राष्ट्रीय समाचार
झारखंड छात्र आंदोलन का 24वां दिन : चार मंत्रियों का समूह करेगा रिफॉर्म मंच से बातचीत
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सोमवार को एक बार फिर वार्ता होगी। आंदोलन के 24वें दिन दोपहर दो बजे मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार के चार मंत्रियों का समूह जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करेगा।
छात्रों को उनके विधिक सलाहकारों के साथ वार्ता में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। आंदोलनकारी छात्र जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की सीबीआई जांच की दो प्रमुख मांगों पर कायम हैं। सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद अब तक दोनों प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में आज की वार्ता को आंदोलन के मौजूदा गतिरोध को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्य सरकार की ओर से छात्रों को बातचीत का यह प्रस्ताव रविवार को दिया गया। अनुमंडल पदाधिकारी और एडीएम, लॉ एंड ऑर्डर ने आंदोलनकारियों को वार्ता की जानकारी दी। सरकार ने छात्रों के विधिक सलाहकारों को भी बातचीत में शामिल होने की अनुमति देने की बात कही है। वार्ता से एक दिन पहले रविवार शाम आंदोलनकारी छात्रों ने रांची में विरोध मार्च निकाला। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकला मार्च अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचा। यहां छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव के पुतले फूंके।
छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराया। छात्रों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान किया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच का कहना है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची पहुंचेंगे। छात्र आंदोलन की दो प्रमुख मांगों को लेकर सरकार का अब तक का रुख अलग है। वर्ष 2024 में हुई जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के माध्यम से दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं।
सरकार का तर्क है कि इस चरण पर परीक्षा रद्द करना व्यावहारिक रूप से कठिन है। सरकार यह भी कहती रही है कि परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की जांच पहले हुई है और मामला न्यायिक प्रक्रिया से भी गुजर चुका है। फिलहाल मामले से जुड़ी जांच राज्य की सीआईडी कर रही है। छात्र सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं जता रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में अब तक हुई जांच से उनका विश्वास बहाल नहीं हुआ है। वे पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से सीबीआई जांच के विकल्प के रूप में सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का प्रस्ताव सामने आ चुका है। हालांकि, आंदोलनकारी छात्र इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। इस बीच, सरकार और छात्रों के बीच पूर्व की वार्ताओं में परीक्षा सुधार से जुड़ी कई मांगों पर सहमति बनी है। सरकार 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और बैकलॉग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा भी कर चुकी है। आंदोलनकारी छात्रों ने पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
हालांकि, सरकार के साथ आज होने वाली बातचीत में मुख्य फोकस भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों और छात्रों की प्रमुख मांगों पर रहने की संभावना है। अब सबकी निगाहें दोपहर दो बजे होने वाली इस वार्ता पर टिकी हैं। यदि सरकार और छात्रों के बीच किसी साझा समाधान पर सहमति बनती है तो करीब साढ़े तीन सप्ताह से चल रहे आंदोलन को विराम देने की राह खुल सकती है। वहीं, बातचीत विफल रहने की स्थिति में 20 अगस्त के प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को लेकर आंदोलन और तेज होने की संभावना है।
राष्ट्रीय समाचार
नोएडा में डेढ़ करोड़ की चोरी का खुलासा; छह आरोपी गिरफ्तार, 1.48 करोड़ कैश बरामद

नोएडा के सेक्टर-25 स्थित गैराज से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की चोरी के मामले में नोएडा पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 करोड़ 48 लाख रुपये की नकदी बरामद की है। बरामद रकम में 500-500 रुपये के नोटों की 296 गड्डियां शामिल हैं। इसके अलावा वारदात में इस्तेमाल की गई बिना नंबर प्लेट की कार भी पुलिस ने बरामद की है। भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद पुलिस इस मामले में आयकर विभाग से भी पत्राचार करने की तैयारी कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, थाना सेक्टर-20 पुलिस ने 18 अगस्त 2026 को लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से चोरी की इस घटना का पर्दाफाश किया। छह आरोपियों को रजनीगंधा चौराहे से फिल्मसिटी की ओर जाने वाले रास्ते से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पवन उर्फ शिवम उर्फ कांचा, अवनीश कुमार, जितेंद्र कुमार, सुमित कुमार, अनिल कुमार और नीशू चौहान के रूप में हुई है।
जांच में सामने आया है कि इस मामले का मुख्य आरोपी अवनीश कुमार अपने कुछ साथियों के साथ सीए फर्म के माध्यम से लोगों से निवेश के नाम पर रकम जुटाने का काम करता था। पुलिस के अनुसार, अवनीश पिछले करीब एक साल से टीपीएफ यानी ट्रेडिंग प्रॉफिट फंड में भी काम कर रहा था। आरोपियों द्वारा लोगों को निवेश के लिए तैयार कर उनसे बड़ी रकम ली गई थी। पुलिस के मुताबिक, जिस 1 करोड़ 48 लाख रुपये की रकम की चोरी हुई, वह शिकायतकर्ता से आशीष ने निवेशक उपलब्ध कराने के नाम पर ली थी।
अवनीश को अपना लगाया हुआ पैसा वापस नहीं मिल रहा था। इसी वजह से उसने रकम वापस हासिल करने के लिए चोरी की योजना बनाई। बताया गया है कि अवनीश ने अपने साथियों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर सेक्टर-25 स्थित आशीष के गैराज को निशाना बनाया। योजना के तहत गैराज से भारी मात्रा में नकदी चोरी कर ली गई। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और स्थानीय सूचना के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई और नकदी बरामद कर ली।
गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी अवनीश कुमार की उम्र 33 वर्ष है और वह बीएससी पास है। पुलिस के अनुसार वह पिछले एक वर्ष से टीपीएफ में काम कर रहा था। पवन उर्फ शिवम उर्फ कांचा की उम्र 28 वर्ष है और वह दिल्ली-एनसीआर तथा मथुरा में ओला-उबर टैक्सी चलाता था। जितेंद्र कुमार 24 वर्ष का है और शराब की दुकान पर सेल्समैन के रूप में काम करता है। वहीं 22 वर्षीय सुमित कुमार प्राइवेट नौकरी करता है। 22 वर्षीय अनिल कुमार भी शराब की दुकान पर सेल्समैन बताया गया है, जबकि 29 वर्षीय नीशू चौहान खेती का काम करता है।
पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरी की रकम के पीछे निवेश से जुड़ा पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी पवन के खिलाफ मथुरा के राया और छाता थानों में आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, चोरी का माल रखने, अपहरण, मारपीट और अन्य धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं। उसके खिलाफ वर्ष 2015 से लेकर 2025 तक अलग-अलग मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। इसी तरह आरोपी अनिल के खिलाफ हाथरस जिले में एनडीपीएस एक्ट, आबकारी अधिनियम और अन्य धाराओं में मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। जितेंद्र के खिलाफ बुलंदशहर के अरनिया थाने में एनडीपीएस एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं।
पुलिस अब आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के साथ-साथ चोरी की रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल की भी जांच कर रही है। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने के बाद पुलिस की जांच अब केवल चोरी की घटना तक सीमित नहीं रहने वाली है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई थी, निवेश के नाम पर कितने लोगों से पैसा लिया गया था और इस रकम का वास्तविक स्रोत क्या था।
भारी मात्रा में कैश बरामद होने के कारण पुलिस आयकर विभाग से भी पत्राचार करेगी। पुलिस अब मामले में फरार बताए जा रहे अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। डीसीपी नोएडा साद मियां खान के मुताबिक, बरामदगी और गिरफ्तारी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
राजनीति
अमित शाह के बयान पर इमरान मसूद का पलटवार, कहा- शर्म आपको आनी चाहिए जो छात्रों पर लाठियां चलवाईं

‘वंदे मातरम’ विवाद को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सोनिया गांधी पर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति का प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है।
अमित शाह ने कहा था कि सोनिया गांधी को शर्म आनी चाहिए, इस पर इमरान मसूद ने कहा कि शर्म आपको आनी चाहिए जो आपने दिल्ली छात्र अंदोलन के दौरान बच्चों पर लाठियां चलवाईं और बिहार में छात्रों पर एके47 से फायरिंग की गई।
इमरान मसूद ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान अमित शाह पर हमला बोलते हुए कहा, “आपको शर्म आनी चाहिए कि आपने इस देश का क्या हाल कर दिया है?”
विरोध-प्रदर्शनों में बच्चों के इस्तेमाल को लेकर योग गुरु बाबा रामदेव के बयान पर भी इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “बाबा जी, आपका उद्योग अच्छा चल रहा है। अपना उद्योग चलाइए। बच्चों को शिक्षा लायक आप छोड़ोगे कहां?”
इमरान मसूद ने कहा, “देश की जवानी खतरे में नहीं है। देश के युवा तो देश के काम के लिए तैयार हैं। भाजपा इसे बर्बाद कर रही है।”
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी द्वारा चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दिए जाने पर भी इमरान मसूद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “सईयां कोतवाल है तो डर किस चीज का, उन्हें तो हर मामले में क्लीन चिट मिलनी ही थी।”
वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा शादी की जवाबदेही, बच्चों के कल्याण और माता-पिता की सुरक्षा से जुड़े व्यापक सामाजिक कानून पैकेज की घोषणा का इमरान मसूद ने समर्थन किया। उन्होंने कहा, “यह अच्छी बात है। हर चीज का विरोध करने की जरूरत नहीं है।” उनका कहना है कि अगर कोई कदम समाज के हित में है तो उसका स्वागत होना चाहिए। विपक्ष हर चीज का मुद्दा बनाकर विरोध करने में यकीन नहीं रखती है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में 2030 तक करीब 62 प्रतिशत लोगों के पास होगा 5जी कनेक्शन

भारत में लगभग 2030 तक 62 प्रतिशत लोगों के पास 5जी कनेक्शन होने की उम्मीद है, यह एशिया प्रशांत क्षेत्र के औसत 50 प्रतिशत से ज्यादा है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
जीएसएमए की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के साथ-साथ भारत को भी इस क्षेत्र के ‘अग्रणी देशों’ में गिना जाता है, जहां डिजिटल-इकोनॉमी की ग्रोथ को तेज करने और मोबाइल-इंडस्ट्री की स्थिरता को बनाए रखने के लिए रेगुलेटरी आधुनिकीकरण जरूरी है।
भारत में कनेक्टिविटी की चुनौती अब कवरेज से हटकर इस्तेमाल और अपनाने की ओर बढ़ रही है, क्योंकि दक्षिण एशिया में कवरेज का अंतर लगभग 30 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत से भी कम हो गया है।
इस वजह से मोबाइल इंटरनेट अपनाने में खर्च, डिवाइस तक पहुंच, डिजिटल स्किल्स, भरोसा और ऑनलाइन सुरक्षा मुख्य बाधाएं बन गई हैं।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि 2030 तक मोबाइल टेक्नोलॉजी और सेवाएं एशिया-प्रशांत की अर्थव्यवस्था में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देंगी, जो आज के 1 ट्रिलियन डॉलर के मुकाबले 40 प्रतिशत ज्यादा है।
डिजिटल ग्रोथ का अगला दौर इस बात से तय होगा कि सरकारें, ऑपरेटर और टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर चार अहम प्राथमिकताओं पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का तेजी से बढ़ना, डिजिटल भरोसे में कमी, ज्यादा मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग और डिजिटल संप्रभुता में बढ़ती रुचि शामिल हैं।
रिपोर्ट में इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की कोशिशों के उदाहरण के तौर पर भारतनेट और पीएमजीडीआईएसएचए का जिक्र किया गया है। पीएमजीडीआईएसएचए ने 6.4 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण नागरिकों को बुनियादी डिजिटल स्किल्स की ट्रेनिंग दी है।
भारत के लिए डिजिटल भरोसा एक आर्थिक प्राथमिकता बनता जा रहा है। 2026 में इन्फॉर्मेशन-सिक्योरिटी पर खर्च में 11.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जो साइबर-सिक्योरिटी, पहचान, प्राइवेसी और भरोसे से जुड़ी दूसरी सेवाओं की बढ़ती मांग को दिखाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स’ संवेदनशील डेटा को स्टोर करने, प्रोसेस करने और मैनेज करने के लिए भरोसेमंद माहौल बनाने की दिशा में योगदान दे रहे हैं। साथ ही, लोकल, ऑडिट-योग्य और सुरक्षित एआई वर्कलोड के लिए सॉवरेन क्लाउड एनवायरनमेंट में भी दिलचस्पी बढ़ रही है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत उन देशों में भी शामिल है जिन्होंने 6जी स्पेक्ट्रम रोडमैप जारी किया है, जो कनेक्टिविटी और स्पेक्ट्रम प्लानिंग के प्रति इसके लंबे समय के नजरिए को दिखाता है।
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