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मजबूत शुरुआत के बाद फिसला बाजार, सेंसेक्स, निफ्टी में लाल निशान के साथ कारोबार
विदेशी बाजार से मिले सकारात्मक संकेतों से मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत तेजी के रुझानों के साथ हुआ, लेकिन जल्द ही बिकवाली के दबाव में गिरावट आ गई और सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लाल निशान के साथ कारोबार चल रहा था। सेंसेक्स सुबह 9.24 बजे पिछले सत्र से 22.51 अंकों यानी 0.07 फीसदी की कमजोरी के साथ 34348.07 पर जबकि निफ्टी 7.70 अंकों यानी 0.08 फीसदी की नरमी के साथ 10159.75 पर बना हुआ था।
बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र की क्लोजिंग के मुकाबले 150.21 अंकों की बढ़त के साथ 34520.79 पर खुला और 34527.20 तक उछला लेकिन जल्द ही बिकवाली के दबाव में फिसलकर 34319.96 पर आ गया।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी भी पिछले सत्र के मुकाबले 13.70 अंकों की तेजी के साथ 10181.15 पर खुला और 10214.80 तक चढ़ा लेकिन बाद में फिसलकर 10150.95 पर आ गया।
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मार्च में इक्विटी फंड में निवेश 11 प्रतिशत बढ़ा; मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रा और डिफेंस सेक्टर बने निवेशकों की पहली पसंद

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में इक्विटी फंड्स में निवेश (नेट फ्लो) बढ़कर 46,501 करोड़ रुपए हो गया, जो फरवरी के 41,934 करोड़ रुपए के मुकाबले करीब 11 प्रतिशत ज्यादा है।
वैलम कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में कुल नेट एसेट फ्लो में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहां निवेशकों ने मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स से पैसा निकालकर इक्विटी में निवेश बढ़ाया।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय शेयर बाजार में आई तेज रिकवरी के कारण 59,629 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित हुआ। एक महीने में स्मॉल-कैप शेयरों में 8.1 प्रतिशत, मिड-कैप में 6.9 प्रतिशत और लार्ज-कैप में 4.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, साल की शुरुआत से अब तक सभी कैटेगरी में रिटर्न अभी भी नकारात्मक बना हुआ है।
वहीं, मनी मार्केट फंड्स में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। फरवरी में जहां 42,800 करोड़ रुपए का इनफ्लो था, वह मार्च में घटकर -1,94,775 करोड़ रुपए हो गया। इसी तरह फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी आउटफ्लो बढ़कर -76,354 करोड़ रुपए हो गया, जो फरवरी में -16,919 करोड़ रुपए था। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक ब्याज दरों को लेकर सतर्क हैं या पैसा निकाल रहे हैं।
कमोडिटी फंड्स में निवेश सकारात्मक तो रहा, लेकिन इसमें तेजी कम देखने को मिली। इससे संकेत मिलता है कि सोना-चांदी जैसे कीमती धातुओं में निवेश की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है।
कुल मिलाकर, नेट एसेट फ्लो फरवरी के 73,589 करोड़ रुपए से बदलकर मार्च में -2,20,797 करोड़ रुपए हो गया, जिसका मुख्य कारण मनी मार्केट से बड़े पैमाने पर पैसा निकलना रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर डॉलर की कमजोरी और अमेरिका से निवेश का रुख बदलना एक बड़ा ट्रेंड माना जा रहा है। थीमैटिक ईटीएफ में सेमीकंडक्टर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
भारत में 2026 के दौरान मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस सेक्टर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं, जबकि पहले पीएसयू और कंजंप्शन सेक्टर ज्यादा पसंद किए जाते थे।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि निवेशक अब ज्यादा सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। मार्च में लार्ज-कैप फंड्स में 28,558 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जो फरवरी से 19,242 करोड़ रुपए ज्यादा है। फ्लेक्सी-कैप और मिड-कैप में भी लगातार निवेश जारी रहा। वहीं, आर्बिट्राज फंड्स से 22,182 करोड़ रुपए की निकासी हुई और डायनेमिक स्ट्रैटेजी फंडों से भी पूंजी का नुकसान हुआ है।
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पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई 2 प्रतिशत तक की गिरावट

पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम होने की उम्मीद के बीच शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के खत्म होने की उम्मीदों के कारण आई है।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 97.99 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जो शुरुआती कारोबार में दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया और इसमें 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई।
वहीं, अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी करीब 2 प्रतिशत गिरकर 92.91 डॉलर के इंट्रा-डे लो तक पहुंच गया।
हालांकि, इससे पहले के कारोबारी सत्र में ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट करीब 5 प्रतिशत की तेजी के साथ 99.39 डॉलर पर बंद हुआ था। इसी तरह, अमेरिकी डब्ल्यूटीआई भी 2 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 93.32 डॉलर पर बंद हुआ था।
घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली, जहां यह 2.6 प्रतिशत तक गिरकर 8,625 रुपए तक आ गया।
ट्रेडर्स को उस समय राहत मिली जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन के युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान ने 20 साल से ज्यादा समय तक परमाणु हथियार नहीं रखने का प्रस्ताव दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि हिजबुल्लाह इस अहम समय में समझदारी दिखाएगा। अगर ऐसा होता है तो यह उनके लिए बड़ा मौका होगा। अब और हिंसा नहीं, हमें आखिरकार शांति चाहिए।”
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “हम देखेंगे कि आगे क्या होता है, लेकिन मुझे लगता है कि हम ईरान के साथ समझौते के काफी करीब हैं।”
शेयर बाजार की बात करें तो वैश्विक बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। वहीं घरेलू बाजार में बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी सपाट खुले। हालांकि बाद में इनमें थोड़ी तेजी देखने को मिली।
एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई, जहां प्रमुख इंडेक्स 1 प्रतिशत तक नीचे रहे।
वहीं, अमेरिका में वॉल स्ट्रीट हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जहां नैस्डैक 0.36 प्रतिशत और एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।
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सोने की चमक बढ़ी, चांदी का दाम 2.55 लाख रुपए हुआ

सोने और चांदी की कीमत में गुरुवार को उछाल देखने को मिला, जिससे दोनों की कीमती धातुओं की कीमत क्रमश: करीब 1.55 रुपए प्रति 10 ग्राम और 2.55 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 10:45 पर सोने का कॉन्ट्रैक्ट (5 जून 2026) 1,016 रुपए या 0.66 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,54,964 रुपए पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,54,501 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,54,990 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।
चांदी का कॉन्ट्रैक्ट (5 मई 2026) 3,258 रुपए या 1.29 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,55,000 रुपए पर था। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,54,074 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,55,735 रुपए का उच्चतम स्तर बनाया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। सोना 0.70 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,856 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 80 डॉलर प्रति औंस पर थी।
जानकारों के मुताबिक, अमेरिका के उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) के उम्मीद से कमजोर आंकड़ों के बाद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट होने से सोने की कीमतों में तेजी आई। इससे मुद्रास्फीति संबंधी तात्कालिक चिंताएं कम हुईं और बाजार का समग्र माहौल बेहतर हुआ। आंकड़ों से पता चला कि पीपीआई में मामूली वृद्धि हुई, जो उम्मीदों से कम रही। इससे संकेत मिलता है कि मुद्रास्फीति का दबाव मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान संघर्ष जैसे बाहरी झटकों से प्रेरित है।
उन्होंने आगे बताया कि इससे डॉलर की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग कम हुई और सोने की कीमतों में वृद्धि हुई, क्योंकि डॉलर के कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए सोना अधिक आकर्षक हो जाता है।
दुनिया की छह बड़ी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 97.80 पर पहुंच गया है, जो कि कुछ दिनों पहले 99 पर था।
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