राष्ट्रीय समाचार
असम पुलिस ने ट्रक से 10 करोड़ रुपए के याबा टैबलेट किए जब्त, एक गिरफ्तार
असम पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ राज्य में जारी कार्रवाई के तहत एक और बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए कछार जिले में एक ट्रक से 10 करोड़ रुपए कीमत के 50,000 याबा टैबलेट जब्त किए। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस कार्रवाई की तारीफ करते हुए लिखा, “हम्प्टी डम्प्टी की तरह यह ड्रग्स तस्करी की खेप भी गिर पड़ी। कछार पुलिस और असम पुलिस ने बेहतरीन काम किया है।”
यह नशीला पदार्थ कछार जिले के दिघारखाल इलाके में पुराने एमवीआई चेक पॉइंट पर एक ऑपरेशन के दौरान बरामद किया गया। वहां पुलिस ने एक ट्रक को रोका और एक चैंबर पाया, जिसका इस्तेमाल नशीले पदार्थ को छिपाने के लिए किया जा रहा था। छिपे हुए खाने से 50,000 याबा टैबलेट जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 10 करोड़ रुपए है। इस जब्ती के सिलसिले में एक व्यक्ति को पकड़ा गया है।
यह बरामदगी असम पुलिस द्वारा चलाए जा रहे बड़े नशीले पदार्थ विरोधी ऑपरेशनों की कड़ी है। कछार और पूर्वोत्तर के ड्रग-तस्करी मार्गों से सटे अन्य जिलों में ऑपरेशन जारी है।
हाल के महीनों में, याबा और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ प्रवर्तन ऑपरेशनों के लिए कछार एक मुख्य केंद्र बनकर उभरा है।
अगस्त में असम पुलिस और असम राइफल्स ने संयुक्त रूप से कछार में लगभग 1.1 लाख याबा टैबलेट और 223 ग्राम हेरोइन जब्त की, जिसकी कीमत 28 करोड़ रुपए से ज्यादा थी और तीन तस्करों को गिरफ्तार किया।
इससे पहले जुलाई में असम पुलिस, असम राइफल्स और कछार व हैलाकांडी की जिला पुलिस इकाइयों के संयुक्त ऑपरेशन में लगभग 80,000 याबा टैबलेट जब्त की गईं और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
जून में, कछार पुलिस ने सिलचर में लगभग 2.9 करोड़ रुपए मूल्य की 29,200 संदिग्ध याबा टैबलेट जब्त की और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया।
सरमा ने बार-बार कहा है कि राज्य सरकार ड्रग्स के कारोबार के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेगी और असम को ड्रग-मुक्त राज्य बनाने की दिशा में काम करेगी।
राजनीति
हमने वही वंदे मातरम् गाया जो गांधी और वाजपेयी ने गाया, अपराध है तो उनके खिलाफ भी केस दर्ज करें: खरगे

कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को पार्टी नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज शिकायत के आधार पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर वंदे मातरम् के पुराने संस्करण को गाना अपराध है, तो महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू तथा अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ भी शिकायत दर्ज होनी चाहिए।
खरगे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “वे क्या शिकायत करेंगे? हमने वही वंदे मातरम् गाया, जो महात्मा गांधी ने गाया था। हमने वही गाया जो जवाहरलाल नेहरू ने गाया था। पिछले 18 वर्षों से हम वही गाते आए हैं, जो उन्होंने गाया था। यहां तक कि वाजपेयी सरकार के दौरान भी यही वंदे मातरम् गाया गया था।”
उन्होंने कहा, “अगर यह अपराध है, तो पिछले 18 वर्षों से वे भी यही अपराध कर रहे हैं। अगर यही अपराध है, तो महात्मा गांधी के खिलाफ केस दर्ज करें। अगर यही अपराध है, तो नेहरू के खिलाफ केस दर्ज करें।”
यह विवाद शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में वंदे मातरम् के गायन के दौरान सामने आया था। कांग्रेस की ओर से पहले कहा गया था कि राष्ट्रगीत की केवल पहली दो पंक्तियां गाई जाएंगी, लेकिन कार्यक्रम के दौरान गायन पूरे संस्करण तक जारी रहा।
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने पार्टी मुख्यालय में तिरंगा फहराया था, जिसके बाद वंदे मातरम् का गायन शुरू हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, सोनिया गांधी ने सबसे पहले इस बात पर ध्यान दिया कि गायक पूरे संस्करण का गायन जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कथित तौर पर खरगे की ओर इशारा किया और बाद में गायकों से रुकने के लिए कहा।
इस मामले में सोमवार को दिल्ली पुलिस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। शिकायत में कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् के गायन को कथित तौर पर बाधित करने के प्रयास को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रीय गीतों को लेकर उस समय प्रस्ताव पारित किया था, जब आज उनके आलोचक भी पैदा नहीं हुए थे।
उन्होंने सवाल किया, “आप जो कहेंगे, क्या वही होगा? आने वाले वर्षों में कोई दूसरी सरकार आएगी, तो क्या वह जो कहेगी, वही होगा?”
कांग्रेस अध्यक्ष ने वित्तीय सहायता रोकने के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि फंडिंग रोकना उचित नहीं है और अगर कोई गलती हुई है तो उसे सुधारना चाहिए।
खरगे ने कहा कि कुछ मुद्दों पर कांग्रेस खुद कदम उठा सकती है, जबकि कुछ मामलों में अन्य दलों को विश्वास में लेना होगा। उन्होंने शैक्षणिक संस्थाओं और अन्य संस्थाओं को मिलने वाली वित्तीय सहायता रोकने का विरोध करते हुए कहा कि अन्य दल भी इसके खिलाफ हैं।
उन्होंने कहा, “अगर कोई गलती है तो उसे सुधारिए। जेल में रखिए। फंडिंग रोकने के बजाय, अगर किसी को सबसे ज्यादा फंडिंग मिल रही है तो वह आरएसएस को ही मिल रही है।”
खरगे ने इस बयान के जरिए वंदे मातरम् विवाद के साथ-साथ फंडिंग के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
राजनीति
‘क्या विजय सिर्फ ईसाई मुख्यमंत्री हैं?’, चामराजनगर मुठभेड़ पर कर्नाटक भाजपा का तमिलनाडु सीएम पर निशाना

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने चामराजनगर में हुई मुठभेड़ में तीन लोगों की मौत को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की कथित दखलंदाजी पर सवाल उठाते हुए मंगलवार को पूछा कि क्या वह सिर्फ “ईसाई मुख्यमंत्री” के तौर पर काम कर रहे हैं या पूरे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में विजयेंद्र ने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने चामराजनगर जिले के हनूर में हुई घटना को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि एक आर्कबिशप ने भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मृतकों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरी और उचित मुआवजे की मांग की है।
विजयेंद्र ने कहा कि भाजपा और जेडीएस ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था और मानवीय आधार पर तीनों मृतकों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की थी।
उन्होंने सवाल किया, “क्या मृतकों को जाति या धर्म का रंग देना उचित है?”
भाजपा नेता ने कहा कि कर्नाटक के कई हिस्सों में जंगलों में रहने वाले समुदायों और वन अधिकारियों के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है। इसके अलावा मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा, “जंगल से लगे इलाकों में रहने वाले लोग लगातार वन अधिकारियों के साथ संघर्ष का सामना कर रहे हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी हो रही हैं। हाल ही में मदिकेरी में बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। मदिकेरी, शिवमोग्गा, उत्तर कन्नड़ और तटीय क्षेत्रों में भी इसी तरह की समस्याएं हैं।”
विजयेंद्र ने राज्य सरकार और मंत्रियों से जंगल से लगे इलाकों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लेने और उनका समाधान करने की अपील की।
मुठभेड़ की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि यदि वन अधिकारी टॉर्च लेकर जंगल में गए थे, तो उन्हें गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी।
उन्होंने कहा, “आपने कहा कि वे टॉर्च लेकर गए थे। फिर मुठभेड़ क्यों हुई? क्या वे शेर या बाघ थे?” विजयेंद्र ने अभियान में चूक का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार से मामले में हुई किसी भी गलती को स्वीकार करने और न्यायिक जांच कराने की मांग की।
गौरतलब है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 15 अगस्त को कावेरी वन्यजीव अभयारण्य में कर्नाटक के वन कर्मियों द्वारा तीन तमिल लोगों एंथनी सामी, जॉन रोज पीटर और कुमार की मौत पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने घटना को “नरसंहार” करार देते हुए कर्नाटक सरकार के उस दावे को खारिज किया था कि यह कार्रवाई अवैध शिकार विरोधी अभियान के दौरान हुई गोलीबारी के जवाब में की गई थी।
वहीं, कर्नाटक सरकार ने विधानसभा में इस मामले पर बयान देते हुए कहा था कि चामराजनगर के रिजर्व फॉरेस्ट में तीन कथित शिकारियों की मौत तब हुई, जब वन विभाग के कर्मचारियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। सरकार के मुताबिक, शिकारियों ने वन कर्मियों पर गोलीबारी की थी।
राजनीति
झारखंडः देवेंद्र महतो बोले-अभी मिली पहली जीत, व्यापक सुधार का आंदोलन जारी रहेगा

झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल समेत टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित 14 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले को आंदोलनकारी छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने आंदोलन की पहली बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा है कि परीक्षा रद्द होना संघर्ष का अंतिम पड़ाव नहीं है और भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
देवेंद्र नाथ महतो ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जिन परीक्षाओं में गड़बड़ी और धांधली के आरोप सामने आए थे, उन्हें रद्द किया जाना छात्रों के लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल किसी एक परीक्षा को रद्द कराना नहीं, बल्कि झारखंड की पूरी भर्ती और परीक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाना है।
उन्होंने कहा कि अब सरकार को ऐसी व्यवस्था की गारंटी देनी होगी, जिसमें भविष्य में पेपर लीक, प्रश्नपत्र की सेटिंग या परीक्षा में किसी भी तरह की धांधली की गुंजाइश न रहे। इसके लिए प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा के हर चरण का ऑडिट होना चाहिए और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी से लेकर संबंधित अधिकारियों तक की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
महतो ने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों ने लंबा संघर्ष किया है। दो जुलाई से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक रूप लेता गया। 25 जुलाई को मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से सत्याग्रह शुरू किया गया और बाद में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना। दो अगस्त से छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू की।
उन्होंने कहा कि छात्रों की लड़ाई केवल वर्तमान अभ्यर्थियों के लिए नहीं है। उनका उद्देश्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार कराना है, जिससे आने वाली पीढ़ी के युवाओं को अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने की जरूरत न पड़े। उन्होंने ईमानदारी से परीक्षा देने वाले और वर्षों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से धैर्य बनाए रखने की अपील भी की।
देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि सरकार के फैसले को आंदोलन की पहली सफलता के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन छात्रों का संघर्ष अब परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित कराने पर केंद्रित रहेगा।
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