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Friday,08-May-2026
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भारत को तेल, गैस निर्यात करना जारी रखेगा अमेरिका : प्राइस

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Petrol

 जीवाश्म ईंधन के प्रति राष्ट्रपति जो बाइडेन के विरोध के बावजूद, अमेरिका सतत ऊर्जा विकास का समर्थन करते हुए भारत को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति जारी रखेगा। विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने यह जानकारी दी।

उन्होंने सोमवार को यह पूछे जाने पर कि क्या बाइडेन प्रशासन निर्यात जारी रखेगा, तो इसके जवाब में प्राइस ने कहा, “भारत के साथ सामरिक ऊर्जा साझेदारी के तहत हमारा व्यापक सहयोग मजबूत है और यह तब भी बढ़ता रहेगा जब प्रशासन जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को प्राथमिकता देगा।”

जलवायु परिवर्तन से लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता के साथ, बाइडेन जीवाश्म ईंधन से जुड़े विदेशी पारिस्थितिकी की समीक्षा कर रहे हैं और एक बड़े कदम में कनाडा से अमेरिका तेल लाने के लिए विवादास्पद कीस्टोन पाइपलाइन परियोजना को रद्द कर दिया।

अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका कच्चे तेल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया है, जिसने 2020 तक नवंबर के दौरान लगभग 8.4 करोड़ बैरल और लगभग 11,500 करोड़ क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का निर्यात किया है।

प्राइस ने कहा, “जब यह ऊर्जा सहयोग में अधिक व्यापक रूप से आता है, तो मैं कहूंगा कि अमेरिका-भारत ऊर्जा साझेदारी सतत ऊर्जा विकास का समर्थन करती है। यह 21वीं सदी की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करती है।”

उन्होंने कहा कि यह सहयोग राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करता है और क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्थिरता को बढ़ावा देता है।

ऊर्जा क्षेत्र में भारत-अमेरिका का सहयोग 2017 में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में बढ़ना शुरू हुआ, जो भारत को तेल और गैस निर्यात बढ़ाने और ईरान पर निर्भरता से दूर करने के लिए उत्सुक थे।

अमेरिका-भारत ऊर्जा सहयोग ने स्वच्छ ऊर्जा पर जोर देने के साथ पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन में जोर पकड़ना शुरू किया लेकिन ट्रंप प्रशासन के तहत, जिन्होंने जलवायु परिवर्तन मसले से दूरी बना ली थी, अमेरिका से जीवाश्म ईंधन निर्यात ने रफ्तार पकड़ी।

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व्यापार

अमेरिका और ईरान में बातचीत के बीच भारतीय शेयर बाजार सपाट खुला, मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी

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अमेरिका और ईरान में युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को सपाट खुला। सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 68 अंक या 0.09 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,889 और निफ्टी 24 अंक या 0.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,303 पर था।

हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी देखी जा रही है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 202 अंक या 0.33 प्रतिशत की तेजी के साथ 61,563 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 97 अंक या 0.53 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,657 पर था।

शुरुआत कारोबार सूचकांक में निफ्टी ऑटो और निफ्टी मेटल बाजार का नेतृत्व कर रहे थे। इसके अलावा निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी इंडिया डिफेंस हरे निशान में थे। वहीं, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी पीएसई, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी सर्विसेज हरे लाल निशान में थे।

सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, टाटा स्टील, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, इन्फोसिस, एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक हरे निशान में थे। टीसीएस, एचयूएल, सन फार्मा, पावर ग्रिड, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, बीईएल, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल, एचसीएल टेक और आईटीसी लूजर्स थे।

ज्यादातर एशियाई बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता हरे निशान में थे। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को हरे निशान में बंद हुआ, जिसमें डाओ जोन्स 1.24 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 2.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।

अमेरिका-ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। ईरान की समाचार एजेंसी आईएसएनए द्वारा ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि तेहरान अपनी प्रतिक्रिया देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि ईरान एक समझौता चाहता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करने और हॉमुर्ज सेट्रट को खोलने की मांग रहा है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि ईरान एक समझौते चाहता है।

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार बिकवाली कर रहे हैं। बुधवार को एफआईआई ने इक्विटी में 5,834.90 करोड़ रुपए की बिकवाली की। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 6,836.87 करोड़ रुपए का इक्विटी में निवेश किया।

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राष्ट्रीय समाचार

भारतीय कंपनियां अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करने के लिए तैयार: सर्जियो गोर

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भारतीय कंपनियां अमेरिका में टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा और अन्य क्षेत्रों में 20.5 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करने की योजना बना रही है। यह बयान बुधवार को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की ओर से दिया गया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गौर ने लिखा कि एक ही दिन में 12 भारतीय कंपनियों ने 1.1 अरब डॉलर के नए निवेश की घोषणा की। साथ कहा कि यह निवेश अमेरिका में नौकरियां पैदा कर रहा है और दोनों देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बना रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि यह निवेश इस बात का प्रमाण है कि जब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र आपस में व्यापार करते हैं, तो सभी को लाभ होता है।

अमेरिकी राजदूत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका कई मोर्चों पर आर्थिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं, और दोनों देशों की मौजूदा सरकारें तेजी से द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा सहयोग और प्रौद्योगिकी साझेदारी को आगे बढ़ा रही हैं।

हालांकि, गौर ने उन 12 कंपनियों के नाम का ऐलान नहीं किया, जिन्होंने अमेरिका में निवेश का ऐलान किया है।

अमेरिकी सरकार के आधिकारिक डेटा के मुताबिक, अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा मार्च 2026 में 3.8 अरब डॉलर रहा है, जो कि पिछले साल की समान अवधि के घाटे 7.4 अरब डॉलर से 48.64 प्रतिशत कम है।

अमेरिकी सरकार की ओर से बताया गया कि मार्च 2026 में अमेरिका का भारत को निर्यात बढ़कर 4.3 अरब डॉलर हो गया है। वहीं, भारत से आयात 8.4 अरब डॉलर रहा है।

भारत के साथ आयात-निर्यात में अंतर कम होने के बावजूद अमेरिका के व्यापार घाटे में बढ़ोतरी हुई है। मार्च में वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार घाटा बढ़कर 60.3 अरब डॉलर हो गया, जो फरवरी के संशोधित 57.8 अरब डॉलर से 2.5 अरब डॉलर अधिक है।

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व्यापार

ट्विटर हिस्सेदारी विवाद में 1.5 मिलियन डॉलर का जुर्माना भरेंगे मस्क

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ट्विटर में हिस्सेदारी को लेकर 2022 के मामले में दिग्गज टेक्नोलॉजी कारोबारी एलन मस्क यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) को 1.5 मिलियन डॉलर का जुर्माना भरने के लिए तैयार हो गए है।

यूएस एसईसी ने मस्क पर आरोप लगाया था कि 2022 में उन्होंने ट्विटर के शेयरधारकों को बिना बताए कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जुर्माना मस्क द्वारा गठित एक ट्रस्ट एसईसी को मुकदमे को समाप्त करने के लिए अदा करेगा, लेकिन इसे अभी भी अदालत की मंजूरी मिलना बाकी है। हालांकि, मस्क ने नियामक के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह एसईसी की ओर से मस्क से इससे पहले मांगे गए जुर्माने से काफी कम है। दिसंबर 2024 में एसईसी ने मस्क से 200 मिलियन डॉलर से अधिक का जुर्माना मांगा था।

जनवरी 2025 में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पदभार संभालने से कुछ दिन पहले, एसईसी ने मस्क पर मुकदमा दायर किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के 5 प्रतिशत से अधिक शेयर जमा करने की जानकारी देने की समय सीमा का उल्लंघन किया।

नियामक के अनुसार, इस देरी के कारण ट्विटर के शेयरधारकों को 150 मिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ। हालांकि, बाद में मस्क ने 2022 में कंपनी को खरीद लिया और इसका नाम बदलकर एक्स कर दिया।

एसईसी के एक प्रवक्ता ने कहा कि यदि यह समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो यह एजेंसी द्वारा किसी संस्था या व्यक्ति पर कथित तौर पर समय पर लाभकारी स्वामित्व रिपोर्ट दाखिल न करने के लिए लगाया गया अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना होगा।

हालांकि, मस्क के वकील ने इसे “मामूली जुर्माना” बताया।

मस्क के वकील एलेक्स स्पिरो ने एक बयान में कहा, “जैसा कि हमने शुरू से कहा था, मस्क को ट्विटर अधिग्रहण से संबंधित फॉर्म देर से दाखिल करने के सभी मामलों से बरी कर दिया गया है। एक ट्रस्ट संस्था ने एक फाइलिंग में देरी के लिए मामूली जुर्माने पर सहमति जताई है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसईसी ने शुरू में दंड और अवैध मुनाफे की वापसी, साथ ही ब्याज की मांग की थी। सोमवार को घोषित समझौता केवल दंड को दर्शाता है।

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