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महाराष्ट्र

कांग्रेस के बाद एनसीपी भी करेगी शहरों के नाम बदलने का विरोध: नवाब मलिक

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nawab malik

महाविकास अघाड़ी सरकार के कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता नवाब मलिक ने नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से खास बातचीत के दौरान यह बताया कि शहरों के नाम बदलने का प्रस्ताव हमारे एजेंडे में नहीं है। यह प्रस्ताव हमने 20 साल पहले ही नामंजूर कर दिया था। नाम बदलने से शहरों का विकास होता है ऐसा हमको नहीं लगता है।

कांग्रेस के बाद एनसीपी के भी इस जंग में कूदने के बाद से शिवसेना की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नवाब मलिक ने कहा कि इस तरह का कोई भी प्रस्ताव तीनों दलों के एजेंडे में नहीं है। राजनीतिक दल भले ही कुछ भी बयानबाजी करते रहे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होगा।

बता दें कि औरंगाबाद का नाम ‘संभाजी नगर’ किए जाने को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। सरकार के घटक दल शिवसेना और कांग्रेस के बीच जुबानी तलवारें खिंच गई हैं। कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा है कि अगर नाम बदला तो सरकार खतरे में पड़ जाएगी।

नवाब मलिक ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेता इस विवाद को हवा दे रहे हैं, ताकि तीनों दलों के बीच मे कोई मनमुटाव हो जाए। लेकिन उन्हें यह बात खुद भी समझनी चाहिए कि जब 5 सालों तक उन्होंने राज्य में सरकार चलाई तब इस तरह का प्रस्ताव उन्होंने क्यों नहीं लाया और क्यों नाम नहीं बदला। यह जवाब उन्हें भी जनता को देना पड़ेगा। हमने तो यह प्रस्ताव 15-20 साल पहले ही रद्द कर दिया था। इस तरह का कोई भी प्रस्ताव आगे भी हमारे एजेंडे में नहीं होगा।

नवाब मलिक ने कहा कि शहरों का सिर्फ नाम बदल देने से कोई फायदा नहीं होगा, जो लोग ऐसा सोचते हैं वह गलत सोचते हैं शहरों का नाम बदलने की राजनीति में हमारा यकीन नहीं है इससे बेहतर होगा कि आप नए शहरों को बसाइए और उनका जो भी नाम रखना चाहते हैं रखिए। आज के 15 साल पहले जो कांग्रेस और एनसीपी की सरकार थी तब हमने यह तय किया था कि नाम बदलने की राजनीति नहीं होगी आज भी हम इस बात पर कायम हैं।

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महाराष्ट्र

बैंक ऑफ महाराष्ट्र फ्रॉड केस : पूर्व मैनेजर राम भरोस मीणा को 7 साल की कठोर कैद

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जयपुर की सीबीआई अदालत ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 3.61 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी के मामले में तत्कालीन ब्रांच मैनेजर राम भरोस मीणा को दोषी ठहराते हुए सात साल की कठोर कैद (आरआई) की सजा सुनाई है।

अदालत ने उन पर 2,85,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

इसी मामले में एक निजी व्यक्ति माखन लाल मीणा को भी दोषी ठहराया गया है और उसे तीन साल की कठोर कैद तथा 25,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने यह मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र के जोनल ऑफिस, जयपुर की ओर से 3 जून 2016 को दी गई लिखित शिकायत के आधार पर 9 नवंबर 2016 को दर्ज किया था।

शिकायत में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर राम भरोस मीणा पर अपने पद का दुरुपयोग करने और धोखाधड़ी एवं जालसाजी के जरिए बैंक को वित्तीय नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे।

आरोप के मुताबिक, 15 जनवरी 2015 से 6 मई 2015 के बीच उन्होंने बिना वैध लोन आवेदन, जरूरी दस्तावेज और पर्याप्त सिक्योरिटी के 17 अकाउंट्स में अवैध तरीके से ऋण मंजूर किए।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मुताबिक, इन अनियमितताओं के चलते बैंक को करीब 3.61 करोड़ रुपए का गलत नुकसान हुआ। जांच एजेंसी ने मामले की जांच पूरी करने के बाद राम भरोस मीणा और माखन लाल मीणा के खिलाफ 9 जुलाई 2020 को चार्जशीट दाखिल की।

चार्जशीट दाखिल करने के बाद अदालत ने 1 दिसंबर 2021 को दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए और मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष जांच एजेंसी की ओर से आरोपों से संबंधित साक्ष्य और दस्तावेज पेश किए गए। सुनवाई पूरी होने के बाद सीबीआई अदालत, जयपुर ने दोनों आरोपियों को मामले में दोषी ठहराया।

अदालत ने राम भरोस मीणा को सात साल की कठोर कैद के साथ 2.85 लाख रुपए का जुर्माना और माखन लाल मीणा को तीन साल की कठोर कैद के साथ 25 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।

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महाराष्ट्र

किसानों की बढ़ती मुश्किलों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र सरकार पर साधा निशाना

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भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों से मानसून की वापसी की आधिकारिक घोषणा के बाद सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। शिवसेना (यूबीटी) की ओर से चेतावनी दी गई कि महाराष्ट्र को गंभीर सूखे का सामना करना पड़ सकता है।

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में ठाकरे गुट की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि बिना बारिश के मॉनसून के चले जाने से राज्यभर के किसानों की आखिरी उम्मीदें भी टूट गई हैं और महाराष्ट्र का आधे से ज्यादा हिस्सा बुरी तरह सूख गया है।

संपादकीय के अनुसार, इस सीजन में महाराष्ट्र के 36 में से 20 से ज्यादा जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई। मानसून के देर से आने के कारण शुरुआती बुआई में रुकावट आई। लगभग दो महीने तक लगातार बारिश नहीं होने से बुआई की कोशिशें भी बेकार गईं जिससे मराठवाड़ा, विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र में फसलें बर्बाद हो गईं।

‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया, “राज्य में सबसे ज्यादा कमी सोलापुर में 58 प्रतिशत दर्ज की गई। बीड में बारिश की कमी 51 प्रतिशत रही। हिंगोली में 49 प्रतिशत, जालना में 48 प्रतिशत और अहिल्यानगर व धाराशिव दोनों में 46 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यहां तक कि तटीय सिंधुदुर्ग, जो आमतौर पर ज्यादा बारिश के लिए जाना जाता है, वहां भी 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।”

राज्य प्रशासन पर निशाना साधते हुए ठाकरे गुट की ओर से आरोप लगाया गया कि सूखे से प्रभावित सोलापुर में स्थानीय अधिकारियों ने गार्डियन मिनिस्टर को सिंचाई वाले हरे-भरे खेत का मुआयना कराया जबकि दूसरी जगहों पर फसलें सूख चुकी थीं। इसे उन्होंने पीड़ित किसानों का क्रूर मजाक बताया।

असामान्य मौसम के कारण यह संकट और भी गंभीर गया है। आम तौर पर अक्टूबर में होने वाली गर्मी अगस्त के मध्य में ही शुरू हो गई और राज्य भर में तापमान 36 डिग्री तक पहुंच गया। संपादकीय में कहा गया है कि इस लगातार गर्मी ने हरे-भरे चरागाहों, कुओं और स्थानीय जल स्रोतों को सुखा दिया है, जिससे पीने के पानी और मवेशियों के चारे की भारी कमी हो गई है।

संपादकीय में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारी आर्थिक तंगी के कारण विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे इलाकों में किसानों की आत्महत्या का नया दौर शुरू हो चुका है। राजनीतिक नेताओं पर सीधा निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि सिर्फ सूखा घोषित कर देने से सरकार अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाती।

संपादकीय में कहा गया है कि मॉनसून के लौटने के साथ ही, वे मंत्री और नेता भी सचिवालय लौट गए हैं जो पहले फोटो खिंचवाने के लिए खेतों की मेड़ों का दौरा करते थे और किसान अब भी तुरंत राहत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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महाराष्ट्र

मुंबई के शिवाजी पार्क में बिना इजाजत जमा होने पर सीजेपी समर्थकों के खिलाफ केस दर्ज

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मुंबई के शिवाजी पार्क में बिना इजाजत के इकट्ठा होने, नारे लगाने और घोषणाएं करने के आरोप में शनिवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

मुंबई पुलिस के अनुसार, लगभग 400 से 500 अज्ञात समर्थक और प्रदर्शनकारी, जिनमें सीजेपी सदस्य अजिंक्य शिंदे, प्रणय अहीरे, आशुतोष रंका, अभिजीत दिपके, सौरव दास, आफरीन नवाज, सौम्या कोर्डे, अंकित भारद्वाज, विजय मलंगी और योगेश इंगले शामिल थे, ने दादर वेस्ट में मीनाताई ठाकरे मेमोरियल के सामने शिवाजी पार्क ग्राउंड के गेट नंबर 6 पर बिना अनुमति के जमा हुए।

बताया जा रहा है कि यह जमावड़ा 2 अक्टूबर की शाम 4 बजे से 7 बजे के बीच शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में हुआ।

पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारी एक सार्वजनिक सड़क पर जमा हुए और नारे लगाए, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई। बिना जरूरी अनुमति के लाउडस्पीकर भी लगाए गए थे।

शुक्रवार को सीजेपी ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए अपना ‘जेल भरो’ विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।

भारी पुलिस तैनाती और शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन करने की औपचारिक अनुमति न मिलने के बावजूद हजारों नागरिक और समर्थक कार्यक्रम स्थल पर जमा हुए। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निशाना बनाते हुए नारे लगाए गए।

आयोजकों द्वारा अपने आंदोलन का ‘सीजन 2’ बताए गए इस विरोध प्रदर्शन को मुंबई पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे, जबकि दादर इलाके के कई हिस्सों में बैरिकेड्स लगाए गए थे।

इस प्रदर्शन को सार्वजनिक हस्तियों, बुद्धिजीवियों और बॉलीवुड हस्तियों का भी समर्थन मिला, जिन्होंने कार्यक्रम में भाग लिया और मतदान के अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थानों के महत्व के बारे में बात की।

मौजूद लोगों में अभिनेता शबाना आजमी और नसीरुद्दीन शाह के साथ-साथ संगीतकार विशाल ददलानी भी शामिल थे। इस सभा में शामिल लोगों ने वोटिंग के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया।

अभिनेता प्रकाश राज ने भी एक रिकॉर्डेड वीडियो मैसेज के जरिए अपना समर्थन दिया और नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की अपील की।

सभा को संबोधित करते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की।

दिपके ने औपचारिक रूप से ‘जेल भरो’ आंदोलन का आह्वान किया और कहा कि वोटिंग के अधिकार की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होना एक मौलिक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने के खिलाफ पुलिस की चेतावनियों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को चुनौती भी दी।

दिपके ने कहा, “मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आपने हमें सिर्फ तीन दिन के लिए जेल में डालने की बात कही थी। अगर आपने तीन महीने कहा होता तो पूरा मुंबई शहर पूरी तरह ठप हो जाता।”

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