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Saturday,01-August-2026
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आजाद ने कहा, पार्टी छोड़ने के लिए उन्हें किया गया मजबूर, मोदी की तारीफ की

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कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने के बाद पार्टी व राहुल के भविष्य पर चिंता जाहिर करते हुए गुलाम नबी आजाद के कहा कि, घर वालों नें घर छोड़ने के लिए मजबूर किया, वहीं पार्टी के लिए मैं बस दुआ ही कर सकता हूं लेकिन मेरी दुआ से कुछ ठीक होने वाला नहीं है। पार्टी के लिए दवा चाहिए और उसके लिए जो डॉक्टर है वह कंपाउंडर है। जबकि सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर चाहिए।

गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी को शुक्रवार को 5 पन्नों का त्यागपत्र भेजा और पार्टी छोड़ दी। अपने पत्र में उन्होंने राहुल गांधी व पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी से इस्तीफा देने के बाद गुलाम नबी आजाद ने पार्टी छोड़े जाने पर कहा कि, घर वालों ने ही घर छोड़ने को मजबूर कर दिया। जब घरवालों को लगे ये आदमी नहीं चाहिए और आदमी को लगे कि हमको पराया समझने लगे हैं तो व्यक्ति घर छोड़ कर चला जाता है।

हालांकि भाजपा के साथ मिलीभगत का आरोप लगाए जाने पर गुलाम नबी आजाद नें कहा, नरेंद्र मोदी या बीजेपी से वो मिले हैं जो मोदी जी का सपना पूरा कर रहे हैं, मोदी जी ने कहा था ‘कांग्रेस मुक्त भारत’, जिन लोगों नें कांग्रेस मुक्त भारत बनाने में उनकी सहायता की, वो मोदी जी से मिले हुए हैं। लोकसभा में स्पीच देने के बाद, जो लोग उनसे गले मिलते हैं वो मिले है, मैं नहीं।

हाल ही में कांग्रेस नेता जयराम रमेश के मोदी-फाइड और डीएनए वाले बयान पर आजाद ने कहा कि, उनका क्या डीएनए है? किसी को नहीं मालूम, किस स्टेट से हैं? किसी को नहीं मालूम, किस डिस्ट्रिक्ट से हैं? यह नहीं मालूम। पहले वो अपना डीएनए चेक कराएं। वह तो कुछ साल पहले फ्रीलांसर थे? वह किस सरकार में काम कर रहे थे? किस-किस पार्टी में उनका क्या डीएनए रहा? जो हाउस में बैठ कर बीजेपी को स्लिप भेजते रहे।

हाउस में बीजेपी और उनके बीच में 100 स्लिपों का आदान-प्रदान होता था, अब वह चेक करेंगे हमारा डीएनए क्या है? सिर्फ चापलूसी करके या ट्वीट करने के लिए पद मिले हैं वो हमारे ऊपर आरोप लगाए तो हमें बहुत दुख होता है।

राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निकले आंसू पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, नरेंद्र मोदी मेरे लिए नहीं रोये थे, वह एक घटना का जिक्र कर रहे थे। मैं उन्हें क्रूर समझता था लेकिन उन्होंने इंसानियत दिखाई। हम एक दूसरे के लिए नहीं बल्कि हम उस घटना को लेकर रोए थे।

उन्होंने आगे कहा, मोदी तो बहाना है, इनकी आंखों में खटकते हैं। जिस दिन से हमने जी-23 का एक पत्र लिखा था। यह कहते थे कि हमको कोई पत्र लिखना नहीं चाहिए। जब हमने उनकी कार्यप्रणाली को लेकर चुनौती दी, तो उनकी आंखों में खटक रहे थे। उसके बाद कई बैठकें हुईं, हमसे एक सुझाव नहीं लिया गया।

हमने एक बैठक में कहा था, हमें कोई पद नहीं चाहिए, चुनाव को लेकर कैम्पेन कमिटी बनाइए, लेकिन ये कमिटी तब बनाते हैं जब चुनाव खत्म हो जाता है। हम जी-23 वाले कैम्पेन खुद करना चाहते थे, हम पार्टी से कोई सुविधा नहीं लेना चाहते थे, हमने मुफ्त काम करने के लिए कहा तो क्या यह कांग्रेस को बनाने के लिए मैंने कहा था या मोदी को बनाने के लिए?

होने वाले कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव और संगठन को लेकर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि, कांग्रेस पार्टी का बैंक लुट गया है, बैंक में कुछ नहीं है। अब जनरल मैनेजर बदलने से क्या? वो खिड़की दरवाजे अलमारियों का मैनेजर होगा। कांग्रेस की भी यही हालत है। कांग्रेस में कुछ नहीं है, सब दूसरी पार्टी में भाग गए, यह हमसे कहते हैं कि पार्टी के बड़े जा रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुष्मिता देव, आर.पी.एन. सिंह .. राहुल गांधी गुजरात से नए लड़के लेकर आए, वो भी चले गए। क्यों भाग गए? यह सब तो राहुल की टीम थे।

नई पार्टी बनाने को लेकर उन्होंने कहा, हमें पूरे देश से संदेश आते हैं कि राष्ट्रीय पार्टी बनाओ, मैंने उसपर अभी कोई ध्यान नहीं दिया है। लेकिन मांग है कि पार्टी बनाई जाए और यह वह लोग बोल रहे हैं जो भाजपा, रिजनल पार्टी में नहीं जाना चाहते। हमने कांग्रेस पार्टी छोड़ी है लेकिन विचाधारा नहीं छोड़ी है। कांग्रेस पार्टी हर दिन सिकुड़ती जा रही है। कांग्रेस से लोग इतना फस्र्टटेड हैं कि छोटे विकल्प में भी जाना चाहते हैं।

राष्ट्रीय पार्टी बनाने में अभी वक्त है उसके लिए बहुत चीजों की जरूरत होती है। जम्मू-कश्मीर का हम तुरंत दौरा शुरू करेंगे।

महाराष्ट्र

मुंबई: 8 साल के बच्चे के माता-पिता को टी-शर्ट से मिला सुराग, जोगेश्वरी से लापता बच्चा सुरक्षित माता-पिता को सौंपा गया, मुंबई पुलिस की बड़ी कामयाबी

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मुंबई पुलिस ने एक गुमशुदा बच्चे के माता-पिता को ढूंढ निकाला, जो एक स्पेशल चाइल्ड था और अपना नाम और पता नहीं बता पा रहा था। पुलिस ने T-सीईआरटी से बच्चे के माता-पिता को ढूंढ निकाला। मुंबई 30 जुलाई, 2026 को जोगेश्वरी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में, पुलिस नायक मिसाल की तुरंत कार्रवाई से लड़के के माता-पिता को सफलतापूर्वक ढूंढ लिया गया। पेट्रोलिंग के दौरान गुमशुदा बच्चा मिल गया। 30 जुलाई, 2026 को शाम करीब 4 बजे, सुभाष रोड, जोगेश्वरी (ईस्ट), मुंबई में ‘यूल चाय’ दुकान के सामने, पैदल पेट्रोलिंग के दौरान, पुलिस नायक मिसाल को लगभग 7 से 8 साल का एक लड़का रोता हुआ और अकेला घूमता हुआ मिला। शुरुआती पूछताछ और उसका नाम और पता पूछने पर पता चला कि लड़का बोल नहीं सकता था। वह सिर्फ “अब्बा” (पिता) और “अम्मा” (माँ) शब्द बोल पा रहा था। पुलिस नाइक मैसेल ने लड़के की टी-शर्ट की बारीकी से जांच की और उस पर मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन हिंदी स्कूल, जोगेश्वरी ईस्ट, मुंबई लिखा हुआ पाया। उन्होंने तुरंत उक्त म्युनिसिपल स्कूल का दौरा किया और वहां के एक शिक्षक लक्ष कुमार नंदेश्वर से संपर्क किया। शिक्षक ने कहा कि लड़का उस समय उस विशेष स्कूल में कक्षाओं में भाग नहीं ले रहा था, टी-शर्ट उसे प्रवेश के समय जारी की गई थी। हालांकि लड़के को वर्तमान में वहां भर्ती नहीं किया गया था, लेकिन स्कूल के प्रवेश रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि वह वर्तमान में ‘सुप्पन स्पेशल इंग्लिश मीडियम स्कूल’ में पढ़ रहा है। स्कूल से संपर्क करने पर, नेहा तेंदुलकर नामक एक शिक्षिका ने लड़के की पहचान की और उसके माता-पिता के बारे में जानकारी दी। माता-पिता की पहचान रियाज अहमद अकबर अली अंसारी के रूप में हुई है। बच्चे का नाम मुहम्मद शहबाज अंसारी उम्र: 8 वर्ष बताया गया है कि बच्चा ठीक से बोल या पढ़ नहीं सकता है। माता-पिता का बयान इसके बाद बच्चे को सुरक्षित रूप से उन्हें सौंप दिया गया। यह जानकारी जोगेश्वरी पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर इकबाल शकीलगर ने दी।

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राष्ट्रीय समाचार

कैबिनेट ने ‘समुद्र मंथन’ योजना को दी मंजूरी, 84,084 करोड़ रुपए से बढ़ेगी भारत की ऑफशोर ऊर्जा क्षमता

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ (नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम) को मंजूरी दे दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की इस केंद्रीय क्षेत्र की योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू करने के लिए 84,084 करोड़ रुपए के बजट को स्वीकृति दी गई है।

एक आधिकारिक बयान में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि यह योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

मंत्रालय के अनुसार, यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2025 पर लाल किले से दिए गए उस विजन को साकार करेगी, जिसमें उन्होंने भारत की विशाल समुद्री ऊर्जा क्षमता का दोहन करने के लिए आधुनिक दौर के ‘समुद्र मंथन’ की आवश्यकता पर जोर दिया था। इस योजना के माध्यम से समुद्र में मौजूद तेल और गैस संसाधनों की खोज और उत्पादन को नई गति मिलेगी।

‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत ऑफशोर ऊर्जा खोज से जुड़े पूरे वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा, जिसके अंतर्गत बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाले सीस्मिक डेटा का संग्रह, प्रोसेसिंग और विश्लेषण, गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेजी से खोजी ड्रिलिंग, फ्रंटियर बेसिन में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, साझा ऑफशोर उत्पादन और परिवहन अवसंरचना का विकास तथा एकीकृत ऑयल एंड गैस मैन्युफैक्चरिंग एंड सर्विसेज जोन की स्थापना की जाएगी।

इसके अलावा, योजना में डिजिटल प्रोग्राम मैनेजमेंट, क्षमता निर्माण, नई तकनीकों को अपनाने, हितधारकों के साथ समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया है, ताकि देश में ऑफशोर तेल एवं गैस क्षेत्र के लिए एक मजबूत और आधुनिक इकोसिस्टम तैयार किया जा सके।

सरकार का अनुमान है कि इस योजना के जरिए 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (एमएमटीओई) से अधिक नए तेल एवं गैस भंडार खोजे जा सकेंगे। इससे देश में ऑफशोर एक्सप्लोरेशन गतिविधियों में तेजी आएगी और घरेलू स्तर पर तेल एवं गैस उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

‘समुद्र मंथन’ योजना से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस योजना से ऑफशोर ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण, आधुनिक तकनीक और सेवाओं का विकास होगा, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।

इसके अलावा, तेल एवं गैस खोज और उत्पादन से जुड़े पूरे वैल्यू चेन में बड़े निवेश आकर्षित होंगे, जिससे उद्योग, नवाचार और आर्थिक विकास को दीर्घकालिक गति मिलेगी।

सरकार ने कहा कि पिछले एक दशक में अपस्ट्रीम सेक्टर में कई बड़े सुधार किए गए हैं। इनमें लगभग पूरे ऑफशोर क्षेत्र को एक्सप्लोरेशन के लिए खोलना, कानूनी और अनुबंध संबंधी ढांचे का आधुनिकीकरण तथा राष्ट्रीय डेटा रिपॉजिटरी को मजबूत करना शामिल है।

इन सुधारों के आधार पर अब ‘समुद्र मंथन’ योजना रणनीतिक सरकारी निवेश, अत्याधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के जरिए भारत में ऑफशोर तेल एवं गैस खोज के नए दौर की शुरुआत करेगी।

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महाराष्ट्र

बॉम्बे हाई कोर्ट: वानखेड़े के खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच पर रोक, एनसीबी ने जवाब मांगा, आरोपी की शिकायत पर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई गलत

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मुंबई; बॉम्बे हाई कोर्ट ने आईआरएस ऑफिसर समीर वानखेड़े के खिलाफ डिपार्टमेंटल और इंटर-डिपार्टमेंटल पूछताछ और हैरेसमेंट पर रोक लगाने का आदेश दिया है। समीर वानखेड़े ने एनसीबी की जांच को चुनौती दी थी, जिस पर कोर्ट ने चिंता जताई कि एक गुमनाम लेटर के आधार पर एक ऑफिसर के खिलाफ कई जांच शुरू की गई हैं, जिससे ऑफिसर का हौसला टूटेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने वानखेड़े को राहत दी है और जांच पर रोक लगाकर प्रोटेक्शन भी दिया है। एक अहम डेवलपमेंट में, बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस ए.एस. गडकरी और कमल खता ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अपने ही पूर्व जोनल डायरेक्टर समीर दुनियादेव वानखेड़े के खिलाफ गुमनाम शिकायतों के आधार पर कई जांच शुरू की हैं। सुनवाई के दौरान, बेंच ने वानखेड़े के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई के आधार पर एनसीबी से काफी सवाल किए। कोर्ट ने सवाल किया कि एक इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर पर सिर्फ़ एक आरोपी के लगाए गए आरोपों और गुमनाम शिकायतों के आधार पर केस कैसे चलाया जा सकता है, खासकर तब जब ऐसी कार्रवाइयों से लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों के काम करने के तरीके पर असर पड़ता है और इंस्टीट्यूशन पर भी असर पड़ सकता है। रिट पिटीशन में वानखेड़े के खिलाफ गुमनाम शिकायतों के आधार पर जारी कई शुरुआती इन्वेस्टिगेशन नोटिस को चुनौती दी गई है। बेंच ने एनसीबी से यह भी ज़रूरी सवाल पूछा कि क्या आरोपी ने ये आरोप अपनी शुरुआती गिरफ्तारी के समय या इन्वेस्टिगेशन के दौरान लगाए थे। कोर्ट ने सवाल किया कि ऐसे आरोप बाद में क्यों सामने आए और यह भी पूछा कि उन पर आखिरी मिनट में क्यों विचार किया गया। कोर्ट ने आगे कहा कि अगर आरोपी को इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर के खिलाफ आरोप लगाने दिए जाते हैं और डिपार्टमेंट ऐसे आरोपों पर आसानी से कार्रवाई करता है, तो इससे क्रिमिनल जस्टिस के एडमिनिस्ट्रेशन में गड़बड़ी पैदा होगी। बेंच ने कहा कि ऐसा करने से ईमानदार ऑफिसर अपने ऑफिशियल कामों को करने में डिमोरलाइज़ होंगे और एक खतरनाक और पूरी तरह से अनचाही मिसाल कायम होगी, जिससे आरोपी सिर्फ़ इसलिए इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को टारगेट कर पाएंगे क्योंकि उन्होंने अपने कानूनी काम किए थे। बेंच ने एनसीबी के वानखेड़े के खिलाफ बार-बार कार्रवाई शुरू करने पर भी सवाल उठाया, जबकि गुमनाम शिकायतों पर नियम मौजूद थे और एजेंसी अपने ही एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई कैसे कर सकती थी। कोर्ट ने ऐसे आरोपों पर अफसोस जताया और कार्रवाई करने में प्रतिवादी एजेंसी के व्यवहार से नाखुशी जताई। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने देखा कि समीर वानखेड़े के खिलाफ बार-बार की गई कार्रवाई याचिकाकर्ता को सीधे तौर पर परेशान करने के बराबर है और ऐसी शिकायतों के आधार पर उनसे लगातार पूछताछ करने के सही होने पर सवाल उठाया। पार्टियों को विस्तार से सुनने के बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि रिट याचिका को आखिरी सुनवाई के लिए स्वीकार किया जाता है और याचिका पर आखिरी फैसला होने तक वानखेड़े को अंतरिम राहत और सुरक्षा दी जाती है।

आज की कार्रवाई ईमानदार सरकारी कर्मचारियों को मनमानी और परेशान करने वाली कार्रवाइयों से बचाने की दिशा में एक अहम कदम है। कोर्ट की टिप्पणियां इस बात को बड़े पैमाने पर सार्वजनिक महत्व देती हैं कि यह पक्का किया जाए कि जांच अधिकारी बिना किसी डर या पक्षपात के, गुमनाम आरोपों के आधार पर शुरू की गई देरी या बदले की कार्रवाई के जोखिम के बिना अपने कानूनी काम कर सकें। समीर वानखेड़े लगातार कहते रहे हैं कि उनके खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई मनमानी, गलत, कानूनी तौर पर टिकने लायक नहीं और एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस का गलत इस्तेमाल है। याचिका में गुमनाम शिकायतों के आधार पर उनके खिलाफ जारी शुरुआती जांच नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है।

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