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Wednesday,08-April-2026
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अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव: युद्ध खत्म करने की शर्तें तय

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तेहरान, 8 अप्रैल : ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने बुधवार को कहा कि अमेरिका के साथ दो हफ्ते का सीजफायर युद्ध के खत्म होने का संकेत नहीं है। क्योंकि उसके 10-सूत्रीय प्रस्ताव के विवरण पर अभी बातचीत होनी बाकी है।

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘मेहर’ के अनुसार, तेहरान की ओर से रखे जाने वाले 10 सूत्रीय प्रस्ताव में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर ईरान का लगातार नियंत्रण, ईरान के परमाणु संवर्धन अधिकारों की स्वीकृति, सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को हटाना, सभी द्वितीयक प्रतिबंधों को हटाना और ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना शामिल है। अमेरिका की यह प्रतिबद्धता कि वह आगे कोई भी आक्रामक कार्रवाई नहीं करेगा और ईरान के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को समाप्त करने की भी मांग रखी गई है।

इसके अतिरिक्त, मांगों में युद्ध में हुए नुकसान के लिए ईरान को मुआवजा देना, क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर शत्रुता की समाप्ति भी शामिल है। काउंसिल ने एक बयान भी जारी किया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित दो हफ्ते के सीजफायर की पुष्टि की गई।

बयान के मुख्य बिंदुओं में यह उल्लेख किया गया है कि ईरान ने एक बड़ी जीत हासिल की है और अमेरिका को अपनी 10-सूत्रीय योजना को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया है। इस योजना में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से नियंत्रित मार्ग और प्रतिरोध की धुरी के सभी तत्वों के खिलाफ युद्ध को समाप्त करने की जरूरत शामिल है।

ईरान के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की 10-सूत्रीय योजना को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार कर लिया है। बयान में आगे कहा गया है कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की मंजूरी के तहत, ईरान युद्धविराम के विवरण को अंतिम रूप देने के लिए इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत करेगा।

बयान में कहा गया है कि अमेरिकी पक्ष पर पूर्ण अविश्वास के साथ ये बातचीत शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में शुरू होगी और ईरान इन वार्ताओं के लिए दो हफ्ते का समय देगा। आपसी सहमति से इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक बाध्यकारी प्रस्ताव की भी मांग की, जो अमेरिका के साथ सभी समझौतों को बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय कानून में बदल देगा।

इसमें यह भी कहा गया कि सीजफायर का मतलब युद्ध की समाप्ति या 10-सूत्रीय योजना के विवरण पर चल रही बातचीत का अंत नहीं है। बयान में आगे ईरानियों से अमेरिका के साथ बातचीत की प्रक्रिया पर भरोसा करने और उसका समर्थन करने की अपील की गई है। यह प्रक्रिया सर्वोच्च नेता और व्यवस्था के उच्चतम स्तरों की निगरानी में हो रही है।

अंतरराष्ट्रीय

भारत ने ईरान में मौजूद भारतीयों को दी जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह, युद्धविराम का स्वागत किया

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते के बावजूद, भारत ने बुधवार को ईरान में मौजूद अपने नागरिकों को सलाह दी कि वे जल्द से जल्द देश छोड़ दें। भारत ने अपने नागरिकों को ईरान में स्थित दूतावास के बताए रास्तों का इस्तेमाल करने का भी सुझाव दिया है।

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को एक एडवाइजरी में कहा, “7 अप्रैल की एडवाइजरी के क्रम में और हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे दूतावास के साथ तालमेल बिठाकर और दूतावास की ओर से सुझाए गए रास्तों का इस्तेमाल करके जल्द से जल्द ईरान छोड़ दें।”

भारतीय दूतावास ने आगे कहा, “यह फिर से दोहराया जाता है कि दूतावास से पहले से सलाह और तालमेल किए बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा तक पहुंचने की कोई कोशिश नहीं की जानी चाहिए।” एडवाइजरी में दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए आपातकालीन नंबर भी शेयर किए हैं।

हालांकि, एक ताजा पोस्ट में भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम का स्वागत किया। इसके साथ ही, उम्मीद जताई कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।

पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम पर विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। जैसा कि हमने पहले भी लगातार जोर दिया है, मौजूदा संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति बेहद जरूरी हैं। इस संघर्ष ने लोगों को पहले ही भारी कष्ट पहुंचाया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व व्यापार नेटवर्क को बाधित किया है। हमें उम्मीद है कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आवागमन की अबाध स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार का प्रवाह जारी रहेगा।”

यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौता होने के महज कुछ घंटों बाद सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष-विराम समझौते के तहत ईरान के खिलाफ हमलों को दो हफ्ते के लिए सशर्त रोकने की घोषणा की। उन्होंने इस कदम को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने के प्रयासों से जोड़ा।

ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्थायी रूप से स्वीकार करने का संकेत दिया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि अगर ईरान पर हमले बंद हो जाते हैं, तो तेहरान भी अपनी सैन्य कार्रवाई रोक देगा।

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अंतरराष्ट्रीय

‘ड्राफ्ट- एक्स पर पाकिस्तान के पीएम का संदेश’, शहबाज शरीफ की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम समझौते पर वाहवाही लूटने की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की एक गलती ने सोशल मीडिया पर एक बहस छेड़ दी। कई यूजर्स ने दावा किया कि शहबाज शरीफ की ओर से कई गई पोस्ट को किसी बाहरी व्यक्ति ने लिखा था।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान को दी समय सीमा बढ़ाने की अपील की। हालांकि, सोशल मीडिया यूजर्स ने इसमें एक ऐसी लिखने की गलती पकड़ ली, जिससे लगा कि यह पोस्ट किसी बाहरी व्यक्ति ने लिखी है।

शहबाज शरीफ के ‘एक्स’ अकाउंट से पोस्ट होने के कुछ ही देर बाद, यूजर्स ने ‘एडिट हिस्ट्री’ के स्क्रीनशॉट शेयर करना शुरू कर दिया। इन स्क्रीनशॉट में दिख रहा था कि शुरुआत में पोस्ट में एक लाइन लिखी थी, “ड्राफ्ट- एक्स पर पाकिस्तान के पीएम का संदेश।”

‘द डेली बीस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा लगता है कि ‘ड्राफ्ट’ वाला लेबल गलती से मूल पोस्ट में शामिल हो गया था, जिसे बाद में किए गए एक बदलाव में हटा दिया गया। इस मीडिया आउटलेट ने रिपोर्ट किया कि यह घटना इस बात को ‘बेनकाब’ करती है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने शायद इस संदेश को ‘कट और पेस्ट’ किया था, जिससे यह अटकलें तेज हो गईं कि इस संदेश को असल में किसने लिखा।

सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस पोस्ट में अमेरिका के कई वरिष्ठ अधिकारियों को टैग किया गया था, जिनमें ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वैन्स और विदेश मंत्री मार्को रूबियो शामिल थे। इससे इस बात की अटकलें और तेज हो गईं कि यह सब किसी आपसी तालमेल के तहत किया गया था। यह भी सवाल उठाया गया कि किसी देश के प्रधानमंत्री की टीम ड्राफ्ट मैसेज में अपने ही देश का नाम क्यों लिखेगी। कुछ यूजर्स ने दावा दिया कि यह शब्द अमेरिकी अधिकारियों की ओर से दिए गए होंगे।

‘फोर्ब्स’ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संदेश की बारीकी से जांच की गई, क्योंकि उनकी अपील का शुरुआती ड्राफ्ट देखकर ऐसा लग रहा था कि इसे पाकिस्तान के बाहर की किसी संस्था ने लिखा है।

‘द डेली बीस्ट’ की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि शहबाज शरीफ ने बाद में एक संशोधित बयान जारी किया, जिसमें ‘ड्राफ्ट’ वाला संदर्भ हटा दिया गया था और उनके कार्यालय ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोधों का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान को लेकर ट्रंप के संकेत के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई

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वॉशिंगटन, 8 अप्रैल : तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को दो सप्ताह के लिए रोकेंगे, जिससे ऊर्जा-समृद्ध खाड़ी क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंकाएं कम हो गईं।

अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गए, जिससे हालिया बढ़त उलट गई। यह बढ़त होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास कई हफ्तों से जारी तनाव के कारण हुई थी, जो वैश्विक तेल परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने को यह जानकारी दी।

जर्नल के अनुसार, यह गिरावट ट्रंप की उस घोषणा के बाद आई जिसमें उन्होंने कहा कि यदि तेहरान जलडमरूमध्य को फिर से खोलता है तो वे ईरान पर हमले रोक देंगे।

शेयर बाजारों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों से जुड़े वायदा 2 प्रतिशत से अधिक बढ़ गए, जो संकट से जुड़ी कई दिनों की अस्थिरता के बाद निवेशकों की राहत का संकेत है।

रिपोर्ट में कहा गया, “स्टॉक फ्यूचर्स तेजी से बढ़ रहे हैं और तेल की कीमतें गिर रही हैं, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि वे ईरान पर हमले दो सप्ताह के लिए रोक देंगे।”

होरमुज़ जलडमरूमध्य, जिसके माध्यम से वैश्विक तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है, इस संघर्ष का केंद्र रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने कई हफ्तों तक इस मार्ग को सीमित किया था, जिससे कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ीं।

जर्नल के अनुसार, ईरान के साथ समझौते की समयसीमा से पहले बाजारों में तनाव था क्योंकि व्यापारियों को डर था कि बड़े स्तर पर संघर्ष से खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति बाधित हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

इसके बजाय, संभावित युद्धविराम की घोषणा से वैश्विक बाजारों में व्यापक तेजी आई। एशियाई शेयर बाजार भी चढ़े, जिसमें जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ बंद हुए।

निवेशकों ने ट्रंप की पहले की धमकियों को काफी हद तक बातचीत की रणनीति माना था। रिपोर्ट के अनुसार, “कुछ निवेशकों ने दांव लगाया था कि ट्रंप समयसीमा बढ़ा सकते हैं, जैसा कि उन्होंने पिछले महीने कई बार किया है।”

हाल के हफ्तों में तेल की कीमतें इस आशंका के कारण बढ़ी थीं कि जलडमरूमध्य को बंद या गंभीर रूप से सीमित किया जा सकता है। यह मार्ग कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस जैसी महत्वपूर्ण आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।

तनाव कम होने से अन्य परिसंपत्तियों को भी समर्थन मिला। सोने की कीमतें बढ़ीं, जो अनिश्चितता को दर्शाती हैं जबकि शेयर बाजार में तेजी आई क्योंकि तत्काल संघर्ष का जोखिम घटा।

हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। प्रस्तावित दो सप्ताह का युद्धविराम इस बात पर निर्भर करता है कि ईरान जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलता है और दोनों पक्ष आगे तनाव नहीं बढ़ाते।

घोषणा के बाद भी खाड़ी के कुछ हिस्सों में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की खबरों ने इस विराम की स्थिरता पर सवाल उठाए।

व्यापक संघर्ष पहले ही ऊर्जा बाजारों को कई हफ्तों से प्रभावित कर चुका है। सीमित शिपिंग और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है।

अब यह दो सप्ताह का समय कूटनीति के जरिए स्थिति को स्थिर करने का अवसर देता है लेकिन व्यापारी अभी भी नीतिगत या सैन्य बदलावों को लेकर सतर्क हैं।

होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक बना हुआ है। इसमें कोई भी व्यवधान वैश्विक स्तर पर तुरंत प्रभाव डाल सकता है, खासकर बड़े आयातकों पर।

भारत के लिए, जो खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल के आयात पर काफी हद तक निर्भर है, तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव से महंगाई, मुद्रा स्थिरता और समग्र आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है।

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