मनोरंजन
एआर रहमान युवाओं का बहुत समर्थन करते हैं: नकुल अभ्यंकर
तमिल सुपरस्टार विक्रम की आने वाली फिल्म ‘कोबरा’ में एआर रहमान का नया ट्रैक ‘थुम्बी थुल्लल’ लॉन्चिंग के बाद कुछ ही समय में हिट हो गया है। इसके पाश्र्व गायक नकुल अभ्यंकर हैं।
चेन्नई के नकुल इससे पहले रहमान के साथ ‘सरकार’ और ‘नवाब’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं। वो कहते हैं कि संगीत के महारथी रहमान हमेशा नई चीजों की खोज करते रहते हैं और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करते हैं।
नकुल ने आईएएनएस को बताया, “रहमान साहब के साथ काम करना हमेशा से मेरा सपना था। मेरे इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए मैं भगवना को जितना शुक्रिया अदा करूं कम है। मैं जब भी उनके साथ होता हूूं वो हर पल बहुत खास होता है। वह युवाओं का बहुत समर्थन करते हैं और नई चीजों की खोज के लिए तो उनका स्टूडियो एक इनोवेशन फैक्ट्री की तरह है। हर दिन हमें कुछ नया सीखने को मिलता है। वह एक महान प्रेरक और एक बहुत ही विनम्र व्यक्ति हैं। उनकी सबसे अच्छी बात ये भी है कि वह हमें हमारी क्रिएटिविटी खोजने के लिए पूरी आजादी देते हैं।”
नकुल ने यह गाना ‘थुम्बी थुल्लल’ श्रेया घोषाल के साथ रिकॉर्ड किया है, जो एक विवाह गीत है। खुशी और रोमांस से भरा यह गाना शुद्ध रूप में एआर रहमान के जादू से भरा है। नकुल कहते हैं, “मैं भाग्यशाली हूं कि मैंने श्रेया घोषाल के साथ इसे गाया। यह उनके साथ मेरा डुएट है, इसीलिए यह गाना मेरे लिए बहुत खास है।”
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कैसे अलका याग्निक बनीं 90 के दशक की बड़ी गायिका, रमेश तौरानी ने बताया अनुराधा पौडवाल का कनेक्शन

हिंदी सिनेमा में 90 का दशक संगीत के मामले में बेहद खास रहा। इस दौर में कुमार सानू, उदित नारायण, सोनू निगम, अलका याग्निक और अनुराधा पौडवाल जैसे गायकों के गाने लोगों की जुबान पर चढ़े रहते थे।
संगीत निर्माता रमेश तौरानी ने उस दौर को याद करते हुए बताया है कि कैसे अनुराधा पौडवाल के एक फैसले से अलका याग्निक को फायदा पहुंचा था और वह हिंदी फिल्मों की सबसे व्यस्त सिंगर्स में शामिल हो गईं थी।
रमेश तौरानी हाल ही में संगीतकार कुमार सानू के साथ ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा के पॉडकास्ट ‘गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज’ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 90 के दशक के हिंदी फिल्म संगीत और उस दौर के गायकों की लोकप्रियता पर बात की। अलका याग्निक के करियर में आए बदलाव के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, ”उस समय लता मंगेशकर और आशा भोसले पहले से ही स्थापित नाम थीं। जब मैं संगीत तैयार करता था, तब लता मंगेशकर मेरी पहली पसंद होती थीं। इसके बाद अलका याग्निक और अनुराधा पौडवाल का नाम आता था।”
तौरानी ने कहा, ”90 के दशक में अनुराधा पौडवाल को नई लता मंगेशकर और अलका याग्निक को नई आशा भोसले के तौर पर देखा जाने लगा था। अनुराधा पौडवाल ने जब फिल्मों के लिए गाना बंद कर टी-सीरीज पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया, तो इसका सीधा फायदा अलका याग्निक को मिला। अलका को अलग-अलग तरह के गाने मिलने लगे। उन्हें सोलो के साथ डुएट गाने और शायरी वाले गीत गाने के मौके भी मिले।”
तौरानी ने कहा, ”उस दौर में कुमार सानू, उदित नारायण और सोनू निगम जैसे गायकों के बीच अलका याग्निक को सबसे ज्यादा गाने मिल रहे थे। इस तरह वह हिंदी फिल्म संगीत की सबसे प्रमुख आवाजों में शामिल हो गईं।”
बता दें कि अनुराधा पौडवाल 80 के दशक के आखिरी वर्षों और 90 के दशक की शुरुआत में हिंदी फिल्म संगीत की प्रमुख गायिकाओं में शामिल थीं। ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’ और ‘साजन’ जैसी फिल्मों के गानों ने उनकी लोकप्रियता को काफी बढ़ाया था। उनकी आवाज रोमांटिक गीतों के लिए खूब पसंद की जाती थी।
दूसरी ओर, अलका याग्निक ने ‘कयामत से कयामत तक’, ‘साजन’ और ‘फूल और कांटे’ जैसी फिल्मों के गानों से लोकप्रियता हासिल की।
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सोनाली बेंद्रे ने बताया कैंसर से लड़ने का अलग नजरिया, बोलीं-मैंने इसे जंग की तरह नहीं देखा

अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे हाल ही में मराठी क्विज शो ‘कोण होणार करोडपति’ के प्रीमियर में पहुंचीं, जिसे अभिनेत्री माधुरी दीक्षित होस्ट कर रही हैं। शो में हुई बातचीत के दौरान अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने अपने कैंसर बैटल पर खुलकर बात की।
अभिनेत्री ने बताया कि इस मुश्किल दौर में उन्होंने अपने शरीर से प्यार करना सीखा और इस फेज से काफी कुछ सीखा। बातचीत के दौरान माधुरी ने सोनाली के कैंसर से लड़ने के हौसले और इस कठिन दौर में उनकी हिम्मत की तारीफ की। माधुरी ने सवाल पूछते हुए कहा, “आपने जिंदगी में कई अलग-अलग अनुभव देखे हैं और जब आपने कैंसर को मात दी, तब हमने आपका एक नया रूप देखा। हमने आपको एक मजबूत सोनाली के रूप में उभरते हुए देखा।”
इस पर अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे कहती हैं कि उन्होंने कभी भी कैंसर को लड़ाई के तौर नहीं देखा था, बल्कि अपने शरीर को समझने और इससे कुछ सीखने पर ध्यान दिया था। उन्होंने कहा, “हम हमेशा कहते हैं कि किसी ने कैंसर पर जीत हासिल कर ली, लेकिन उस वक्त मेरा इरादा इससे उबरने का नहीं था बल्कि, यह समझने का था कि ऐसा क्यों हो रहा है और इससे मैं क्या सीख सकती हूं।”
सोनाली बेंद्र ने माधुरी दीक्षित को बताया कि कैंसर के दौरान उन्हें जिंदगी के कई अनुभव मिलें। उन्होंने कहा, ” यकीन मानिए, मैंने इससे वाकई बहुत कुछ सीखा और मैंने इसे इसी नजरिए से देखा।”
सोनाली ने यह भी बताया कि उन्हें क्यों लगता है कि लड़ाई और जीतने जैसी भाषा कभी-कभी अपने ही शरीर के साथ एक टकराव पैदा कर देती है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि जब हम कहते हैं कि हमने किसी चीज पर जीत हासिल कर ली है, तो कहीं न कहीं ऐसा लगता है जैसे ये एक लड़ाई है। इसमें कहीं न कहीं एक निगेटिविटी आ जाती है और आखिर है तो ये हमारा ही शरीर, है ना? कैंसर सेल्स भी तो हमारे ही सेल्स हैं। तो हम खुद से ही कैसे लड़ सकते हैं?”
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सोशल मीडिया ट्रोलिंग को ऐसे हैंडल करते हैं अमिताभ बच्चन, बताया क्यों लिखना कर दिया कम

सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग अब मशहूर हस्तियों (सेलेब्स) के जीवन का एक सामान्य हिस्सा बन चुकी है। चाहे कोई छोटा कलाकार हो या बड़ा, हर किसी को कभी न कभी इस स्थिति का सामना करना पड़ता है। इसी बीच, महानायक अमिताभ बच्चन ने भी सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और नकारात्मक टिप्पणियों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में आए कंटेस्टेंट विनम्र ने अभिनेता से नेगेटिविटी से निपटने के लिए उनसे सलाह मांगी, तब अभिनेता ने बताया कि जेन जी के लिए आलोचनाओं को संभालना अक्सर मुश्किल हो जाता है। शो के दौरान विनम्र ने मेगास्टार से कहा, “मैं तो आपसे यह सवाल पूछना चाहता हूं कि सोशल मीडिया पर आप आलोचना को हैंडल कैसे करते हैं? जैसे मेरी ऐज ग्रुप के लोगों को क्रिटिसिज्म बिल्कुल हैंडल करना नहीं आता और नहीं हो पाता।”
अभिनेता ने बताया कि कैसे शुरुआत में वे सोशल मीडिया को अपने दिल की बात खुलकर कहने का एक जरिया मानते थे। उन्होंने आगे बताया कि यूजर्स के कमेंट्स पढ़ने के बाद उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया। अभिनेता ने बताया, “पहले हमने सोचा कि सोशल मीडिया पर हम बिना सोचे समझे दिल की बात बोल सकते हैं। उसके बाद, जब हमने इसके कमेंट पढ़ने शुरू किया, तो हमने भी इस तरह से लिखना बंद कर दिया।”
अभिनेता ने आगे बताया, “हमारे लिखे गए पोस्ट के कमेंट सेक्शन में लोग ‘अपने आप को क्या समझता है रे तू बुढ़ऊ… ऐसे क्यों बोल रहा है?’ तो ऐसी-ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे देखकर बहुत अजीब लगता है और हमने अब इस तरह से लिखना ही छोड़ दिया।”
मेगास्टार ने अपनी बात को हल्के-फुल्के अंदाज में खत्म करते हुए कहा, “और भाईसाहब एक बात बताएं आपको? जब से कम लिखना कर दिया है, हमारे फॉलोअर्स बढ़ते चले जा रहे हैं।”
बिग बी की बात सुनकर पूरे स्टूडियो का माहौल बदल गया, सभी लोग अभिनेता की बात सुनकर हंसने लगे।
बता दें, अमिताभ बच्चन ने साल 2008 में अपना पर्सनल ब्लॉग लिखना शुरू किया था और पिछले कई सालों से वे अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक्टिव रहे हैं।
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