राजनीति
पीएम मोदी तीन देशों के दौरे पर हुए रवाना, बोले- यात्रा का मकसद आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना है
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे के लिए नई दिल्ली से रवाना हो गए हैं। तीन देशों की यात्रा के लिए रवाना होने से पहल पीएम मोदी ने कहा कि इसका मकसद इन कीमती विकास साझेदारों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना होगा कि आने वाले समय में हमारे देश के युवाओं को और मौके मिलें।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना लेख साझा किया और कहा, “अगले कुछ दिनों में, मैं इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल हो रहा हूं। इन मीटिंग का मकसद अहम विकास साझेदारों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना होगा कि आने वाले समय में हमारे देश के युवाओं को और मौके मिलें।”
वहीं, पीएम मोदी ने इस यात्रा से जुड़ा एक लेख भी शेयर किया, “मैं 6-11 जुलाई 2026 तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के तीन देशों के दौरे पर जा रहा हूं। इंडोनेशिया गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम बोवो सुबियान्टो के निमंत्रण पर, मैं 6-8 जुलाई तक इंडोनेशिया जाऊंगा। 2018 में इंडोनेशिया के मेरे पहले दौरे के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने आपसी संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाया था। हमारे आपसी संबंधों के बढ़ने के बाद यह मेरा पहला द्विपक्षीय दौरा होगा और राष्ट्रपति प्रबोवो के राजकीय दौरे के बाद होगा, जो 26 जनवरी, 2025 को हमारे गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे।”
उन्होंने कहा, भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत सांस्कृतिक और जनसंपर्क हैं और मेरा दौरा हमारी कई तरह की साझेदारी के सभी पहलुओं को और गहरा करेगा। इस दौरे के दौरान, मैं इंडोनेशिया में भारतीय प्रवासियों से भी बातचीत करूंगा और राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करूंगा, जो हमारे करीबी सांस्कृतिक संबंधों का एक और शानदार सबूत है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इंडोनेशिया से, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री, एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर, मैं मेलबर्न जाऊंगा। मेरी यात्रा हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगी और मैं प्रधानमंत्री अल्बनीज के साथ अपनी बातचीत में, रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और निवेश, शिक्षा और मोबिलिटी और लोगों के बीच संबंधों के क्षेत्रों में हमारे संबंधों को आगे बढ़ाऊंगा। मेलबर्न में, मुझे भारतीय डायस्पोरा से बातचीत करने का मौका मिलेगा जो हमारी रणनीचिक साझेदारी का एक जरूरी स्तंभ है। इसके अलावा, यह यात्रा भारत और ऑस्ट्रेलिया को उभरती और जरूरी तकनीक, खेल और स्पोर्ट्स साइंस के क्षेत्रों में हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने का भी मौका देगी।
न्यूजीलैंड के दौरे के बारे में जानकारी देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मेलबर्न से, न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री, क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर, मैं ऑकलैंड, न्यूजीलैंड जाऊंगा। मेरा यह दौरा मार्च 2025 में प्रधानमंत्री लक्सन के भारत दौरे के बाद हमारे आपसी संबंधों में आई मजबूत रफ्तार को और मजबूत करेगा। अपने दौरे के दौरान, मैं प्रधानमंत्री लक्सन के साथ इस बारे में बात करूंगा कि आर्थिक, व्यापारिक और कमर्शियल रिश्तों को और कैसे बढ़ाया जाए। भारत और न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करके आपसी व्यापार और कमर्शियल संबंधों को मजबूत करने का वादा किया है। हमारे आपसी संबंधों में भारतीय समुदाय का अहम योगदान रहा है और इस दौरे के दौरान मैं भारतीय समुदाय के एक बड़े समूह को संबोधित करने के लिए उत्सुक हूं, जिन्होंने जिंदगी के हर क्षेत्र में बेहतरीन काम किया है।”
पीएम मोदी ने आखिर में कहा कि पूर्वी और दक्षिणी हिंद महासागर में क्रमशः इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की मेरी यात्रा, और उसके बाद न्यूजीलैंड की यात्रा, भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, महासागर विजन के साथ-साथ एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के प्रति हमारे दृष्टिकोण को और मजबूत करेगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
युद्ध खत्म करना चाहता है रूस, जेलेंस्की ने गंवाए शांति वार्ता के कई मौके: डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए समझौता करना चाहते हैं। वहीं, उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर आरोप लगाया कि उन्होंने शांति वार्ता के कई मौके गंवा दिए।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि मॉस्को समझौते के लिए तैयार दिख रहा है लेकिन कीव की ओर से समझौते की इच्छा उतनी स्पष्ट नहीं है।
ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि रूस समझौता करना चाहता है। इस मुद्दे पर कई बार बातचीत आगे-पीछे हुई है, लेकिन रूस समझौते के लिए तैयार है।”
उन्होंने कहा कि जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूं, इस मामले का समाधान कई बार हो सकता था लेकिन किसी वजह से जेलेंस्की समझौता नहीं करना चाहते। ट्रंप ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि फरवरी 2022 में शुरू हुए इस युद्ध को खत्म करने में पुतिन की दिलचस्पी है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति पुतिन वास्तव में किसी समाधान और समझौते तक पहुंचना चाहते हैं।”
ट्रंप की यह टिप्पणी शुक्रवार को पुतिन के साथ हुई उनकी टेलीफोन बातचीत के बाद आई है। यह ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका और यूक्रेन के बीच रूस के डीजल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील को लेकर मतभेद बढ़ गए हैं।
ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजारों को डीजल की आपूर्ति करेगा। उनका कहना था कि यह कदम ईरान संघर्ष की वजह से पैदा हुई ईंधन कमी और बढ़ती कीमतों को कम करने में मदद करेगा।
हालांकि, इस फैसले की जेलेंस्की ने आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि ऊर्जा निर्यात से रूस की अतिरिक्त कमाई उसकी सैन्य क्षमता को और मजबूत करेगी तथा उसे युद्ध जारी रखने में मदद मिलेगी। इस विवाद ने यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की अमेरिकी कूटनीतिक कोशिशों को और जटिल बना दिया है।
ट्रंप ने संघर्ष के दौरान राष्ट्रपति चुनाव न कराने को लेकर भी जेलेंस्की की आलोचना दोहराई। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि उन्हें चुनाव कराना चाहिए था और वह इस मामले को कई बार सुलझा सकते थे। ट्रंप का कहना था कि अगर यूक्रेनी नेतृत्व दो साल पहले किसी समझौते पर पहुंच जाता तो वह बातचीत में कहीं मजबूत स्थिति में होता। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने दो साल पहले समझौता कर लिया होता तो यह समझदारी भरा कदम होता। तब यूक्रेन कहीं बेहतर स्थिति में होता और उसे कहीं बेहतर शर्तें मिलतीं।
ट्रंप ने रूस की सैन्य ताकत और संख्या बल का जिक्र करते हुए कहा कि यूक्रेन को अपनी बातचीत की रणनीति पर फिर से विचार करना चाहिए। हालांकि, पुतिन की मंशा को लेकर ट्रंप की यह राय उनकी अपनी व्याख्या है। दोनों नेताओं के बीच हालिया बातचीत के बाद युद्ध खत्म करने को लेकर किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
वहीं, क्रेमलिन ने भी संकेत दिया है कि शांति वार्ता तुरंत दोबारा शुरू होगी, यह अभी निश्चित नहीं है। पुतिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव के अनुसार, शुक्रवार की बातचीत में रूसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन के साथ शांति वार्ता दोबारा शुरू करने की कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई।
ताजा घटनाक्रम यह दिखाता है कि युद्ध खत्म करने की शर्तों को लेकर वॉशिंगटन और कीव के बीच अब भी मतभेद बने हुए हैं। एक ओर ट्रंप प्रशासन मॉस्को के साथ कूटनीतिक संपर्क बढ़ा रहा है। वहीं, दूसरी ओर वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने की भी कोशिश कर रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
हैदराबाद और तेलंगाना से ड्रग्स को खत्म करने की कोशिश जारी : के. लक्ष्मण

हैदराबाद में रविवार को आयोजित ‘नशा मुक्त भारत साइकिल राइड’ में भाजपा सांसद के. लक्ष्मण ने हिस्सा लिया। ‘अक्षरा स्फूर्ति’ द्वारा आयोजित इस राइड का मकसद नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ जागरूकता फैलाना और एक स्वस्थ, नशा-मुक्त भारत को बढ़ावा देना था। यह राइड बाल हनुमान मंदिर, सीतारामपेट (आघापुरा के पास) से शुरू होकर सरदार वल्लभभाई पटेल जी की प्रतिमा, असेंबली तक आयोजित की गई।
इस दौरान सांसद के. लक्ष्मण ने मीडिया से बातचीत में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों का पालन करते हुए, ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत हैदराबाद में ‘अक्षर स्फूर्ति’ संस्था पिछले दो महीनों से हर रविवार साइकिल रैलियां आयोजित कर रही है, ताकि देश को नशे की लत से मुक्त किया जा सके। यह चिंता की बात है कि ड्रग्स के इस्तेमाल के मामले में भारत दुनिया में काफी आगे है और आरोप है कि विदेशी ताकतें स्कूल और कॉलेज के छात्रों को नशे की लत में फंसाकर भारत को आर्थिक रूप से कमजोर करने की साजिश रच रही हैं।”
सांसद ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने तीन साल के भीतर देश को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। जिस तरह गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों से माओवादियों, नक्सलियों और गैर-संवैधानिक संगठनों से निपटा गया, उसी तरह अब तेलंगाना सरकार, पुलिस (ईगल फोर्स) हैदराबाद और तेलंगाना से ड्रग्स को खत्म करने की कोशिश कर रही है। युवाओं से परिवारों, समाज और देश को नशे से होने वाली बर्बादी से बचाने के लिए इस अभियान में शामिल होने का आग्रह करते हुए वक्ता ने मीडिया, एक्टिविस्ट और सभी राजनीतिक दलों के सदस्यों से राजनीति से ऊपर उठकर प्रधानमंत्री मोदी के नशा मुक्त भारत के सपने को पूरा करने में मदद करने की अपील की है।”
एक दिन पहले शनिवार को सांसद ने एक्स पर लिखा था, “नशामुक्त युवा ही एक स्वस्थ और सशक्त भारत की नींव हैं। मैं ‘अक्षरा स्फूर्ति’ द्वारा आयोजित ‘नशा-मुक्त भारत साइकिल राइड’ में शामिल हो रहा हूं। इसका उद्देश्य नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना और युवाओं को स्वस्थ व सक्रिय जीवन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नशा-मुक्त भारत’ के आह्वान से प्रेरित होकर, मैं युवाओं, साइकिल चालकों और सभी नागरिकों को इस राइड में शामिल होने और इस महत्वपूर्ण अभियान का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करता हूं। नशे को न कहें। स्वस्थ जीवन चुनें।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान से युद्ध समाप्त करने के लिए ट्रंप ने रखी शर्त, परमाणु हथियार न बनाने की मांगी पक्की गारंटी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका चाहे तो अभी ईरान में अपनी सैन्य भागीदारी खत्म कर सकता है, अगर पक्की गारंटी मिल जाए कि ईरान भविष्य में कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा।
जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “हम अभी वहां से निकल सकते हैं लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में उनके पास परमाणु हथियार न हों और हम यह सुनिश्चित करेंगे।”
जब उनसे पूछा गया कि अमेरिकी सैन्य अभियान के जरिए ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने का दावा करने के बावजूद वह जीत की घोषणा क्यों नहीं कर रहे हैं, तो ट्रंप ने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि यह खतरा दोबारा पैदा न हो।
उन्होंने कहा, “मुझे स्थिति को इसी तरह बनाए रखना है। मैं नहीं चाहता कि दो साल बाद फिर यही करना पड़े। हमें ऐसी गारंटी चाहिए कि भविष्य में उनके पास यह क्षमता न हो।”
ट्रंप की यह टिप्पणी टेनेसी के क्लार्क्सविल में दिए गए उनके भाषण के बाद आई, जहां उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। हालांकि उन्होंने इस संघर्ष में जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों का भी जिक्र किया।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सात महीनों से इस संघर्ष में शामिल है। उन्होंने इसकी तुलना वियतनाम और अफगानिस्तान जैसे पुराने अमेरिकी युद्धों से की। उन्होंने कहा, “अब ईरान में हमें सात महीने हो चुके हैं” और फिर उन 18 अमेरिकी जवानों का जिक्र किया, जिनके मारे जाने का उन्होंने दावा किया।
ट्रंप ने अपने समर्थकों से कहा, “हमारे कई लोग घायल हुए हैं, लेकिन हमने उन्हें परमाणु हथियार हासिल करने से रोक दिया है।”
राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने डोवर एयर फोर्स बेस पर शहीद सैनिकों के परिवारों से मुलाकात की थी और कहा कि ऐसे पल उनके पद की सबसे कठिन जिम्मेदारियों में से एक होते हैं।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान ने ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक, ईरान की नौसेना, वायुसेना, रडार सिस्टम और कई निर्माण सुविधाओं को नष्ट कर दिया गया है।
राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है और इसके खत्म होने से वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत मिलेगी।
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