अंतरराष्ट्रीय समाचार
व्हाइट हाउस डिनर अटैक से पहले हमलावर ने परिवार से मांगी थी माफी, कैलिफोर्निया से खरीदे थे हथियार
व्हाइट हाउस के संवाददाता रात्रिभोज के दौरान फायरिंग मामले की जांच में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने हथियारों के साथ आरोपी कोल टॉमस एलन को हिरासत में ले लिया था और उससे व्यापक पूछताछ जारी है। इस बीच अधिकारियों ने बताया है कि संदिग्ध बंदूकधारी राष्ट्रपति और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को निशाना बनाने वाला था और इसके लिए उसने बड़ी सावधानीपूर्वक साजिश रची थी।
अधिकारियों ने ये भी बताया कि आरोपी एलन जो करने जा रहा था, इस बारे में उसने हमले के कुछ समय पहले ही परिवार के सदस्यों और एक पूर्व नियोक्ता को ईमेल के माध्यम से जानकारी दी थी, जिसमें “माफी और स्पष्टीकरण शीर्षक वाला एक दस्तावेज संलग्न था।
ईमेल में एलन ने लिखा, “मैंने जो भी परेशानी पैदा की है, उसके लिए मैं तहे दिल से माफी मांगता हूं और साथ ही यह भी कहा कि वह जो करने वाला है उसके लिए उसे माफी की उम्मीद नहीं है। मेरे प्रतिनिधियों के कार्यों का मुझ पर प्रभाव पड़ता है और मैं अब अपराधों को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हूं।”
अमेरिकी अटॉर्नी जीनिन पिरो ने कहा कि लिखित दस्तावेज को देखने के बाद इसमें कोई संदेह नहीं है कि एलन ने राष्ट्रपति की हत्या की कोशिश की। एलन ने अपने संदेश में यह संकेत दिया गया था कि वह सीक्रेट सर्विस से जुड़े लोगों को केवल तभी निशाना बनाया जाएगा जब जरूरी हो।
होटल के कर्मचारी और मेहमान इसके निशाने पर नहीं होंगे। अगर बिलकुल जरूरी हुआ तो वह लगभग हर किसी को मार डालेगा। उसकी यह स्वीकारोक्ति खतरे की संभावित भयावहता को जाहिर करता है। जांचकर्ताओं ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ईमेल को हमले से पहले एक विशिष्ट समय पर भेजने के लिए शेड्यूल किया गया था।
इतना ही नहीं आरोपी ने इसके लिए कई जगहों की यात्रा की थी और हमले को अंजाम देने से पहले होटल के अंदर अपनी स्थिति का जायजा लिया था। अधिकारियों ने बताया कि कोल टॉमस एलन ने 25 अप्रैल के कार्यक्रम से काफी पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी। वह राष्ट्रपति के तय आगमन पर नजर रख रहा था और उसी स्थान पर अपने आवास की व्यवस्था कर ली थी।
एक संघीय हलफनामे के अनुसार, एलन ने 6 अप्रैल को वाशिंगटन हिल्टन में 24 से 26 अप्रैल तक तीन रातों के लिए बुकिंग कराइए थी। यह बुकिंग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सार्वजनिक रूप से रात्रिभोज में शामिल होने की पुष्टि के हफ्तों बाद की गई थी। एलन ने 21 अप्रैल को लॉस एंजिल्स के पास स्थित अपने घर से ट्रेन से यात्रा शुरू की और 23 अप्रैल को शिकागो पहुंचा। इसके बाद वह वाशिंगटन डीसी के लिए रवाना हुए, जहां वे 24 अप्रैल को दोपहर लगभग 1 बजे पहुंचा।
दोपहर लगभग 3 बजे वह होटल पहुंचा और रातभर वहीं रुका रहा, उसने खुद को उसी इमारत के अंदर रखा, जहां वह हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम आयोजित होने वाला था। अधिकारियों ने बताया कि कोल टॉमस एलन को रात्रिभोज के कार्यक्रम और वरिष्ठ अमेरिकी नेताओं की उपस्थिति की जानकारी थी। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मंत्रिमंडल के अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम होटल के कॉनकोर्स तल पर स्थित एक बैंक्वेट हॉल में रात लगभग 8 बजे शुरू हुआ।
लगभग 40 मिनट बाद एलन ने अपना काम शुरू किया। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लेंच ने कहा, “लगभग 8.40 बजे एलन होटल के टेरेस लेवल पर एक सुरक्षा चौकी के पास पहुंचा। अधिकारियों ने बताया कि वह एक लंबी बंदूक लेकर मैग्नेटोमीटर से होकर गुजरा। कुछ ही क्षणों बाद गोली चलने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। चेकपॉइंट पर तैनात एक सीक्रेट सर्विस अधिकारी को सीने में गोली लगी थी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने के कारण वह बच गया।
अधिकारी ने जवाबी फायरिंग की और इसके बाद एलन को तुरंत काबू कर लिया गया। ब्लेंच ने कहा कि यह हमला अचानक नहीं हुआ था, बल्कि वेल प्लांड था। जांचकर्ताओं ने बताया कि एलन के पास कई हथियार थे, जिनमें 12-गेज शॉटगन और 38 कैलिबर की पिस्तौल शामिल थी। एलन ने ये हथियार कैलिफोर्निया में खरीदे थे और वाशिंगटन पहुंचने से पहले उन्हें राज्य की सीमाओं के पार ले गया था।
अमेरिकी अटॉर्नी जीनिन पिरो ने कहा कि घटनाक्रम से स्पष्ट इरादा जाहिर होता है। उन्होंने कहा, वह पूरी तरह से सचेत था। उसने बैंक्वेट हॉल में घुसने का फैसला किया लेकिन कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने मुख्य कार्यक्रम में पहुंचने से पहले ही उसे रोक दिया। जांचकर्ताओं ने बताया कि संदिग्ध के होटल के कमरे, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और यात्रा इतिहास से अतिरिक्त सबूतों की समीक्षा की जा रही है। आरोपी की इस काम में किसी ने मदद की थी या नहीं, उसकी भी जांच की जा रही है।
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ईरान का दावा,’ अमेरिका को दिया जवाब, कुवैत में उसके सैन्य ठिकानों पर किया ड्रोन से हमला’

अमेरिका ने लगातार आठवीं रात ईरान पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी आर्मी के अनुसार, उसने कुवैत स्थित दो अमेरिकी सैन्य अड्डों को ड्रोन से निशाना बनाया है। रविवार को ईरान के सरकारी प्रसारक आईएसएनए ने सेना की ओर से जारी किए गए बयान के हवाले से कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी हमलों के प्रतिशोध में की गई।
ईरानी सेना के अनुसार, उसने कामिकाजे ड्रोन के जरिए कैंप उदैरी स्थित अमेरिकी सेना के गोला-बारूद भंडार और अली अल सलेम एयर बेस पर तैनात पैट्रियट रडार सिस्टम और एयर सर्विलांस रडार को निशाना बनाया। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान या संभावित हताहतों के बारे में तत्काल कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस बीच, ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही, जो खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख हैं, ने अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कोई और सैन्य कार्रवाई की, तो ईरानी सशस्त्र बल उसका “निर्णायक और विनाशकारी जवाब” देंगे।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अब्दुल्लाही ने कहा कि देश किसी भी आक्रामक कार्रवाई का पूरी ताकत से जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने अमेरिका को “ग्रेट सैटन (महाशैतान)” बताते हुए उन पर “विश्वासघाती और धोखेबाज दुश्मन” होने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सशस्त्र सेनाओं, सरकारी संस्थानों और आम जनता के बीच एकता को और मजबूत करेगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि भविष्य में ईरान अमेरिका को पिछले संघर्षों की तुलना में कहीं अधिक भारी कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।
इससे पहले, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बयान जारी कर पुष्टि की है कि उसने 18 जुलाई को ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का एक और दौर पूरा किया। सेंटकॉम के अनुसार, यह लगातार आठवीं रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की।
अमेरिकी सेना ने बताया कि इस अभियान में ईरान की तटीय निगरानी प्रणालियों, वायु रक्षा ठिकानों, समुद्री सैन्य क्षमताओं और मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करना था।
सेंटकॉम ने यह भी कहा कि अमेरिकी सैन्य संसाधनों ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े उन बलों को भी निशाना बनाया, जिन पर 17 जुलाई को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने का आरोप है।
अमेरिकी सेना के अनुसार, वर्तमान में मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। बयान में कहा गया कि सभी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं, अभियान के लिए तैयार हैं और क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने की क्षमता रखते हैं।
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अमेरिका ने समझौते से किए वादे नहीं निभाए, इसलिए ईरान ने भी अपने दायित्वों का पालन रोका: उपविदेश मंत्री गरीबाबादी

ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपविदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने कहा कि ईरान ने अमेरिका के साथ शांति समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना बंद कर दिया है। वाशिंगटन ने समझौते के तहत अपने वादों को तोड़ा है।
सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में, गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को असल में तोड़ा है या रद्द कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अब अपना बचाव करने पर ध्यान दे रहा है और बातचीत की कोई खबर नहीं है।
उन्होंने कहा, “अभी हमारे सामने देश का मजबूती से बचाव करने की चुनौती है। इस बार भी, अमेरिकियों को पहले ही जवाब मिल चुका है कि इन आक्रामक कार्रवाइयों से कुछ नहीं होगा। अगर वे समझदार हैं, तो उन्हें दूसरे तरीके चुनने चाहिए।”
दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिकी समयानुसार, शनिवार की रात को जानकारी देते हुए लिखा, “अमेरिकी सेना ने आज (शनिवार) शाम 6 बजे कमांडर इन चीफ के कहने पर ईरान के खिलाफ नए एयरस्ट्राइक शुरू किए। ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को और कम करने और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की सेना को तुरंत सजा देने के लिए किए गए हैं, जिन्होंने कल रात जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमले किए थे।”
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को बताया कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में दो यूएस सैनिक मारे गए और एक लापता हैं। मार्च के बाद से ईरानी गोलीबारी में पहली अमेरिकी सैनिक की मौत है।
सेंट्रल कमांड ने कहा, “17 जुलाई को, जॉर्डन में दो अमेरिकी सेवा सदस्य मारे गए, जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड और साझेदार फोर्स ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव कर रहे थे। इसके अलावा, एक सेवा सदस्य अभी लापता है।”
कमांड के अनुसार, चार और अमेरिकी सेवा सदस्य को मेडिकली जॉर्डन के हॉस्पिटल में ले जाया गया, लेकिन उन्हें छुट्टी दे दी गई। दूसरे लोगों को मामूली चोटें आईं और वे ड्यूटी पर लौट आए हैं।
वहीं, शहीदों की पहचान से संबंधित जानकारी को लेकर उन्होंने कहा कि सैनिकों की पहचान उनके परिवार वालों को बताए जाने के 24 घंटे बाद तक सार्वजनिक तौर पर साझा नहीं करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सैनिकों की मौत पर दुख जताया। उन्होंने बताया, “हमें ऐसा होते देखना अच्छा नहीं लग रहा। हमारे देश की सेवा करते हुए वो शहीद हुए।”
इसके अलावा, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक्स पर लिखा, “भगवान आपका भला करे, हीरो। उनकी कुर्बानी हमारे इरादे को और मजबूत करती है।”
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने शनिवार को एक बयान में जॉर्डन के अल-अजराक में अमेरिकी सेना के बेस पर हुए हमलों की जिम्मेदारी ली। आईआरजीसी ने दावा किया कि हमले में कई एयरक्राफ्ट पूरी तरह से नष्ट हो गए। यह हमला मिसाइलों और ड्रोन दोनों से किया गया था।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, अमेरिका ने पिछले हफ्ते ईरान के दक्षिणी प्रांतों में सैन्य ठिकानों और ढांचों पर कई हमले किए हैं। अमेरिका का दावा है कि उनका मकसद होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को कम करना था।
ईरान ने जवाब में कई खाड़ी देशों और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य बेस और जगहों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
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रूस पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला, मास्को के पास वेयरहाउस पर हमले में 7 की मौत

यूक्रेन ने शनिवार तड़के रूस के कई इलाकों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए। रूसी अधिकारियों के अनुसार, मास्को से दक्षिण-पूर्व स्थित तांबोव क्षेत्र के कोटोव्स्क शहर में एक लॉजिस्टिक्स सेंटर पर हुए ड्रोन हमले में 7 कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि 24 से 25 लोग घायल हुए हैं।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, तांबोव के गवर्नर येवगेनी पेर्विशोव ने बताया कि हमला रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज के स्वामित्व वाले वेयरहाउस पर हुआ। उनके मुताबिक, सभी मृतक नाइट शिफ्ट में काम कर रहे थे।
गवर्नर ने दावा किया कि रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले 28 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। उन्होंने कहा कि यदि सभी ड्रोन अपने निशाने तक पहुंच जाते, तो नागरिक हताहतों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी।
वहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार एक अलग घटना में ड्रोन हमले से एक तेल डिपो में आग लग गई। इसकी जानकारी मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने दी। उन्होंने बताया कि ड्रोन के मलबे के गिरने से नोगिंस्क शहर के एक तेल डिपो में आग लग गई।
उन्होंने बताया कि इस घटना में दो लोग घायल हुए हैं। एहतियात के तौर पर पास के एक मैटरनिटी हॉस्पिटल को खाली करा लिया गया। हालांकि, तेल डिपो को हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यह डिपो हल्के पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण और वितरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
जानकारी के मुताबिक, इस डिपो में पेट्रोल, डीजल और केरोसीन का भंडारण किया जाता है। यहां कुल 24 स्टोरेज टैंक हैं, जिनकी संयुक्त भंडारण क्षमता लगभग 11,500 घन मीटर (क्यूबिक मीटर) है।
रूसी अधिकारियों के अनुसार, कोटोव्स्क स्थित लॉजिस्टिक्स सेंटर के वेयरहाउस में लगी आग पर काबू पा लिया गया है, जबकि मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी है।
24 फरवरी 2022 से रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष जारी है। हाल के महीनों में दोनों पक्षों के बीच ड्रोन हमलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।
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