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बड़ा मंगल: हनुमान मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, ‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंजा परिसर

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अमेठी, 10 जून। ज्येष्ठ माह के पांचवें मंगलवार को उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित हनुमान मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतार देखने को मिली। हनुमान जी के दर्शन और पूजन के लिए लोगों में गजब का उत्साह नजर आया। खासकर ‘जामों के गौरा’ स्थित हनुमान गढ़ी मंदिर में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा।

मंदिर परिसर में “संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा” और हनुमान जी के जयकारों की गूंज सुनाई दी। श्रद्धालुओं ने मंदिरों के साथ-साथ चौराहों और कस्बों में स्टॉल लगाकर प्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन किया। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के लिए रास्तों को डायवर्ट किया, ताकि व्यवस्था बनी रहे।

वहीं, मिठाई और पूजन सामग्री की दुकानों पर भी प्रसाद लेने के लिए भीड़ देखने को मिली।

हनुमान गढ़ी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर मंगलकामनाएं मांगी। मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल रहा, जहां लोग भक्ति और आस्था में डूबे नजर आए। भक्तों का कहना था कि हनुमान जी के दर्शन से उनके सारे दुख-दर्द मिट जाते हैं।

बता दें, ज्येष्ठ मास के मंगलवार को बड़का मंगल, बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। मान्यता है कि इस माह के मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा-पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और कई समस्याएं खत्म हो जाती हैं।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर के साथ धी या चमेली का तेल मिलाकर लगाना चाहिए। साथ ही उन्हें प्रिय चना-गुड़, बूंदी के लड्डू, पान और लौंग का भोग भी लगाना चाहिए।

श्रीराम दूत को लाल रंग का चोला और झंडा भी चढ़ाना चाहिए। श्रीराम भक्त को अपने स्वामी का नाम सर्वप्रिय है। ऐसे में रामनाम की माला या तुलसी की पत्तियों, बरगद, पीपल के पत्तों पर राम नाम लिखकर चढ़ाने से मनोरथ भी पूरे होते हैं।

राजनीति

‘वंदे मातरम’ केवल गीत नहीं, राष्ट्र की चेतना और साहस का मंत्र है : सीएम योगी

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लखनऊ, 22 दिसंबर : राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस चर्चा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, क्रांतिकारियों के साहस और राष्ट्र के आत्मसम्मान का मंत्र है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संभवतः उत्तर प्रदेश पहली विधानसभा है, जहां इस ऐतिहासिक विषय पर विस्तार से चर्चा हो रही है।

मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, यह चर्चा किसी गीत की वर्षगांठ भर नहीं है, बल्कि भारत माता के प्रति राष्ट्रीय कर्तव्यों की पुनर्स्थापना का अवसर है। ‘वंदे मातरम’ का सम्मान केवल एक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह हमारे संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय दायित्वों का बोध कराता है। यह राष्ट्र की आत्मा, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। यह केवल काव्य नहीं था, बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है।

सीएम योगी ने कहा कि जब ‘वंदे मातरम’ अपनी रजत जयंती मना रहा था, तब देश ब्रिटिश हुकूमत के अधीन था। 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद अंग्रेजी शासन दमन और अत्याचार की पराकाष्ठा पर था। काले कानूनों के माध्यम से जनता की आवाज को दबाया जा रहा था, यातनाएं दी जा रही थीं, लेकिन ‘वंदे मातरम’ ने देश की सुप्त चेतना को जीवित रखा। जब देश इसकी रजत और स्वर्ण जयंती मना रहा था, तब भी ब्रिटिश शासन कायम था। उस समय स्वतंत्रता की चेतना को आगे बढ़ाने का मंच कांग्रेस के अधिवेशन रहे, जहां वर्ष 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे स्वर दिया। यह पूरे देश के लिए एक मंत्र बन गया।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब ‘वंदे मातरम’ की शताब्दी आई, तब वही कांग्रेस सत्ता में थी, जिसने कभी देश की आत्मा जगाने वाले इस गीत को अपने मंच पर स्थान दिया था, मगर उसने देश पर आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटने का कार्य किया। यह इतिहास का एक ऐसा कालखंड था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। आज जब ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तब भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आत्मविश्वास के साथ ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रगीत के अमर रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जो सपना था, उसे नया भारत साकार करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इसी कारण यह चर्चा सदन में अत्यंत सामयिक है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर का उल्लेख करते हुए कहा कि बैरकपुर में मंगल पांडेय, गोरखपुर में शहीद बंधु सिंह, मेरठ में धन सिंह कोतवाल और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में देशभर में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष हुआ। स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद उपजी हताशा के दौर में ‘वंदे मातरम’ ने देश की सोई हुई आत्मा को जगाने का काम किया। उस समय डिप्टी कलेक्टर के रूप में ब्रिटिश शासन में कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आम जनमानस की भावनाओं को ‘वंदे मातरम’ के माध्यम से स्वर दिया।

उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बना। भारत माता केवल भूभाग नहीं थी, बल्कि हर भारतीय की भावना थी। स्वाधीनता राजनीति नहीं, बल्कि साधना थी। ‘सुजलाम, सुफलाम् मलयज-शीतलाम् शस्यश्यामलाम् मातरम्’ की पंक्तियों ने भारतीय मानस में चेतना का संचार किया और भारत की प्रकृति, समृद्धि, सौंदर्य और शक्ति को एक साथ मूर्त रूप दिया।

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राजनीति

केंद्र सरकार का खजाना बिहार के लिए खुला है : शाहनवाज हुसैन

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नई दिल्ली, 22 दिसंबर : भाजपा के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पीएम मोदी की मुलाकात पर कहा कि एनडीए की बिहार में सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार पहली बार दिल्ली आए और पीएम मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात काफी अच्छी रही है। हुसैन ने कहा कि केंद्र सरकार का खजाना बिहार के लिए खुला है।

नई दिल्ली में मिडिया से बातचीत में भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम नीतीश की जोड़ी हिट साबित हुई है। शपथग्रहण समारोह में पीएम मोदी गए थे और पहली बार नीतीश कुमार शपथग्रहण के बाद दिल्ली आए। दोनों के बीच बहुत अच्छी मुलाकात हुई है। बिहार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के द्वारा नई पार्टी बनाने पर भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हुमायूं कबीर टीएमसी के एजेंट हैं। ममता बनर्जी ने जानबूझकर उनसे नई पार्टी बनवाई है ताकि ध्रुवीकरण हो और ममता से नाराज मुस्लिम वोटर विपक्ष के पास न जाएं, बल्कि बंट जाएं। यह पूरी स्क्रिप्ट ममता बनर्जी ने लिखी है। टीएमसी ध्रुवीकरण की चाल चल रही है और वोट बैंक की राजनीति कर रही है। बंगाल की जनता इसका जवाब देगी।

उन्होंने बंगाली गायिका के विरोध पर कहा कि बंगाल में सारी मर्यादाएं टूट रही हैं। कलाकारों को प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी जा रही। मानो इस्लामिक स्टेट की हुकूमत चल रही हो। पूजा करने या ‘श्री राम’ बोलने पर ममता बनर्जी भड़क जाती हैं, अब गाने पर भी राजनीति हो रही है।

भाजपा नेता ने महाराष्ट्र निकाय चुनाव पर कहा कि विपक्ष नाम की कोई चीज बचने वाली नहीं लगती। बिहार से जो सुनामी चली थी, वह महाराष्ट्र भी पहुंच गई है। भाजपा ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। अरुणाचल प्रदेश में भी जीत हासिल की है और गोवा में भी जीत रही है। जहां भी चुनाव होंगे, वहां भाजपा ही आएगी।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार पर भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बांग्लादेश में जिहादियों की हरकतों की पूरे दुनिया के मुसलमानों को खड़े होकर निंदा करनी चाहिए। इन लोगों ने इस्लाम को बदनाम किया है। मुस्लिम का चोला पहनकर ये इंसानियत के दुश्मन हैं। सबसे ज्यादा नुकसान इस्लाम को मानने वालों का ही हुआ है। बांग्लादेशियों की खैर नहीं। भारत सरकार चिंता जता रही है। शेख हसीना ने भी इन घटनाओं की निंदा की है।

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राजनीति

दिल्ली की हवा साफ करने के मिशन में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं : पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा

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नई दिल्ली, 22 दिसंबर : मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार राजधानी में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति पर तेज़ी से काम कर रही है। बीते चार दिनों से लागू ग्रैप-4 के सख़्त प्रावधानों के सकारात्मक असर अब ज़मीन पर दिखने लगे हैं और हवा की गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया जा रहा है।

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि “नो पीयूसी, नो फ्यूल” नियम लागू होने के बाद अब तक 2 लाख से ज्यादा वाहनों की पीयूसी जांच हुई है और सर्टिफिकेट्स दिए गए। साथ ही 10,000 वाहन मानकों पर खरे नहीं उतर सके। उन्होंने कहा कि यह इस बात का साफ संकेत है कि सख्त प्रवर्तन सही दिशा में असर दिखा रहा है।

माननीय मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सभी पीयूसी केंद्रों को आधुनिक और उन्नत मशीनों से अपग्रेड किया जा रहा है, ताकि जांच में देरी न हो और नतीजे सही रहें। इसके साथ ही पीयूसी व्यवस्था को और भरोसेमंद बनाने के लिए थर्ड-पार्टी जांच प्रणाली लागू की जा रही है। परिवहन विभाग की तकनीकी टीमें लगातार मौके पर निगरानी कर रही हैं ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

आज से दिल्ली भर में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ अभियान और तेज कर दिया गया है। जो भी औद्योगिक इकाई वायु प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करती पाई जाएगी, उसे तुरंत सील किया जाएगा। 31 दिसंबर तक ओईसीएम सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन न करने वाले उद्योगों पर भी सख्त कार्रवाई होगी।

एमसीडी और डीपीसीसी मिलकर शहर में चल रहे अवैध और अनधिकृत औद्योगिक यूनिट्स की पहचान कर रहे हैं। ऐसे सभी यूनिट्स बंद किए जाएंगे। मंत्री ने कहा, “दिल्ली सरकार 100 प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

श्री सिरसा ने बताया कि धूल नियंत्रण के लिए सड़कों पर दिन-रात सफाई और पानी का छिड़काव किया जा रहा है। साथ ही लैंडफिल साइट्स पर रोजाना करीब 35,000 मीट्रिक टन कचरे की वैज्ञानिक तरीके से बायो-माइनिंग की जा रही है, ताकि पुराने कचरे के पहाड़ खत्म हों और धूल से होने वाला प्रदूषण घटे।

माननीय मंत्री ने शहर के जलाशयों को पुनर्जीवित करने की दिशा में हो रही प्रगति की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि जो जलाशय वर्षों से खत्म या अतिक्रमण का शिकार हो चुके हैं, उनमें से कम से कम 50 प्रतिशत को आने वाले दिनों में उनके मूल स्वरूप में वापस लाया जाए। ये जलाशय धूल को कम करने और शहर के पर्यावरण को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।”

वर्क-फ्रॉम-होम निर्देशों को लेकर मंत्री ने साफ कहा कि ग्रैप-4 के तहत 50 प्रतिशत वर्क-फ्रॉम-होम का पालन न करने वाली निजी कंपनियों पर कार्रवाई होगी। सुविधा जरूरी है, लेकिन लोगों की सेहत से समझौता नहीं किया जा सकता।

एएनपीआर कैमरों में तकनीकी खामियों की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए माननीय मंत्री ने कहा कि परिवहन विभाग इस मुद्दे को देख रहा है। उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन योजनाओं को उन्होंने संभाला, वहां भी लापरवाही रही। हमने सोचा था कि कम से कम ये कैमरे तो ठीक होंगे, लेकिन यहां भी शिकायतें सामने आ रही हैं।

सिरसा ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो लोग दस साल तक दिल्ली पर राज कर गए और प्रदूषण, बदइंतजामी और भ्रष्टाचार छोड़ गए, वे अब सिर्फ़ पोलिटिकल टूरिस्ट जैसे फोटो खिंचवाने और कार्यक्रमों में दिखने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे लोगों को दिल्ली के पर्यावरण पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”

अंत में पर्यावरण मंत्री ने दिल्ली के नागरिकों और अधिकारियों का सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और आगे भी साथ देने की अपील की। उन्होंने कहा, “सरकार पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ रही है। मिलकर हम दिल्ली को और साफ, सुरक्षित और स्वस्थ बना सकते हैं।”

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