अंतरराष्ट्रीय
संकट गहराने के साथ ही क्यूबा अगला निशाना होगा : ट्रंप
TRUMP
वॉशिंगटन, 30 मार्च : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि क्यूबा “अगला होगा” जो पतन का सामना करेगा। उन्होंने द्वीपीय राष्ट्र को एक असफल राज्य बताने के साथ ही यह संकेत दिया कि वॉशिंगटन वहां के लोगों की स्थिति सुधारने के लिए तेल आपूर्ति की अनुमति देने को तैयार है।
ट्रंप ने एयरफोर्स वन में पत्रकारों से कहा, “क्यूबा अगला होगा… क्यूबा बहुत खराब हालत में है। यह एक असफल देश है और यह अगला होगा।”
उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका क्यूबाई-अमेरिकियों और अन्य प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आएगा। उन्होंने कहा, “हम मदद के लिए वहां होंगे… हम अपने महान क्यूबाई-अमेरिकियों की मदद के लिए वहां होंगे।”
ट्रम्प ने क्यूबा की स्थिति के लिए उसके नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “उनका शासन खराब है। उनका नेतृत्व बहुत खराब और भ्रष्ट है।”
यह टिप्पणियां तब आईं जब वे उन रिपोर्टों पर बोल रहे थे कि आर्थिक कठिनाइयों के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका क्यूबा तक रूस सहित तेल आपूर्ति की अनुमति दे सकता है।
उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा कि अगर कोई देश अभी क्यूबा को कुछ तेल भेजना चाहता है, तो मुझे इससे कोई समस्या नहीं है।”
उन्होंने जोड़ा कि ऐसी आपूर्ति से भू-राजनीतिक स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं आएगा। चाहे वह रूस हो या कोई और… इससे मुझे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। इसका कोई खास असर नहीं होगा।
ट्रम्प ने तर्क दिया कि ईंधन की आपूर्ति की अनुमति देने से सरकार के बजाय आम क्यूबाई लोगों को फायदा होगा। उन्होंने कहा, “मैं इसे आने देना पसंद करूंगा… क्योंकि लोगों को हीट, कूलिंग और अन्य जरूरी चीजों की जरूरत होती है।”
साथ ही, उन्होंने कहा कि अतिरिक्त तेल आपूर्ति क्यूबा की व्यापक स्थिति को नहीं बदल पाएगी। चाहे उन्हें तेल से भरा एक जहाज मिल भी जाए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। क्यूबा खत्म हो चुका है।
ट्रंप की टिप्पणियां एक दोहरी रणनीति का संकेत देती हैं, जिसमें हवाना के नेतृत्व पर दबाव के साथ-साथ आम नागरिकों की मुश्किलें कम करने के लिए सीमित मानवीय लचीलापन शामिल है।
हाल के वर्षों में क्यूबा लंबे समय से आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है, जिसमें ईंधन की कमी, बिजली कटौती और विदेशी मुद्रा आय में गिरावट शामिल है। अमेरिकी प्रतिबंधों और पाबंदियों के साथ-साथ क्यूबा की अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक चुनौतियों ने इस संकट को और गहरा किया है।
अंतरराष्ट्रीय
‘हमारे भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं, कोई चिंता नहीं’, होर्मुज स्ट्रेट तनाव के बीच ईरानी दूतावास का आश्वासन

नई दिल्ली, 2 अप्रैल : ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच भीषण संघर्ष दूसरे महीने में आ चुका है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि ईरान और ईरानी ताकत को पूरी तरह से कमजोर कर दिया गया है, वहीं ईरान भी लगातार हमले तेज कर रहा है। इन सबके बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। मौजूदा हालात के बीच भारत में ईरानी दूतावास ने कहा है कि भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं।
दरअसल, दक्षिण अफ्रीका में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “होर्मुज स्ट्रेट का भविष्य सिर्फ ईरान और ओमान ही तय करेंगे। आप सुरक्षित हाथों में हैं, चिंता की कोई बात नहीं।” इसे रिपोस्ट कर भारत में ईरानी दूतावास ने लिखा, “होर्मुज स्ट्रेट का भविष्य सिर्फ ईरान और ओमान ही तय करेंगे। आप सुरक्षित हाथों में हैं, चिंता की कोई बात नहीं।”
तेहरान के मेयर के प्रवक्ता अब्दुलमोहर मोहम्मदखानी ने कहा कि हाउसिंग यूनिट्स को हुए नुकसान में कांच, दरवाजे और खिड़कियों जैसी छोटी-मोटी मरम्मत से लेकर बड़े रीकंस्ट्रक्शन या पूरे रेनोवेशन तक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 1,869 परिवारों को घर की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि करीब 1,245 परिवारों को 23 रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट किया गया है।
मोहम्मदखानी ने आगे कहा कि अब तक 4,000 से ज्यादा रेजिडेंशियल यूनिट्स की मरम्मत शुरू हो चुकी है, जिन्हें नगर निकाय ने या तो किया है या वित्तीय समर्थन दिया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्रंप के भाषण के जवाब में एक बयान जारी किया है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी थी कि ईरान को दो से तीन हफ्ते के अंदर एक समझौते के लिए सहमत होना होगा या अपने हर पावर प्लांट पर हमले का सामना करना होगा।
ट्रंप की इस धमकी को लेकर इस्माइल बघाई ने कहा, “हम युद्ध, बातचीत, सीजफायर और फिर उसी पैटर्न को दोहराने के इस बुरे चक्र को बर्दाश्त नहीं करेंगे।” उन्होंने चल रहे संघर्ष को “न केवल ईरान के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र और उससे आगे के लिए विनाशकारी” बताया।
बघाई ने कहा कि जब तक अमेरिकी-इजरायली हमले जारी रहेंगे, ईरान जवाबी कार्रवाई करता रहेगा। तेहरान अपने खाड़ी पड़ोसियों को दुश्मन नहीं मानता।
उन्होंने कहा, “हमने बार-बार कहा है कि हम उन सभी के साथ अपने अच्छे पड़ोसी वाले संबंध जारी रखने के लिए पक्के इरादे वाले हैं। समस्या यह है कि अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ अपने सैन्य हमले को अंजाम देने के लिए उनके इलाकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान में अमेरिका के सैनिक तैनात होंगे या नहीं, ट्रंप की चुप्पी से मीडिया परेशान

TRUMP
वॉशिंगटन, 2 अप्रैल : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लेकर लगातार अपने पुराने दावों को दोहरा रहे हैं। इसे लेकर अब अमेरिकी मीडिया में भी असंतोष देखने को मिल रहा है। अपन प्राइम-टाइम भाषण में ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ लड़ाई पूरी होने वाली है, लेकिन उन्होंने रणनीति, लड़ाई को बढ़ाने और लड़ाई के अंत को लेकर जरूरी सवालों के जवाब नहीं दिए। अमेरिकी मीडिया ने ईरान को लेकर ट्रंप की रणनीति पर गहरी निराशा जाहिर की।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ने इस बारे में कोई साफ बात नहीं कही कि ईरान में जमीनी स्तर पर अमेरिका के सैनिक तैनात किए जाएंगे या नहीं।
द न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में बताया गया कि ट्रंप ने किसी भी डिप्लोमैटिक रास्ते या बाहर निकलने की रणनीति के बारे में बताने से भी परहेज किया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई दो से तीन हफ्ते और चल सकती है।
ट्रंप ने रणनीतिक होर्मुज स्ट्रेट का थोड़ा सा जिक्र किया और कहा कि दूसरे देशों को, खासकर जो मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर हैं, इसे फिर से खोलने के लिए आगे आना चाहिए। हम मदद करेंगे लड़ाई खत्म होने के बाद पानी का रास्ता अपने आप खुल जाएगा।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा कि ट्रंप ने इस इलाके में सैन्य ऑपरेशन के मिले-जुले नेचर के बावजूद, इजरायल समेत खास साथियों की भूमिका के बारे में विस्तार से नहीं बताया। न ही उन्होंने नाटो साझेदारों के साथ सहयोग पर बात की, जबकि रिपोर्ट्स में गठबंधन के समर्थन को लेकर पहले के तनाव का संकेत मिला।
द वॉशिंगटन पोस्ट के लाइव कवरेज के मुताबिक, ईरान के राजनीतिक भविष्य को लेकर ट्रंप ने कहा कि सत्ता परिवर्तन अमेरिका का मकसद नहीं था। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि ट्रंप के संबोधन में ईरान के उभरते लीडरशिप स्ट्रक्चर या मोजतबा खामेनेई जैसे लोगों का जिक्र नहीं था। अमेरिकी मीडिया ने ईरान में वरिष्ठ अधिकारियों की मौत के बाद मोजतबा को एक खास पावर सेंटर के तौर पर पहचाना गया है।
ट्रंप ने इस बारे में भी कुछ नहीं कहा कि क्या अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर मैटीरियल को सुरक्षित करने की कोशिश करेगा, जबकि द न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण के मुताबिक, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जमीन के नीचे दबे संवर्धित यूरेनियम को निकालने के लिए रिस्की ग्राउंड ऑपरेशन करने होंगे।
हालांकि ट्रंप ने इस दावे को दोहराया कि ईरान की सैन्य क्षमता में बहुत ज्यादा कमी आई है, लेकिन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि तेहरान पूरे इलाके में मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए है।
अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स ने बताया कि ट्रंप ने अपने संबोधन में ज्यादातर मौजूदा बातों को ही दोहराया गया, सैन्य या डिप्लोमैटिक मोर्चों पर कोई नई घोषणा नहीं की गई।
रिपोर्ट्स में बताए गए विश्लेषक ने कहा कि जमीनी कार्रवाई, होर्मुज सुरक्षा और युद्ध के बाद के गवर्नेंस पर खास जानकारी न होने से लड़ाई के अगले चरण के बारे में अनिश्चितता बनी हुई है।
युद्ध अब अपने दूसरे महीने में है, बढ़ते खतरों, इलाके की स्थिरता और मिडिल ईस्ट में अमेरिका की लंबे समय की रणनीति पर सवाल उठा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई बच्चों के भविष्य में निवेश जैसी, हमले तेज करने की दी चेतावनी

वॉशिंगटन, 2 अप्रैल : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आने वाले हफ्तों में ईरान के खिलाफ हमले और तेज करने की बात कही और चेतावनी दी है। कि ये हमले अभी कुछ हफ्तों तक और चलेगा। ट्रंप ने कहा कि हम अगले दो से तीन हफ्तों में उन पर बहुत जोरदार हमला करने वाले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ इन हमलों को बच्चों के भविष्य में निवेश बताया।
देश के नाम अपने संबोधन में स्थानीय समयानुसार बुधवार को ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एक महीने से थोड़ा ज्यादा चला है, लेकिन अमेरिका ने पहले ही उस चीज को खत्म कर दिया है जिससे बड़ा खतरा बताया था। उन्होंने कहा, “हम इस सैन्य ऑपरेशन में 32 दिनों से हैं और देश को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है और असल में अब कोई खतरा नहीं है।”
उन्होंने कैंपेन की रफ्तार में तेजी को दिखाने के लिए इसकी तुलना पिछले अमेरिकी युद्धों के समय से की। ट्रंप ने कहा, “पहले विश्व युद्ध में अमेरिका की भागीदारी एक साल, सात महीने और पांच दिन तक चली। दूसरा वर्ल्ड वॉर तीन साल, आठ महीने और 25 दिन तक चला। कोरियाई युद्ध तीन साल, एक महीने और दो दिन तक चला। वियतनाम युद्ध 19 साल, पांच महीने और 29 दिन तक चला और इराक युद्ध आठ साल, आठ महीने और 28 दिन तक चला।”
ईरान ऑपरेशन को बहुत तेज बताते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने ऐसी रफ्तार से नतीजे दिए हैं जो मॉडर्न लड़ाई में बहुत कम देखी गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “लड़ाई के इतिहास में कभी किसी दुश्मन को कुछ हफ्तों में इतना साफ, भयानक और बड़े पैमाने पर नुकसान नहीं हुआ।” उन्होंने कहा कि लड़ाई का कम समय सैन्य ताकत और रणनीतिक स्पष्टता दोनों को दिखाता है।
ट्रंप ने कहा, “हम अमेरिका और दुनिया के लिए ईरान के खतरे को खत्म करने की कगार पर हैं।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “हम तब तक काम करते रहेंगे, जब तक हमारे मकसद पूरी तरह पूरे नहीं हो जाते। हमने जो प्रक्रिया की है, उसकी वजह से मैं कह सकता हूं कि हम बहुत जल्द अमेरिका के सभी मकसद पूरे करने की राह पर हैं।”
उन्होंने ईरान को यह भी चेतावनी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो हम उनके हर बिजली बनाने वाले प्लांट पर बहुत जोरदार हमला करेंगे और शायद एक साथ।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस लड़ाई को अमेरिका के लिए बेहतर और सुरक्षित भविष्य पक्का करने की कोशिश बताया है। ट्रंप ने कहा, “यह आपके बच्चों और आपके नाती-पोतों के भविष्य में एक सच्चा निवेश है।
उन्होंने दोहराया कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने के लिए जंग जरूरी है। हालांकि ट्रंप के अपने इंटेलिजेंस चीफ ने पिछले साल माना था कि तेहरान ऐसा नहीं चाहता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन के आखिरी में कहा, “जंग पहले ही जीत ली गई है और लगभग खत्म हो चुकी है। हम अमेरिका और दुनिया के लिए ईरान के खतरनाक खतरे को खत्म करने की कगार पर हैं।”
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