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धनतेरस पर सोना या चांदी? छोटे निवेशकों के लिए क्या है बेहतर विकल्प, जानिए फायदे और जोखिम
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रोशनी का पर्व ‘दीपावली’ बस आने वाला ही है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है, जो 6 नवंबर को पड़ रहा है। इस दिन लोग सोना और चांदी समेत कई कीमती धातुएं खरीदते हैं।
वहीं, धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना केवल परंपरा नहीं, बल्कि निवेश का भी एक अहम माध्यम माना जाता है। हालांकि सीमित बजट वाले निवेशकों के सामने अक्सर यह सवाल होता है कि सोना खरीदें या चांदी। ऐसे में फैसला केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि बजट, जोखिम क्षमता और निवेश के लक्ष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
सोना लंबे समय से संपत्ति सुरक्षित रखने (वेल्थ प्रिजर्वेशन) का सबसे भरोसेमंद माध्यम माना जाता है। इसकी मांग लगातार बनी रहती है और जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से बेचा भी जा सकता है। हालांकि आभूषण खरीदने पर मेकिंग चार्ज और टैक्स अलग से देने पड़ते हैं, जिससे कुल लागत बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश के नजरिए से गोल्ड कॉइन, गोल्ड बार, गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्प ज्यादा व्यावहारिक माने जाते हैं। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है, लेकिन आमतौर पर यह चांदी की तुलना में कम अस्थिर माना जाता है।
वहीं, चांदी छोटे निवेशकों के लिए अधिक किफायती विकल्प हो सकती है। कम बजट में निवेशक ज्यादा मात्रा में चांदी खरीद सकते हैं। इसके अलावा सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे क्षेत्रों में बढ़ती औद्योगिक मांग चांदी को अतिरिक्त समर्थन देती है। हालांकि चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में अधिक रहता है, क्योंकि इस पर निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों का भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में तेजी से मुनाफे के अवसर तो मिल सकते हैं, लेकिन जोखिम भी ज्यादा होता है।
ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपका उद्देश्य संपत्ति सुरक्षित रखना और अपेक्षाकृत स्थिर निवेश है, तो सोना बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं यदि आपका बजट सीमित है, आप ज्यादा मात्रा में धातु खरीदना चाहते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकते हैं, तो चांदी पर विचार किया जा सकता है।
मौजूदा स्थिति में एक और दिलचस्प पहलू यह है कि सोना अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 25 प्रतिशत और चांदी लगभग 55 प्रतिशत तक नीचे आ चुकी है। ऐसे में कई निवेशक इसे खरीदारी का अवसर भी मान रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल धनतेरस के दिन एकमुश्त खरीदारी करने के बजाय निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों और समयावधि के अनुसार फैसला लेना चाहिए।
जो निवेशक शुद्धता, सुरक्षा और स्टोरेज की चिंता से बचना चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ जैसे विकल्प भी उपयोगी हो सकते हैं। इनमें फिजिकल धातु रखने की जरूरत नहीं होती और निवेश एक्सचेंज के माध्यम से किया जा सकता है।
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भारत की बायोइकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए तेज मंजूरियां और आसान फंडिंग जरूरी: पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत की जैव अर्थव्यवस्था (बायोइकोनॉमी) को गति देने के लिए नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया तेज करने, स्टार्टअप्स के लिए वित्तपोषण को आसान बनाने और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया है।
‘भारत की बायोइकॉनॉमी का अवसर: नवाचार और विकास को बढ़ावा देने में स्टार्टअप्स की भूमिका’ विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक की अध्यक्षता करते हुए गोयल ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता और उद्यमशील प्रतिभा का बेहतर उपयोग कर देश को वैश्विक बायोइकोनॉमी क्षेत्र में अग्रणी बनाया जा सकता है।
वाणिज्य मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि गोयल ने बैठक के दौरान सामने आए सुझावों पर समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। चर्चा का मुख्य फोकस बायोफार्मा स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए नियमों को सरल बनाना, मंजूरी प्रक्रियाओं को तेज करना, पूंजी तक पहुंच बढ़ाना और साझा बुनियादी ढांचे का विकास करना था।
डीपीआईआईटी द्वारा नीति आयोग और नीति फ्रंटियर टेक हब के सहयोग से आयोजित इस बैठक में प्रतिभागियों ने एक प्रस्तावित रेगुलेटरी सैंडबॉक्स, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम, वैश्विक नियामकीय मानकों के साथ बेहतर तालमेल और पेटेंट आवेदन प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे उपायों पर चर्चा की। इन कदमों का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स को तेजी से विस्तार करने में मदद करना है।
बैठक में केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित बायोफार्मा शक्ति पहल पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने साझा प्रयोगशालाओं, परीक्षण सुविधाओं और क्लीनिकल ट्रायल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि बायोफार्मा स्टार्टअप्स की लागत कम हो सके और नवाचार को बढ़ावा मिले।
इस बीच, नीति आयोग की विशिष्ट फेलो ने कहा कि प्रतिस्पर्धी वैश्विक बायोइकोनॉमी के निर्माण के लिए स्टार्टअप्स, उद्योग, शिक्षाविदों और सरकार के बीच सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वहीं, नीति आयोग के सदस्य गोबर्धन दास ने अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने और वैज्ञानिक खोजों को व्यावसायिक रूप से उपयोगी उत्पादों में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया।
राउंडटेबल में जीवन विज्ञान क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण को मजबूत करने, प्रयोगशाला उपकरणों और रसायनों के आयात हेतु सीमा शुल्क मंजूरियों को तेज करने तथा सरकारी योजनाओं और नियामकीय समर्थन तक पहुंच को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, प्रतिभागियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि नीतिगत हस्तक्षेप अधिक प्रभावी हों और क्षेत्र विशेष की चुनौतियों का तेजी से समाधान किया जा सके।
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लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ हरे निशान में खुला बाजार, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा उछला

हफ्ते के लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में खुला। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, कंपनियों के मजबूत दूसरी तिमाही नतीजों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में 1 प्रतिशत तक की बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।
बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 75,692.78 से 595.87 अंक यानी 0.78 प्रतिशत उछलकर 76,288.65 पर खुला। वहीं दिन के कारोबार में एक समय यह 728.7 अंक यानी 0.96 प्रतिशत की तेजी के साथ 76,421.48 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
वहीं निफ्टी 50 अपने पिछले बंद भाव 23,440.80 से 141.45 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,582.25 पर खुला, जबकि दिन के कारोबार में एक समय इसने 198.4 अंक यानी 0.84 प्रतिशत की उछाल के साथ 23639.20 का इंट्रा-डे हाई छुआ।
सेक्टोरल आधार पर वित्तीय शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज एक्स-बैंक इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत चढ़ गया। इसके अलावा केमिकल, एफएमसीजी और मीडिया शेयरों में भी मजबूती रही और इनके सूचकांक 0.77 प्रतिशत तक बढ़े। प्राइवेट बैंक, सीमेंट, आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयर भी हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।
दूसरी ओर हेल्थकेयर और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे इन सेक्टरों पर कुछ दबाव बना रहा।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियां बाजार में जारी तेजी को आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल दिखाई दे रही हैं। उनका कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतों का 104 डॉलर प्रति बैरल तक आना, एआई थीम आधारित वैश्विक निवेशों में नरमी, बेहतर कॉर्पोरेट नतीजे और एफआईआई की वापसी भारतीय बाजारों के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
तकनीकी दृष्टिकोण से भी बाजार की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी ने अपना 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) करीब 23,170 के स्तर पर पुनः हासिल कर लिया है। आरएसआई बढ़कर 61.03 पर पहुंच गया है, जो बाजार में मजबूत गति का संकेत देता है। वहीं पुट-कॉल रेशियो (पीसीआर) 1.28 पर है, जो डेरिवेटिव बाजार में सकारात्मक रुझान दर्शाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,200-23,300 का दायरा निकटतम समर्थन (सपोर्ट) क्षेत्र है, जबकि 23,600-23,700 का स्तर तत्काल प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) के रूप में देखा जा रहा है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि हालिया तेजी का एक बड़ा कारण वैल्यू बायिंग और शॉर्ट कवरिंग है। विशेष रूप से बड़े लार्जकैप शेयरों में निवेशकों ने गिरावट के दौरान खरीदारी की थी, जिसका फायदा अब दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि धैर्य के साथ की गई वैल्यू बायिंग निवेशकों को बेहतर रिटर्न दे सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई मजबूत लार्जकैप शेयरों में मंदड़ियों ने एफआईआई बिकवाली जारी रहने की उम्मीद पर शॉर्ट पोजीशन बनाई थीं, लेकिन परिस्थितियां बदलने के साथ अब इन पोजीशनों को कवर किया जा रहा है, जिससे बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल रहा है।
सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार दूसरे सत्र खरीदारी जारी रखते हुए 3,114 करोड़ रुपए की शुद्ध इक्विटी खरीद की थी। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार दूसरे दिन शुद्ध विक्रेता रहे और उन्होंने 392 करोड़ रुपए की बिकवाली की।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों और उनके वैश्विक भू-राजनीतिक प्रभाव पर भी बनी रहेगी, क्योंकि इन घटनाक्रमों का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों और निवेश प्रवाह पर पड़ सकता है।
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धनतेरस से पहले कीमती धातुओं पर दबाव! सोना 1 प्रतिशत फिसला; चांदी 5,600 रुपए तक टूटी

धनतेरस और दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है। सोमवार को आई मामूली रिकवरी ज्यादा देर टिक नहीं पाई और मंगलवार को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में कीमती धातुओं पर फिर दबाव देखने को मिला। एमसीएक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में 1 प्रतिशत से ज्यादा तक की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख, ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावना और मजबूत रुपए के चलते सोना-चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिली।
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में मंगलवार को सोना और चांदी दोनों गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। सोना करीब 1.05 प्रतिशत टूटकर 3,928 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, तो वहीं चांदी 3.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59.25 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखाई दी।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी मिड-टर्म चुनावों से पहले निवेशक सतर्क हैं और फिलहाल बाजार में जोखिम लेने की इच्छा सीमित बनी हुई है। यही वजह है कि सोमवार की रिकवरी के बाद भी भारी खरीदारी देखने को नहीं मिली।
अंतरराष्ट्रीय कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। घरेलू बाजार में सोना करीब 1 प्रतिशत गिरकर 1.39 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे आ गया, जबकि चांदी का भाव करीब 3 प्रतिशत फिसलकर 1.78 लाख प्रति किलोग्राम के करीब आ गया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव 1,40,186 रुपए से 766 रुपए या 0.54 प्रतिशत गिरकर 1,39,420 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला, जबकि दिन के कारोबार में एक समय यह 1,508 रुपए यानी 1.07 प्रतिशत गिरकर 1,38,678 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर पर आ गया।
वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद 1,83,779 रुपए से 892 रुपए या 0.48 प्रतिशत फिसलकर 1,82,887 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुली, वहीं दिन के कारोबार में एक समय यह 5,667 रुपए यानी 3.08 प्रतिशत टूटकर 1,78,112 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी सामान्य रूप से सोने को समर्थन देती है, लेकिन फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और ऊंची ब्याज दरों की आशंका ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाए रखा है। वहीं पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊंचे कच्चे तेल के दाम महंगाई संबंधी चिंताओं को बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने और चांदी की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति और महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। बाजार अब दिसंबर में फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना को पहले की तुलना में थोड़ा कम मान रहा है, लेकिन अनिश्चितता अभी बरकरार है।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1.40 लाख रुपए से 1.41 लाख रुपए का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) है, और नीचे 1.37 लाख रुपए से 1.38 लाख रुपए का क्षेत्र अहम सपोर्ट माना जा रहा है। चांदी के लिए 1.78 लाख रुपए से 1.80 लाख रुपए का सपोर्ट जोन है, जबकि ऊपर की ओर 1.86 लाख रुपए से 1.88 लाख रुपए का स्तर मजबूत प्रतिरोध बना हुआ है।
इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट ने कुछ राहत जरूर दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड में भारी बिकवाली देखी गई है, क्योंकि ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के बाद तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि भू-राजनीतिक जोखिम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं, इसलिए निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
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