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अमेरिका-ईरान युद्धविराम के चलते शेयर बाजार में लौटी हरियाली, सेंसेक्स और निफ्टी में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल
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मुंबई, 8 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते के चलते हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार जबरदस्त तेजी के साथ हरे निशान में खुला। इस दौरान निफ्टी50 और सेंसेक्स में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल दर्ज की गई।
सेंसेक्स 2674.05 अंक या 3.58 प्रतिशत बढ़कर 77,290.63 पर खुला, तो वहीं निफ्टी 50 ने दिन की शुरुआत 731.50 अंक या 3.2 प्रतिशत उछलकर 23,855.15 पर की।
हालांकि खबर लिखे जाने तक (सुबह 9.32 बजे के करीब) सेंसेक्स 3.56 प्रतिशत यानी 2658.73 अंकों की बढ़त के साथ 77,275.31 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि निफ्टी50 3.34 प्रतिशत यानी 772.95 अंकों की तेजी के साथ 23,896.60 पर कारोबार कर रहा था।
गौरतलब है कि बाजार में यह तेजी ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की स्थिति में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के बाद आई है। इससे पहले दोनों कारोबारी सत्रों में बाजार में गिरावट देखी गई।
शुरुआती कारोबार में सभी क्षेत्रों में तेजी देखने को मिली और सभी शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। क्षेत्रवार देखें तो रियल एस्टेट, ऑटो, बैंकिंग और फार्मा कंपनियों के शेयरों में 6 प्रतिशत तक की बढ़त देखी गई।
व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 3.25 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 3.22 प्रतिशत की तेजी दर्जी की गई। इसके साथ ही लार्जकैप सूचकांकों में भी बढ़त देखी गई। वहीं, इंडिया वीआईएक्स में 19 प्रतिशत की गिरावट आई।
निफ्टी50 पैक में इंडिगो, एलएंडटी, श्रीराम फाइनेंस, अदाणी पोर्ट्स, टीएमपीवी, एमएंडएम, अदाणी इंटरप्राइजेज, बजाज फाइनेंस और मारुति सुजुकी के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई और ये टॉप गेनर्स में शामिल रहे। इसके विपरीत कोल इंडिया, ओएनजीसी, टेक महिंद्रा, विप्रो, सन फार्मा और हिंडाल्को के शेयरों में गिरावट देखने को मिली।
इसके अलावा, आज व्यापारी और निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के वित्त वर्ष 2027 के लिए पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा पर भी बारीकी से नजर रखेंगे।
विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा भू-राजनीतिक चिंताओं और विदेशी पूंजी के लगातार निकासी के बीच अस्थिरता बने रहने की संभावना है।
विश्लेषकों ने कहा, “व्यापारियों को जोखिम प्रबंधन पर सख्ती बरतते हुए, गिरावट आने पर खरीदारी करने या विशिष्ट स्टॉक के शेयरों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी जाती है। आईटी, बैंकिंग और तेल से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों पर नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि निकट भविष्य में अस्थिरता और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि “यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होता है, तो मैं ईरान पर बमबारी और हमले को दो सप्ताह के लिए निलंबित करने पर सहमत हूं। यह दोतरफा युद्धविराम होगा।”
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भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में 7 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद: रिपोर्ट

भारत चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5-7 प्रतिशत हासिल करने की राह पर है। इस दौरान मजबूत घरेलू मांग, बैंक ऋण में तेजी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार के चलते नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 11-12 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। यह जानकारी जेफरीज की ओर से जारी एक रिपोर्ट में दी गई है।
जेफरीज ने अपनी ताजा ‘ग्रीड एंड फियर’ रिपोर्ट में कहा कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन छह महीने पहले की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। इसकी वजह ऋण में व्यापक स्तर पर विस्तार और मांग से जुड़े संकेतकों में सुधार है।
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जुलाई में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जाने वाले ऋण में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उद्योग क्षेत्र को कर्ज 20 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र को ऋण 22.9 प्रतिशत और कॉरपोरेट ऋण में 21.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
रिपोर्ट में कहा गया, “कॉरपोरेट ऋण में तेजी यह भी संकेत देती है कि लंबे समय से प्रतीक्षित निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र की शुरुआत आखिरकार हो रही है।”
जेफरीज में इंडिया रिसर्च के प्रमुख महेश नंदूरकर ने कहा कि आय वृद्धि चालू वित्त वर्ष के 14 प्रतिशत से बढ़कर 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में घरेलू मांग में लगातार बनी मजबूती की ओर भी इशारा किया गया है।
इसके अलावा, अगस्त में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अप्रैल-अगस्त के दौरान बिजली की मांग में वृद्धि बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। इसकी तुलना में जनवरी-मार्च की अवधि में बिजली मांग में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
वहीं, रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एफसीएनआर (बी) पहल के तहत विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह देखने को मिला, जिसके तहत सरकार ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) से उम्मीद से बेहतर 136 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा राशि जुटाई।
राजकोषीय मोर्चे पर ब्रोकरेज ने कहा कि सरकार के राजकोषीय समेकन के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसके और कम होने की उम्मीद है।
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सोने और चांदी का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ा, निवेशकों को फेड के फैसले का इंतजार

सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को तेजी देखने को मिली और दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ गया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,809 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,291 रुपए या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,52,100 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।
दोपहर 12 बजे यह 953 रुपए या 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,51,762 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,51,450 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,52,100 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है, यह दिखाता है कि खुलने के बाद सोना सीमित दायरे में बना हुआ है।
सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिल रही है।
चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,32,118 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 3,667 रुपए या 1.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,35,785 रुपए प्रति किलो पर खुला।
फिलहाल यह 3,250 रुपए या 1.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,35,988 रुपए प्रति किलो पर था।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,34,540 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,35,988 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर बनाया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,366 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65 डॉलर प्रति औंस पर थी।
ब्याज दरों पर दो दिवसीय अमेरिकी फेड बैठक के फैसलों का ऐलान आज देर शाम किया जाएगा। यह ऐसे समय पर आ रहा है, जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत करीब चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और यूएस बॉन्ड यील्ड भी 5 प्रतिशत के ऊपर जा चुकी है। इस कारण इस फैसले पर निवेशक करीब से निगाह रख रहे हैं।
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भारत का आवासीय बाजार स्थिर, हाउसिंग प्राइस इंडेक्स पहली तिमाही में 3.6 प्रतिशत बढ़ा

भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (एचपीआई) वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो पिछले साल की समान अवधि की वृद्धि के समान ही है। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में यह सालाना 4.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा था। यह देश के स्थिर आवासीय बाजार को दिखाता है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में बताया गया कि तिमाही आधार पर एचपीआई वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 1.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में की वृद्धि दर 0.5 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, हाउसिंग क्रेडिट वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 11 प्रतिशत रही है।
रिपोर्ट में बताया गया कि हाउसिंग के क्षेत्र में महंगाई पर इनपुट लागत बढ़ने का असर हुआ है। ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों और कंस्ट्रक्शन की लागत में बढ़ोतरी से घरों की कीमतें बढ़ीं।
पश्चिम एशिया में संघर्ष के असर से ग्लोबल ग्रोथ पर दबाव पड़ा, क्योंकि इससे कमोडिटी की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन में रुकावट आई। भारत में भी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में महंगाई तेजी से बढ़ी और इसका असर अलग-अलग इंडस्ट्रीज पर देखा गया।
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एचपीआई की सालाना बढ़ोतरी में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले शहरों में चंडीगढ़ (49.6 प्रतिशत), जयपुर (36.4 प्रतिशत), कानपुर (27.5 प्रतिशत), लखनऊ (17.7 प्रतिशत) और तिरुवनंतपुरम (16.3 प्रतिशत) शामिल थे।
चंडीगढ़ में कीमतों में बढ़ोतरी की वजह कलेक्टर रेट में हालिया बदलाव है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू हुआ है। इसके अलावा, नई जमीन की कमी ने भी हाल के समय में कीमतों को बढ़ाया है।
दिल्ली (-1.2 प्रतिशत), कोलकाता (-31.5 प्रतिशत), मुंबई (2.8 प्रतिशत) और हैदराबाद (-0.8 प्रतिशत) जैसे शहरों में वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के दौरान गिरावट आई है या बढ़ोतरी की रफ्तार बहुत धीमी रही है।
बेहतर कनेक्टिविटी और सर्विस-सेक्टर में रोजगार के बढ़ते मौकों की वजह से बड़े शहरों के बजाय टियर-2 शहर बाजार की मांग को आगे बढ़ा रहे हैं।
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