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Saturday,19-September-2026
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राजनीति

बिहार में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर बंटे तमाम राजनीति दल

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उत्तर प्रदेश सरकार के जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की कवायद के बाद बिहार की राजनीति भी गर्म हो गई है। बिहार में इस कानून को लेकर सत्तारूढ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में भी मतभेद दिख रहा है जबकि जनता दल (युनाइटेड) के नेताओं के सुर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सोमवार को अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा था कि इसके लिए कानून लाना जरूरी नहीं। उन्होंने कहा, ” जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लाने से बहुत लाभ नहीं होने वाला है। इसके लिए महिलाओं को शिक्षित और जागरुक करना जरूरी है।”

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ” अलग-अलग राज्यों की अपनी-अपनी सोच है। जो करना चाहें करें, लेकिन हमारी राय यह है कि सिर्फ कानून बनाने से जनसंख्या नियंत्रित नहीं होगी। हमारी सोच सभी समुदाय पर काम करेगी।”

इधर, जदयू के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने भी जनसंख्या नियंत्रण कानून का समर्थन किया है। हालांकि उन्होंने इसके लिए परामर्श की भी बात कही है। कुशवाहा ने कहा, ”समय के अनुसार बिहार में भी ऐसे कानून की आवश्यकता बढ़ गई है, क्योंकि जिस तरह से आबादी बढ़ रही है उसका असर विकास पर दिखेगा। राज्य सरकार को भी परामर्श कर इस कानून को लागू करने की आवश्यकता है। ”

इस बीच, बिहार के उपमुख्यमंत्री रेणु देवी के विचार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विचार से इतर दिख रहे हैं। रेणु देवी कहती हैं, ” जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिलाओं से अधिक पुरुषों को जागरूक करने की आवश्यकता है क्योंकि पुरुषों में नसबंदी को लेकर काफी डर देखा जाता है।”

इधर, इस बहस में कांग्रेस भी अब कूद गई है। पार्टी के मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने कहा, ” कांग्रेस पहले से ही जनसंख्या नियंत्रण के लिए जागरूकता अभियान चलाती रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी जागरूक करने की बात कर रहे है, जिसका हम स्वागत करते हैं। ”

राठौड ने हालांकि यह भी पूछा कि नीतीश कुमार का यह व्यक्तिगत बयान है या जदयू का बयान, क्योंकि जदयू नेता कुशवाहा का बयान इस मामले में मुख्यमंत्री से मेल नहीं खाता।

उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि जदयू पहले अपने दल में ही आपसी सहमति कर लें फिर राजग के दलों में सहमति बनाकर मुख्यमंत्री को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व जनसंख्या दिवस पर ‘जनसंख्या नीति उत्तर प्रदेश 2021-30’ का विमोचन किया। इसके बाद से ही जनसंख्या नियंत्रण को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।

राष्ट्रीय समाचार

दिल्ली में नाबालिग लड़की से गैंगरेप और हत्या मामले का एनसीडब्ल्यू ने लिया संज्ञान, कमिश्नर को लिखा पत्र

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राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने आउटर नॉर्थ दिल्ली में 16 साल की लड़की से गैंगरेप और हत्या का मामला खुद संज्ञान में लिया है। एनसीडब्ल्यू की चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर समयबद्ध और विस्तृत जांच, सख्त कानूनी कार्रवाई और सभी फोरेंसिक सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग की है।

दरअसल नाबालिग लड़की की गैंगरेप के बाद चाकू मारकर उसकी हत्या कर दी गई थी। लड़की का शव एक खुले मैदान में मिला था। राष्ट्रीय महिला आयोग ने पोक्सो एक्ट और बीएनएस के तहत उचित कार्रवाई करने और जहां कानूनी रूप से लागू हो, वहां 16-18 साल के आरोपियों के लिए जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 15 के तहत शुरुआती जांच करने को भी कहा है।

आयोग ने पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा, कानूनी मदद, काउंसलिंग और मुआवजे के साथ-साथ सात दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है।

13 सितंबर को उत्तरी दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में कुशक रोड पर जयपाल राणा के खेत के पास सड़ी-गली लाश मिली थी। शव की हालत ऐसी थी कि पुलिस शुरू में यह भी तय नहीं कर पाई कि शव लड़के का है या लड़की का। पुलिस को जांच में पता चला कि गैंगरेप के बाद हत्या कर शव फेंका गया था। पुलिस के मुताबिक इस वारदात को 4 लोगों ने अंजाम दिया, जिसमें 3 नाबालिग थे।

जांच में पता चला कि पीड़िता आरोपियों को जानती थी और उनके साथ टेंपो में सफर कर रही थी। पुलिस के अनुसार सफर के दौरान सभी ने शराब पी और फिर लड़की से दुष्कर्म किया। इसके बाद चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी गई और शव को खुले खेत में फेंक दिया गया। लावारिस कुत्तों ने शव के कुछ हिस्से खा लिए थे और पीड़िता का एक हाथ शरीर से अलग पड़ा मिला था। पुलिस ने बताया कि लड़की के परिवार ने उसकी गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी।

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राजनीति

तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में जन्मे बच्चों को मिलेगी सोने की अंगूठी, सीएम विजय 28 सितंबर से योजना करेंगे शुरू

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 28 सितंबर को थाईमामन गोल्ड रिंग योजना का शुभारंभ करेंगे, जिसके तहत सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे को एक ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सचिवालय में कल्याणकारी योजना के शुभारंभ और कार्यान्वयन की तैयारियों का आकलन करने के लिए एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

सरकार ने कहा कि उसने गर्भवती महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता, मुफ्त प्रसव और नवजात शिशु देखभाल, आपातकालीन प्रसूति उपचार, पोषण संबंधी सहायता और संस्थागत प्रसव के लिए अग्रिम योजना के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल में सुधार को उच्च प्राथमिकता दी है।

गर्भावस्था और शिशु समूह निगरानी और मूल्यांकन सॉफ्टवेयर का उपयोग गर्भवती महिलाओं और शिशुओं की एकीकृत निगरानी के लिए भी किया जा रहा है। बयान में कहा गया है कि इन पहलों से राज्य के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

थाईमामन गोल्ड रिंग योजना का उद्देश्य सरकारी चिकित्सा सेवाओं में जनता का विश्वास बढ़ाना और नवजात शिशुओं का सम्मान करना है। यह तमिल संस्कृति में मामा की पारंपरिक भूमिका को भी दर्शाती है।

इस योजना के तहत 22 जून 2026 को या उसके बाद सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले सभी पात्र शिशुओं को एक ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी। इस योजना को अधिकृत करने वाला सरकारी आदेश 23 जून को जारी किया गया था। तमिलनाडु में प्रतिवर्ष लगभग 7.80 लाख जन्म दर्ज किए जाते हैं।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार, राज्य में लगभग 99.9 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में होते हैं।

सरकारी अस्पतालों में लगभग 42 लाख प्रसव होते हैं, जो कुल प्रसवों का 53 प्रतिशत है। सरकारी अस्पतालों में होने वाले लगभग 90 प्रतिशत प्रसव व्यापक आपातकालीन प्रसूति एवं नवजात शिशु देखभाल केंद्रों में संपन्न होते हैं।

सरकार ने कहा कि ये आंकड़े सुरक्षित प्रसव और स्वस्थ नवजात शिशुओं को सुनिश्चित करने में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के महत्वपूर्ण योगदान को उजागर करते हैं। इस योजना के तहत वितरित की जाने वाली प्रत्येक सोने की अंगूठी पर एक यूनिक सीरियल नंबर होगा और इसे टेंपर प्रूफ पैकेजिंग आपूर्ति की जाएगी।

पहले चरण में कुल 1.28 लाख अंगूठियां खरीदी गई हैं। तमिलनाडु में स्थायी रूप से रहने वाली माताएं इस योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र होंगी, बशर्ते वे गर्भावस्था एवं शिशु समूह निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली (पीआईसीएमई) पोर्टल पर पंजीकृत हों और उनके पास प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पहचान संख्या हो।

22 जून और औपचारिक शुभारंभ के बीच जन्मे बच्चों को अंगूठियां वितरित करने के लिए 107 नामित केंद्रों पर विशेष व्यवस्था की गई है। प्रत्येक केंद्र 28 सितंबर से प्रतिदिन 100 बच्चों को सेवा प्रदान करेगा। इसके बाद सरकारी अस्पतालों से छुट्टी मिलने पर पात्र नवजात शिशुओं को अंगूठियां सौंप दी जाएंगी।

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राष्ट्रीय समाचार

‘महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं’, नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या मामले पर बोलीं प्रियंका

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दिल्ली में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और हत्या के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “दिल्ली में एक 17 साल की बच्ची के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं और उसके बाद उसे बर्बरता से मार डाला गया।”

उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों पहले एक और नाबालिग लड़की का बलात्कार किया गया। देश में महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है। महिलाओं के विकास की सिर्फ खोखली बातें की जाती हैं। सैकड़ों महिलाओं पर अत्याचार होते हैं और हिंसा होती है, मगर अपराधियों पर ठोस कार्रवाई की वे उम्मीद नहीं कर सकतीं। एफआईआर दर्ज तक नहीं होते।

साथ ही, प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि समाज और सरकार दोनों, महिलाओं को सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता का अधिकार देने में पूरी तरह से विफल हैं।

इससे पहले, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली की घटना को लेकर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के बिना भारत आगे नहीं बढ़ सकता।

राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में 17 साल की युवती के साथ गैंगरेप हुआ, उसकी हत्या कर शव खुले मैदान में फेंक दिया गया। राजधानी में इतनी बड़ी दरिंदगी और पुलिस को कई दिनों तक भनक नहीं लगती। दुर्भाग्य है कि दिल्ली आज राजधानी नहीं, महिलाओं के लिए हर दिन की खौफनाक कहानी बनकर रह गई है।”

कांग्रेस सांसद ने लिखा, “अमित शाह जी, दिल्ली पुलिस आपके अधीन है। महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? या दिल्ली पुलिस का काम सिर्फ आम नागरिकों को डराना-धमकाना रह गया है? क्योंकि अपराधी तो बेखौफ घूम रहे हैं। दरिंदों की तत्काल गिरफ्तारी हो, कड़ी कार्रवाई और सजा मिले, और इस आपराधिक गैर-जिम्मेदारी की जवाबदेही तय हो।”

यह मामला 13 सितंबर को सामने आया, जब उत्तरी दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में कुशक रोड पर जयपाल राणा के खेत के पास एक बुरी तरह सड़ी-गली लाश मिली। हालत ऐसी थी कि पुलिस शुरू में यह भी तय नहीं कर पाई कि शव लड़के का है या लड़की का।

जांच में पीड़िता की पहचान की गई। बाद में पता चला कि इस वारदात को चार लोगों ने अंजाम दिया, जिनमें तीन नाबालिग हैं। आरोपियों ने बाद में लड़की के शव को खुले इलाके में फेंक दिया था। पुलिस के अनुसार, पीड़िता आरोपियों को जानती थी और उनके साथ टेंपो में सफर कर रही थी। सफर के दौरान सभी ने शराब पी और फिर लड़की के साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी गई और शव को खुले खेत में फेंक दिया गया।

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