राष्ट्रीय समाचार
तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शनिवार को प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज परिसर में नवनिर्मित विभिन्न शैक्षिक सुविधाओं का लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ-साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए निर्मित शैक्षणिक सुविधाएं उत्कृष्ट एवं उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए। प्रयोगशालाओं के प्रभावी एवं नियमित उपयोग पर बल देते हुए कहा कि इनके माध्यम से विद्यार्थी अधिक व्यावहारिक ज्ञान अर्जित कर सकते हैं।
उन्होंने मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे शिक्षा अधिक पारदर्शी एवं परिणामोन्मुखी बन सके। उन्होंने अभिभावकों से भी आह्वान किया कि वे समय-समय पर विश्वविद्यालय आकर यह अवलोकन करें कि उनके बच्चे क्या सीख रहे हैं और किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में उन्होंने वर्तमान विश्व परिस्थितियों एवं संघर्षों का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि किसी भी राष्ट्र का विकास उसकी दूरदर्शिता पर निर्भर करता है।
राज्यपाल ने कहा कि वे स्वयं को केवल अपने परिवार की अपेक्षाओं तक सीमित न समझें, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के सपनों का प्रतिनिधि मानते हुए अपने लक्ष्य निर्धारित करें। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे यह विचार करें कि वे राष्ट्र निर्माण में क्या योगदान दे सकते हैं, क्योंकि प्रत्येक युवा की सकारात्मक सोच एवं प्रयास ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि आज का भारत अवसरों से परिपूर्ण है, जहां प्रत्येक विद्यार्थी के पास अपने सपनों को साकार करने की असीम संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि युवा केवल रोजगार तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार, शोध एवं सृजनात्मक कार्यों के माध्यम से देश के विकास में योगदान दें। आज का भारत एक आकांक्षी भारत है, जहां हर व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक, नवाचार एवं डिजिटल क्रांति का युग है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है। तकनीक के साथ-साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे केवल तकनीकी रूप से दक्ष न बनें, बल्कि नैतिक रूप से भी सशक्त बनें तथा अपने ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के कल्याण के लिए करें। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का वर्तमान दशक चुनौतियों एवं संभावनाओं का संगम है, जहां वैश्विक परिस्थितियों के बीच आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। भारत ने कठिन परिस्थितियों को अवसर में परिवर्तित करने की क्षमता प्रदर्शित की है तथा तकनीकी क्षेत्र में तीव्र गति से प्रगति करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
राज्यपाल ने देश में सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हो रहे विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत के तकनीकी आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्थापित हो रहे सेमीकंडक्टर संयंत्र देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं। जनभवन, उत्तर प्रदेश की पहल पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय एवं सीमेंस कंपनी के मध्य हुए समझौते के तहत सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन एवं सिमुलेशन जैसे क्षेत्रों में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की जा रही है। इसके अंतर्गत लगभग 200 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जो आगे चलकर हजारों विद्यार्थियों को उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इस प्रकार की पहलें युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीकी दक्षता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आज का भारत केवल परिवर्तन का साक्षी नहीं, बल्कि परिवर्तन का नेतृत्वकर्ता बन चुका है। ऊर्जा, तकनीक एवं नवाचार के क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना रहा है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे समय के साथ चलने के साथ-साथ समय को दिशा देने का संकल्प लें, ताकि वे स्वयं के साथ-साथ राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर स्थित देवालय के भी दर्शन किया। इसके पश्चात उन्होंने फार्मेसी विभाग, विज्ञान विभाग एवं कृषि विभाग के नव-निर्मित एवं उद्घाटित प्रयोगशालाओं, स्मार्ट कक्षाओं एवं अन्य शैक्षिक अवसंरचनाओं का निरीक्षण किया।
उन्होंने इन सुविधाओं की गुणवत्ता, आधुनिकता एवं उपयोगिता की प्रशंसा करते हुए इसे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही विश्वविद्यालय के लोकार्पित मुख्य पूर्वी द्वार का भी भ्रमण किया।
कुलपति डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नव-स्थापित प्रयोगशालाओं में विद्यार्थी केवल शोध कार्य ही नहीं करेंगे, बल्कि तर्क, विश्लेषण एवं नवाचार की क्षमता भी विकसित करेंगे। यहां से निकलने वाले शोध समाज एवं राष्ट्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
राष्ट्रीय समाचार
भारत की औद्योगिक वृद्धि दर अगस्त में बढ़कर 8 प्रतिशत हुई, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर शीर्ष पर रहा

भारत का औद्योगिक उत्पादन अगस्त में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ा है। इसकी वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन करना था। यह जानकारी सोमवार को सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में दी गई।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अगस्त के दौरान 9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।
आधिकारिक बयान के अनुसार, “रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने लगातार तीन महीनों में 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर्ज की है।”
यह अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि देश के इंजीनियरिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर 23 में से 18 उद्योग समूहों ने अगस्त में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इस दौरान सबसे अधिक योगदान देने वाले तीन प्रमुख उद्योगों में मोटर वाहनों का विनिर्माण, जिसमें 25.2 प्रतिशत वृद्धि हुई, इलेक्ट्रिकल उपकरणों का विनिर्माण, जिसमें 30.9 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, और मशीनरी एवं उपकरणों का विनिर्माण, जिसमें 25.3 प्रतिशत वृद्धि हुई, शामिल हैं।
बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में अगस्त के दौरान 12.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
हालांकि, खनन क्षेत्र में अगस्त के दौरान 5.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।
उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़ों के अनुसार, कैपिटल गुड्स, यानी कारखानों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के उत्पादन में अगस्त में 16.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई। यह खंड अर्थव्यवस्था में हो रहे वास्तविक निवेश को दर्शाता है, जिसका आगे चलकर रोजगार और आय के सृजन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
अगस्त के दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी के उत्पादन में भी 11.1 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि हुई। यह बढ़ती आय के बीच इन वस्तुओं की उपभोक्ता मांग में वृद्धि को दर्शाता है। वहीं, साबुन और कॉस्मेटिक्स जैसे कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स के उत्पादन में महीने के दौरान 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स सेक्टर में भी 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि हाईवे, बंदरगाह और रेलवे परियोजनाओं में सरकार के बड़े निवेश से प्रेरित रही। ऐसी परियोजनाएं बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने के साथ-साथ समग्र आर्थिक विकास दर को बढ़ावा देती हैं।
राजनीति
शरद पवार ने रखीं 17 मांगें, किसानों पर मंडराया बड़ा संकट: एनसीपी नेता अनीश गवांडे

एनसीपी (एसपी) नेता अनीश गवांडे ने शरद पवार की बैठक, चुनाव आयोग से जुड़े विवाद, सीजेपी के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को अनुमति नहीं दिए जाने, आईआईटी मुंबई के छात्र की मौत और प्रवेश वर्मा के थप्पड़ मारने के विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन सभी मुद्दों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाबदेही की मांग की।
शरद पवार की बैठक को लेकर अनीश गवांडे ने कहा कि पवार साहब ने एक पत्र के जरिए 17 मांगें सामने रखी हैं। इनमें कर्ज माफी, बिजली बिल और सूखा प्रभावित किसानों को सहायता देने जैसी मांगें शामिल हैं। कुछ महीने पहले ही शरद पवार ने आशंका जताई थी कि अगर इस साल बारिश ठीक नहीं हुई तो देश और खासकर महाराष्ट्र के किसानों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ईरान में हुए युद्ध के बाद यूरिया खाद की कमी की बात सामने आ रही है। ऐसे में अगर बारिश कम होती है तो किसानों के सामने और बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने किसानों के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई।
गवांडे ने कहा कि बैठक में अन्य राजनीतिक मुद्दों के साथ चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों पर भी चर्चा होगी और आगे की कार्रवाई को लेकर विचार किया जाएगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर गवांडे ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज पर इतने गंभीर आरोप लगाए गए हैं, ऐसे में तीनों चुनाव आयुक्तों को एक साथ सामने आकर स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने फॉर्म-6 में हुए बदलाव, वोटर लिस्ट के केंद्रीकरण और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। गवांडे ने इन प्रक्रियाओं को ‘असंवैधानिक और गैरकानूनी’ बताते हुए आरोप लगाया कि एसआईआर को लेकर राज्य चुनाव अधिकारियों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। साथ ही, अपील की प्रक्रिया में भी सभी चुनाव आयुक्तों को विश्वास में नहीं लिया गया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाएगा। कांग्रेस के अलावा सिविल सोसाइटी के लोग भी इस मुद्दे पर सामने आए हैं। मुंबई में 2 तारीख को विरोध-प्रदर्शन और 4 तारीख को शिवसेना तथा मनसे के साथ प्रदर्शन की बात कही गई है। चुनाव आयोग देश की महत्वपूर्ण स्वतंत्र संस्था है और उसके कामकाज को लेकर सवाल उठने पर नागरिकों को आवाज उठानी चाहिए।
मुंबई पुलिस द्वारा 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रस्तावित सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने पर भी गवांडे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महात्मा गांधी के दांडी मार्च का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी किसी अनुमति का सवाल नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विरोध-प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं देना अपना सामान्य रवैया बना लिया है। विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने मराठा आरक्षण, चुनाव आयोग और पुणे में एमपीएससी छात्रों के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों में अनुमति नहीं दी जाती, जबकि सरकार और सत्तारूढ़ पक्ष के कार्यक्रमों को अनुमति मिलती है। जनता इसे अन्याय के रूप में देख रही है और लोग अनुमति मिले या नहीं मिले, विरोध के लिए सड़कों पर उतरेंगे।
आईआईटी मुंबई के छात्र की मौत के मामले पर अनीश गवांडे ने छात्र आत्महत्या को राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति बताया। उन्होंने 2024 के एनसीआरबी आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि उस साल 14,500 छात्रों ने आत्महत्या की, जो 2014 के करीब 8,000 के आंकड़े से 80 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने आईआईटी में पिछले 20 वर्षों के दौरान 170 से अधिक छात्रों की आत्महत्या का भी दावा किया। गवांडे ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए संस्थानों में काउंसलरों की संख्या बढ़ाने और जातिगत भेदभाव के खिलाफ प्रभावी व्यवस्था बनाने की जरूरत है। जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके साथ सरकार को बातचीत करनी चाहिए और उन्हें राजनीतिक विरोधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रवेश वर्मा से जुड़े थप्पड़ विवाद पर गवांडे ने इसे गलत बताते हुए कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी आम नागरिक को सार्वजनिक रूप से थप्पड़ मारना अपराध है। किसी भी व्यक्ति को अपने हाथ में कानून लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने भाजपा से प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि अगर पार्टी खुद को अलग तरह की पार्टी मानती है तो उसे अपने नेता के खिलाफ कार्रवाई करके यह दिखाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हो तो पुलिस को भी मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी आम नागरिक पर हाथ उठाना गलत है, खासकर तब जब ऐसा करने वाला व्यक्ति विधायक या किसी महत्वपूर्ण पद पर हो।
राष्ट्रीय समाचार
नौसेना कमांडर्स कांफ्रेंस में समुद्री सुरक्षा अभियान व तैयारियों पर होगा मंथन

नई दिल्ली में भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडर्स तीन दिनों तक देश की समुद्री सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन मंथन करेंगे। इसके लिए नौसेना कमांडर्स कांफ्रेंस 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक नौसेना भवन में आयोजित की जाएगा। नौसेना का यह सर्वोच्च स्तर का सम्मेलन है। यह केवल नियमित समीक्षा का मंच नहीं है, बल्कि सैन्य और रणनीतिक स्तर पर नौसेना की तैयारियों का व्यापक आकलन करने का महत्वपूर्ण अवसर भी है।
कांफ्रेंस में नौसेना के शीर्ष नेतृत्व के साथ ऑपरेशनल तैनाती पर कार्यरत व एरिया कमांडर शामिल होंगे। इनके जरिए समुद्री अभियानों की तैयारियों, चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों पर व्यापक चर्चा होगी। साथ ही, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ भी संस्थागत संवाद किया जाएगा। यह वर्ष 2026 में आयोजित होने वाले नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर्स कांफ्रेंस का दूसरा संस्करण है। इस बार सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी हैं और समुद्री मार्गों तथा ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में यहां भारतीय नौसेना की भूमिका सम्मेलन के प्रमुख विषयों में रह सकती है।
नौसेना के अनुसार, देश के समुद्री हितों की सुरक्षा में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हुई है। खास तौर पर ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ के दौरान नौसेना ने जिस तरह समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े हितों की रक्षा के लिए अभियान चलाया है, उसने हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे एक भरोसेमंद समुद्री सुरक्षा साझेदार के रूप में उसकी भूमिका को और मजबूत किया है। भारतीय नौसेना लगातार हाई ऑपरेशनल स्तर पर काम कर रही है। ऐसे में सम्मेलन के दौरान यह भी देखा जाएगा कि बदलते समुद्री सुरक्षा वातावरण में नौसेना अपनी युद्धक क्षमता और परिचालन तैयारियों को किस तरह और मजबूत कर सकती है।
सम्मेलन के पहले दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नौसेना के कमांडरों को संबोधित करेंगे। वह राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़े व्यापक दृष्टिकोण और भारतीय नौसेना से देश की अपेक्षाओं पर अपनी बात रखेंगे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और थल सेनाध्यक्ष भी नौसेना कमांडरों के साथ संवाद करेंगे। इस पहल का उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, संयुक्त अभियानों और सैन्य एकीकरण को और मजबूत करना है।
सम्मेलन के अगले दो दिनों में नौसेना प्रमुख और नौसेना के कमांडर-इन-चीफ कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की समीक्षा करेंगे। इनमें अभियान, सैन्य सामग्री, रसद, मानव संसाधन और प्रशिक्षण जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं। इसके साथ ही युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए नई तकनीकों को तेजी से अपनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। एआई, बड़े आंकड़ों का विश्लेषण, स्वायत्त और बिना चालक वाली प्रणालियां तथा साइबर अभियान जैसे क्षेत्र चर्चा के केंद्र में रहेंगे।
नौसेना का जोर अत्याधुनिक तकनीकों को केवल शामिल करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें वास्तविक सैन्य अभियानों में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित करने पर भी रहेगा। इसके लिए आधुनिक युद्ध की नई अवधारणाओं को अपनाने और तकनीकी क्षमता को तेजी से सैन्य ताकत में बदलने की जरूरत पर जोर दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का आधार नौसेना के तीन प्रमुख स्तंभ होंगे। इनमें संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार हैं। इन्हीं के जरिए सरकार के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप नौसेना की भविष्य की क्षमता को आकार देने पर जोर रहेगा।
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