अंतरराष्ट्रीय समाचार
कट्टरता और विश्वास की कमी शांति के लिए सबसे बड़ी चुनौती : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कट्टरपंथ और चरमपंथ के खिलाफ लड़ने के लिए एक साझा टेम्पलेट का आह्वान किया। ताजिकिस्तान के दुशांबे में चल रही 21वीं एससीओ बैठक के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कट्टरपंथ और विश्वास की कमी मध्य एशिया में शांति के लिए सबसे बड़ी चुनौती है और अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रम ने इस चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है।
अपने छह मिनट के वर्चुअल संबोधन में, मोदी ने कहा, “अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है। सूफीवाद जैसी संस्कृतियां यहां पैदा हुईं और पूरी दुनिया में फैल गईं। इसे अब भी इसकी सांस्कृतिक विरासत में देखा जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि एससीओ को इस्लाम से जुड़े उदार, सहिष्णु और समावेशी संस्थानों और परंपराओं के बीच मजबूत नेटवक विकसित करने के लिए काम करना चाहिए, जो पहले से ही भारत और सदस्य देशों में प्रचलित है।
प्रधानमंत्री ने मध्य एशियाई देशों से भारत के विशाल बाजारों से जुड़ने और लाभ हासिल करने को भी कहा।
भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं।
कनेक्टिविटी के मुद्दों पर चीन का परोक्ष संदर्भ में उन्होंने कहा कि कोई भी कनेक्टिविटी पहल एकतरफा पहल नहीं हो सकती है।
मोदी ने चाबहार और नॉर्थ साउथ इंटरनेशनल कॉरिडोर के लिए भी कहा, यह सुनिश्चित, परामर्शी, पारदर्शी और भागीदारीपूर्ण होना चाहिए। सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।
ब्लॉक में नए शामिल होने का स्वागत करते हुए, उन्होंने कहा कि ईरान को एससीओ सदस्य के रूप में शामिल किया गया है जबकि सऊदी अरब, मिस्र और कतर को संवाद भागीदारों के रूप में शामिल किया गया है, उनकी भागीदारी से ब्लॉक को और मजबूती मिलेगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान पर सैन्य कार्रवाई का ट्रंप ने किया बचाव; कहा-परमाणु हथियारों का खतरा गंभीर था, इसलिए किया हस्तक्षेप

नॉर्दर्न केंटकी यूनिवर्सिटी के ‘ट्रूइस्ट एरिना’ में आयोजित एक रिपब्लिकन चुनावी रैली में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के अपने फैसले का बचाव किया। ट्रंप ने अपने दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल की सबसे बड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जरिए ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता पूरी तरह नष्ट कर दी गई है और तेहरान को दोबारा यह क्षमता विकसित नहीं करने दी जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान का खतरा इतना गंभीर था कि अमेरिका के लिए हस्तक्षेप करना जरूरी हो गया था।
ट्रंप ने समर्थकों से कहा, “ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। ऐसा नहीं हो सकता, क्योंकि अगर उनके पास होगा तो वे उसका इस्तेमाल करेंगे।”
राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु ढांचे को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं कि यह कार्यक्रम फिर से शुरू न हो सके। उन्होंने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह दोबारा वापस न आए।”
ट्रंप ने बताया कि सैन्य अभियान के दौरान उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसी दिशा में काम करने के निर्देश दिए थे। ट्रंप ने इस कार्रवाई को अपने उस बड़े दावे से भी जोड़ा, जिसमें वे कहते रहे हैं कि उनके नेतृत्व में अमेरिका की सैन्य ताकत फिर से मजबूत हुई है और देश अब अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने कहा कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया, जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। राष्ट्रपति ने माना कि इस अभियान के कारण अमेरिका को मध्य पूर्व पर अतिरिक्त ध्यान और संसाधन लगाने पड़े, लेकिन उनका कहना था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना किसी भी अल्पकालिक आर्थिक प्रभाव से ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सैन्य अभियान खत्म होने के बाद ऊर्जा की कीमतों में गिरावट आएगी।
ट्रंप ने कहा, “यह बहुत जल्दी खत्म होने वाला है।” उन्होंने आगे कहा कि अभियान समाप्त होने के बाद पेट्रोल की कीमतें पहले के मुकाबले और नीचे आ जाएंगी। अपने भाषण में बाद में ट्रंप फिर इस मुद्दे पर लौटे और इसे अपनी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताया।
उन्होंने कहा, “ईरान के पास न परमाणु हथियार है, न होगा, और कभी नहीं होगा। बात बिल्कुल साफ है।” ट्रंप का कहना था कि इस समस्या का समाधान पहले की अमेरिकी सरकारों को ही कर देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ईरान का सामना करने के लिए जरूरी दृढ़ता और इच्छाशक्ति दिखाई है।
राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ अभियान को अपनी अन्य विदेश नीति पहलों, जैसे वेनेजुएला और ग्रीनलैंड से जुड़े घटनाक्रमों के साथ भी जोड़ा।
ट्रंप ने अमेरिकी रक्षा खर्च में बढ़ोतरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार और रिपब्लिकन बहुमत वाली कांग्रेस ने सेना के लिए एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है और देश की रक्षा क्षमताएं ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा और प्रभाव को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
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बांग्लादेश को झटका, कप्तान लिटन दास ‘त्रिकोणीय सीरीज’ से बाहर

बांग्लादेश के वनडे कप्तान लिटन दास, अफगानिस्तान और जिम्बाब्वे के साथ खेली जा रही त्रिकोणीय सीरीज से बाहर हो गए हैं। हिप जॉइंट में चोट के कारण लिटन दास को सीरीज शुरू होने से ठीक पहले ही टीम से बाहर होना पड़ा है। उनकी गैर-मौजूदगी में तौहीद हृदोय टीम की कमान संभाल रहे हैं।
लिटन दास को इस साल की शुरुआत में मेहदी हसन मिराज की जगह बांग्लादेश की वनडे टीम का पूर्णकालिक कप्तान बनाया गया था। यह फैसला टीम प्रबंधन ने अगले वर्ष होने वाले आईसीसी मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप की तैयारियों को मद्देनजर रखते हुए लिया था, ताकि टीम एक स्थिर नेतृत्व के साथ अपने अभियान को मजबूत कर सके।
त्रिकोणीय सीरीज के पहले मैच में बांग्लादेश का सामना जिम्बाब्वे से हो रहा है, जिसमें जिम्बाब्वे ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला लिया है। बांग्लादेश की टीम में मेहदी हसन मिराज भी नहीं खेल रहे हैं, क्योंकि उन्हें बुखार है।
शेख जायद स्टेडियम में टॉस गंवाने के बाद तौहीद हृदय ने कहा, “टॉस जीतकर मैं भी बल्लेबाजी करना चाहता था, लेकिन विकेट एकदम ताजा लग रही है, इसलिए हम इसका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। लिटन को चोट की कुछ समस्या है, इसलिए वह नहीं खेल रहे हैं। हमारे पास तीन तेज गेंदबाज और दो स्पिनर हैं, इसलिए उम्मीद है कि हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे। वर्ल्ड कप 2027 की तैयारियों के मद्देनजर हमारे लिए हर एक मैच अहम है, सिर्फ वर्ल्ड कप ही नहीं। हमारे यहां एशिया कप होने वाला है, इसलिए यह खुद को अच्छी तरह तैयार करने का एक अच्छा मौका है।”
वहीं, टॉस जीतने के बाद जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा ने कहा, “हम पहले बल्लेबाजी करेंगे। विकेट काफी सूखा लग रहा है और अबू धाबी की परिस्थितियों को देखते हुए, यहां पहले बल्लेबाजी करना फायदेमंद साबित हो सकता है। यही एक मुख्य कारण है कि हम आज पहले बल्लेबाजी करना चाहते हैं। हमारे पास तीन सीमर और दो स्पिनर हैं, और सबसे खास बात यह है कि तफदजवा त्सिगा आज अपना डेब्यू करने जा रहे हैं।”
बांग्लादेश की प्लेइंग इलेवन में तंजीद हसन तमीम, सौम्या सरकार, नजमुल हुसैन शांतो, तौहीद हृदोय (कप्तान), मोसादेक हुसैन, सैफ हसन, नुरुल हसन (विकेटकीपर), रिशद हुसैन, शोरफुल इस्लाम, तस्कीन अहमद और मुस्तफिजुर रहमान शामिल हैं।
वहीं, सिकंदर रजा की कप्तानी में जिम्बाब्वे ब्रायन बेनेट, बेन कुरेन, ब्रेंडन टेलर, क्रेग एर्विन, वेस्ली मधेवेरे, तफदजवा त्सिगा (विकेटकीपर), ब्रैड इवांस, न्यूमैन न्यामुरी, ब्लेसिंग मुजाराबानी और वेलिंगटन मसाकाद्जा के साथ इस मुकाबले में उतरी है।
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अमेरिका कंपनी निल्सन भारत को बना रही अपना प्रमुख ग्लोबल इनोवेशन सेंटर : रिपोर्ट

अमेरिका की मीडिया एनालिटिक्स कंपनी निल्सन भारत को अपना प्रमुख ग्लोबल इनोवेशन सेंटर बना रही है। देश में कंपनी के 5,000 से अधिक कर्मचारी हैं, जो उसके दुनियाभर के कुल कर्मचारियों का लगभग आधा हिस्सा हैं। बेंगलुरु कंपनी का सबसे बड़ा केंद्र है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
मनीकंट्रोल का हवाला देते हुए डेली सन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि निल्सन के ग्लोबल इनोवेशन का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा अब भारत से आता है। कंपनी ने यहां विज्ञापन संबंधी जानकारी जुटाने और उसका विश्लेषण करने की प्रक्रिया को स्वचालित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी अनिल गोयल ने कहा कि एआई खेल आयोजनों में ब्रांड की दृश्यता पर नजर रखने और विभिन्न मीडिया माध्यमों में बंटे दर्शकों की संख्या का आकलन करने की प्रक्रिया को स्वचालित बनाने में मदद करता है।
उन्होंने कहा कि कंपनी ने भारत में अपने परिचालन को इस तरह विकसित किया है कि देश उसका ‘ग्लोबल इनोवेशन सेंटर’ बने, न कि केवल एक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी)।
गोयल के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया, “पारंपरिक जीसीसी के विपरीत, जहां भारत स्थित टीमें विदेशों में मौजूद अपने समकक्षों के अधीन काम करती हैं, निल्सन की स्थानीय टीमें उत्पादों का नेतृत्व करती हैं, फैसले लेती हैं और वैश्विक ग्राहकों के साथ सीधे काम करती हैं।”
गोयल ने कहा कि राजस्व के मामले में दूसरे बाजार भारत से आगे हैं, लेकिन भारतीय बाजार की तेज विकास दर के कारण यह कंपनी के उन शीर्ष 10 बाजारों में शामिल है, जहां विकास की सबसे अधिक संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि विज्ञापन सत्यापन और ब्रांड सुरक्षा पर केंद्रित कंपनी डबलवेरिफाई को शामिल किए जाने के बाद निल्सन की भारत में मौजूदगी और बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने भारत में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कुशल कर्मचारियों की बड़ी संख्या की भी सराहना की और कहा कि इससे यहां इनोवेशन संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के अवसर बढ़ रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई का निल्सन के विज्ञापन विश्लेषण कारोबार पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। कंपनी भारत और अमेरिका सहित 30-40 प्रमुख बाजारों में टेलीविजन, रेडियो, प्रिंट, पत्रिकाओं और आउटडोर मीडिया पर होने वाले विज्ञापन खर्च का आकलन करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, “पहले कंपनी सूचनाओं को संसाधित करने के लिए स्वचालन तकनीक और मैन्युअल काम के संयोजन पर निर्भर थी। उन कमियों को दूर करने के लिए 1,000 से अधिक कर्मचारी काम करते थे, जिन्हें तकनीक से हल नहीं किया जा सकता था।”
गोयल के अनुसार, एआई और बड़े भाषा मॉडल के इस्तेमाल से इन क्षेत्रों में मशीनों का योगदान पहले के 80-90 प्रतिशत से बढ़कर 97-98 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
रिपोर्टों में कहा गया है कि जैसे-जैसे अधिक उपभोक्ता फैसले लेने के लिए चैटजीपीटी, जेमिनी और क्लॉड जैसे एआई टूल और एआई एजेंटों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसे-वैसे मीडिया खपत को मापने के पारंपरिक तरीकों के सामने नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं।
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