राष्ट्रीय समाचार
गिरफ्तार जैश सहयोगी हमीम मंडल मामले में खुलासा; मॉडल्स को हनी-ट्रैप रैकेट में फंसाता था, मंत्रियों के परिजन भी थे निशाने पर
पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले के बर्दवान से पिछले सप्ताह गिरफ्तार किए गए संदिग्ध जैश-ए-मोहम्मद सहयोगी हमीम मंडल पर आरोप है कि वह नए मॉडलों को राजनीतिक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली लोगों को हनी-ट्रैप में फंसाने के लिए अपने जाल में फंसाता था।
जांच अधिकारियों को हमीम मंडल से पूछताछ के दौरान यह भी पता चला कि सोशल मीडिया पर नियमित रूप से रील्स पोस्ट करने वाली आकर्षक महिला सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी उसके निशाने पर रहती थीं।
दरअसल, उसकी महिला सहयोगी अर्पिता सरकार जिसे पिछले सप्ताह पड़ोसी राज्य झारखंड के साहिबगंज से गिरफ्तार किया गया था, एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर थी और वह अक्सर रील्स पोस्ट करती थी। इसी के जरिए हमीम मंडल ने सबसे पहले उससे संपर्क स्थापित किया था।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में हमीम मंडल ने स्वीकार किया है कि आकर्षक युवा महिलाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करने का यह काम उसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी-अपराधी संगठन शहजाद भट्टी नेटवर्क (एसबीएन) ने सौंपा था।
सूत्रों के अनुसार, हमीम मंडल की भूमिका केवल शुरुआती चरण तक सीमित थी, जिसमें वह अपने निशाने पर मौजूद महिलाओं और पाकिस्तान में बैठे एसबीएन हैंडलर्स के बीच संपर्क स्थापित कराता था। इसके बाद एसबीएन के हैंडलर्स हमीम मंडल को दरकिनार कर सीधे उन महिलाओं से संपर्क करते थे। अर्पिता सरकार के मामले में भी यही तरीका अपनाया गया था।
अब पश्चिम बंगाल पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के जांच अधिकारी अर्पिता सरकार के अलावा उन अन्य युवा और आकर्षक महिलाओं की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें हमीम मंडल ने अपने जाल में फंसाया था। एसटीएफ ने हमीम मंडल के दूसरे सहयोगी आदित्य सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया है।
जांच अधिकारी उन लोगों का भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं, जो हनी-ट्रैप का शिकार तो हुए, लेकिन सामाजिक प्रतिष्ठा खोने के डर से अब तक चुप रहे।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को हमीम मंडल और अर्पिता सरकार से पूछताछ की। मंगलवार को आदित्य सिंह से भी पूछताछ किए जाने की संभावना है।
सूत्रों का कहना है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो बयानों में किसी भी तरह के विरोधाभास से बचने के लिए एनआईए तीनों से एक साथ भी पूछताछ कर सकती है।
एसटीएफ अधिकारियों को हमीम मंडल और अर्पिता सरकार से पूछताछ के बाद यह भी जानकारी मिली है कि शहजाद भट्टी नेटवर्क (एसबीएन) ने अर्पिता सरकार के माध्यम से पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल के कम से कम छह मौजूदा मंत्रियों के परिवार के सदस्यों** को निशाना बनाया था। जांच में अब तक यह भी सामने आया है कि राज्य के प्रशासनिक तंत्र से जुड़े कई अन्य प्रभावशाली लोगों को भी अर्पिता सरकार के जरिए निशाना बनाया गया था।
जीवन शैली
गुजरात में बाढ़ प्रभावित 1.74 लाख लोगों का किया गया इलाज, सर्विलांस टीमें घर-घर कर रहीं जांच

गुजरात में भारी बारिश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। विभाग ने निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए हजारों टीमें तैनात की हैं और बाढ़ प्रभावित इलाकों में बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए मेडिकल कैंपों के जरिए 1.74 लाख से अधिक लोगों का इलाज किया है।
राज्य सरकार के अनुसार, मानसून से पहले और उसके दौरान सभी 34 जिलों और आठ नगर निगमों में एक व्यापक ‘मानसून एक्शन प्लान’ लागू किया गया था, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों को बाढ़ और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों से तेजी से निपटने में मदद मिली।
सरकार ने कहा कि अब तक सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई बड़ी आपातकालीन स्थिति सामने नहीं आई है और भारी बारिश व बाढ़ के बावजूद बीमारियों का प्रकोप काफी हद तक नियंत्रण में रहा है। विभाग ने राज्य स्तर, सभी जिलों और आठों नगर निगमों में चौबीसों घंटे काम करने वाले हेल्थ कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं।
राज्य, जिला और तालुका स्तर पर रैपिड रिस्पॉन्स टीमें काम कर रही हैं जबकि हर जिले को पांच अतिरिक्त इमरजेंसी मेडिकल टीमें दी गई हैं, जिन्हें खास गाड़ियां और स्टाफ़ भी उपलब्ध कराया गया है। स्वास्थ्य सेवा सहायता में कमजोर वर्गों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
विभाग ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों की 675 गर्भवती महिलाओं को पहले ही हेल्थकेयर सेंटर्स में शिफ्ट कर दिया गया था, जहां 272 संस्थागत प्रसव सफलतापूर्वक कराए गए। बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए राहत कैंपों में रह रहे लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच भी की जा रही है।
108 इमरजेंसी सर्विस के तहत 1,496 एम्बुलेंस और प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स व कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स से जुड़ी 816 एम्बुलेंस को स्टैंडबाय पर रखकर इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं को मजबूत किया गया है। बिजली कटौती के दौरान भी सेवाएं बिना रुकावट जारी रखने के लिए प्राइमरी और कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स में जनरेटर और पर्याप्त डीजल की व्यवस्था की गई है।
बाढ़ के बाद होने वाली बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए विभाग ने 6,868 मेडिकल कैंप लगाए, जिनमें 1.74 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें मौके पर ही इलाज दिया गया।
18,000 से अधिक सर्विलांस टीमें प्रभावित इलाकों में रोज़ाना घर-घर जाकर जांच कर रही हैं। इन दौरों के दौरान, 1.05 करोड़ से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 10.29 लाख से अधिक ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) पैकेट बांटे गए।
अधिकारियों ने बताया कि पीने के सुरक्षित पानी को सुनिश्चित करने के लिए 10.52 लाख से अधिक रेजिडुअल क्लोरीन टेस्ट किए गए जबकि पीने के पानी की पाइपलाइन में हुई 3,061 से ज्यादा लीकेज को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया गया।
विभाग ने हेल्थकेयर सेंटर्स में 1.5 करोड़ से ज़्यादा क्लोरीन टैबलेट, 60 लाख से ज़्यादा ओआरएस पैकेट और 1,38,234 एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन भी उपलब्ध कराए हैं।
बाढ़ के मौसम में सांप के काटने के मामलों का तुरंत इलाज करने के लिए 108 एम्बुलेंस में एंटी-स्नेक वेनम भी उपलब्ध कराया गया है।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद लेप्टोस्पायरोसिस को रोकने के लिए वलसाड, सूरत, नवसारी और तापी जिलों के 562 गांवों में ज्यादा जोखिम वाले 7.61 लाख से ज्यादा लोगों को कीमोप्रोफिलैक्सिस के तौर पर डॉक्सीसाइक्लिन दी गई है।
राज्य सरकार ने मच्छर से फैलने वाली बीमारियों को कम करने के मकसद से एंटी-लार्वल उपाय और जन-जागरूकता गतिविधियां चलाने के लिए 497 अतिरिक्त वेक्टर कंट्रोल टीमें भी तैनात की हैं। अधिकारियों ने बताया कि ज़्यादा जोखिम वाले 106 गांवों में इनडोर रेसिडुअल स्प्रेइंग का पहला दौर पूरा हो चुका है और दूसरा दौर 1 अगस्त से शुरू होगा।
मच्छरों के पनपने पर रोक लगाने के लिए 4,998 स्थायी जल निकायों में लार्विवोरस गैम्बूसिया मछलियां भी छोड़ी गई हैं। अधिकारियों ने कहा, “हम मानसून से जुड़ी बीमारियों से बचाव के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए आशा वर्करों और वेक्टर कंट्रोल टीमों के ज़रिए जन-जागरूकता अभियान जारी रखे हुए हैं। मौजूदा मानसून सीज़न में पैदा होने वाली किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए भी तैयार हैं।”
राष्ट्रीय समाचार
जम्मू-कश्मीर में इस साल हुई बादल फटने की 35 घटनाएं, 31 लोगों की मौत और तबाही का दिखा मंजर

जम्मू-कश्मीर में 2026 की गर्मियों को लंबे समय तक याद रखा जाएगा, क्योंकि इस केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले लोगों के लिए बादल फटना कोई अपवाद नहीं, बल्कि एक आम बात बन गई थी। अब तक इस केंद्र शासित प्रदेश में बादल फटने की 35 घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 31 लोगों की जान चली गई।
1 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के छत्रू इलाके में जबरदस्त बादल फटने की घटना हुई, जिससे भारी तबाही मची। बाढ़ का पानी अपने साथ मलबा, उखड़े हुए पेड़ और पत्थर बहाकर रिहायशी इलाकों और स्थानीय बाजार तक ले आया। कई घरों में दरारें आ गईं, दुकानें पानी में डूब गईं और खड़ी गाड़ियां बह गईं। कुछ इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई, जिसके बाद अधिकारियों ने बहाली का काम शुरू किया।
पिछले चार दिनों में शोपियां जिले में लगातार तीन बार बादल फटने की घटनाएं हुईं, जिससे जिले के बद्रहामा, पहलपोरा और हीरपोरा इलाकों में सरकारी और निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा। अधिकारियों ने बताया कि बादल फटने की इन तीन घटनाओं के कारण कई घर पानी में डूब गए और बचाव एजेंसियों को आपातकालीन कार्रवाई करनी पड़ी। अचानक बादल फटने से पानी का बहाव तेजी से बढ़ा, जिससे रिहायशी इलाकों में बाढ़ आ गई और कई परिवार प्रभावित हुए। शोपियां पुलिस, स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ोर्स (एसडीआरएफ) और स्थानीय लोगों की टीमों ने तुरंत बचाव और राहत का काम शुरू किया ताकि प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके और फँसे हुए लोगों की मदद की जा सके।
इस साल अब तक बादल फटने की 35 घटनाएं हुई हैं, जिनमें से 22 घटनाएं 1 जून से जुलाई के बीच में हुईं। जुलाई के आखिर से अगस्त की शुरुआत तक लगातार बारिश के कारण और भी घटनाएं हुईं।
सोमवार को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के लोलाब इलाके के हिमली में बादल फटने से अचानक आई बाढ़ में 52 साल की नसीमा बेगम फिसलकर गिर गईं, वह उस समय एक छोटे नाले के पास अपने खेत में थीं। बादल फटने, अचानक आई बाढ़ और जमीन खिसकने (लैंडस्लाइड) की इन घटनाओं में 31 लोगों की मौत हो गई।
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में पुंछ, राजौरी, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़ (चिनाब घाटी) शामिल हैं। इसके अलावा कश्मीर में भी कुछ जगहों पर ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें शोपियां, कुपवाड़ा, बांदीपोरा, अनंतनाग (पहलगाम) और हाल ही में गांदरबल में मिट्टी खिसकने की घटनाएं शामिल हैं। दर्जनों घर, दुकानें, स्कूल, सिंचाई की नहरें और खेत बह गए हैं या पानी में डूब गए हैं।
मलबे के जमा होने और नालों के उफान पर होने के कारण जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे समेत कई अहम हाईवे और गांदरबल जिले के कंगन और पहलगाम की स्थानीय सड़कें कुछ समय के लिए बंद कर दी गई हैं।
लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने और मलबा हटाने के काम के लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत टीमें तैनात की गई हैं।
बार-बार होने वाली खराब मौसम की घटनाओं से घर, सड़कें, पुल, खेती की ज़मीन और दूसरी सार्वजनिक सुविधाएं बर्बाद हुई हैं। साथ ही कई दूर-दराज़ के इलाकों में आवाजाही पर भी असर पड़ा है।
हाल ही में हुई भारी बारिश ने एक बार फिर दिखाया है कि पहाड़ी इलाके मौसम से जुड़ी आपदाओं के प्रति कितने संवेदनशील हैं। कई प्रभावित ज़िलों में अधिकारी बचाव, बहाली और राहत का काम कर रहे हैं।
आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बाढ़ और भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और मौसम से जुड़ी सलाहों का सख्ती से पालन करने को कहा है, क्योंकि मानसून का असर इलाके में अभी भी बना हुआ है।
जानकारों का मानना है कि इन भयानक बादल फटने की घटनाओं और मौसम से जुड़ी दूसरी आपदाओं के पीछे हिमालयी इलाके के स्थानीय कारण और ग्लोबल वार्मिंग (जलवायु परिवर्तन) जैसे वैश्विक कारण हैं।
स्थानीय कारणों में पहाड़ों को काटने, पेड़ों की कटाई और कमजोर इलाकों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य से पर्यावरण को होने वाला नुकसान शामिल है। ये चीजें पहाड़ों की ढलानों को अस्थिर करती हैं और पानी के प्राकृतिक बहाव के रास्तों को रोकती हैं।
वैश्विक कारणों में दुनिया भर में बढ़ता तापमान शामिल है, जिससे हवा में हर डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने पर लगभग 7 प्रतिशत अधिक नमी सोखने की क्षमता आ जाती है, जिससे मानसून के बादल और ज़्यादा शक्तिशाली हो जाते हैं।
अरब सागर और हिंद महासागर में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से पहाड़ों की ओर आने वाली हवाओं में जल-वाष्प (नमी) की मात्रा बढ़ जाती है।
मानसून के अनियमित पैटर्न, जैसे जेट स्ट्रीम का बदलना और स्थानीय स्तर पर बनने वाले तूफानी सिस्टम, ऊंचे और घने तूफानी बादल बनाते हैं जो बहुत कम समय में और छोटी सी जगह पर भारी बारिश करते हैं।
कश्मीर में भौगोलिक कारणों में पहाड़ों की कमज़ोर बनावट शामिल है। खड़ी और संकरी घाटियां तथा ऊंचाई वाली ढलानें गर्म और नमी वाली हवा को तेजी से ऊपर की ओर धकेलती हैं, जिससे अचानक भारी संघनन (कंडेनसेशन) होता है।
इन मानवीय, पर्यावरणीय, भौगोलिक और जलवायु संबंधी कारकों का मिला-जुला असर यह हुआ है कि आजकल जब भी जम्मू-कश्मीर में बादल जमा होने लगते हैं, तो लोग घबरा जाते हैं क्योंकि कोई भी यह पहले से नहीं बता सकता कि अगली बार बादल कहां फटेंगे।
राजनीति
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का पूर्वोत्तर दौरा, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की करेंगे समीक्षा

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा 4 से 6 अगस्त तक पूर्वोत्तर भारत के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर हाल ही में आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लेंगे।
जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा 4 अगस्त को नई दिल्ली से असम के डिब्रूगढ़ पहुंचेंगे और रात वहीं प्रवास करेंगे। दौरे के दूसरे दिन, 5 अगस्त को वे असम के चराइदेव जिले का दौरा करेंगे, जो हाल की बाढ़ के दौरान सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है। यहां वे स्वास्थ्य सुविधाओं, राहत कार्यों और प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सेवाओं का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वे नागालैंड के मोन जिले के लिए रवाना होंगे, जहां विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रमों और बैठकों में भाग लेंगे।
नागालैंड के दौरे के बाद नड्डा उसी दिन डिब्रूगढ़ लौटेंगे। यहां वे असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, चिकित्सा ढांचे की बहाली, राहत शिविरों में स्वास्थ्य सुविधाओं तथा संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के उपायों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री स्थानीय कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे और रात डिब्रूगढ़ में ही ठहरेंगे।
दौरे के अंतिम दिन 6 अगस्त को केंद्रीय मंत्री अरुणाचल प्रदेश के केयी पैन्योर जिले के याज़ाली जाएंगे। वहां वे स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण करेंगे, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों से चर्चा करेंगे तथा विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस दौरान क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत बनाने और आपदा के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा मुख्य रूप से बाढ़ और भूस्खलन के बाद उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का आकलन करने पर केंद्रित है। हाल की प्राकृतिक आपदाओं से कई क्षेत्रों में चिकित्सा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जबकि जलजनित और वेक्टर जनित बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी की निगरानी प्रणाली, मेडिकल राहत कार्यों, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता की समीक्षा करेंगे।
हालिया आपदा के बाद बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने वाले सबसे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री के रूप में नड्डा का यह दौरा केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करने तथा प्रभावित लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दौरे के दौरान उनकी समीक्षा के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने तथा भविष्य में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की संभावना है।
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