अपराध
अहमदाबाद एयरपोर्ट पर 11 करोड़ का हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद, बैंकाक से आया यात्री गिरफ्तार
गुजरात के अहमदाबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए बैंकॉक से आए एक यात्री के पास से 10.91 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 11 करोड़ रुपए बताई जा रही है। मामले में आरोपी यात्री को गिरफ्तार कर लिया गया है।
कस्टम अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई रविवार को अहमदाबाद कस्टम की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (एआईयू) ने की। आरोपी यात्री गुजरात के जूनागढ़ जिले के मंगरोल का रहने वाला है और वह थाई एयरवेज की फ्लाइट टीजी-343 से बैंकॉक से अहमदाबाद पहुंचा था।
जांच के दौरान यात्री के चेक-इन सामान की तलाशी ली गई। इसी दौरान कस्टम के स्निफर डॉग ने बैग में नशीले पदार्थ की मौजूदगी का संकेत दिया। इसके बाद बैगेज टैग के आधार पर यात्री की पहचान कर उसे रोका गया।
अधिकारियों ने जब उसके ट्रॉली बैग की गहन जांच की तो उसमें छिपाकर रखे गए चांदी रंग के पांच पॉलीथीन पैकेट मिले। इन पैकेटों में हरे रंग का पौधेनुमा पदार्थ भरा हुआ था। फील्ड टेस्टिंग किट से जांच करने पर यह हाइड्रोपोनिक गांजा निकला।
कस्टम अधिकारी ने बताया कि बरामद मादक पदार्थ का कुल शुद्ध वजन 10,911 ग्राम है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब 11 करोड़ रुपए है।
इस खेप को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत जब्त कर लिया गया है। वहीं, आरोपी यात्री को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह खेप कहां से लाई गई, इसे किसे पहुंचाया जाना था और इसके पीछे किसी बड़े तस्करी नेटवर्क का हाथ तो नहीं है।
अहमदाबाद एयरपोर्ट पर बैंकॉक से आने वाले यात्रियों के पास से हाइड्रोपोनिक गांजा पकड़े जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले महीने भी कस्टम ने बैंकॉक से आए एक यात्री के बैग से 20 किलोग्राम से अधिक गांजा बरामद किया था। इसके अलावा एक अन्य यात्री के पास से करीब 6.5 किलोग्राम और एक अलग कार्रवाई में लगभग 4 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त किया गया था।
पिछले सप्ताह मुंबई कस्टम ने भी बैंकॉक से आए दो यात्रियों को गिरफ्तार किया था, जिनके सामान से 19 किलोग्राम से अधिक हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद हुआ था।
बता दें कि हाइड्रोपोनिक गांजा उस गांजे को कहा जाता है जिसे बिना मिट्टी के, केवल पानी और विशेष पोषक तत्वों के नियंत्रित घोल की मदद से कृत्रिम वातावरण में उगाया जाता है।
अपराध
आगरा में सीबीआई ने पीएनबी के ब्रांच मैनेजर को रिश्वत लेते रंगे हाथों किया गिरफ्तार

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की भद्रौली शाखा, बरहन के मैनेजर को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
आरोपी को सीबीआई ने ट्रैप कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा। सीबीआई के अनुसार, इस मामले में 25 जून को एक निजी कंपनी में कार्यरत शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बैंक मैनेजर करीब 19 सोलर पैनल लोन फाइलों की प्रोसेसिंग और मंजूरी के लिए प्रति फाइल 7,000 रुपये रिश्वत की मांग कर रहा था।
शिकायत के मुताबिक, बातचीत के बाद आरोपी मैनेजर 19 लोन फाइलों को क्लियर करने के बदले कुल 52,000 रुपए रिश्वत लेने पर तैयार हो गया। खास बात यह है कि ये सभी 19 लोन फाइलें पहले से ही बैंक द्वारा विधिवत स्वीकृत की जा चुकी थीं, इसके बावजूद उन्हें आगे बढ़ाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत मांगी गई।
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी को शिकायतकर्ता से रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 30,000 रुपए मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
सीबीआई ने आरोपी बैंक मैनेजर को 25 जून को गिरफ्तार किया। उसे शुक्रवार को गाजियाबाद की सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा। सीबीआई ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और रिश्वतखोरी से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
बता दें कि इससे पहले 22 जून को सीबीआई ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), रामगढ़ (झारखंड) के बरका सयाल एरिया के सौंदा स्थित रीजनल स्टोर के चीफ स्टोर कीपर को रिश्वतखोरी के मामले में रंगे हाथ पकड़ा था। यह मामला शिकायत मिलने पर दर्ज किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से 10,000 रुपए की रिश्वत मांगी थी। यह रिश्वत शिकायतकर्ता को उसकी मेडिकल स्थिति को देखते हुए हल्के काम सौंपकर सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी जारी रखने देने के बदले मांगी गई थी।
अपराध
मुंबई लोकल ट्रेन में बारिश के दौरान दरवाज़ा बंद करने को लेकर हुए विवाद में हत्या

मुंबई: मुंबई की एक लोकल ट्रेन में सनसनीखेज मर्डर से टेंशन बढ़ गया है। मुंबई लोकल ट्रेन में एक पैसेंजर की दूसरे पैसेंजर ने चाकू मारकर हत्या कर दी। यह घटना मंगलवार रात करीब 10 बजे हुई। पुलिस ने बताया कि मरने वाले पैसेंजर की पहचान मयंक लोहार (22) के तौर पर हुई है। आरोपी की पहचान हो गई है और उसे अरेस्ट करने के लिए रेलवे पुलिस की छह टीमें लगाई गई हैं। इस घटना के बाद एक बार फिर ट्रैवल सेफ्टी का मुद्दा सामने आ गया है। मंगलवार, 23 जून को रात करीब 10 बजे मुंबई लोकल ट्रेन में एक आदमी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि यह घटना फर्स्ट क्लास डिब्बे में हुई। यह घटना बोरीवली और अंधेरी स्टेशन के बीच हुई। तेज बारिश के दौरान ट्रेन का दरवाजा बंद करने को लेकर बहस शुरू हो गई और यह बढ़ती गई। इस दौरान एक पैसेंजर ने दूसरे पैसेंजर की चाकू मारकर हत्या कर दी। रेलवे पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बहस के बाद दूसरे लोगों ने आरोपी की पिटाई कर दी। गुस्साए आरोपी ने अपने बैग से चाकू निकाला और मयंक पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। हमलावर बोरीवली स्टेशन पर ट्रेन रुकने से पहले ही उतर गया और भाग गया। घटना के बाद रेलवे पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए छह टीमें बनाई हैं और पुलिस ने सर्च ऑपरेशन और तलाशी अभियान भी शुरू कर दिया है।
अपराध
दिल्ली पुलिस ने किया अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 12 आरोपी गिरफ्तार

ARREST
दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट यूनिट ने एक बड़े अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान 5 नवजात बच्चों को रेस्क्यू किया है। यह गिरोह लंबे समय से नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त में शामिल था और देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय था।
पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम करता था। आरोपी पहले दूसरे राज्यों से नवजात बच्चों को लाते थे और फिर उनके जन्म रिकॉर्ड और पहचान दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर उन्हें अवैध रूप से बेच देते थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह लाखों रुपए लेकर जरूरतमंद और संतानहीन दंपतियों को बच्चे बेच देता था।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कुछ की गिरफ्तारी दिल्ली से हुई है, जबकि अन्य को राजस्थान से पकड़ा गया है। यह गिरोह कई राज्यों में फैला हुआ था और हरियाणा सहित अन्य जगहों पर भी बच्चों को बेचे जाने के संकेत मिले हैं। पुलिस का कहना है कि यह एक बड़ा रैकेट है जो लंबे समय से सक्रिय था और अब तक 20 से अधिक बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त की बात सामने आई है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी अस्पतालों और अन्य माध्यमों से नवजात बच्चों को हासिल करने के बाद उनकी पहचान छुपाते थे। इसके लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे, ताकि बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने जैसा दिखाया जा सके।
पुलिस ने इस पूरे मामले में गहन जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही, यह भी जांच हो रही है कि बच्चों को किन-किन राज्यों में और किन लोगों को बेचा गया है।
रेस्क्यू किए गए 5 नवजात बच्चों को फिलहाल सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और बाल कल्याण समिति की निगरानी में उन्हें आगे की देखभाल दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि इस तरह के संगठित अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और पूरे नेटवर्क को जल्द ही पूरी तरह उजागर किया जाएगा।
दिल्ली पुलिस ने इस कार्रवाई को मानव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता बताया है और कहा है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
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