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Friday,17-July-2026
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ट्रंप प्रशासन की चेतावनी, अमेरिका में चुनावी डेटा पर साइबर हमले का खतरा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने हाल ही में सार्वजनिक किए गए गोपनीय खुफिया और साइबर सुरक्षा आकलनों में चेतावनी दी कि देश के मतदाता पंजीकरण डेटाबेस अब भी विदेशी साइबर हमलों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। अगर यह डेटा चोरी होता है तो उसका दुरुपयोग कई वर्षों तक किया जा सकता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी सुरक्षा पर दिए गए संबोधन के बाद जारी इन दस्तावेजों में कहा गया कि मतदाता पंजीकरण डेटाबेस विदेशी खुफिया एजेंसियों और साइबर हमलावरों के लिए सबसे आकर्षक लक्ष्यों में से एक हैं। इनका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालना और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर करना हो सकता है।

व्हाइट हाउस द्वारा जारी अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में अमेरिका के सभी 50 राज्यों के मतदाता पंजीकरण सिस्टम को हैक करने की कोशिश की गई। इनमें से कम से कम 20 राज्यों में साइबर हमलावरों को सेंध लगाए।

रिपोर्ट में कहा गया, “राज्य स्तर के मतदाता पंजीकरण डेटाबेस विदेशी विरोधी देशों के लिए बेहद आकर्षक लक्ष्य हैं।” इसमें यह भी चेतावनी दी गई है कि मतदाताओं की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी लीक होने का खतरा सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव लंबे समय तक रह सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, चोरी किए गए मतदाता डेटा का इस्तेमाल डाक मतपत्र के लिए फर्जी आवेदन करने, मतदाता पंजीकरण रिकॉर्ड में बदलाव करने, मतदान केंद्र बदलने या मतदाता का नाम सूची से हटाने जैसे कामों में किया जा सकता है।

इस आकलन रिपोर्ट में वर्ष 2016 के बाद से चुनावी ढांचे पर हुए कई साइबर हमलों का भी जिक्र किया गया। इनमें वोटर रजिस्ट्रेशन डेटाबेस की जांच करने की रूस की कोशिशें, वोटर रजिस्ट्रेशन की जानकारी हासिल करने का ईरान का प्रयास और चुनाव से जुड़े नेटवर्क एवं आम लोगों के लिए उपलब्ध वोटर डेटा को निशाना बनाने वाली चीन की संदिग्ध साइबर गतिविधियां शामिल हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि हाल ही में सार्वजनिक किए गए खुफिया दस्तावेज यह साबित करते हैं कि अमेरिका लंबे समय से जानता था कि उसकी चुनावी व्यवस्था विदेशी साइबर खतरों के संपर्क में है।

उन्होंने बताया कि खुफिया एजेंसियों ने मतदाता पंजीकरण डेटाबेस, इलेक्ट्रॉनिक पोल बुक और आधिकारिक चुनावी वेबसाइटों को सबसे अधिक जोखिम वाले सिस्टम के रूप में चिह्नित किया है।

डीएचएस की रिपोर्ट में राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों को साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई सुझाव भी दिए गए हैं। इनमें मतदाता डेटाबेस का नियमित ऑफलाइन बैकअप, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का व्यापक उपयोग, नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में बांटना, इंटरनेट से जुड़े सिस्टम की लगातार निगरानी और किसी भी साइबर हमले से निपटने के लिए व्यापक योजना तैयार करना शामिल है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बैंकों, स्वास्थ्य सेवाओं और क्रेडिट रिपोर्टिंग एजेंसियों जैसी निजी कंपनियों के पास मौजूद व्यक्तिगत डेटा में बड़ी सेंध भी चुनावी सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि इसी तरह की व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग मतदाताओं की पहचान सत्यापित करने और डाक मतपत्र जारी करने में किया जाता है।

ट्रंप ने बताया कि उनका प्रशासन संभावित साइबर कमजोरियों से प्रभावित राज्यों के राज्यपालों, सांसदों और चुनाव अधिकारियों को सूचना देना शुरू कर चुका है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग अगले वर्ष होने वाले मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों से पहले राज्यों के साथ मिलकर इन तकनीकी कमजोरियों को दूर करेगा।

हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि अब तक ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकला है कि इन साइबर हमलों ने किसी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम को बदला हो। फिर भी रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी देशों की बढ़ती साइबर क्षमताओं को देखते हुए मतदाता पंजीकरण डेटाबेस की सुरक्षा अब अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है।

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पीएम मेलोनी ने पाकिस्तानी मूल की लड़की की हत्या के मामले में कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, बोलीं- ‘महिलाओं की आजादी नकारना मंजूर नहीं’

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इटली में उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं है जो कथित सांस्कृतिक या धार्मिक वजहों के नाम पर एक महिला की आजादी, उनका सम्मान और उनके अस्तित्व को नकारने की मंशा रखते हैं। इसका ताजा उदाहराण पाकिस्तान मूल की 18 साल की समन अब्बास की हत्या के मामले में कोर्ट के फैसले के दौरान देखने को मिला। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी इस मामले में कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने पाकिस्तान मूल की समन अब्बास की उसके माता-पिता द्वारा की गई हत्या के मामले में कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम मेलोनी ने लिखा, “समन अब्बास की हत्या के आखिरी फैसले के साथ, एक दर्दनाक कानूनी कहानी खत्म हो गई है। इटली में पाकिस्तानी मूल की एक जवान लड़की समन को उसके माता-पिता और कुछ रिश्तेदारों ने मार डाला, क्योंकि उसने जबरदस्ती शादी का विरोध किया था और अपना भविष्य खुद चुनने के अपने अधिकार पर जोर दिया था।”

उन्होंने लिखा कि कोई भी फैसला उसकी जिंदगी वापस नहीं ला सकता, लेकिन यह सही है कि इस जुर्म के लिए जिम्मेदार लोगों को दोषी ठहराया गया है।

प्रधानमंत्री मेलोनी ने शख्त हिदायत देते हुए कहा, “इटली में उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं है जो तथाकथित सांस्कृतिक या धार्मिक वजहों के नाम पर एक महिला की आजादी, इज्जत और जिंदगी को नकारने की हिम्मत करते हैं। ये ऐसे सिद्धांत हैं जिनसे कोई समझौता नहीं हो सकता और जिनसे हम कभी पीछे नहीं हटेंगे। मेरी संवेदनाएं समन के साथ हैं। भगवान उन्हें शांति दे।”

बता दें, समन अब्बास इटली में रहने वाली 18 साल की पाकिस्तानी मूल की लड़की थी। समन के परिवार ने 2021 में उसकी ऑनर किलिंग (सम्मान के नाम पर हत्या) कर दी थी। मृतिका के परिवार ने पाकिस्तान में उसकी मर्जी के बिना शादी तय कर दी। समन को ये मंजूर नहीं था और वह लगातार इस शादी का विरोध करती रही। इस विरोध का अंजाम उसकी मौत थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, समन के परिवार ने उसकी शादी पाकिस्तान में उसके चचेरे भाई के साथ तय की थी। इस दौरान समन नाबालिग थीं और उन्होंने शादी से इनकार करने के बाद इटली में सोशल सर्विस डिपार्टमेंट से मदद मांगी। नवंबर 2020 में उन्हें एक शेल्टर होम भेज दिया गया था।

उन्होंने अपने माता-पिता के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन 11 अप्रैल 2021 को वह दोबारा अपने परिवार के पास लौट गईं। साइप्रस मेल की रिपोर्ट के अनुसार, समन अप्रैल 2021 से लापता थी। पुलिस ने घर के पास वाले सीसीटीवी फुटेज को खंगाला, जिसमें पांच लोग घर से फावड़े, लोहे की रॉड और एक बाल्टी लेकर जाते हुए दिखाई दिए और करीब ढाई घंटे बाद वे वापस लौटे।

लगभग एक साल से ज्यादा का समय बीतने के बाद, नवंबर 2022 में मृतिका के शरीर के कुछ अवशेष इटली के नोवेल्लारा शहर में उसके घर के पास से मिले। जांच करने वाली टीम ने डेंटल रिकॉर्ड्स के आधार पर समन के शव की पहचान की।

इसके बाद 2023 में प्रधानमंत्री मेलोनी ने कहा था कि पीड़िता की पहचान को लेकर कोई संदेह नहीं रह गया है। उस निर्दोष लड़की को न्याय मिले, जो सिर्फ अपनी आजादी के साथ जिंदगी जीना चाहती थी।

इटली की सर्वोच्च अपीलीय अदालत, सुप्रीम कोर्ट ऑफ कैसेशन ने अब्बास के माता-पिता नाजिया शाहीन और शब्बर अब्बास, उसके चचेरे भाइयों इजाज इकराम और नोमानुल हक को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। अदालत ने उसके चाचा दानिश हसनैन की 22 साल की जेल की सजा भी कायम रखी।

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भारत-यूके सीईटीए के लागू होने से स्थानीय सेवाओं और सामानों की मांग बढ़ेगी: फिक्की

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फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने बुधवार को भारत-यूके सीईटीए के लागू होने का स्वागत करते हुए कहा कि यह अहम समझौता भारतीय इंडस्ट्री के लिए नए मौके खोलेगा, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाएगा और ग्लोबल वैल्यू चेन के साथ देश की भागीदारी को मजबूत करेगा।

इस समझौते के लागू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए, फिक्की के सेक्रेटरी जनरल अनंत स्वरूप ने कहा कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) से सामान और सेवाओं, दोनों ही क्षेत्रों में कारोबार के लिए नए मौके बनेंगे।

स्वरूप ने कहा, “भारत-यूके सीईटीए के लागू होने पर फिक्की की ओर से पीएम मोदी को बहुत-बहुत बधाई। यह समझौता भारतीय इंडस्ट्री के लिए सामान और सेवाओं, दोनों में नए मौके खोलेगा। इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और टैलेंट मोबिलिटी में सहयोग से भारतीय इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।”

उन्होंने इस समझौते को भारत की मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) यात्रा में एक अहम पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि इससे ग्लोबल वैल्यू चेन में देश की भागीदारी बढ़ेगी और भारत व यूके, दोनों जगह इनोवेशन-बेस्ड ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा।

फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि यह अहम समझौता भारत की लगातार आर्थिक वृद्धि, वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता और इंटरनेशनल मार्केट के साथ गहरे जुड़ाव की आकांक्षाओं को मजबूत करके ‘विकसित भारत’ के विजन को पूरा करने में मदद करेगा।

गोयनका ने कहा, “जैसे-जैसे भारत एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उच्च-गुणवत्ता वाली आर्थिक साझेदारियां व्यापार के अवसरों को बढ़ाने, औद्योगिक क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक व्यापार और निवेश नेटवर्क में देश की भागीदारी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।”

इंडस्ट्री बॉडी के अनुसार, यह समझौता आर्थिक जुड़ाव के प्रति एक दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है और भारत की अधिक समृद्धि, नवाचार और आर्थिक परिवर्तन की यात्रा का समर्थन करेगा।

भारत-यूके एफटीए बुधवार से लागू हो गया, जिससे भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात के लिए बिना किसी शुल्क के बाजार तक पहुंच मिली और इसमें द्विपक्षीय व्यापार मूल्य का लगभग 100 प्रतिशत हिस्सा शामिल है।

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बोस्टन की सड़कों पर भारतीय नौसैनिकों का कदमताल, बिखेरा तिरंगे का रंग

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अमेरिका के ऐतिहासिक शहर बोस्टन में भारतीय नौसेना के जवानों ने कदमताल किया है। यहां शहर की मुख्य सड़कों पर भारतीय नौसैनिकों ने परेड की। दरअसल अमेरिका में यह परेड नौकायन पोत आईएनएस सुदर्शिनी द्वारा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं का एक भव्य प्रदर्शन था।

बोस्टन पहुंचा यह पोत दुनिया भर के 20 से अधिक देशों के 60 से ज्यादा विशाल नौकायन पोतों के साथ प्रतिष्ठित ‘सेल बोस्टन 2026’ समारोह में भाग ले रहा है। बोस्टन की ऐतिहासिक सड़कों पर आयोजित क्रू एवं कैडेट सिटी परेड में आईएनएस सुदर्शिनी के चालक दल और प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्ण यह मार्च किया। भारतीय दल की अनुशासित और आकर्षक प्रस्तुति ने स्थानीय नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों का ध्यान खींचा। परेड के दौरान भारत की समुद्री परंपराओं, नौवहन इतिहास और सांस्कृतिक पहचान की झलक देखने को मिली।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस सहभागिता ने भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग को और मजबूत करने का संदेश दिया। साथ ही यह भी दर्शाया कि समुद्र केवल व्यापार और सुरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि देशों और समाजों को जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु भी है। इससे पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने न्यूयॉर्क में आयोजित भव्य ‘सेल फोर्थ 250’ समारोह में हिस्सा लेकर हजारों दर्शकों के बीच भारतीय तिरंगे की शान बढ़ाई थी। न्यूयॉर्क में अपनी सफल उपस्थिति दर्ज कराने के बाद यह पोत बोस्टन पहुंचा। यहां दुनिया के विभिन्न देशों के पारंपरिक नौकायन पोत एक साथ समुद्री विरासत का उत्सव मना रहे हैं।

‘लोकायन 2026’ अभियान के तहत आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के विभिन्न बंदरगाहों की यात्रा कर रहा है। इस अभियान का उद्देश्य भारत की समुद्री विरासत, नौवहन परंपराओं और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के संदेश को दुनिया तक पहुंचाना है। नॉरफॉक से बोस्टन तक की यात्रा के दौरान पोत ने भारतीय संस्कृति, मित्रता और सद्भावना का संदेश भी प्रसारित किया। भारतीय नौसेना का यह ऐतिहासिक नौकायन पोत जहां भी पहुंच रहा है, वहां भारत की समुद्री शक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि और वैश्विक साझेदारी की नई कहानी लिख रहा है।

बोस्टन में उसकी मौजूदगी ने एक बार फिर साबित किया कि भारत की समुद्री विरासत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी दुनिया को जोड़ने वाली एक जीवंत शक्ति है। गौरतलब है कि आईएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का पाल वाला पोत है। प्राचीन जहाज निर्माण पद्धति पर आधारित इस पोत का उपयोग प्रशिक्षण, समुद्री जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय सद्भावना यात्राओं के लिए किया जा रहा है। वर्तमान में यह पोत लोकायन 2026 वैश्विक समुद्री अभियान पर है। इसके तहत विभिन्न यह अलग-अलग देशों के बंदरगाहों का दौरा कर भारत की समुद्री विरासत, संस्कृति और नौसैनिक परंपराओं का प्रचार-प्रसार कर रहा है।

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