, जो परीक्षा के दौरान अपनी उत्तर पुस्तिका में एक के बाद एक कई अनुपूरक प्रश्न जोड़ता है, और परिणाम घोषित होने पर मुश्किल से उत्तीर्ण हो पाता है।
मुख्यपत्र ‘सामना’ में टिप्पणी की गई, “महाराष्ट्र की अनुपूरक प्रश्न मांगने वाली सरकार अनुपूरक प्रश्नों की मांग में रिकॉर्ड बनाकर राज्य की तबाह अर्थव्यवस्था का सार्वजनिक रूप से मजाक उड़ा रही है।”
संपादकीय में तर्क दिया गया कि किसी भी सरकार के लिए बजट के तुरंत बाद पूरक मांग बेहद शर्मनाक होता है।
संपादकीय में कहा गया, “अनुत्पादक गतिविधियों पर अंधाधुंध खर्च के कारण राज्य सरकार की वित्तीय योजना पूरी तरह से पटरी से उतर गई है। महाराष्ट्र कभी वित्तीय अनुशासन के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन पिछले चार वर्षों में यह प्रतिष्ठा पूरी तरह से धूमिल हो गई है। इन चार वर्षों के दौरान महायुति सरकार ने लगभग 5 लाख करोड़ रुपए की पूरक मांगें लाने का सिलसिला जारी रखा है। यह बजट से अधिक खर्च का विश्व रिकॉर्ड है।”
शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि आदर्श रूप से यदि वित्तीय वर्ष के अंत में आवंटित धनराशि कम पड़ जाए या कोई नई योजना अचानक शुरू हो जाए तो अगले बजट से कुछ ही दिन पहले पूरक मांगों का उपयोग किया जाना चाहिए, लेकिन आज आवंटन जानबूझकर मुख्य बजट में छिपाए जाते हैं, और राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पूरक मार्गों के माध्यम से हजारों करोड़ रुपए की मांग की जाती है। इस बार सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। अगले बजट में पूरे नौ महीने शेष रहते हुए सरकार के राजस्व और व्यय अनुमान पहले तीन महीनों में ही धराशायी हो गए।
उन्होंने कहा कि जब महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सत्ता में थी और उसने काफी कम पूरक मांगें रखी थीं, तब मौजूदा सरकार के नेताओं (जो उस समय विपक्ष में थे) ने वित्तीय अनुशासन के पूर्ण पतन का आरोप लगाते हुए उनकी कड़ी आलोचना की थी।
संपादकीय में आगे कहा गया, “आज वही विपक्षी नेता राज्य के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। उनके कार्यकाल के चार वर्षों में पूरक मांगें 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो जाने के बावजूद वह अब इसे वित्तीय अनुशासनहीनता नहीं मानते।”
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने व्यंग्य करते हुए कहा कि पूरक उपलब्धि समर्थक सरकार पूरक मांगों का नया रिकॉर्ड बना रही है और उस राज्य की अर्थव्यवस्था को सार्वजनिक रूप से अपमानित कर रही है जो कभी अपनी वित्तीय अनुशासन के लिए प्रसिद्ध था। सरकार खुलेआम उस राज्य की आर्थिक विरासत को नष्ट कर रही है जिसे कभी वित्तीय ईमानदारी के लिए सम्मान दिया जाता था।
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