राजनीति
शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा-सरकारी मशीनरी का ‘सायरन’ खामोश
शिवसेना के उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने सोमवार को महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ केंद्र सरकार ने देशभर में मोबाइल फोन पर इमरजेंसी सायरन टेस्ट करके लोगों को आपदा की चेतावनी देने की कोशिश की, वहीं महाराष्ट्र में जब महिलाओं और छोटी बच्चियों के साथ रोजाना बलात्कार और अत्याचार की घटनाएं हो रही हैं, तो सरकारी मशीनरी का ‘सायरन’ खामोश है।
दरअसल, शिवसेना गुट के मुखपत्र ‘सामना’ में सोमवार को छपे एक संपादकीय में पुणे जिले के भोर तहसील के नसरापुर में चार साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या की घटना का जिक्र किया गया है। इस दर्दनाक घटना से पूरे इलाके में भारी गुस्सा फैल गया। गुस्साए लोग बच्ची का शव सड़क पर लेकर आए और आरोपी को तुरंत उनके हवाले करने की मांग करने लगे ताकि वे खुद न्याय कर सकें, लेकिन इसके बजाय पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज कर दिया।
लेख में कहा गया है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने ‘मिसिंग लिंक’ टनल प्रोजेक्ट के उद्घाटन के दौरान लगे ट्रैफिक जाम के लिए जनता से माफी मांगी। नसरापुर, चाकन और नागपुर में छोटी बच्चियों के साथ हुए अमानवीय यौन अत्याचार गृह विभाग की विफलता को दर्शाते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री को राज्य की सभी छोटी बच्चियों और उनकी माताओं से माफी मांगनी चाहिए।
संपादकीय में कहा गया है कि भोर तालुका के नसरापुर गांव में, चार साल की एक बच्ची से बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई। पुणे में अत्याचार और हत्या की घटनाएं चिंताजनक रूप से तेजी से बढ़ रही हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री के अपने शहर नागपुर में भी अत्याचार का शिकार हुई महिलाओं की दिल दहला देने वाली चीखें सुनी जा सकती हैं। सांगली में भी इसी तरह के अत्याचार के मामले सामने आए हैं। महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों को लेकर सरकार निष्क्रिय बनी हुई है और अपराधियों को अब कानून का कोई डर नहीं रहा।
आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री फडणवीस राज्य के गृह मंत्री के तौर पर पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। वह राज्य की कानून-व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय दूसरे राज्यों में राजनीतिक प्रचार में व्यस्त रहे। इसमें पश्चिम बंगाल, केरल, असम और तमिलनाडु के दौरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि महाराष्ट्र की छवि चमकाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है। राज्य के भीतर भ्रष्टाचार और अपराध बढ़ रहे हैं और खासकर महिलाओं की सुरक्षा बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुकी है।
लेख में भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा गया है कि जब पश्चिम बंगाल के आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले में भाजपा ने जोरदार विरोध किया था, तब महाराष्ट्र में हो रही घटनाओं पर वे राजनीति न करने की सलाह दे रहे हैं यानी जहां विपक्ष शासित राज्य होता है, वहां विरोध तेज होता है, लेकिन अपने राज्य में ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साध ली जाती है।
संपादकीय में यह भी सवाल उठाया गया है कि सरकार बार-बार फास्ट ट्रैक कोर्ट और फांसी की सजा की बात करती है, लेकिन वास्तव में कितने दोषियों को सजा मिली है। जनता का गुस्सा बढ़ रहा है और लोग पूछ रहे हैं कि सिर्फ बयानबाजी से क्या बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी?
लेख में सरकार की ‘लड़की बहन योजना’ पर भी तंज कसा गया है, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए की सहायता दी जाती है। सवाल उठाया गया है कि क्या सिर्फ 1,500 रुपए देने से सरकार को उन महिलाओं की बेटियों की सुरक्षा की अनदेखी करने का लाइसेंस मिल जाता है?”
संपादकीय में कहा गया है कि अगर किसी को इन घटनाओं का असली जिम्मेदार ठहराना हो तो वह गृह विभाग और राज्य सरकार की व्यवस्था है, जो कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही है।
लेख के अनुसार यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानवता और महिलाओं की गरिमा का सवाल है। सरकार से मांग की गई है कि वह सिर्फ ट्रैफिक या प्रशासनिक मुद्दों पर माफी मांगने के बजाय महाराष्ट्र की महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा में असफल रहने के लिए सार्वजनिक माफी मांगे।
महाराष्ट्र
मुंबई मानखुर्द एटीएम कार्ड फ्रॉड के दो आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने एटीएम कार्ड बदलकर फ्रॉड करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। 5 अगस्त को शिकायत करने वाली महिला पैसे निकालने के लिए मंगल मूर्ति जंक्शन पर बने एटीएम सेंटर गई थी। एटीएम से पैसे निकालते समय उसके पीछे खड़े एक अनजान व्यक्ति ने कार्ड का पिन देख लिया। इसके बाद उसने चालाकी से एटीएम रॉड बदलकर 19,000 रुपये निकाल लिए। पुलिस ने इस मामले में फ्रॉड का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में तीन संदिग्ध लोग दिखे थे जो एटीएम कार्ड से पैसे निकालते हुए पाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की पहचान कल्याण के रहने वाले 30 साल के कासिम अली बरकत अली और 38 साल के परवेज अकबर अली शेख के तौर पर हुई है। पुलिस दोनों से आगे की जांच कर रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उन्होंने पहले कितने लोगों को ठगा है। यह कार्रवाई एडिशनल कमिश्नर धनंजय कुलकर्णी के निर्देश पर डीसीपी समीर शेख ने की।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
बांग्लादेश चुनावों में ज्यादातर हिंसा के लिए बीएनपी से जुड़े गुट जिम्मेदार: मानवाधिकार संगठन

बांग्लादेश में आगामी राष्ट्रीय चुनाव से पहले हिंसा नियंत्रण एक बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। इसकी वजह कुछ महीने पहले संपन्न हुए चुनावों के दौरान या फिर बाद में हुई हिंसक गतिविधियां हैं। स्थानीय मीडिया ने मानवाधिकार संगठन के हवाले से बताया कि चुनावी हिंसा में सबसे ज्यादा सक्रिय वो गुट रहे हैं जो सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) जुड़े रहे।
ढाका के ह्यूमन राइट्स ग्रुप ‘ओधिकार’ ने अपनी मॉनिटरिंग रिपोर्ट में बताया कि बीएनपी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले 52 फीसदी, पोलिंग के दिन 53 फीसदी और चुनाव के बाद 75 फीसदी हिंसक गतिविधियों में लिप्त पाए गए।
बांग्लादेश के जाने-माने अखबार द डेली स्टार ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले दर्ज 15 फीसदी, चुनाव के दिन 13 फीसदी और चुनाव के बाद 9 फीसदी गतिविधियों में शामिल थे।
ये नतीजे सोमवार को ढाका में सेंटर ऑन इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (सीआईआरडीएपी) में हुई चर्चा के दौरान पेश किए गए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 के चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय तौर पर हिंसक और डराने-धमकाने की घटनाएं जारी रहीं।
बांग्लादेश के सभी जिलों में से चटगांव, कॉक्स बाजार, भोला, मैमनसिंह और ढाका मुख्य हॉटस्पॉट के तौर पर उभरे। यहां मुख्य तौर पर लोगों को डराया-धमकाया गया था। वहीं पोस्ट-इलेक्शन मारपीट, संपत्ति को नुकसान और हत्या जैसी वारदातें ज्यादा दर्ज की गईं। चुनाव से पहले 62 घटनाएं दर्ज की गईं।
चटगांव में सबसे ज्यादा 11 घटनाएं दर्ज की गईं, उसके बाद कॉक्स बाजार में आठ घटनाएं हुईं। ढाका और मैमनसिंह में पांच-पांच घटनाएं जबकि सिराजगंज में चार घटनाएं दर्ज की गईं। चुनाव से पहले हुई 34 घटनाओं में अधिकारियों ने किसी न किसी तरह की कार्रवाई की, जबकि 28 मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ओधिकार ने वोटिंग के दिन 19 चुनाव क्षेत्रों में 32 घटनाएं रिकॉर्ड की, जिसमें मैमनसिंह में सात और भोला में छह वारदातें अंजाम दी गईं। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव में चार जबकि कॉक्स बाजार और फेनी में तीन-तीन मामले संज्ञान में आए।
32 घटनाओं में से 17 में बीएनपी और उसके सहयोगी शामिल थे, जबकि चार में जमात और उसके सहयोगी। दो में इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के कार्यकर्ता शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक 11 मामलों में कोई पुलिसिया कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सात मामलों में क्या कार्रवाई हुई, यह पता नहीं चल सका।
पिछले महीने, ओधिकार ने बताया कि इस साल अप्रैल और जून के बीच बांग्लादेश में मॉब लिंचिंग में 33 लोग मारे गए, जबकि पूरे देश में राजनीतिक हिंसा में 41 लोगों की जान चली गई और 970 घायल हुए।
राजनीति
एनसीडीसी (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पारित, सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी सांसदों के जोरदार नारेबाजी के बीच राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनि मत से पारित हो गया।
सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से एनसीडीसी (संशोधन) विधेयक पेश किया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन करना है, ताकि सहकारी समितियों के लिए निधिकरण प्रक्रिया को तेज और अधिक लचीला बनाया जा सके।
इस विधेयक का उद्देश्य सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय, एनसीडीसी (एनसीडीसी) की भूमिका का विस्तार करना है, जो सहकारी समितियों को वित्तपोषित और प्रोत्साहित करता है, ताकि देशभर में सहकारी क्षेत्रों को वित्तपोषित किया जा सके।
सदन की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने विपक्षी सांसदों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया। हालांकि विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
इसके बाद लोकसभा में ध्वनि मत से विधेयक पारित हो गया और सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026, भी लोकसभा में लगातार नारेबाजी के बीच ध्वनि मत से पारित हो गया। इस विधेयक में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक पेश किया, जबकि विपक्षी सांसद 20 जुलाई को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति और बयान की मांग करते हुए नारेबाजी कर रहे थे।
नित्यानंद राय और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केरल का नाम बदलने के विधेयक पर चर्चा नहीं करने के लिए विपक्ष की आलोचना की। जब हंगामा बंद नहीं हुआ, तो विधेयक को बिना किसी चर्चा के ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
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