व्यापार
आईबीएम और एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब के बीच बड़ा समझौता, भारत के डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
आईबीएम और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) की पहल एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब (एमएसएच) ने भारत के डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम की वृद्धि को गति देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। मंगलवार को की गई घोषणा के अनुसार, इस साझेदारी का उद्देश्य तकनीकी पहुंच, मेंटरशिप, स्किलिंग सपोर्ट और एंटरप्राइज एंगेजमेंट के अवसरों के माध्यम से स्टार्टअप्स को मजबूत बनाना है।
यह साझेदारी एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब के देशव्यापी इनोवेशन नेटवर्क को आईबीएम की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), हाइब्रिड क्लाउड और क्वांटम कंप्यूटिंग संबंधी विशेषज्ञता के साथ जोड़ने का प्रयास करेगी, ताकि उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप्स घरेलू और वैश्विक बाजारों के लिए तकनीकी समाधान विकसित, सत्यापित और विस्तार कर सकें।
इस सहयोग के तहत स्टार्टअप्स को व्यावसायिक और औद्योगिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए आईबीएम के एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी पोर्टफोलियो और इनोवेशन प्लेटफॉर्म तक पहुंच मिलेगी। उन्हें आईबीएम वाटसनएक्स, जो कंपनी का एंटरप्राइज एआई और डेटा प्लेटफॉर्म है, आईबीएम बॉब, जो एंटरप्राइजेज के लिए एक एआई कोडिंग एजेंट है, और आईबीएम सॉवरेन कोर, जो डिजिटल संप्रभुता को समर्थन देने के लिए तैयार एआई-सक्षम सॉफ्टवेयर स्टैक है, पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।
स्टार्टअप्स को आईबीएम की हाइब्रिड क्लाउड और क्वांटम कंप्यूटिंग तकनीकों के साथ-साथ उसकी सुरक्षा और ऑटोमेशन समाधानों का भी अनुभव प्राप्त होगा।
एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. पन्नीरसेल्वम मदनगोपाल ने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से तकनीकी नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने कहा, “भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तकनीकी नवाचार का वैश्विक इंजन बनकर उभर रहा है। आईबीएम के साथ इस सहयोग के जरिए हमारा उद्देश्य स्वदेशी डीप-टेक क्षमताओं को मजबूत करना, प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना और नवाचारकर्ताओं के लिए ऐसे समाधान विकसित करने के अधिक अवसर पैदा करना है, जो विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें।”
वहीं, आईबीएम इंडिया और दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक संदीप पटेल ने कहा कि यह साझेदारी नवाचार को बढ़ावा देने और भारत के डीप-टेक स्टार्टअप परिदृश्य को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा, “यह सहयोग नवाचार को बढ़ावा देने और देश के डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ये स्टार्टअप्स भारत और दुनिया के लिए प्रौद्योगिकी आधारित विकास के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।”
पटेल ने आगे कहा, “एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब के साथ मिलकर हमारा लक्ष्य संस्थापकों को तेजी से नवाचार करने, जिम्मेदारी के साथ विस्तार करने और राष्ट्रीय तथा वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने वाले समाधान विकसित करने में मदद करना है, ताकि संभावनाओं से भरे नवाचारों को वास्तविक प्रभाव में बदला जा सके।”
व्यापार
यूको बैंक भर्ती 2026: अप्रेंटिस के 530 पदों पर आवेदन शुरू, ग्रेजुएट युवाओं के लिए सुनहरा मौका

बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए एक शानदार मौका सामने आया है। यूको बैंक ने अप्रेंटिस के तौर पर काम करने के लिए योग्य और इच्छुक उम्मीदवारों से कुल 530 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।
यूको बैंक की ओर से 530 अप्रेंटिस पोस्ट के लिए रिक्तियां राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और श्रेणी के अनुसार जारी की गई हैं, जिसमें आंध्र प्रदेश में 8, अरुणाचल प्रदेश में 1, असम में 24, बिहार में 34, चंडीगढ़ में 4, छत्तीसगढ़ में 9, गोवा में 1, गुजरात में 20, हरियाणा में 15, हिमाचल प्रदेश में 25, जम्मू और कश्मीर में 3, झारखंड में 12, कर्नाटक में 11, केरल में 10, मध्य प्रदेश में 27, महाराष्ट्र में 32, मणिपुर में 2, मेघालय में 1, नगालैंड में 1, नई दिल्ली में 13, ओडिशा में 41, पांडिचेरी में 1, पंजाब में 24, राजस्थान में 37, सिक्किम में 1, तमिलनाडु में 21, तेलंगाना में 8, त्रिपुरा में 5, उत्तर प्रदेश में 45, उत्तराखंड में 8 और पश्चिम बंगाल में 86 पद शामिल हैं।
अप्रेंटिस की इन सभी रिक्तियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 14 अक्टूबर से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 29 अक्टूबर तक तय की गई है। ऐसे में जो उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे सबसे पहले खुद को एनएटीएस पोर्टल पर रजिस्टर करें। इसके बाद यूको बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर लें।
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। आवेदकों की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 28 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 अक्टूबर 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले अभ्यर्थियों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन ऑनलाइन टेस्ट (ऑब्जेक्टिव टाइप), दस्तावेज सत्यापन और स्थानीय भाषा की परीक्षा के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स को प्रति माह 16,650 रुपए स्टाइपेंड के तौर पर दिए जाएंगे। वहीं, ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा 7 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे से बीएफएसआई सेक्टर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया (बीएफएसआई एसएससी) द्वारा आयोजित की जाएगी।
आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो सामान्य/ईडब्ल्यूएस और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी)-पुरुष उम्मीदवारों के लिए 800 रुपए के साथ जीएसटी, सामान्य/ईडब्ल्यूएस और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी)-महिला/ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए 600 रुपए के साथ जीएसटी, अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 200 रुपए के साथ जीएसटी, और बेंचमार्क दिव्यांगता वाले (पीडब्ल्यूबीडी) उम्मीदवारों के लिए 200 रुपए के साथ जीएसटी निर्धारित किया गया है।
कैंडिडेट्स ध्यान दें कि ट्रेनिंग की कुल अवधि कॉन्ट्रैक्ट की तारीख से एक वर्ष होगी।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में 2026 के त्योहारी सीजन में कारोबार 7 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचने का अनुमान: कैट

भारत में 2026 के त्योहारी सीजन (नवरात्रि से लेकर दीपावली तक) में कारोबार 7 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंचने का अनुमान है, यह पिछले साल के आंकड़े से 15-18 प्रतिशत है। यह जानकारी कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की ओर से दी गई।
कैट के नेशनल सेक्रेटरी जनरल और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि यह अनुमान अलग-अलग राज्यों के व्यापार संघों और बाजारों से मिली जानकारी, ग्राहकों की मांग, त्योहारों के दौरान खरीदारी के ट्रेंड और ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों में बढ़ी हुई कमर्शियल गतिविधियों पर आधारित था।
उन्होंने कहा कि पिछले साल त्योहारों के दौरान कुल कारोबार लगभग 6.05 लाख करोड़ रुपए का था, जिसमें 5.40 लाख करोड़ रुपए का सामान और 65,000 करोड़ रुपए की सेवाएं शामिल थीं।
कैट के अनुसार, मौजूदा त्योहारी सीजन में सर्विस सेक्टर में 20-25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है और इसका कारोबार 80,000 करोड़ रुपए से 1 लाख करोड़ रुपए के बीच रहने का अनुमान है।
त्योहारों के समय बढ़ने वाली मांग से ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स डिलीवरी, वेयरहाउसिंग, होटल, रेस्टोरेंट, टूरिज्म, कैटरिंग, इवेंट मैनेजमेंट और लोकल ट्रांसपोर्टेशन जैसे सेक्टर को फायदा होने की उम्मीद है।
कैट के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, त्योहारों के दौरान होने वाले व्यापार में ग्रोसरी और फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, इसके बाद सोना, चांदी और ज्वेलरी का नंबर आता है जिनकी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत होगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल सामान की हिस्सेदारी 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रेडीमेड कपड़े और गिफ्ट आइटम की हिस्सेदारी 7-7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
व्यापारी संगठन ने कहा कि होम डेकोर और फर्नीचर व फर्निशिंग की हिस्सेदारी 5-5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
बाकी कैटेगरी में टेक्सटाइल और फैब्रिक, मिठाई और नमकीन, पूजा का सामान, फल और ड्राई फ्रूट्स, बेकरी और कन्फेक्शनरी, जूते-चप्पल और अन्य सामान व उनसे जुड़े बिजनेस शामिल हैं।
खंडेलवाल ने कहा कि त्योहारों के मौसम में धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और कमर्शियल इवेंट्स – जैसे रामलीला, दुर्गा पूजा सेलिब्रेशन, गरबा और डांडिया इवेंट्स, मेले, एग्जीबिशन और कम्युनिटी गैदरिंग – के जरिए भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
उन्होंने कहा कि त्योहारों के बिजनेस में होने वाली संभावित बढ़ोतरी से पता चलता है कि कंज्यूमर अब स्थानीय स्तर पर बने प्रोडक्ट्स, हैंडीक्राफ्ट, भारतीय ब्रांड और माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) द्वारा बनाए गए सामान को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
खंडेलवाल ने इस ट्रेंड के लिए कुछ हद तक ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे इनिशिएटिव्स को मिली बढ़ती स्वीकार्यता को जिम्मेदार बताया।
उन्होंने कंज्यूमर्स से त्योहारों के मौसम में भारतीय प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देने की अपील की और कहा कि इससे व्यापारियों, कारीगरों, एमएसएमई, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और स्थानीय सर्विस प्रोवाइडर्स को फायदा होगा।
कैट ने भरोसा जताया कि नवरात्रि से दीपावली 2026 तक चलने वाला त्योहारों का मौसम देश के व्यापार, सर्विस सेक्टर और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा।
राष्ट्रीय समाचार
एयर इंडिया की फ्रैंकफर्ट-दिल्ली फ्लाइट को जयपुर में करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग, हाईजैक अलर्ट से मचा हड़कंप

फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को बुधवार सुबह सुरक्षा अलर्ट मिलने के बाद जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फ्लाइट में कथित हाईजैक खतरे से जुड़ा संकेत मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और विमान को दिल्ली के बजाय जयपुर डायवर्ट कर दिया गया।
एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-2030 फ्रैंकफर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। भारतीय हवाई क्षेत्र के करीब पहुंचने के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को एक सुरक्षा अलर्ट प्राप्त हुआ, जिसके बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग के लिए एहतियाती कदम उठाए गए। विमान को जयपुर के राजस्थान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतारा गया, जहां उसे सुरक्षा जांच के लिए अलग-थलग (आइसोलेशन बे) क्षेत्र में ले जाया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सुबह करीब 9 बजे कुछ सेकंड के लिए इमरजेंसी सिग्नल प्राप्त हुआ। इसके बाद करीब 9:10 बजे विमान को जयपुर की ओर मोड़ने का फैसला लिया गया। विमान ने लगभग 9:45 बजे जयपुर हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की।
लैंडिंग के बाद विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने विमान की गहन जांच शुरू की। फिलहाल किसी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच प्रक्रिया जारी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान से कथित तौर पर “स्क्वॉड 7500” सिग्नल प्रसारित हुआ था। विमानन क्षेत्र में यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ट्रांसपोंडर कोड है, जिसका उपयोग पायलट किसी संभावित हाईजैकिंग या विमान में अवैध हस्तक्षेप की स्थिति की जानकारी एयर ट्रैफिक कंट्रोल को गोपनीय तरीके से देने के लिए करते हैं।
इसी संकेत के मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं और विमान की प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान के सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकालकर एयरपोर्ट टर्मिनल के निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में ले जाया गया। किसी के घायल होने या किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है।
घटना के बाद कुछ समय के लिए यात्रियों के बीच चिंता का माहौल जरूर बना, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों और एयरपोर्ट प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखा।
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विमान से हाईजैक अलर्ट क्यों प्रसारित हुआ। यह तकनीकी त्रुटि थी, गलत संकेत था या फिर किसी अन्य कारण से यह कोड सक्रिय हुआ, इसकी जांच की जा रही है।
घटना के समय तक एयर इंडिया और जयपुर एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
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