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आईसीआईसीआई बैंक ने आरबीआई की एफसीएनआर(बी) स्वैप सुविधा के तहत 17.88 अरब डॉलर जुटाए
आईसीआईसीआई बैंक ने बुधवार को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा के तहत विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर(बी)) जमा के जरिए करीब 17.88 अरब डॉलर जुटाए हैं।
बैंक ने बताया कि जुटाई गई राशि में से ऐसी जमाओं के बदले बैंक की अंतरराष्ट्रीय शाखाओं और सहायक कंपनियों द्वारा दिए गए ऋण की राशि करीब 9 अरब डॉलर रही। वहीं, ऐसी जमाओं से समर्थित ऋण के बदले बैंक द्वारा अन्य ऋणदाताओं को जारी किए गए स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (एसबीएलसी) करीब 3.63 अरब डॉलर के रहे।
हालांकि, रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आरबीआई की डॉलर जमा योजना के जरिए 100 अरब डॉलर से अधिक की राशि जुटाई गई है।
इसके अलावा, आईसीआईसीआई बैंक ने बताया कि उसने जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान कुल 3.55 अरब डॉलर के अमेरिकी डॉलर-मूल्य वाले बॉन्ड जारी किए हैं।
आरबीआई ने रुपए पर दबाव के बीच विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के लिए 8 जून को यह सुविधा शुरू की थी।
केंद्रीय बैंक के अनुसार, 21 अगस्त तक अधिकृत डीलर बैंकों ने इस योजना के तहत 72.848 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह जुटाया था। इसमें एफसीएनआर(बी) जमा की हिस्सेदारी 65.397 अरब डॉलर थी।
वहीं, 21 अगस्त तक इस सुविधा के तहत ईसीबी और ओएफसीबी के जरिए 7.451 अरब डॉलर का अतिरिक्त विदेशी मुद्रा प्रवाह आया था। ईसीबी और ओएफसीबी के लिए यह सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी।
सरकार ने अगस्त में कहा था कि इस योजना से विदेशी मुद्रा के प्रवाह में तेज वृद्धि हुई है और इसे भारत द्वारा अब तक की गई सबसे बड़ी और सबसे तेज विदेशी मुद्रा जुटाने की कवायद बताया था। यह 2013 की एफसीएनआर(बी) स्वैप योजना के स्तर को भी पार कर गई है।
आरबीआई ने शुरुआत में घोषणा की थी कि एफसीएनआर(बी) विंडो 30 सितंबर तक खुली रहेगी, लेकिन उत्साहजनक प्रतिक्रिया और पर्याप्त विदेशी मुद्रा जुटाए जाने का हवाला देते हुए इसे 31 अगस्त को ही बंद कर दिया गया।
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भारत में डेटा सेंटर की क्षमता 2029 तक बढ़कर 6 गीगावाट होने की उम्मीद

भारत का डेटा सेंटर इंडस्ट्री की क्षमता जून 2026 तक 1.6 गीगावाट की क्षमता से बढ़कर 2029 तक 6 गीगावाट होने की उम्मीद है। इसके लिए करीब 110 अरब डॉलर की पूंजी की जरूरत होगी। इस वृद्धि को एआई वर्कलोड और हाइपरस्केल क्लाउड की तैनाती से बढ़ावा मिलेगा। यह जानकारी बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में डेटा सेंटर क्षेत्र में 101 मेगावाट की मांग दर्ज की गई, जो पिछले तीन वर्षों के पहली छमाही के औसत से 20 प्रतिशत से अधिक है।
इस अवधि में आपूर्ति भी मजबूत रही और 85 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई, जो मुख्य रूप से मुंबई और चेन्नई में केंद्रित रही। पहले से बुक की गई क्षमता की तेजी से डिलीवरी के कारण डेटा सेंटर में मौजूद खाली क्षमता घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 2.8 प्रतिशत पर आ गई, जो बाजार की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां बाजार की गतिशीलता को मूल रूप से बदल रही हैं। वे नई क्षमता का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा सेल्फ-बिल्ड सुविधाओं के जरिए विकसित करने की प्रतिबद्धता जता रही हैं।
हाइपरस्केल सेल्फ-बिल्ड परियोजनाओं के तहत 2029 तक 1.4 गीगावाट क्षमता उपलब्ध होने की उम्मीद है। बड़े निवेश के चलते हैदराबाद और विशाखापत्तनम जैसे शहर गीगावाट-स्तरीय डेटा सेंटर हब में बदल रहे हैं, जबकि मुंबई और चेन्नई जैसे स्थापित बाजार भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं।
हालिया केंद्रीय बजट में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 20 साल की टैक्स हॉलिडे की घोषणा की गई है, जिसे 31 मार्च, 2047 तक बढ़ाया गया है। इससे निवेश प्रतिबद्धताओं में काफी तेजी आई है।
इस नीति के तहत 50 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी पूंजी निवेश प्रतिबद्धताएं आकर्षित हुई हैं। यह पहल भारत को वैश्विक एआई और क्लाउड सेवाओं की रूटिंग के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ लंबी अवधि के पूंजी निवेश के जोखिम को कम करने में मदद कर रही है।
इस विस्तार के लिए रियल एस्टेट निर्माण पर 4 अरब डॉलर, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग (एमईपी) बुनियादी ढांचे पर 18 अरब डॉलर तथा सर्वर और रैक समेत आईटी उपकरणों पर 88 अरब डॉलर की जरूरत होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2033 तक छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) विकसित होने से बड़े डेटा सेंटर कैंपस के लिए ऑफ-ग्रिड बिजली समाधान की भविष्य में संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।
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मध्य पूर्व में तनाव से भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद, सेंसेक्स 374 अंक फिसला

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के कारण भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 373.93 अंक या 0.49 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,570.35 और निफ्टी 141.35 अंक या 0.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,914.45 पर था।
बाजार में गिरावट व्यापक आधार पर थी। लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 332.90 अंक या 0.53 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63,001.60 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 74 अंक या 0.37 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,812.25 पर था।
बाजार में गिरावट का नेतृत्व ऑटो और आईटी शेयरों में किया। निफ्टी ऑटो 1.79 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 1.75 प्रतिशत, निफ्टी आईटी 1.25 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 0.81 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 0.75 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 0.73 प्रतिशत और निफ्टी कंजप्शन 0.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
दूसरी तरफ निफ्टी एनर्जी 0.59 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 0.54 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.38 प्रतिशत, निफ्टी ऑयलएंडगैस 0.33 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 0.21 प्रतिशत और निफ्टी इन्फ्रा 0.03 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, टाइटन, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा और आईटीसी गेनर्स थे। एशियन पेंट्स, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक, एचसीएल टेक, बीईएल, इन्फोसिस, एसबीआई, इंडिगो, एचयूएल, टीसीएस, टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक, इटरनल, टाटा स्टील और अल्ट्राटेक सीमेंट लूजर्स थे।
बाजार के जानकारों ने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध फिर से शुरू होने से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। इससे कच्चे तेल की कीमतें फिर से 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। यह भारत के साथ वैश्विक बाजारों पर भी दबाव बनाने का काम कर रहा है। इससे ऑटो, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
व्यापार
अदाणी पोर्ट्स ने अगस्त में संभाला 5 करोड़ मीट्रिक टन कार्गो, 19 प्रतिशत की हुई वृद्धि

अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) ने बुधवार को कहा कि अगस्त 2026 में कंपनी ने 5 करोड़ मीट्रिक टन कार्गो संभाला है। इसमें सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
कंपनी ने कहा कि यह कंपनी द्वारा किसी एक महीने में संभाला गया, अब तक का सबसे अधिक कार्गो है, जो उसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स की क्षमता को दिखाता है।
अगस्त में कार्गो ढुलाई में वृद्धि की वजह ड्राई कार्गो का सालाना आधार पर 25 प्रतिशत और कंटेनर वॉल्यूम का सालाना आधार पर 15 प्रतिशत बढ़ना था।
एपीएसईजेड ने कहा कि यह प्रदर्शन उसकी अलग-अलग तरह से ग्रोथ करने की रणनीति की सफलता को दिखाती है, जिसमें विझिंजम और कोलंबो में ट्रांसशिपमेंट ऑपरेशन्स की वजह से कंटेनर वॉल्यूम में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
अगस्त तक, इस साल अब तक एपीएसईजेड ने 23.44 करोड़ मीट्रिक टन कार्गो संभाला, जो पिछले साल के मुकाबले 16 प्रतिशत ज्यादा है। इस बढ़ोतरी में ड्राई कार्गो (17 प्रतिशत की वृद्धि) और कंटेनर (15 प्रतिशत की वृद्धि) का अहम योगदान रहा।
कंपनी ने कहा कि महीने का यह शानदार प्रदर्शन एपीएसईजेड को वित्त वर्ष 2031 तक सालाना 100 करोड़ मीट्रिक टन कार्गो संभालने के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ने में मदद करेगा।
इसके बाद, बुधवार को बीएसई पर एपीएसईजेड के शेयरों में तेजी देखी गई। शेयर 1.61 प्रतिशत या 27 रुपए प्रति शेयर चढ़कर दोपहर 1:20 बजे तक 1,674 रुपए के इंट्राडे हाई पर पहुंच गए।
एपीएसईजेड का 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर 1,891.80 रुपए और निचला स्तर 1,293.10 रुपए छुआ है।
पिछले दस सालों में इस स्टॉक में 500 प्रतिशत से ज्यादा और पिछले पांच सालों में लगभग 120 प्रतिशत की तेजी आई है। पिछले तीन सालों और एक साल में इसने क्रमशः 100 प्रतिशत और 24 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
इसके अलावा, कंपनी लिक्विड कार्गो में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है और साथ ही ड्राई कार्गो सेगमेंट में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
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