अंतरराष्ट्रीय
अंतहीन प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा ईरान-अमेरिका समझौता, दोनों देश नई शर्तों के साथ कर रहे संशोधन की तैयारी
वाशिंगटन, 1 जून: अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ चल रहे समझौते की शर्तों में बदलाव करने की योजना बना रहे हैं, ताकि युद्ध को खत्म किया जा सके। वहीं दूसरी तरफ तेहरान नए बदलाव जोड़ने की तैयारी कर रहा है।
सूत्रों से मिजी जानकारी के अनुसार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने बताया कि इस अंतहीन प्रक्रिया में व्हाइट हाउस बातचीत में ईरान की नई प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। लगता है कि यह बातचीत फिर से शुरुआती और मुश्किल स्थिति में पहुंच सकती है।
एडनक्रोनोस समाचार एजेंसी ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि ट्रंप बातचीत को तेज करना चाहते हैं और दूसरी तरफ दबाव बढ़ाकर समझौता जल्दी करना चाहते हैं। लेकिन उन्हें ईरान की जटिल सत्ता व्यवस्था से भी निपटना पड़ रहा है।
तेहरान में किसी भी बदलाव या समझौते को अंतिम मंजूरी सर्वोच्च नेता के पास होती है। अगर समझौते के मसौदे में बदलाव होता है, तो बातचीत और लंबी हो सकती है।
तस्नीम समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के नए प्रस्ताव के बाद ईरान भी समझौते के ड्राफ्ट में कुछ नए बदलाव जोड़ना चाहता है।
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप 60 प्रतिशत तक समृद्ध किए गए यूरेनियम के भंडार को लेकर ज्यादा साफ और सख्त नियम चाहते हैं, जो अभी ईरान के पास हैं। साथ ही वह यह भी चाहते हैं कि समुद्री व्यापार के लिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के तरीके साफ किए जाएं।
जो मौजूदा ड्राफ्ट समझौता है, उसमें ईरान यह मानने को तैयार है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। साथ ही इसमें 60 दिनों की एक समय-सीमा भी है, जिसमें दोनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम और जमा हुए संवर्धित यूरेनियम के भविष्य पर बातचीत करेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति इसमें और साफ नियम जोड़ना चाहते हैं, खासकर इस बात पर कि अमेरिका उस सामग्री को कब और कैसे हासिल करेगा।
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा, “मुझे बस यही गारंटी चाहिए कि परमाणु हथियार नहीं बनेंगे। उन्होंने यह मान लिया है।” उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में ईरान ने सिर्फ यह कहा था कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे, लेकिन अब समझौते में यह भी शामिल किया गया है कि वे किसी भी तरह से परमाणु हथियार न तो बनाएंगे और न ही हासिल करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा, “उन लोगों से बातचीत करना बहुत मुश्किल है और इसमें समय लगता है, लेकिन मुझे जल्दी नहीं है।”
व्हाइट हाउस अभी भी इस समझौते को पूरा होने को लेकर आशावादी है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक सरकारी टीवी पर कहा कि अमेरिका के साथ ‘बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान’ अभी भी जारी है, लेकिन जब तक इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता, तब तक इन पर कोई पक्का फैसला नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “इस समय जो भी बातें कही जा रही हैं, वे सिर्फ अटकलें हैं और उन्हें ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए।”
हालांकि, तेहरान से कई बड़े नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। विदेश मंत्री अराघची के नरम रुख के उलट, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबाफ ने सख्त बयान दिया।
उन्होंने कहा, “जब तक हमें यह पूरी तरह भरोसा नहीं हो जाता कि ईरानी लोगों के अधिकार सुरक्षित हैं, हम किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं देंगे।” गालिबाफ ने कहा कि जो लोग कूटनीति से जुड़े हैं, वे अमेरिका के वादों या बातों पर भरोसा नहीं करते।
इस बीच, ईरान की राजनीति को लेकर स्थिति और भी जटिल बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने मोज्तबा खामेनेई को अपना इस्तीफा सौंपने का एक पत्र भेजा है। यह जानकारी लंदन स्थित ईरानी विपक्षी वेबसाइट ‘ईरान इंटरनेशनल’ से जुड़े एक सूत्र ने दी है, लेकिन ईरान सरकार ने इस खबर को तुरंत खारिज कर दिया और इसे ‘झूठी मीडिया रिपोर्ट’ बताया।
राष्ट्रीय समाचार
यूपीआई लेनदेन की संख्या बीते एक दशक में 13,000 गुना बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हुई : केंद्र

भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई)पर वार्षिक लेनदेन की संख्या बीते एक दशक में 13,000 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ हो गई है, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में इनकी संख्या 1.78 करोड़ थी। यह जानकारी वित्त मंत्रालय की ओर से सोमवार को दी गई।
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से 25 अगस्त, 2016 को यूपीआई को लॉन्च किया था। आज के समय में यह देश के डिजिटल भुगतान प्रणाली की रीढ़ बन गया है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यूपीआई लेनदेन की कुल वैल्यू वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपए हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 2016-17 में 0.07 लाख करोड़ रुपए थी। यह बीते एक दशक में करीब 4,000 गुना की बढ़ोतरी दिखाता है।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई के बड़े पैमाने, भरोसे और इंटरऑपरेबिलिटी को दुनिया भर में पहचान मिली है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने इसे ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना है। 2025 तक, दुनिया भर में होने वाले रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत थी।
2026 में यूपीआई की ग्रोथ की रफ्तार और तेज हो गई है। मई में पहली बार यूपीआई लेनदेन की संख्या 2,300 करोड़ के आंकड़े को पार कर 2,320 करोड़ पर पहुंच गई। इसके बाद जुलाई में प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड 2,366 करोड़ लेनदेन हुए, जो इसके दस साल के सफर में सबसे अधिक मासिक लेनदेन का आंकड़ा है।
संस्थागत भागीदारी में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। यूपीआई पर लाइव बैंकों की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में 44 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 तक 703 हो गई, जिसमें पब्लिक सेक्टर बैंक, प्राइवेट बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और कोऑपरेटिव बैंक शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा कि मर्चेंट पेमेंट में यूपीआई को काफी ज्यादा अपनाया गया है। कुल लेनदेन की संख्या में पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेनदेन का हिस्सा 63 प्रतिशत था, जबकि कुल लेनदेन वैल्यू में पर्सन-टू-पर्सन का योगदान 71 प्रतिशत था।
डेटा से यह भी पता चलता है कि रोजमर्रा के छोटे-मोटे भुगतान के लिए यूपीआई का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। वित्त वर्ष 26 में लगभग 86 प्रतिशत पी2एम लेनदेन 500 रुपए से कम के थे, जबकि 59 प्रतिशत पी2पी लेनदेन भी 500 रुपए से कम के थे।
व्यापार
भारतीय शेयर बाजार मजबूत वैश्विक संकेतों से हरे निशान में खुला, आईटी स्टॉक्स में खरीदारी

मजबूत वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में तेजी के साथ खुला। सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 226 अंक या 0.28 प्रतिशत की मजबूती के साथ 77,765 और निफ्टी 52 अंक या 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,305 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी को सहारा आईटी शेयर ने दिया। सूचकांकों में निफ्टी आईटी और निफ्टी मीडिया करीब एक प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर्स थे। निफ्टी मेटल, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी प्राइवेट बैंक हरे निशान में थे।
वहीं, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑटो और निफ्टी पीएसयू बैंक लाल निशान में थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंक या 0.26 प्रतिशत की तेजी के साथ 63,900 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 96 अंक या 0.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 20,068 पर था।
सेंसेक्स पैक में इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टाटा स्टील, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, टेक महिंद्रा, इंडिगो, आईसीआईसीआई बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचयूएल, एनटीपीसी, ट्रेंट, आईटीसी, मारुति सुजुकी, एसबीआई और सन फार्मा गेनर्स थे। एशियन पेंट्स, बीईएल, टाइटन, अदाणी पोर्ट्स, इटरनल, पावर ग्रिड, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल और एमएंडएम लूजर्स थे।
जानकारों के मुताबिक, अमेरिका बॉन्ड यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने जैसे सकारात्मक संकेतों से बाजार में तेजी को सहारा मिला है।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी सरकार की ओर से लंबी अवधि के बॉन्ड बायबैक की लिमिट को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर 4 अरब डॉलर करने से 30 साल के अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में करीब आधा प्रतिशत की कमी आई है।
खबर लिखे जाने तक कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 91.35 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.60 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 85.68 डॉलर प्रति बैरल पर था।
वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार के सत्र में बढ़त के साथ बंद हुआ था, जिसमें डाओ जोन्स 0.98 प्रतिशत और नैस्डैक 0.43 प्रतिशत की उछाल के साथ बंद हुआ।
व्यापार
इस सप्ताह निफ्टी में गिरावट के बीच एफआईआई ने निकाले 1,602 करोड़ रुपए, घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा

ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे सप्ताह दबाव देखने को मिला। इस दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय बाजार से 1,602 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने खरीदारी जारी रखते हुए बाजार को सहारा दिया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, एफआईआई तीन सप्ताह की लगातार खरीदारी के बाद फिर से बिकवाली के रुख में लौट आए। पूरे सप्ताह के दौरान उनका निवेश व्यवहार मिश्रित रहा। सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में उन्होंने बिकवाली की, इसके बाद अगले दो सत्रों में खरीदारी की और फिर अंतिम दो कारोबारी दिनों में दोबारा बिकवाली शुरू कर दी।
यदि 20 जुलाई से 21 अगस्त की अवधि को देखा जाए, तो एफआईआई पहले सप्ताह में विक्रेता रहे, उसके बाद लगातार तीन सप्ताह खरीदार बने और इस सप्ताह में फिर से बिकवाली की। इसके बावजूद पिछले एक महीने में उनकी कुल गतिविधि का परिणाम 1,282 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी के रूप में सामने आया।
दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार मजबूती से खरीदारी करते रहे। उन्होंने पिछले एक महीने के दौरान हर सप्ताह शुद्ध निवेश किया और कुल मिलाकर 48,390 करोड़ रुपए का निवेश किया। केवल इस सप्ताह ही डीआईआई ने 17,320 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की।
अगस्त महीने के अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो दोनों श्रेणियों के निवेशक कुल मिलाकर खरीदार बने हुए हैं। इस अवधि में एफआईआई ने 2,510 करोड़ रुपए और डीआईआई ने 34,370 करोड़ रुपए का निवेश किया है।
सप्ताह के दौरान प्रमुख सूचकांकों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
निफ्टी ने सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ की और मध्य सप्ताह में 24,026 का निचला स्तर छुआ। हालांकि अंतिम दो कारोबारी सत्रों में रिकवरी देखने को मिली, जिससे सूचकांक निचले स्तरों से उबर गया। इसके बावजूद सप्ताह के अंत में निफ्टी 24,252 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले सप्ताह की तुलना में लगभग 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।
व्यापक बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने नया सर्वकालिक उच्च स्तर छूते हुए सप्ताह में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की रुचि अभी भी मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में बनी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। यदि तेल कीमतों में और तेजी आती है, तो भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी बाजार को समर्थन देती रह सकती है।
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