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Monday,31-August-2026
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अबू आज़मी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ईद मिलादुन्नबी के लिए 8 सितंबर को छुट्टी घोषित करने का आग्रह किया

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ABU ASIM AZMI

मुंबई: समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ईद मिलादुन्नबी के लिए 8 सितंबर को आधिकारिक अवकाश घोषित करने की अपील की है, क्योंकि मुस्लिम समुदाय ने अपना मुख्य जुलूस उस दिन निकालने का फैसला किया है।

परंपरागत रूप से, ईद मिलाद-उन-नबी, जो पैगंबर मुहम्मद की जयंती के रूप में मनाई जाती है, इस वर्ष 5 सितंबर को मनाई गई, जिसके एक दिन बाद 6 सितंबर को जुलूस निकाले गए। हालांकि, चूंकि गणेश विसर्जन भी उसी दिन निर्धारित है, इसलिए अखिल भारतीय खिलाफत समिति, जो बायकुला में मुख्य जुलूस का आयोजन करती है, ने रसद संबंधी टकराव से बचने और दोनों त्योहारों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए कार्यक्रम को 8 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया।

एक्स पर एक पोस्ट में, आज़मी ने बताया कि जुलूस के कार्यक्रम में फेरबदल का फैसला सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के हित में लिया गया है। आज़मी ने लिखा, “इस साल गणेश विसर्जन 6 सितंबर को है, जो ईद मिलाद के जुलूस के साथ ही है। हिंदू-मुस्लिम एकता को मज़बूत करने और शांति सुनिश्चित करने के लिए, मुस्लिम समुदाय ने 8 सितंबर को जुलूस मनाने का फैसला किया है। हालाँकि, सरकार ने अभी तक इसे सार्वजनिक अवकाश घोषित नहीं किया है। मैं मुख्यमंत्री से अनुरोध करता हूँ कि वे एक आधिकारिक सरकारी आदेश जारी करें और मुस्लिम समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए 8 सितंबर को अवकाश घोषित करें।”

इस साल का जश्न और भी अहम है क्योंकि यह पैगंबर मुहम्मद साहब की 1,500वीं जयंती है। अखिल भारतीय खिलाफत समिति के अध्यक्ष सरफराज आरज़ू ने कहा कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया है। उन्होंने कहा, “लगातार तीसरे साल ईद-ए-मिलाद और गणेश विसर्जन एक ही दिन पड़ रहे हैं। पिछले सालों की तरह, हमने असुविधा से बचने के लिए रैली स्थगित करने का फैसला किया है। हमें उम्मीद है कि सरकार इसे समझेगी और 8 सितंबर को छुट्टी घोषित करेगी।”

आज़मी के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने भी मुख्यमंत्री फडणवीस को पत्र लिखकर इस दिन सरकारी छुट्टी की मांग की है। इसी तरह का अनुरोध उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार को भी भेजा गया है।

राष्ट्रीय समाचार

दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर बोले अरविंद केजरीवाल- 1.5 करोड़ में से 47 लाख मतदाता गायब

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दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि दिल्ली की करीब 1.5 करोड़ की आबादी में से लगभग 47 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं हैं।

इसे लेकर अरविंद केजरीवाल ने चुनाव प्रक्रिया और एसआईआर पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में एसआईआर के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हो चुकी है और इसमें करीब 47 लाख लोगों के नाम नहीं हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भारत सरकार को देश की आबादी को लेकर बेवजह परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि चुनाव आयोग एसआईआर के जरिए देश की आबादी को ही 140 करोड़ से घटाकर 50 करोड़ कर देगा।

उन्होंने मतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को गंभीर मुद्दा बताते हुए इस पर सवाल खड़े किए।

वहीं, ‘आप’ नेता सौरभ भारद्वाज ने भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और भारत का चुनाव आयोग एक ‘लतीफा’ बनकर रह गया है। भारद्वाज ने सवाल उठाया कि जिस दिल्ली की जनता ने भाजपा को लगातार तीन बार सात-सात लोकसभा सीटों पर जीत दिलाई और करीब डेढ़ साल पहले दिल्ली में भाजपा की सरकार बनाने में भूमिका निभाई, आज उसी दिल्ली की जनता के एक बड़े हिस्से के वोट पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दिल्ली में ‘गरीब भगाओ’ योजना चला रही है। उनके मुताबिक, गरीबों को मिलने वाली सुविधाओं को लगातार खत्म किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अस्पतालों में गरीबों का मुफ्त इलाज प्रभावित हुआ है, दवाओं की उपलब्धता बंद की गई है और मोहल्ला क्लीनिक तथा जांच सुविधाओं को भी बंद किया गया है। उन्होंने महिलाओं के लिए बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा बंद करने का भी आरोप लगाया।

‘आप’ नेता ने कहा कि महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए देने का वादा किया गया था, लेकिन उनके मुताबिक अभी तक केवल करीब 4 हजार महिलाओं का ही चयन किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीबों के घरों और झुग्गियों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं तथा रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों के कामकाज पर भी कार्रवाई की जा रही है। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार की नीति गरीबों को दिल्ली से बाहर करने, उनके वोट काटने और केवल संपन्न इलाकों के मतदाताओं के सहारे सरकार चलाने की है।

उन्होंने कहा कि गरीबों के अधिकारों को छीनने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने युवाओं का जिक्र करते हुए भाजपा पर राजनीतिक रूप से लोगों को बरगलाने का आरोप लगाया। भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली के युवाओं को बहकाना आसान नहीं है और आने वाले चुनाव में जनता भाजपा को जवाब देगी। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से कितने भी लोगों के नाम काट दिए जाएं, अगले चुनाव में दिल्ली की जनता भाजपा को सत्ता से बाहर कर देगी।

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राष्ट्रीय समाचार

नीट-पीजी 2026 : 2.73 लाख से अधिक मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए रविवार को परीक्षा

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नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट फॉर पोस्ट-ग्रेजुएट (नीट-पीजी) 2026 रविवार को देश भर के 340 शहरों में निर्धारित 1,300 केंद्रों पर आयोजित की जाएगी, जिसमें 2.73 लाख से ज्यादा मेडिकल ग्रेजुएट के शामिल होने की उम्मीद है।

एक अधिकारी ने बताया कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) ने 26 अगस्त को नीट-पीजी 2026 का एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया था।

अधिकारी ने बताया कि नीट-पीजी 2026 के लिए कुल 2,73,183 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.5 प्रतिशत से ज्यादा है। उन्होंने यह भी बताया कि परीक्षा एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाएगी।

नीट-पीजी पास करने के बाद डॉक्टर सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में कई एडवांस्ड मेडिकल कोर्स में सीट पा सकते हैं और एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) और एमएस (मास्टर ऑफ सर्जरी) जैसे कोर्स कर सकते हैं।

इससे पहले, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने नीट-पीजी 2026 की तैयारियों का जायजा लिया था। केंद्रीय मंत्री ने सभी संबंधित लोगों को परीक्षा की प्रक्रिया को सुचारू, सुरक्षित, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-आधारित बनाने का निर्देश दिया।

परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए अधिकारी एक व्यापक सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा कर रहे हैं, जिसमें सीसीटीवी निगरानी, ​​बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, तलाशी, सिग्नल जैमर, डायनामिक कंप्यूटर आवंटन, केंद्रीय और क्षेत्रीय कमांड सेंटरों के जरिए लाइव मॉनिटरिंग और 60,000 से ज्यादा परीक्षा कर्मियों की तैनाती शामिल है।

इसी के साथ नड्डा ने उम्मीदवारों से अपील की कि वे परीक्षा से जुड़ी अफवाहों या धोखाधड़ी वाले दावों से गुमराह न हों। उन्होंने बताया कि फाइनल प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले एक बहुत सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड और समय-सीमा वाली प्रक्रिया के जरिए चुना जाता है। इसमें कई स्तरों पर तकनीकी और ऑपरेशनल सुरक्षा उपाय किए जाते हैं।

उन्होंने उम्मीदवारों को सलाह दी कि वे केवल एनबीईएमएस और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अनुचित तरीकों की कोशिश की तुरंत रिपोर्ट करें। इस वर्ष छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई सुधार किए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, उम्मीदवार परीक्षा केंद्रों के लिए तीन राज्यों का विकल्प चुन सकते थे, जिसमें उनके पत्राचार वाले राज्य को पहली प्राथमिकता के तौर पर चुनना अनिवार्य था।

परीक्षा के पैटर्न में भी बदलाव किया गया है, जिसके तहत 210 मिनट में 180 सवालों के जवाब देने होंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उम्मीदवारों को हर सवाल के लिए ज्यादा समय मिले।

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राष्ट्रीय समाचार

चीनी की एक्स-मिल कीमतों में 20 प्रतिशत की गिरावट, खुदरा बाजार में भी शुरू हुई नरमी: सरकार

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उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि देश में एक्स-मिल चीनी कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और अब खुदरा बाजार में भी चीनी के दाम नीचे आने लगे हैं। सरकार के अनुसार, आपूर्ति शृंखला में कीमतों का प्रभाव धीरे-धीरे पहुंचता है, इसलिए आने वाले दिनों में खुदरा स्तर पर भी कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।

मंत्रालय ने बताया कि सरकार लगातार देशभर में चीनी की कीमतों, स्टॉक और आपूर्ति की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हाल के दिनों में कीमतों में आई तेज वृद्धि के बाद सरकार ने कई सक्रिय कदम उठाए, जिनका असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है।

मंत्रालय के अनुसार, एक्स-मिल और खुदरा दोनों स्तरों पर कीमतों में आई गिरावट यह संकेत देती है कि हालिया मूल्य वृद्धि का प्रमुख कारण वास्तविक कमी नहीं, बल्कि जमाखोरी और सट्टेबाजी थी।

सरकार द्वारा देशभर की चीनी मिलों में भंडार के भौतिक सत्यापन अभियान चलाए गए। जांच के दौरान कई मामलों में यह पाया गया कि कुछ मिलों के पास घोषित आंकड़ों से अधिक चीनी का भंडार मौजूद था। इस सत्यापन अभियान से यह स्पष्ट हुआ कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और घबराहट में खरीदारी या अतिरिक्त भंडारण का कोई औचित्य नहीं है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में चीनी मिलें “शॉर्ट सेलिंग” का सहारा ले रही थीं, जिसका अर्थ है कि मासिक कोटा के तहत उन्हें जितनी चीनी बाजार में बेचनी चाहिए थी, उससे कम मात्रा जारी की जा रही थी। इस तरह की गतिविधियों से पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बाजार में आपूर्ति प्रभावित होती है और कीमतों पर अनावश्यक दबाव बनता है।

सरकार ने यह भी देखा कि कई बार महीने की शुरुआत में चीनी की बिक्री होने के बावजूद खरीदार उसे मिलों से महीने के अंत तक नहीं उठाते थे, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बनता था। इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने सितंबर से मासिक कोटा प्रणाली की जगह पखवाड़ा-आधारित चीनी आवंटन प्रणाली लागू करने का फैसला किया है।

नई व्यवस्था के तहत चीनी मिलों को आवंटित मात्रा का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा पहले सप्ताह में और शेष मात्रा अगले सप्ताह में बाजार में जारी करनी होगी। इसके अलावा, सरकार ने चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि बिक्री के बाद चीनी को सात दिनों के भीतर मिल परिसर से भेजना अनिवार्य होगा।

सरकार का मानना है कि पखवाड़ा-आधारित कोटा और सात दिन के भीतर अनिवार्य आपूर्ति की व्यवस्था से चीनी की आवाजाही तेज होगी, जिससे चीनी सीधे मिलों से थोक विक्रेताओं और फिर उपभोक्ताओं तक जल्दी पहुंचेगी, जबकि जमाखोरी और सट्टेबाजी की संभावना कम होगी। साथ ही बड़े उपभोक्ताओं को भी उनकी वास्तविक आवश्यकता से अधिक स्टॉक न रखने की सलाह दी गई है।

मंत्रालय ने कहा कि नई पेराई सत्र की शुरुआत 15 अक्टूबर से होने जा रही है। अक्टूबर में ही 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। सरकार ने यह भी अनुमति दी है कि अक्टूबर में उत्पादित चीनी को मिलें बिना किसी अतिरिक्त प्रतिबंध के बेच सकें, ताकि नए सत्र की चीनी जल्द से जल्द घरेलू बाजार में उपलब्ध हो सके।

सरकार के अनुसार, नवंबर में लगभग 45 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन होने की संभावना है, जिससे बाजार में आपूर्ति और मजबूत होगी तथा कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय ने दोहराया कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और उपभोक्ताओं को घबराने या अतिरिक्त खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार बाजार पर करीब से नजर रखे हुए है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी उचित हस्तक्षेप करती रहेगी।

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