अंतरराष्ट्रीय समाचार
विदेश मंत्री जयशंकर और उनके यूएई समकक्ष ने रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी बढ़ाने पर की चर्चा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उनके समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने मंगलवार को मुंबई में अहम बैठक की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और व्यापक रणनीतिक तथा आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत-यूएई संबंध एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं। इस बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम महाजन और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
विदेश मंत्री जयशंकर ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “यूएई के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ एक सार्थक बैठक हुई, जिसमें हमने अपने व्यापक संबंधों की विस्तृत समीक्षा की। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे क्षेत्रों में हमारा सहयोग काफी व्यापक और महत्वाकांक्षी है। भारत-यूएई संबंध एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं।”
यूएई के विदेश मंत्रालय ने भी ‘एक्स’ पर विदेश मंत्री जयशंकर और शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई बैठक के बारे में जानकारी साझा की।
यूएई के विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर लिखा, “महामहिम शेख अब्दुल्ला बिन जायद ने मुंबई में भारत के विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर के साथ एक विस्तृत बैठक की। इसमें उन्होंने भारत और यूएई के बीच व्यापक रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा की। साथ ही, दोनों देशों की विकास और समृद्धि की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग का दायरा बढ़ाने पर भी बात हुई।”
विदेश मंत्रालय ने बताया कि यूएई के शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान सोमवार को एक आधिकारिक दौरे पर मुंबई पहुंचे। यह भारत और यूएई के बीच करीबी और नियमित जुड़ाव को दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर कहा, “यूएई के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री महामहिम शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान का भारत के आधिकारिक दौरे पर मुंबई पहुंचने पर हार्दिक स्वागत है। महाराष्ट्र सरकार के कौशल विकास मंत्री श्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने उनका स्वागत किया।”
मंत्रालय ने आगे कहा, “यह उच्च-स्तरीय दौरा भारत और यूएई के बीच करीबी और नियमित संबंधों को दर्शाता है, और इससे हमारी ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ और भी मजबूत होगी।” शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान का भारत दौरा, विदेश मंत्री जयशंकर के हालिया यूएई दौरे के बाद हो रहा है, जहां उन्होंने यूएई के नेतृत्व के साथ बातचीत की थी और ‘रायसीना मिडिल ईस्ट डायलॉग’ में हिस्सा लिया था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ली छ्यांग ने ईरान के प्रथम उप राष्ट्रपति से मुलाकात की

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने दुशानबे में एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद के 25वें सम्मेलन में भाग लेने से इतर ईरान के प्रथम उप राष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ से मुलाकात की।
ली छ्यांग ने कहा कि चीन और ईरान दोनों प्राचीन सभ्यता वाले देश हैं और परंपरागत मित्रता का लंबा इतिहास है। वर्तमान वर्ष दोनों देशों की सर्वांगीण रणनीतिक साझेदारी की स्थापना की 10वीं वर्षगांठ है। चीन ईरान के साथ इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों का आदान-प्रदान व सहयोग बढ़ाने को तैयार है।
ली छ्यांग ने कहा कि इस साल में मध्यपूर्व की स्थिति डांवाडोल रही है। चीन का पक्ष है कि विभिन्न देशों की प्रभुसत्ता और सुरक्षा को सम्मान मिलना चाहिए। संबंधित पक्षों को शांति के विकल्प पर कायम रहकर यथाशीघ्र ही वार्ता बहाल कर राजनीतिक तथा कूटनीतिक माध्यम से मतभेद हल कर यथाशीघ्र ही क्षेत्रीय शांति की बहाली करनी चाहिए। चीन वार्ता बढ़ाने की भरसक कोशिश करता रहता है और राष्ट्रपति शी द्वारा प्रस्तुत श्रृंखलात्मक महत्वपूर्ण प्रस्ताव के मुताबिक क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास के लिए कोशिश जारी रखेगा।
मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि ईरान चीन के साथ संबंधों को बड़ा महत्व देता है और चीनी पक्ष के साथ विभिन्न स्तरीय आवाजाही घनिष्ठ बनाकर विभिन्न क्षेत्रों का परस्पर लाभकारी सहयोग मजबूत करने और एससीओ, ब्रिक्स आदि बहुपक्षीय ढांचे में समन्वय मजबूत करने को तैयार है ताकि ईरान-चीन सर्वांगीण रणनीतिक साझेदारी निरंतर आगे बढ़े। ईरान मध्यपूर्व शांति व सुरक्षा पर राष्ट्रपति शी के अहम प्रस्ताव का स्वागत और समर्थन करता है और वार्ता से मतभेद सुलझाना चाहता है। ईरान इस्लामाबाद मेमोरेंडम पर लौटकर यथाशीघ्र ही क्षेत्रीय शांति बहाल करने की उम्मीद करता है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अराघची और लावरोव की बैठक में परमाणु साझेदारी पर जोर, यूरोप से पश्चिम एशिया तक कई मुद्दों पर हुई चर्चा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय बैठक में यूरोप से लेकर पश्चिम एशिया तक कई मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान परमाणु क्षेत्र में साझेदारी आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर बैठक की जानकारी साझा की।
अराघची ने पोस्ट में लिखा, ”आज सर्गेई लावरोव का तेहरान में स्वागत किया और उनके साथ अहम बातचीत हुई। हमने यूरोप से लेकर पश्चिम एशिया तक कई मुद्दों पर चर्चा की। इसमें लेबनान, फिलिस्तीन, यूक्रेन और यमन की स्थिति भी शामिल रही।”
उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, ”हमने आर्थिक सहयोग बढ़ाने और परमाणु क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया। हमारे इतिहास में शायद ही कभी ऐसा समय आया हो जब ईरान और रूस के रिश्ते आज जितने करीब और मजबूत रहे हों।”
इससे पहले सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाल ही में हुए घटनाक्रमों पर चर्चा की।
पेजेश्कियन ने कहा कि तेहरान और मॉस्को के बीच हुए समझौतों और आपसी सहमतियों को तेजी से लागू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, परिवहन, व्यापार और बिजली संयंत्रों से जुड़े बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना दोनों देशों के रिश्तों की प्राथमिकता है।
पेजेश्कियन ने आगे कहा कि ईरान और रूस अपनी साझा क्षमताओं का बेहतर उपयोग करके और क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए मिलकर शांति, स्थायी सुरक्षा और बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बैठक के दौरान तेहरान और मॉस्को के संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही, दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
दक्षिण कोरिया की प्रधानमंत्री ने प्योंगयांग के साथ बातचीत फिर से शुरू करने पर दिया जोर

दक्षिण कोरिया की प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने रविवार को कहा कि सरकार सोल और प्योंगयांग के बीच बातचीत फिर से शुरू करने का प्रयास करेगी और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में काम करेगी।
सोल में विस्थापित उत्तर कोरियाई नागरिकों के लिए आयोजित एक प्रतियोगिता में शामिल होते हुए, हान ने कहा, “दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच बातचीत के रास्ते खोलने और शांति तथा साझा समृद्धि पर चर्चा करने के प्रयास किए जाएंगे।”
योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दोनों देशों के विभाजन को एक “हकीकत” बताया और इस बात पर जोर दिया कि विस्थापित नागरिकों और अलग हुए परिवारों का दर्द आज भी “जारी” है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता खोलने के हमारे प्रयास रुक नहीं सकते।” उन्होंने प्रतिभागियों से शांति स्थापित करने में सहयोग मांगा और दक्षिण कोरिया के आर्थिक विकास तथा लोकतंत्रीकरण में उनके योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
8 अक्टूबर को, दक्षिण कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया से “जिम्मेदार कदम” उठाने का आग्रह किया। दक्षिण कोरिया ने प्योंगयांग पर ‘युद्धविराम समझौते’ के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर एक बारूदी सुरंग बिछाई थी, जिसकी चपेट में आने से पिछले महीने दोनों कोरियाई देशों की सीमा के पास तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हो गए थे।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की एक समिति बैठक के दौरान, संयुक्त राष्ट्र में दक्षिण कोरिया के राजदूत चा जी-हून ने बताया कि दक्षिण कोरियाई सेना और संयुक्त राष्ट्र कमान (यूएनसी) की संयुक्त जांच से पुष्टि हुई है कि 21 सितंबर को हुआ विस्फोट एक बारूदी सुरंग के कारण हुआ था। इस सुरंग को उत्तर कोरियाई सैन्य बलों ने जानबूझकर ‘सैन्य सीमा रेखा’ (एमडीएल) के दक्षिण में बिछाया था, जो दोनों कोरियाई देशों को अलग करती है।
चा ने कहा, “दक्षिण कोरियाई सेना और यूएनसी की संयुक्त जांच, जिसे फोरेंसिक विश्लेषण का भी समर्थन प्राप्त है, से पुष्टि हुई है कि यह विस्फोट उत्तर कोरियाई बलों द्वारा सैन्य सीमा रेखा के दक्षिण में जानबूझकर बिछाई गई बारूदी सुरंग के कारण हुआ था।” उन्होंने दोनों कोरियाई देशों को उनके आधिकारिक नामों – ‘रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ (दक्षिण कोरिया) और ‘डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ (उत्तर कोरिया) – से संबोधित किया।
चा ने कहा कि यह घटना ‘युद्धविराम समझौते’ का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने आगे कहा, “हम उत्तर कोरिया (डीपीआरके) से आग्रह करते हैं कि वह माफी मांगे, तनाव बढ़ाने वाली ऐसी गतिविधियों को रोके और जिम्मेदार कदम उठाए।”
हालांकि, उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि ने सोल के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह प्योंगयांग द्वारा अपनी दक्षिणी सीमा को मजबूत करने के प्रयासों को ‘सैन्य घुसपैठ’ के रूप में पेश करने की एक कोशिश है। प्रतिनिधि ने कहा, “यह आरओके (दक्षिण कोरिया) सेना की एक घटिया चाल के अलावा और कुछ नहीं है, जिसका मकसद अपनी गलतियों का दोष डीपीआरके (उत्तर कोरिया) पर मढ़ना है।”
दोनों कोरियाई देशों ने प्योंगयांग के परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अपने-अपने विपरीत रुख को फिर से दोहराया।
चा ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के प्रति सोल की प्रतिबद्धता को दोहराया और उत्तर कोरिया से आग्रह किया कि वह ‘परमाणु अप्रसार संधि’ और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों का पूरी तरह से पालन करे।
उत्तर कोरियाई प्रतिनिधि ने प्योंगयांग के परमाणु हथियारों का बचाव करते हुए कहा कि अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए यह एक अनिवार्य विकल्प था, क्योंकि उन्हें “दशकों से अमेरिकी परमाणु खतरे” का सामना करना पड़ रहा है।
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