अंतरराष्ट्रीय समाचार
जापान रक्षा क्षेत्र में एआई और मानवरहित तकनीक का इस्तेमाल तेज करेगा: प्रधानमंत्री ताकाइची
जापान अपनी रक्षा तैयारियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मानवरहित तकनीक के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने बुधवार को इस मसले पर सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज (एसडीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की। उन्होंने कहा कि ट्रेडिशनल सैन्य उपकरणों की तुलना में तेजी से विकसित हो रही नई तकनीकों को रक्षा व्यवस्था में जल्द शामिल करना जरूरी है।
जापानी न्यूज एजेंसी क्योडो के अनुसार, एसडीएफ की कमांडर-इन-चीफ के तौर पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए ताकाइची ने कहा कि एआई और मानवरहित रक्षा प्रणालियों जैसी तकनीकों को ज्यादा तेजी से अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों का विकास पारंपरिक रक्षा उपकरणों की तुलना में बिल्कुल अलग गति से हो रहा है।
ताकाइची ने कहा कि जापान इस साल के अंत तक अपनी तीन प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा दस्तावेजों में संशोधन करने की तैयारी कर रहा है। ये दस्तावेज अगले कई वर्षों के लिए देश की रक्षा नीति की दिशा तय करेंगे।
उन्होंने कहा, “संशोधित दस्तावेज जापान की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक नई दिशा तय करेंगे। इसके पीछे बदलता क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल है, जहां कई देश एआई को सैन्य प्रणालियों के साथ जोड़ने और बड़े पैमाने पर मानवरहित विमानों के इस्तेमाल की क्षमता विकसित करने में तेजी दिखा रहे हैं।”
जापान की मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति और दो अन्य प्रमुख रक्षा दस्तावेज 2022 में तैयार किए गए थे। इन्हें अगले करीब 10 वर्षों की रक्षा नीति को ध्यान में रखकर बनाया गया था, लेकिन अब ताकाइची सरकार ने इनके संशोधन की समयसीमा आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
इसके पीछे मुख्य वजह पूर्वी एशिया में तेजी से बदलते समीकरण है। जापान विशेष रूप से चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता और उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम को लेकर चिंतित है।
टोक्यो का मानना है कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे में केवल पारंपरिक लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों या अन्य सैन्य प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। एआई से लैस सिस्टम, ड्रोन और अन्य मानवरहित प्लेटफॉर्म भविष्य की सैन्य रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जापान पर अमेरिका की ओर से भी रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अपने सहयोगी देशों से रक्षा क्षेत्र में ज्यादा निवेश करने की मांग करता रहा है।
2022 में जापान ने अपनी रक्षा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए ‘काउंटरस्ट्राइक क्षमता’ हासिल करने का फैसला किया था। यह कदम द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अपनाई गई उसकी पारंपरिक रूप से रक्षात्मक सैन्य नीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना गया।
उसी समय जापान ने रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य भी तय किया था।
अब एआई और मानवरहित सैन्य तकनीकों पर जोर इस बात का संकेत है कि जापान अपनी रक्षा नीति को केवल ज्यादा हथियार खरीदने तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि तकनीकी बदलावों के साथ अपनी सैन्य क्षमता को भी बदलना चाहता है।
रक्षा मंत्रालय और सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के शीर्ष कमांड अधिकारियों की यह बैठक ताकाइची के पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद पहली बार हुई है।
यह बैठक पहली बार 1964 में आयोजित की गई थी और आम तौर पर हर साल होती रही। हालांकि सितंबर 2019 के बाद इसमें नियमितता नहीं रही। कोरोना महामारी के दौरान 2020 में इसे दूरस्थ माध्यम से आयोजित किया गया था।
अब करीब सात साल बाद शीर्ष सैन्य अधिकारियों की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब जापान अपनी रक्षा नीति की अगली दिशा तय करने की तैयारी कर रहा है।
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नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या ग्यारह सौ के पार, सर्च ऑपरेशन जारी

नेपाल फ्लैश फ्लड में मरने वालों की संख्या ग्यारह सौ के पार पहुंच गई है। बुधवार को नेपाल प्रशासन ने ताजा आंकड़े साझा करते हुए बताया कि सर्च (खोज), रेस्क्यू (बचाव) और रिलीफ (बचाव) ऑपरेशन जारी है।
नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि पिछले हफ्ते आई भयानक बाढ़ में बहे 1,114 शव बुधवार सुबह 9 बजे तक बरामद कर लिए गए थे।
सबसे ज्यादा शव दक्षिणी चितवन जिले से बरामद किए गए (348), इसके बाद नवलपरासी ईस्ट (217), नवलपरासी वेस्ट (190), नुवाकोट (155), गोरखा (66), धाडिंग (59), रसुवा (41) और तनहुं (38) का नंबर आता है। इन आंकड़ों में अलग-अलग जगहों से बरामद शरीर के अंग भी शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि अब तक 95 शवों की पहचान कर ली गई है और उन्हें उनके रिश्तेदारों को सौंप दिया गया है।
एनडीआरआरएमए के अनुसार, 3,916 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें सरकारी कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी, चुने हुए प्रतिनिधि, विदेशी नागरिक, विदेशी पर्यटकों के साथ आए नेपाली लोग, स्थानीय निवासी और पनबिजली परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूर शामिल हैं।
हालांकि, एनडीआरआरएमए और नेपाल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों में अंतर है।
नेपाल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 4,858 लोग (जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं) लापता हैं। ये आंकड़े बुधवार सुबह 8 बजे तक इकट्ठा की गई जानकारी के आधार पर साझा किए गए।
इस बीच, बाढ़ पीड़ित 11 पनबिजली परियोजनाओं से लापता बताए गए कई लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।
इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल (आईपीपीएएन) के अनुसार, रसुवा और नुवाकोट में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी कॉरिडोर के किनारे 11 पनबिजली परियोजनाओं से जुड़े 983 लोगों की स्थिति का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
नेपाली सेना के जवान, भारतीय और चीनी टनल बचाव टीमों के साथ मिलकर, कई पनबिजली परियोजनाओं में सुरंगों के अंदर गहराई तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि लापता लोगों का पता चल सकता है या नहीं। पावर डेवलपर्स की प्राइवेट सेक्टर की प्रतिनिधि संस्था ने मंगलवार शाम को बताया कि कई प्रोजेक्ट्स पर बचाव कार्य जारी हैं। इनमें अपर त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (60 एमडब्ल्यू), चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (22 एमडब्ल्यू), लांगटांग खोला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (20 एमडब्ल्यू), त्रिशूली 3बी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (37 एमडब्ल्यू) और अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (216 एमडब्ल्यू) शामिल हैं।
आईपीपीएएन के अनुसार, जब बाढ़ आई, तो अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर 1,433 लोग काम कर रहे थे।
इनमें से 876 लोगों को या तो बचा लिया गया है या उनसे संपर्क हो गया है।
आईपीपीएएन के मुताबिक, जिन लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चला है, उनमें प्रोजेक्ट कंपनी के 15 कर्मचारी, ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) कॉन्ट्रैक्टर डूसान के 78 कर्मचारी, एंड्रिट्ज हाइड्रो के 94 कर्मचारी, कंसल्टेंट (लाहमेयर इंटरनेशनल जीएमबीएच और जेड कंसल्ट प्राइवेट लिमिटेड के जॉइंट वेंचर) के सात और सिविल सब-कॉन्ट्रैक्टर पावरचाइना के 385 वर्कर शामिल हैं।
मंगलवार तक रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (111 एमडब्ल्यू) से लापता बताए गए 91 लोगों का कोई पता नहीं चल सका था।
नेपाली सेना की अगुवाई वाली एक टीम ने सोमवार को मौके का मुआयना किया और यह रिपोर्ट देने के बाद लौटी कि उन्हें पावरहाउस टनल के अंदर कोई नहीं मिला।
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अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने शुरू की कार्रवाई, खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी हमले शुरू कर दिए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बताया कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों पर जवाबी कार्रवाई की गई है।
मंगलवार रात (स्थानीय समयानुसार) अपने आधिकारिक समाचार माध्यम ‘सेपाह न्यूज’ पर जारी बयान में आईआरजीसी ने कहा कि हमलावरों के खिलाफ उसका जवाब शुरू हो गया है। आईआरजीसी ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने एक अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है।
आईआरजीसी ने कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में कैंप टिटिन और बहरीन में शेख ईसा एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए। संगठन का दावा है कि इन हमलों में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए और कई महत्वपूर्ण सैन्य सुविधाएं तथा लड़ाकू हेलीकॉप्टर नष्ट हुए।
आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिका के हालिया हमलों से होर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने की अवधि और बढ़ सकती है। साथ ही, इससे ईरानी सशस्त्र बल विदेशी हस्तक्षेप का मुकाबला करने के लिए और अधिक दृढ़ हो जाएंगे।
शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के तटीय क्षेत्रों में कई नागरिक ठिकानों पर हमला किया। संगठन ने दावा किया कि यह कार्रवाई अमेरिका ने ‘हताशा’ में की और यह होर्मोजगान प्रांत में एक शादी समारोह पर हुए कथित अमेरिकी हमले के बाद की गई।
जॉर्डन की सशस्त्र सेना (जेएएफ) ने बाद में बताया कि मंगलवार शाम उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से आए 13 में से 10 बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया।
जॉर्डन के अनुसार, बाकी तीन मिसाइलें आबादी वाले क्षेत्रों से दूर गिरीं और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने होर्मोजगान प्रांत के राजनीतिक एवं सुरक्षा मामलों के उप-गवर्नर अहमद नफीसी के हवाले से कहा कि सिरिक काउंटी में एक शादी समारोह को निशाना बनाए गए अमेरिकी हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत हुई। मृतकों में एक चार साल का बच्चा और एक महिला भी शामिल हैं। 50 से अधिक लोग घायल बताए गए हैं।
मंगलवार शाम दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इसी दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आईआरजीसी के ठिकानों पर हमले शुरू करने की घोषणा की।
ईरानी मीडिया के अनुसार, धमाकों की आवाजें सिरिक, बंदर अब्बास, केशम, जास्क, कोनारक, चाबहार, जीरोफ्त और असलूयेह सहित कई क्षेत्रों में सुनी गईं।
ईरान के प्रमुख सैन्य कमांड खातम अल-अंबिया सेंट्रल मुख्यालय ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी ‘हवाई आक्रमण’ के जवाब में ईरानी सशस्त्र बल अमेरिका को ‘कड़ा और करारा जवाब’ देंगे। बयान में कहा गया कि ईरान अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाना जारी रखेगा।
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अमेरिकी राजदूत गोर किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जापारोव से मिले, साझेदारी बढ़ाने पर जताई प्रतिबद्धता

अमेरिका ने किर्गिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई है। अमेरिकी पक्ष ने सोमवार को बिश्केक में किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के कई नए अवसर मौजूद हैं।
अमेरिका के नई दिल्ली में राजदूत और दक्षिण और मध्य एशिया में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रतिनिधि सर्जियो गोर ने कहा, “बिश्केक में किर्गिज गणराज्य के राष्ट्रपति झापारोव से मुलाकात की। हमारे पास दोनों देशों के लिए मिलकर काम करने के कई बेहतरीन अवसर हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका अगले महीने राष्ट्रपति जापारोव के स्वागत के लिए उत्सुक है। इस दौरान दोनों देश अपनी बढ़ती साझेदारी को और आगे ले जाने की दिशा में बातचीत करेंगे।
दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय सहयोग, निवेश, डिजिटल तकनीक और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई। जापारोव आने वाले समय में अमेरिका की यात्रा पर भी जाने वाले हैं।
इस मुलाकात को मध्य एशिया में अमेरिका की बढ़ती सक्रियता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका और किर्गिस्तान के बीच व्यापार, निवेश, सुरक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
अमेरिका शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का सदस्य नहीं है। गोर के दौरे को आधिकारिक रूप से किर्गिजस्तान की स्वतंत्रता दिवस की 35वीं वर्षगांठ और विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन से जोड़ा गया है।
पिछले साल तियानजिन में हुए एससीओ सम्मेलन के दौरान मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की एक साथ तस्वीरें अमेरिका में चर्चा का कारण बनी थीं। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति और रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव के बीच पीएम मोदी की चीन यात्रा से वॉशिंगटन काफी असहज हो गया था।
विपक्ष और आलोचकों ने ट्रंप पर आरोप लगाया था कि उनकी नीतियों की वजह से भारत अमेरिका से दूर जा रहा है। ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर कहा था कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के पाले में खो दिया है।
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