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अजमेर 92 विवाद: मुस्लिम संगठन क्यों कर रहे हैं फिल्म पर बैन की मांग?
जुलाई 2023 में रिलीज होने वाली फिल्म अजमेर 92 विवादों में फंस गई है। कई मुस्लिम संगठनों ने कथित तौर पर फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है और इसे देश में नफरत फैलाने की साजिश करार दिया है। अजमेर 92 में जरीना वहाब, करण वर्मा, सुमित सिंह, सयाजी शिंदे और मनोज जोशी शामिल हैं। यह पुष्पेंद्र सिंह द्वारा निर्देशित है और उमेश कुमार तिवारी द्वारा निर्मित है। सच्ची घटनाओं पर आधारित, अजमेर 92 में 250 कॉलेज लड़कियों की कहानी बताने का दावा किया गया है, जो 1992 में राजस्थान के अजमेर में राजनेताओं और प्रभावशाली पुरुषों सहित अजमेर दरगाह के कार्यवाहकों द्वारा फंसाए गए, यौन शोषण और ब्लैकमेल किए गए थे। फिल्म है 14 जुलाई को रिलीज़ होने की संभावना है। फिल्म की घोषणा के तुरंत बाद, अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा कि फिल्म के माध्यम से एक विशेष धर्म को लक्षित किया जा रहा है। इस सप्ताह की शुरुआत में, उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि फिल्म देश के लोगों को ‘भ्रमित’ कर रही है और समाज में विभाजन पैदा कर रही है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अजमेर 92 ने दरगाह को गलत तरीके से पेश किया है और वहां दी जाने वाली शिक्षा को ‘गलत’ बताया है जैसा कि फिल्म में दिखाया गया है। कथित तौर पर, उन्होंने सरकार से फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का भी अनुरोध किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अजमेर दरगाह की अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती ने अजमेर 92 को ‘राजनीतिक स्टंट’ बताया. द हिंदू की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि फिल्म ‘समाज में दरार’ पैदा करेगी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म दरगाह अजमेर शरीफ को ‘बदनाम’ करने के लिए बनाई गई है और इसे तुरंत प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। यह ध्यान दिया जा सकता है कि हाल ही में, सुदीप्तो सेन और विपुल शाह की द केरल स्टोरी ने अपने ट्रेलर के रिलीज होने के बाद से ही विवादों के केंद्र में पाया और कई राजनीतिक नेताओं ने फिल्म पर देश में नफरत फैलाने के उद्देश्य से आरोप लगाया है। फिल्म ने देश को विभाजित भी किया है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे केरल की महिलाओं को लव जिहाद के जरिए जबरदस्ती बरगलाया गया, गर्भवती किया गया और आईएसआईएस में शामिल होने के लिए इराक और सीरिया ले जाया गया।
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मुंबई में डिलीवरी वाहन से 27 गैस सिलेंडर चोरी, जांच जारी

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मुंबई, 28 मार्च : ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध के बाद से अचानक गैस सिलेंडरों के लिए मारामारी शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट से जुड़ी चिंताओं के बीच कांदिवली पश्चिम के चारकोप इलाके में चोर डिलीवरी वाहन का ताला तोड़कर 27 सिलेंडर ले गए।
पुलिस ने शनिवार को बताया कि यह घटना 25 और 26 मार्च की दरमियानी रात को हुई। आरोपियों ने गैस वितरण के लिए इस्तेमाल होने वाले एक टैंपो को निशाना बनाया और 27 सिलेंडर लेकर फरार हो गए। इनमें पांच भरे हुए और 22 खाली सिलेंडर थे।
मुंबई पुलिस ने बताया कि अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ चारकोप पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है और दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
मलाड पश्चिम के जय जनता नगर के निवासी शिकायतकर्ता नंदकुमार रामराज सोनी (35) पिछले सात वर्षों से चारकोप में श्रीजी गैस सर्विस के साथ डिलीवरी एजेंट के रूप में काम कर रहा है।
वह टैंपो का इस्तेमाल करके घर-घर जाकर ग्राहकों को एलपीजी सिलेंडर पहुंचाता है। 25 मार्च को नंदकुमार ने अपनी रोजाना की डिलीवरी का काम पूरा किया और फिर रात करीब 11 बजे घर लौटने से पहले टैंपो को चारकोप इलाके में खड़ा कर दिया। वाहन में अगले दिन वितरण के लिए रखे गए सिलेंडर लदे हुए थे।
जब वह 26 मार्च को सुबह करीब 8 बजे उसी जगह पर वापस आए, तो उन्होंने पाया कि वाहन के साथ छेड़छाड़ की गई है। टैंपो की खिड़की का शीशा टूटा हुआ था और पीछे का ताला भी टूटा हुआ था। जांच करने पर नंदकुमार ने पाया कि सभी सिलेंडर चोरी हो चुके थे। चोरी हुए सिलेंडरों की कुल कीमत लगभग 15,500 रुपये आंकी गई है।
शुरुआत में नंदकुमार ने अपने सहकर्मियों से संपर्क करके यह पता लगाने की कोशिश की कि क्या सिलेंडरों को किसी और जगह ले जाया गया है, लेकिन कोई जानकारी न मिलने पर उन्होंने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों को पकड़ने के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। इलाके के सीसीटीवी फुटेज में कुछ संदिग्ध व्यक्ति वाहनों के साथ नजर आए हैं और उनकी पहचान करने के प्रयास जारी हैं।
जांचकर्ता चोरी हुए सिलेंडरों का पता लगाने के लिए स्क्रैप बाजारों और अवैध गैस व्यापार नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों से भी पूछताछ कर रहे हैं।
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मुंबई : विदेशी नागरिक से लूट के मामले में दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार, तीन की तलाश जारी

मुंबई, 28 मार्च : मुंबई के जूहू इलाके में दो पुलिस कांस्टेबल एक फॉरेक्स कंपनी के डिलीवरी एग्जीक्यूटिव का अपहरण कर उससे 10,000 अमेरिकी डॉलर लूटने के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं। जबकि लूटी गई रकम अभी तक बरामद नहीं हो सकी है।
मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में तीन अन्य आरोपी अब भी फरार है, उनकी तलाश की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संदीप शिंदे (33) और गजेंद्र राजपूत (40) के रूप में हुई है। दोनों क्रमशः बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स और जोगेश्वरी पुलिस स्टेशन में तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने अपनी वर्दी और पद का दुरुपयोग करते हुए इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार, घटना 25 मार्च की दोपहर करीब 2 बजे की है। पीड़ित बांद्रा स्थित एक फॉरेक्स कंपनी में डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत है। वह जूहू इलाके में विदेशी मुद्रा देने पहुंचा था। इसी दौरान जूहू सर्कल के पास आरोपियों ने उसे एक एर्टिगा कार में जबरन बैठाकर अगवा कर लिया। कार के अंदर आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी दी।
इसके बाद आरोपी पीड़ित को दहिसर ले गए, जहां उससे 10,000 डॉलर से भरा बैग छीन लिया गया। आरोप है कि इस दौरान पीड़ित की लगातार पिटाई भी की गई। हालांकि, पीड़ित ने शोर मचाया और आसपास के लोग आ गए। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस की पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंच गई।
लोगों को आता देख आरोपी भगाने लगे लेकिन पुलिस एक ही आरोपी की गिरफ्तार कर पाई जबकि दूसरा भीड़ का फायदा उठाकर भाग गया। फॉरेक्स कंपनी के डिलीवरी एग्जीक्यूटिव से लूट की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और दूसरे आरोपी गजेंद्र राजपूत को ठाणे स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ अपहरण, उगाही, डकैती और सरकारी कर्मचारी बनकर अपराध करने जैसे गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है।
फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और फरार तीन आरोपियों की तलाश में कई टीमें जुटी हुई हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन किया गया है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
अपराध
महाराष्ट्र विधानसभा के फर्जी एंट्री पास मामले में पुलिस ने 5 आरोपियों को किया गिरफ्तार

CRIME
मुंबई, 27 मार्च : महाराष्ट्र विधानसभा सत्र के दौरान फर्जी एंट्री पास बनाए जाने का मामला सामने आया है। मुंबई की मरीन ड्राइव पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मंत्रालय में काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं। मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र में विधानसभा सत्र के दौरान एंट्री के लिए नकली पास बनाने की बात सामने आई थी। इस मुद्दे को राज्य सरकार में मंत्री उदय सामंत ने भी उठाया था। मुंबई पुलिस ने बताया कि इस मामले में जांच के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से कुछ मंत्रालय में काम करने वाले कर्मचारी हैं।
मरीन ड्राइव पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों की पहचान केशव गुंजल (53), गणपत भाऊ जावले (50), नागेश शिवाजी पाटिल (42), मनोज आनंद मोरबले (40) और स्वप्निल रमेश तायडे (40) के रूप में हुई है।
पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी कि आरोपी दत्तात्रय गुंजाल को पास दिया गया था। उस पर कथित रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय सलाहकार लिखा था। विधानभवन पुलिस को इस पास पर शक हुआ और उसके बाद पूछताछ शुरू की गई। इसके बाद विधानभवन पुलिस की जांच में पूरा मामला खुलकर सामने आया। एक शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पूरे नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। इसलिए मामले में कुछ अन्य आरोपियों की तलाश भी की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि इसमें अभी तक कहीं भी पैसे के लेन-देन की बात सामने नहीं आई है, लेकिन मरीन ड्राइव पुलिस आगे की जांच कर रही है।
बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र 25 मार्च को संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 6 मार्च को सदन में बजट पेश किया।
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