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Tuesday,01-September-2026
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राजनीति

सस्ती पढ़ाई, वैश्विक मान्यता और यूक्रेन का इन्फ्रास्ट्रक्चर भारतीय छात्रों को करता है आकर्षित

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भारत के हर हजारों छात्र हर साल मेडिकल की पढ़ाई के लिए युक्रेन जाते हैं। इसका एक बड़ा कारण छात्रों को यूक्रेन में मिलने वाली सुविधाएं और सस्ती मेडिकल पढ़ाई और विश्व भर में यूक्रेन के विश्वविद्यालयों को दी जाने वाली मान्यता है। भारत के मुकाबले यूक्रेन के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस के अति महत्वपूर्ण पढ़ाई का खर्च आधा है। इसके साथ ही यूक्रेन में एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया भी भारत के मुकाबले काफी सरल है। इन्हीं सब सुविधाओं को देखते हुए भारत के हजारों छात्र हर साल एमबीबीएस और बीडीएस जैसे मेडिकल कोर्स करने के लिए यूक्रेन का रुख करते हैं।

यूक्रेन में फिलहाल 14 बड़े मेडिकल कॉलेज हैं जिनमें 18000 से अधिक भारतीय छात्र एमबीबीएस और बीडीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से करीब 1000 छात्र स्वदेश भारत लौट चुके हैं जबकि अन्य छात्रों को वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है। देश की प्रसिद्ध मेडिकल कोचिंग करवाने वाली संस्थाओं में से एक के निदेशक संदीप धमीजा के बताते हैं कि यूक्रेन में मेडिकल के लिए जितनी सीटें आरक्षित हैं, उपलब्ध हैं उसके मुकाबले वहां स्थानीय स्तर पर काफी कम उम्मीदवार आवेदन करते हैं। यही कारण है कि मेडिकल सीट विदेशी छात्रों के लिए काफी सरलता से उपलब्ध हो जाती है तो इसका लाभ भारतीय छात्रों को भी मिलता है।

यूक्रेन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुके शिरीष मेहता का कहना है कि यूक्रेन के मेडिकल कॉलेजों में जहां इन्फ्राट्रक्च र भारत के मुकाबले कहीं बेहतर है। वही यहां मेडिकल पढ़ाई का खर्च भारत के निजी कॉलेजों की तुलना में आधा भी नहीं है।

यदि भारत के सरकारी कॉलेजों में मेडिकल कॉलेजों की बात की जाए तो यहां एमबीबीएस जैसे पाठ्यक्रम हो का सालाना खर्च प्रत्येक छात्र के लिए करीब 3 लाख रुपये के आसपास रहता है। वहीं भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में यह खर्च 20 लाख रुपए के आसपास है। भारत के ही कई मेडिकल कॉलेजों में तो एमबीबीएस का खर्च

30 लाख सालाना तक भी पहुंच जाता है।

भारत के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जहां एमबीबीएस के 5 वर्ष की पढ़ाई का खर्च 15 से 20 लाख रुपए पर आता है। वहीं निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रत्येक छात्र को एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के लिए 80 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च करनी पड़ती है। कई भारतीय प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में यह खर्च 1 करोड़ से भी अधिक है।

दूसरी ओर यदि यूक्रेन के मेडिकल कॉलेजों की बात करें तो यहां एमबीबीएस कर रहे छात्र को प्रति वर्ष लगभग 5 लाख का खर्च वहन करना पड़ता है और 5 वर्षों के एमबीबीएस पाठ्यक्रम में भारतीय छात्रों को 25 लाख रुपए की राशि खर्च करनी पड़ती है, जो कि भारतीय मेडिकल कॉलेजों खासतौर प्राइवेट कॉलेजों के मुकाबले काफी कम है।

भारतीय शिक्षाविद सीएस कांडपाल का कहना है कि यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई लोकप्रिय होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि यहां छात्रों को इन पाठ्यक्रमों में शामिल होने के लिए अलग से कोई परीक्षा नहीं देनी पड़ती, जबकि भारत में नीट परीक्षाएं आयोजित की जाती है।

इनमें हर साल करीब लाखों छात्र नीट परीक्षा में शामिल होते हैं जिनमें से लगभग 40 हजार छात्रों को ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिल पाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में नीट क्वालीफाई कर चुके भारतीय छात्र यूक्रेन का रुख करते हैं।

यूक्रेन में भारत से नीट क्वालीफाई कर चुके छात्रों को दाखिला मिल जाता है और यहां नीट की रैंकिंग कोई महत्व नहीं रखती है। यहां साल में दो बार सितंबर और जनवरी में दाखिला प्रक्रिया आयोजित की जाती है। यूक्रेन से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों को यहां पढ़ाई पूरी करने के उपरांत एक और महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है, जिसके तहत प्रैक्टिस करने के लिए एफएमसीजी परीक्षा पास करनी होती है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

अमेरिकी राजदूत गोर किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जापारोव से मिले, साझेदारी बढ़ाने पर जताई प्रतिबद्धता

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अमेरिका ने किर्गिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई है। अमेरिकी पक्ष ने सोमवार को बिश्केक में किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के कई नए अवसर मौजूद हैं।

अमेरिका के नई दिल्ली में राजदूत और दक्षिण और मध्य एशिया में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रतिनिधि सर्जियो गोर ने कहा, “बिश्केक में किर्गिज गणराज्य के राष्ट्रपति झापारोव से मुलाकात की। हमारे पास दोनों देशों के लिए मिलकर काम करने के कई बेहतरीन अवसर हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका अगले महीने राष्ट्रपति जापारोव के स्वागत के लिए उत्सुक है। इस दौरान दोनों देश अपनी बढ़ती साझेदारी को और आगे ले जाने की दिशा में बातचीत करेंगे।

दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय सहयोग, निवेश, डिजिटल तकनीक और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई। जापारोव आने वाले समय में अमेरिका की यात्रा पर भी जाने वाले हैं।

इस मुलाकात को मध्य एशिया में अमेरिका की बढ़ती सक्रियता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका और किर्गिस्तान के बीच व्यापार, निवेश, सुरक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

अमेरिका शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का सदस्य नहीं है। गोर के दौरे को आधिकारिक रूप से किर्गिजस्तान की स्वतंत्रता दिवस की 35वीं वर्षगांठ और विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन से जोड़ा गया है।

पिछले साल तियानजिन में हुए एससीओ सम्मेलन के दौरान मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की एक साथ तस्वीरें अमेरिका में चर्चा का कारण बनी थीं। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति और रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव के बीच पीएम मोदी की चीन यात्रा से वॉशिंगटन काफी असहज हो गया था।

विपक्ष और आलोचकों ने ट्रंप पर आरोप लगाया था कि उनकी नीतियों की वजह से भारत अमेरिका से दूर जा रहा है। ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर कहा था कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के पाले में खो दिया है।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से पहले उद्योग जगत से चर्चा करेगा वाणिज्य मंत्रालय, निर्यातकों की चिंताओं पर होगा मंथन

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर जारी बातचीत के बीच वाणिज्य मंत्रालय मंगलवार को उद्योग संगठनों और निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेगा, जिसका उद्देश्य भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना और विभिन्न क्षेत्रों की चिंताओं एवं सुझावों को समझना है।

बैठक की अध्यक्षता वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे, जो भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए भारत के मुख्य वार्ताकार भी हैं। बैठक में हाल के व्यापारिक रुझानों, विभिन्न क्षेत्रों के निर्यात प्रदर्शन और अमेरिकी बाजार से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

बैठक में फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग, वस्त्र, कृषि, रसायन, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, हस्तशिल्प और प्लास्टिक उद्योग के प्रतिनिधियों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। इसके अलावा सीआईआई, फिक्की, एसोचैम और फियो जैसे प्रमुख उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी विचार-विमर्श में शामिल होंगे।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं। वह 30 सितंबर से मिल्वौकी में आयोजित होने वाली जी-20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ द्विपक्षीय चर्चा भी करेंगे।

हाल ही में पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का पहला चरण तभी लागू होगा जब अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर या कम से कम तुलनात्मक लाभ प्राप्त हो। इसी कारण मंत्रालय उद्योग जगत से सीधे फीडबैक लेकर यह समझना चाहता है कि मौजूदा शुल्क व्यवस्था और व्यापारिक बाधाओं का विभिन्न क्षेत्रों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने हाल ही में कहा था कि भारत और अमेरिका दोनों फरवरी में तय किए गए ढांचे के आधार पर व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर नियमित संपर्क बना हुआ है और वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

हालांकि, फरवरी में पहले चरण की प्रगति के बाद अमेरिका में कुछ नए घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनसे अनिश्चितता बढ़ी है। वर्तमान में भारतीय निर्यात पर अमेरिका में सेक्शन 301 जांच के तहत लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क का असर पड़ रहा है। यह जांच कथित जबरन श्रम संबंधी चिंताओं से जुड़ी हुई है।

इसके अलावा, अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में एक प्रतिबंध संबंधी विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों के निर्यात पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत उन देशों में शामिल है जो बड़ी मात्रा में रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहे हैं। जुलाई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही थी।

हालांकि इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए वाणिज्य सचिव ने कहा कि यह अमेरिका की आंतरिक विधायी प्रक्रिया का हिस्सा है और भारत फिलहाल व्यापार समझौते पर रचनात्मक बातचीत जारी रखे हुए है।

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राजनीति

राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर पर भड़की मध्य प्रदेश कांग्रेस कांग्रेस, कहा- कार्रवाई शुद्धिकरण कराने वालों पर होनी चाहिए

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मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा पर दलितों का अपमान करने और फिर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को निशाना बनाने का आरोप लगाया। यह प्रतिक्रिया उस समय आई, जब हल्द्वानी में हुए “शुद्धिकरण” विवाद पर की गई टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

मध्य प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने कहा कि गांधी के खिलाफ मामला दर्ज करने के बजाय उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी जिन्होंने उस जगह पर शुद्धिकरण अनुष्ठान किया था, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जनसभा की थी।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि भाजपा ने पहले अनुष्ठान करके दलितों का अपमान किया और फिर जब गांधी ने यह मुद्दा उठाया तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना दिखाती है कि भाजपा न केवल दलितों का अपमान करती है, बल्कि उनके अधिकारों के लिए लड़ने वालों को परेशान भी करती है। कमलनाथ ने कहा, “कांग्रेस पार्टी मजबूती से मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ खड़ी है। देशभर का दलित समुदाय इस अन्याय और अपमान के लिए भाजपा को सबक सिखाएगा।”

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी भाजपा पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि उसने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को बचाया और इसके बजाय गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया। पटवारी ने कहा, “संकीर्ण सोच वाली भाजपा ने पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली वाली जगह का ‘शुद्धिकरण’ करवाया। जब जन-नायक राहुल गांधी ने छुआछूत का यह गंभीर मुद्दा उठाया तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई।”

उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना भाजपा-आरएसएस की “दलित-विरोधी मानसिकता” को दर्शाती है और दावा किया कि पार्टी दलितों और वंचित लोगों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।

ये प्रतिक्रियाएं उत्तराखंड पुलिस द्वारा हल्द्वानी में वाल्मीकि समुदाय के एक सदस्य की शिकायत पर गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के एक दिन बाद आईं।

जानकारी के अनुसार, यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की उन धाराओं के तहत दर्ज किया गया जो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए जानबूझकर किए गए कार्यों से संबंधित हैं। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम भी लागू किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि गांधी ने खड़गे के कार्यक्रम वाली जगह पर हुए धार्मिक अनुष्ठान को जातिवादी रंग दिया।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब खड़गे की जनसभा के तीन दिन बाद 11 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक “शुद्धि यज्ञ” किया गया।

राज्य कांग्रेस के अनुसार, राहुल गांधी 12 सितंबर को इंदौर का दौरा करेंगे और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होकर उसे संबोधित करेंगे।

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