राष्ट्रीय समाचार
एएआईबी द्वारा प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट जारी करने पर एयर इंडिया और बोइंग ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया
नई दिल्ली, 12 जुलाई। विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा अहमदाबाद में हुए दुखद एयर इंडिया विमान हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट जारी करने के कुछ ही घंटों बाद, एयर इंडिया और बोइंग दोनों ने बयान जारी कर जारी जाँच में सहयोग करने और पीड़ितों व उनके परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
एएआईबी के प्रारंभिक निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि एयर इंडिया बोइंग 787-8 विमान के इंजन ईंधन नियंत्रण स्विच उड़ान भरने के तीन सेकंड के भीतर ही ‘रन’ से ‘कटऑफ’ स्थिति में बदल गए, जिसके परिणामस्वरूप एक भयावह विफलता हुई।
12 जून को अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के मात्र 34 सेकंड बाद ही विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें यात्रियों, चालक दल और ज़मीन पर मौजूद लोगों सहित 275 लोगों की मौत हो गई। विमान एक भीड़भाड़ वाले इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और आग के गोले में तब्दील होने से पहले एक डॉक्टर्स हॉस्टल की इमारत से टकराया।
एयर इंडिया ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “हम AI171 दुर्घटना से प्रभावित परिवारों और लोगों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। हम इस क्षति पर शोक व्यक्त करते हैं और इस कठिन समय में सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
एयरलाइन ने AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट प्राप्त होने की पुष्टि की और कहा, “एयर इंडिया नियामकों सहित हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रही है। हम AAIB और अन्य अधिकारियों के साथ उनकी जाँच में पूर्ण सहयोग जारी रखेंगे।”
जाँच की प्रक्रिया जारी रहने के कारण, एयरलाइन ने दुर्घटना के विशिष्ट विवरणों पर टिप्पणी करने से परहेज किया और आगे की पूछताछ AAIB को निर्देशित की।
बोइंग ने भी शोक व्यक्त करते हुए एक बयान जारी किया।
कंपनी ने कहा, “एयर इंडिया की उड़ान 171 में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के प्रियजनों के साथ-साथ अहमदाबाद में ज़मीन पर प्रभावित सभी लोगों के प्रति हमारी संवेदनाएँ हैं। हम जाँच और अपने ग्राहकों का समर्थन जारी रखेंगे।”
इसमें आगे कहा गया है कि वह विस्तृत जानकारी के लिए AAIB से संपर्क करेगा, क्योंकि वह संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के अनुबंध 13 के पालन का हवाला देता है।
AAIB की 15-पृष्ठ की रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया की उड़ान 171 के इंजनों को ईंधन की आपूर्ति करने वाले दोनों ईंधन नियंत्रण स्विच एक के बाद एक अचानक बंद हो गए, जिससे दोनों इंजन बंद हो गए।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में एक पायलट को दूसरे से यह पूछते हुए सुना जा सकता है कि उसने ईंधन क्यों बंद कर दिया, जिस पर दूसरे पायलट ने जवाब दिया, “मैंने ऐसा नहीं किया।”
15-पृष्ठ की रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान के उड़ान भरने और क्रैश होने के बीच लगभग 30 सेकंड का समय लगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय, बोइंग 787-8 विमान और GE GEnx-1B इंजन के संचालकों के लिए कोई अनुशंसित कार्रवाई नहीं है।
प्रारंभिक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) ने 2018 में “ईंधन नियंत्रण स्विच लॉकिंग सुविधा के संभावित विघटन” के संबंध में एक विशेष उड़ान योग्यता सूचना बुलेटिन (SAIB) जारी किया था।
हालांकि, एयर इंडिया ने निरीक्षण नहीं किया क्योंकि SAIB केवल एक परामर्श था और अनिवार्य नहीं था।
रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान में मौसम संबंधी कोई समस्या नहीं थी, और विमान का टेक-ऑफ भार दी गई परिस्थितियों के लिए स्वीकार्य सीमा के भीतर था।
इस हवाई दुर्घटना में लगभग 270 लोग मारे गए – विमान में सवार 242 लोगों में से 241 और बाकी ज़मीन पर।
राजनीति
पश्चिम बंगाल में डीजीपी की नियुक्ति पर पेंच, यूपीएससी ने सुप्रीम कोर्ट जाने की दी सलाह

कोलकाता, 6 जनवरी: पश्चिम बंगाल में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर जटिलता बढ़ती नजर आ रही है। मौजूदा डीजीपी राजीव कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होने वाला है, लेकिन उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति पर अब तक स्थिति साफ नहीं हो पाई है।
इसी बीच, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से आवश्यक अनुमति लेने की सलाह दी है।
यूपीएससी के निदेशक नंद किशोर कुमार ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर कहा है कि राजीव कुमार के उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए। यूपीएससी ने राज्य सरकार द्वारा भेजी गई आईपीएस अधिकारियों की सूची भी लौटा दी है, जिनमें से किसी एक को नया डीजीपी बनाए जाने की सिफारिश की गई थी।
नियमों के अनुसार, किसी भी राज्य सरकार को डीजीपी पद के लिए राज्य में कार्यरत तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजनी होती है। इसके बाद यूपीएससी इन तीन नामों में से एक नाम को अंतिम रूप से मंजूरी देता है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मामले में यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पाई।
इस पूरे विवाद की जड़ दिसंबर 2023 में तत्कालीन डीजीपी मनोज मालवीय के सेवानिवृत्त होने से जुड़ी है। उस समय राज्य सरकार को उनके उत्तराधिकारी के लिए तीन आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजना था, लेकिन ऐसा करने के बजाय राज्य सरकार ने राजीव कुमार को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त कर दिया। राज्य सरकार ने बाद में उनके स्थायी उत्तराधिकारी के लिए आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा, जिसे यूपीएससी ने स्वीकार नहीं किया।
यूपीएससी के निदेशक ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2018 के आदेश का हवाला दिया है। इस आदेश के अनुसार, किसी भी राज्य सरकार को मौजूदा डीजीपी के सेवानिवृत्त होने से कम से कम तीन महीने पहले नए डीजीपी के लिए आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजना अनिवार्य है।
इस आधार पर यूपीएससी का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार को सितंबर 2023 में ही पैनल भेज देना चाहिए था, क्योंकि मनोज मालवीय दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे। पत्र में यह भी बताया गया है कि इस मामले में आयोग ने भारत के अटॉर्नी जनरल से भी सलाह ली थी। अटॉर्नी जनरल ने भी यही राय दी है कि राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेकर ही राजीव कुमार के उत्तराधिकारी की नियुक्ति करनी चाहिए।
राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली हाईकोर्ट में होगी दुष्यंत गौतम के मानहानि मामले की सुनवाई, 2 करोड़ रुपए का हर्जाना मांगा

नई दिल्ली, 6 जनवरी: दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम द्वारा दायर मानहानि मामले पर सुनवाई होने जा रही है। यह मामला उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा है, जिसमें सोशल मीडिया पर दुष्यंत गौतम का नाम उछाला गया था।
दुष्यंत गौतम का कहना है कि बिना किसी आधार के उनका नाम इस मामले से जोड़ा गया, जिससे उनकी छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा है। दुष्यंत गौतम की ओर से वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने दिल्ली हाईकोर्ट से मामले की जल्द सुनवाई की मांग की थी।
उनका तर्क था कि सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों के जरिए लगातार आपत्तिजनक और मानहानिकारक बातें फैलाई जा रही हैं, जिनका तुरंत संज्ञान लिया जाना जरूरी है। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
दुष्यंत गौतम ने दिल्ली हाईकोर्ट में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए कुछ दलों और नेताओं ने जानबूझकर सोशल मीडिया पर उनका नाम उछाला और उन्हें अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ने की कोशिश की। दुष्यंत गौतम का कहना है कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी उन्हें बदनाम किया गया।
अपनी याचिका में दुष्यंत गौतम ने कोर्ट से मांग की है कि उनके खिलाफ डाले गए सभी मानहानिकारक कंटेंट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाया जाए। इसके अलावा उन्होंने दो करोड़ का हर्जाना भी मांगा है। उनका कहना है कि इस तरह के झूठे आरोपों से न सिर्फ उनकी राजनीतिक साख को नुकसान पहुंचा है, बल्कि व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर भी उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा है। सितंबर 2022 में 19 साल की अंकिता भंडारी, जो एक होटल में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी, की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में बीजेपी के पूर्व नेता के बेटे पुलकित आर्य को मुख्य आरोपी बनाया गया था। निचली अदालत ने इस मामले में पुलकित आर्य और दो अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
राजनीति
विलासराव देशमुख के खिलाफ रवींद्र चव्हाण की टिप्पणी पर नवाब मलिक बोले- मर्यादा का पालन करें

मुंबई, 6 जनवरी: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार) के नेता नवाब मलिक ने विलासराव देशमुख के खिलाफ टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य इकाई के अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण को जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि दिवंगत आत्माओं को लेकर नैतिकता होती है और इसका सभी को पालन करना चाहिए।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कथित तौर पर विलासराव देशमुख की यादें लातूर शहर से मिटाने की बात की। इस पर नवाब मलिक ने कहा, “विलासराव देशमुख लातूर से कई बार चुनाव लड़े, जीते और महाराष्ट्र के कई बार मुख्यमंत्री रहे। वे केंद्र में मंत्री भी रहे। कहीं न कहीं दिवंगत के बारे में एक नैतिकता होती है कि कोई भी बात न करे। हमें लगता है कि लोगों को उस मर्यादा का पालन करना चाहिए। अगर कोई उनके खिलाफ या उनके नाम को मिटाने की बात करता है, तो हमें लगता है कि ये उचित नहीं है।”
मीडिया से बातचीत में नवाब मलिक ने महानगरपालिका चुनावों में गठबंधन को लेकर भी भाजपा को निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जिस तरह से बीजेपी नेता बयान दे रहे हैं, उन्हें पहले गठबंधन की मर्यादा का पालन करना चाहिए। हमें लगता है कि यह चुनाव एक लड़ाई जैसा है और प्यार और जंग में सब जायज है। हम चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगा देंगे।”
एनसीपी (अजित गुट) के नेता ने ‘आतंकवादी’ और ‘जिहादी’ शब्दों के लिए भाजपा के नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने कहा कि हम लीगल नोटिस भेजेंगे। अगर उन्होंने माफी नहीं मांगी, तो हम न्यायालय जाएंगे और उनको दंडित कराएंगे।
इसी बीच, उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर का वीडियो वायरल होने और उनके खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज होने पर कहा, “राहुल नार्वेकर महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष हैं। वे एक सर्वोच्च पद पर विराजमान हैं। उनकी जिम्मेदारी बनती है कि उस पद की गरिमा को बनाए रखें। व्यक्ति नहीं, बल्कि पद बड़ा होता है और पद की गरिमा अगर गिरने लगे तो हमें लगता है कि यह उचित नहीं है।”
महानगरपालिका चुनावों को लेकर उन्होंने कहा, “हमारे सभी उम्मीदवारों ने अपना कैंपेन शुरू कर दिया है। बड़े पैमाने पर ऑफिस खोले गए हैं। पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों से मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में नुक्कड़ सभाएं और जनसभाएं होंगी। हमारे सभी नेता कैंपेन में हिस्सा लेंगे। जिस तरह से उम्मीदवारों को चुना गया है और लोगों के साथ उनका जैसा जुड़ाव है, उसे देखते हुए हमें उम्मीद है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बड़ी संख्या में उम्मीदवार जीतेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में बहुत सारे दल धार्मिक भावनाओं को भड़काकर चुनाव लड़ना चाहते हैं। लेकिन ये हथकंडे पुराने हो गए हैं। अब लोग बंटवारे की, बांटने की राजनीति से पूरी तरह से ऊब चुके हैं। लोग चाहते हैं हम उन्हीं के साथ रहें जो लोगों को जोड़कर चलना चाहते हैं।
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