राजनीति
15 सालों में ‘नम्मा मेट्रो’ नेटवर्क 6.7 किमी से बढ़कर 96.1 किमी तक पहुंचा : सीएम शिवकुमार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि नम्मा मेट्रो बेंगलुरु के रोजमर्रा के जीवन का अहम हिस्सा बन गई है। उन्होंने कहा कि यह लाखों लोगों को उनके काम पर पहुंचाने और उनके सपनों को पूरा करने में मदद कर रही है। शहर के मेट्रो नेटवर्क के 15 साल पूरे होने पर सीएम ने यह बात कही।
इस खास मौके पर जारी बयान में सीएम शिवकुमार ने नम्मा मेट्रो के सफर पर गर्व जताया। उन्होंने बताया कि 2011 में 6.7 किलोमीटर से शुरू हुआ नेटवर्क आज 96.1 किलोमीटर तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा, “जो एक नए सफर के रूप में शुरू हुआ था, वह आज बेंगलुरु की रोजमर्रा की जिंदगी का अटूट हिस्सा बन गया है।”
उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के लोगों के जीवन में मेट्रो का बड़ा महत्व है। हर दिन लाखों लोग नम्मा मेट्रो से सफर कर काम पर जाते हैं, अपने सपनों को पूरा करते हैं और अपने रोजमर्रा के काम निपटाते हैं। उनकी ये यात्राएं ही बेंगलुरु की कहानी कहती हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि अब तक जो प्रगति हुई है, उसे आगे बढ़ाया जाए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को और अधिक सुलभ बनाना, रोज के सफर को आसान करना और पूरे शहर में कनेक्टिविटी बेहतर करना सरकार का लक्ष्य है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेंगलुरु बेहतर तरीके से जुड़ा रहे, यह सुनिश्चित करना जरूरी है। 15वीं वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री ने उन लाखों यात्रियों को शुभकामनाएं दीं, जिनकी रोज की यात्राओं से शहर चलता है।
बता दें कि नम्मा मेट्रो 20 अक्टूबर को 15 साल पूरे कर रहा है। इसका पहला हिस्सा 20 अक्टूबर 2011 को शुरू हुआ था, जो बयप्पनहल्ली से एमजी रोड तक था। तब यह सिर्फ 6.7 किलोमीटर था, जो अब 83 स्टेशनों के साथ 96.1 किलोमीटर तक फैल चुका है।
फिलहाल सरकार का फोकस फेज 2 के बाकी हिस्सों को पूरा करने पर है, जो शहर के बड़े रोजगार केंद्रों को जोड़ता है। येलो लाइन (आरवी रोड से बोम्मासंद्रा वाया इलेक्ट्रॉनिक सिटी) अगस्त 2025 में पूरी तरह से चालू हो चुकी है।
बेंगलुरु मेट्रो का तेजी से विस्तार हो रहा है। फेज 2, फेज 3 और नए प्रस्तावित विस्तारों पर काम चल रहा है। मौजूदा 96.1 किलोमीटर का नेटवर्क 2026 के अंत तक 137.11 किलोमीटर और 2027 के अंत तक 175.55 किलोमीटर तक पहुंचने की उम्मीद है।
राजनीति
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पुरुष प्रधान और संविधान विरोधी संगठन : राहुल गांधी

लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने आरएसएस को एक पुरुष प्रधान और संविधान विरोधी संगठन बताया है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा कि आरएसएस एक पुरुष प्रधान, संविधान विरोधी संगठन है, जो मानता है कि महिलाएं पुरुषों की संपत्ति हैं। उन्होंने कहा कि मैं शिव-शक्ति में विश्वास करता हूं, इसलिए मुझे उनसे लड़ना इतना आनंद देता है। सबसे खूबसूरत बात यह है कि उनके संगठन की कई महिलाएं मेरे साथ हैं।
नेता विपक्ष ने देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि आप सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। अहंकार, अन्याय और अत्याचार पर सत्य और न्याय की विजय का यह पर्व आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए।
इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अक्सर अपना ज्यादातर समय विदेश यात्राओं में बिताते हैं। राहुल गांधी भारत आते हैं, किसी मुद्दे पर विवाद खड़ा करते हैं और फिर विदेश यात्रा पर निकल जाते हैं।
प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि राहुल गांधी की विदेश यात्राओं के उद्देश्य और वहां उनकी मुलाकातों के बारे में लोगों को स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी से पिछले दो-तीन वर्षों के दौरान की गई विदेश यात्राओं का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी इन यात्राओं के दौरान किन लोगों से मिलते हैं और उनके खर्च का भुगतान कौन करता है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और एक सार्वजनिक हस्ती हैं। ऐसे में जनता को उनकी विदेश यात्राओं के उद्देश्य और खर्च के बारे में जानकारी मिलने का अधिकार है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए खंडेलवाल ने कहा कि उन्हें लगता है कि खड़गे ने आरोप लगाने से पहले कांग्रेस के इतिहास पर पर्याप्त नजर नहीं डाली है। खड़गे जिन कामों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, कांग्रेस खुद अपने शासनकाल में पहले ही ऐसे काम कर चुकी है।
राजनीति
रेस कोर्स मस्जिद विवाद: ओवैसी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद के मामले में दखल देने का आग्रह किया।
हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस मामले में रिजिजू के तत्काल दखल की जरूरत है।
ओवैसी ने बताया कि 1977 से ही यह मस्जिद एक वक्फ संपत्ति है, फिर भी वक्फ बोर्ड ने इसके गिराए जाने के आदेश को चुनौती नहीं दी। साथ ही, उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने की कोई कोशिश भी नहीं की।
उन्होंने कहा, “वक्फ संशोधन अधिनियम भी मस्जिद की सुरक्षा करता है, क्योंकि यह ‘उपयोग के आधार पर वक्फ’ है। अतीत में पंजीकृत ऐसी सभी संपत्तियां सुरक्षित हैं। फिर भी, कोई प्रयास नहीं किया गया।”
उन्होंने आगे कहा, “2023 से दिल्ली वक्फ बोर्ड का गठन नहीं हुआ है, इसलिए इस मामले को सुलझाना मंत्री की जिम्मेदारी है। हालांकि, बोर्ड के सीईओ भी इसमें हस्तक्षेप कर सकते थे, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ।”
इससे पहले एक पोस्ट में, उन्होंने रेस कोर्स के पास स्थित ऐतिहासिक मस्जिद ‘हुजरा कुआं’ को गिराने की कोशिश की कड़ी निंदा की थी।
उन्होंने बताया कि लोगों को इस मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा रहा है, जबकि 1977 के गजट में इसका विधिवत उल्लेख है और इसकी देखभाल करने वाले को मस्जिद गिराने की धमकी दी गई है, जबकि इस संबंध में कोई औपचारिक नोटिस भी जारी नहीं किया गया है।
सांसद ने कहा, “मुसलमानों के इबादतगाहों को निशाना क्यों बनाया जा रहा है? वक्फ संशोधन अधिनियम और धार्मिक स्थल अधिनियम के दुरुपयोग को लेकर हमारी आशंकाएं सच होती दिख रही हैं। सरकार को इन गैरकानूनी धमकियों को वापस लेना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि मस्जिद के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।”
लगभग 40 वर्षों से मस्जिद से जुड़े मोहम्मद हारून ने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में बताया कि अधिकारियों ने उनसे छह दिनों के भीतर जगह खाली करने को कहा है। मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई है और ‘लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस’ (एलएनडीओ) ने सभी गेट बंद कर दिए हैं।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने किरेन रिजिजू से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा। इसमें मस्जिद और सफदरजंग मकबरे के पीछे स्थित कब्रिस्तान को बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
विदेश मंत्री जयशंकर और उनके यूएई समकक्ष ने रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी बढ़ाने पर की चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उनके समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने मंगलवार को मुंबई में अहम बैठक की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और व्यापक रणनीतिक तथा आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत-यूएई संबंध एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं। इस बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम महाजन और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
विदेश मंत्री जयशंकर ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “यूएई के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ एक सार्थक बैठक हुई, जिसमें हमने अपने व्यापक संबंधों की विस्तृत समीक्षा की। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे क्षेत्रों में हमारा सहयोग काफी व्यापक और महत्वाकांक्षी है। भारत-यूएई संबंध एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं।”
यूएई के विदेश मंत्रालय ने भी ‘एक्स’ पर विदेश मंत्री जयशंकर और शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई बैठक के बारे में जानकारी साझा की।
यूएई के विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर लिखा, “महामहिम शेख अब्दुल्ला बिन जायद ने मुंबई में भारत के विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर के साथ एक विस्तृत बैठक की। इसमें उन्होंने भारत और यूएई के बीच व्यापक रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा की। साथ ही, दोनों देशों की विकास और समृद्धि की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग का दायरा बढ़ाने पर भी बात हुई।”
विदेश मंत्रालय ने बताया कि यूएई के शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान सोमवार को एक आधिकारिक दौरे पर मुंबई पहुंचे। यह भारत और यूएई के बीच करीबी और नियमित जुड़ाव को दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर कहा, “यूएई के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री महामहिम शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान का भारत के आधिकारिक दौरे पर मुंबई पहुंचने पर हार्दिक स्वागत है। महाराष्ट्र सरकार के कौशल विकास मंत्री श्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने उनका स्वागत किया।”
मंत्रालय ने आगे कहा, “यह उच्च-स्तरीय दौरा भारत और यूएई के बीच करीबी और नियमित संबंधों को दर्शाता है, और इससे हमारी ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ और भी मजबूत होगी।” शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान का भारत दौरा, विदेश मंत्री जयशंकर के हालिया यूएई दौरे के बाद हो रहा है, जहां उन्होंने यूएई के नेतृत्व के साथ बातचीत की थी और ‘रायसीना मिडिल ईस्ट डायलॉग’ में हिस्सा लिया था।
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