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Tuesday,29-September-2026
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व्यापार

सोने और चांदी खरीदारों के लिए खुशखबरी, कीमतें 2.5 प्रतिशत तक गिरीं

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सोने और चांदी में सोमवार के सत्र में गिरावट देखने को मिली और शुरुआती कारोबार में ही दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 2.5 प्रतिशत तक कम हो गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स)पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,881 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,50,100 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

फिलहाल 9:50 पर यह 2,721 रुपए या 1.80 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,48,160 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

अब तक के कारोबारी सत्र में सोने ने 1,47,667 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,50,100 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ।

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है।

चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 2,34,696 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,32,300 रुपए प्रति किलो पर खुला।

फिलहाल यह 5,490 रुपए या 2.34 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,29,206 रुपए प्रति किलो पर थी।

अब तक के कारोबारी सत्र में चांदी ने 2,28,035 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,32,300 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ।

भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखी जा रही है। सोना 2.09 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,230 डॉलर प्रति औंस और चांदी 3.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 62.43 डॉलर प्रति औंस पर थी।

जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह फेड की ओर से ब्याज दरों के बढ़ने की आशंका और डॉलर इंडेक्स में लगातार तेजी को माना जा रहा है, जो कि अब 100.83 पर पहुंच गया है।

डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी मुद्रा डॉलर की दुनिया की छह बड़ी मुद्राओं- यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक- के मुकाबले स्थिति को दिखाता है।

राष्ट्रीय समाचार

भारत की औद्योगिक वृद्धि दर अगस्त में बढ़कर 8 प्रतिशत हुई, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर शीर्ष पर रहा

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भारत का औद्योगिक उत्पादन अगस्त में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ा है। इसकी वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन करना था। यह जानकारी सोमवार को सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में दी गई।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अगस्त के दौरान 9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

आधिकारिक बयान के अनुसार, “रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने लगातार तीन महीनों में 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर्ज की है।”

यह अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि देश के इंजीनियरिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर 23 में से 18 उद्योग समूहों ने अगस्त में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इस दौरान सबसे अधिक योगदान देने वाले तीन प्रमुख उद्योगों में मोटर वाहनों का विनिर्माण, जिसमें 25.2 प्रतिशत वृद्धि हुई, इलेक्ट्रिकल उपकरणों का विनिर्माण, जिसमें 30.9 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, और मशीनरी एवं उपकरणों का विनिर्माण, जिसमें 25.3 प्रतिशत वृद्धि हुई, शामिल हैं।

बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में अगस्त के दौरान 12.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

हालांकि, खनन क्षेत्र में अगस्त के दौरान 5.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।

उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़ों के अनुसार, कैपिटल गुड्स, यानी कारखानों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के उत्पादन में अगस्त में 16.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई। यह खंड अर्थव्यवस्था में हो रहे वास्तविक निवेश को दर्शाता है, जिसका आगे चलकर रोजगार और आय के सृजन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

अगस्त के दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी के उत्पादन में भी 11.1 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि हुई। यह बढ़ती आय के बीच इन वस्तुओं की उपभोक्ता मांग में वृद्धि को दर्शाता है। वहीं, साबुन और कॉस्मेटिक्स जैसे कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स के उत्पादन में महीने के दौरान 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स सेक्टर में भी 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि हाईवे, बंदरगाह और रेलवे परियोजनाओं में सरकार के बड़े निवेश से प्रेरित रही। ऐसी परियोजनाएं बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने के साथ-साथ समग्र आर्थिक विकास दर को बढ़ावा देती हैं।

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व्यापार

वैश्विक तनावों के चलते धराशायी हुआ बाजार; सेंसेक्स 1,124 अंक फिसला, निफ्टी में 1.56 प्रतिशत की गिरावट

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भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ।

इस दौरान, घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों में भारी बिकवाली देखी गई, और बीएसई सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर आ गया, तो वहीं निफ्टी50 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर आ गया।

दिन के कारोबार में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 73,895.74 से 160.91 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 73,734.83 पर खुला, और एक समय यह 1,179.51 अंक यानी 1.59 प्रतिशत गिरकर 72,716.23 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।

वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,140.50 से 0.32 प्रतिशत गिरकर 23,064.90 पर खुला और एक समय यह 378.3 अंक यानी 1.63 प्रतिशत गिरकर 22,762.20 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के नवीनतम प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल ने निवेशकों के विश्वास को कमजोर कर दिया।

व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 क्रमशः 1.63 प्रतिशत और 1.85 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।

सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा; वहीं निफ्टी आईटी ने सबसे कम गिरावट के साथ बेहतर प्रदर्शन किया।

निफ्टी50 इंडेक्स में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इंफोसिस और एचडीएफसी लाइफ को छोड़कर बाकी सभी शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इनमें सबसे ज्यादा गिरावट टीएमपीवी, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, पावरग्रिड और एलएंडटी के शेयरों में रही।

इस बीच, बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) शुक्रवार के करीब 482 करोड़ रुपए से घटकर 474 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिसमें 8 लाख करोड़ रुपए की गिरावट आई।

सोमवार को बाजार गिरने के कारणों की बात करें तो, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और लड़ाई समाप्त करने के ईरानी प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जबकि ईरान ने जोर देकर कहा कि केवल कूटनीति ही संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के साथ उसके संघर्ष का समाधान कर सकती है। आज वैश्विक शेयर बाजार, तेल बाजार और बॉन्ड बाजार में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिला।

अधिकांश एशियाई बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जिनमें दक्षिण कोरिया का सूचकांक 2 प्रतिशत और जापान का निक्केई सूचकांक 0.10 प्रतिशत गिर गया। चीनी बाजार भी 1 प्रतिशत से अधिक नीचे रहे।

पश्चिम एशिया संकट के समाधान न होने के कारण आपूर्ति संबंधी चिंताओं ने तेल की कीमतों को ऊंचा बनाए रखा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत में मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे को और बढ़ा सकती हैं, क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है।

ब्रेंट क्रूड वायदा 2.2 प्रतिशत बढ़कर 106.6 डॉलर प्रति बैरल हो गया, और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.45 प्रतिशत बढ़कर 93.76 डॉलर प्रति बैरल हो गया। तेल की कीमतों में उछाल और बढ़ती मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच बॉन्ड बाजारों में बिकवाली फिर से शुरू हो गई।

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व्यापार

एनएसई के शेयर आईपीओ इश्यू प्राइस से नीचे फिसले, ऑल-टाइम हाई से 6 प्रतिशत नीचे

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) के हाल ही में सूचीबद्ध हुए शेयर सोमवार को अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के इश्यू प्राइस से नीचे फिसल गए। इसके साथ ही, शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद अपने उच्चतम स्तर से इनमें 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

सुबह के कारोबार में एनएसई का शेयर 1,767 रुपए पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट है।

शेयर ने सुबह करीब 10 बजे 1,761 रुपए का इंट्राडे लो बनाया। यह इश्यू प्राइस से 1.34 प्रतिशत और बीएसई पर दर्ज 1,878 रुपए के उच्चतम स्तर से 6.23 फीसदी नीचे था।

दोपहर 11:30 बजे एनएसई का शेयर मामूली रिकवरी के साथ 1,771 रुपए पर था।

इसके अलावा, शेयर 1,800 रुपए पर सूचीबद्ध हुआ था, जो कि इसके इश्यू प्राइस 1,785 रुपए से अधिक था। इसी दिन शेयर ने 1,878 रुपए का ऑल-टाइम हाई बनाया था।

इससे पहले के कारोबारी सत्र में भी शेयर 0.56 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ था। यह लिस्टिंग प्राइस से मामूली ऊपर था।

एनएसई का 22,561.57 करोड़ रुपए का आईपीओ वर्ष 2024 में हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपए के आईपीओ के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम था।

लिस्टिंग के बाद एनएसई का बाजार पूंजीकरण करीब 4.49 लाख करोड़ रुपए है। इसके साथ एनएसई भारत की 10वीं सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी बन गई है और बाजार पूंजीकरण के मामले में सन फार्मास्युटिकल्स और टाइटन जैसी दिग्गज कंपनियों से आगे है।

एक्सचेंज का आईपीओ 17 सितंबर से 21 सितंबर तक खुला था और इसे 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।

एक्सचेंज को अपने राजस्व का एक बड़ा हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्ज से मिलता है। वित्त वर्ष 2026 में इसके परिचालन से प्राप्त राजस्व में ट्रांजैक्शन चार्ज की हिस्सेदारी 78.65 फीसदी थी।

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