अंतरराष्ट्रीय
ईरान में क्रूर शासन के खिलाफ हमारे संघर्ष की दहाड़ पूरी दुनिया सुन रही : नेतन्याहू
तेल अवीव : इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि मेरे भाइयों और बहनों, इजरायल के नागरिकों, इस स्वतंत्रता के पर्व की पूर्व संध्या पर इजरायल पहले से कहीं अधिक मजबूत है। पूरी दुनिया ईरान की दुष्ट सरकार के खिलाफ हमारी लड़ाई में हमारी शेर जैसी गर्जना सुन रही है, एक ऐसी लड़ाई जिसमें हमने बेहद बड़ी व विशाल उपलब्धियां हासिल की हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इसकी एक पीड़ादायक कीमत भी है। अभी कल ही, हमने अपने चार सर्वश्रेष्ठ बेटों को खो दिया। इजरायल के नागरिकों की ओर से और मेरी व मेरी पत्नी सारा की ओर से मैं शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। हम सभी प्रेम के साथ उन परिवारों को गले लगाते हैं जिन्होंने अपना सबसे अनमोल सदस्य खो दिया है और हम अपने वीर घायल साथियों को भी प्रेम से गले लगाते हैं। हम एक ही लोग हैं, एक साझा नियति की डोर से बंधे हुए, अपने अस्तित्व और अपने भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए साथ हैं।
अमेरिका के साथ हमारे संयुक्त अभियान के एक महीने पूरे होने पर हम व्यवस्थित रूप से उस आतंकी शासन को कुचल रहे हैं जिसने दशकों तक यह नारा लगाया: “अमेरिका की मौत, इजरायल की मौत।” यह सच है कि हर पीढ़ी में वे हमें नष्ट करने के लिए उठ खड़े होते हैं और इस पीढ़ी में आयतुल्लाओं के शासन ने हमें समाप्त करने, मध्य पूर्व पर कब्ज़ा करने और पूरी दुनिया को धमकाने का बड़ा प्रयास किया। उसने इन घातक इरादों को आगे बढ़ाने के लिए परमाणु कार्यक्रमों और बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास किया, हमारे आसपास आतंकवादी संगठनों को धन और हथियार दिए और उस पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को झेलते हुए आगे बढ़ा। अब मैं आपको बताना चाहता हूं कि वर्षों में इस सब पर ईरान को लगभग एक ट्रिलियन डॉलर का खर्च आया है। अब यह कहा जा सकता है कि वह पैसा व्यर्थ चला गया।
ईरान से वसूली गई कीमत केवल धन तक सीमित नहीं थी। आने वाले पासओवर (मुक्ति पर्व) की भावना में ‘मोचन युद्ध’ की शुरुआत से ही, हमने ‘बुराई के धुरी’ पर दस विपत्तियां डाली हैं। गाज़ा में हमास पर प्रहार, लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर प्रहार, सीरिया में असद पर प्रहार, यहूदिया और समारिया में आतंकी संगठनों पर प्रहार, यमन में हूतियों पर प्रहार, और ईरान पर पांच और प्रहार- उनके परमाणु कार्यक्रम पर प्रहार, उनकी मिसाइलों पर प्रहार, शासन की बुनियादी संरचना पर प्रहार, दमनकारी ताकतों पर प्रहार, और “पहिलौठों की विपत्ति”, या हमारे मामले में, शीर्ष नेतृत्व पर प्रहार। तानाशाह खामेनेई से लेकर परमाणु वैज्ञानिकों तक और रिवोल्यूशनरी गार्ड व बसीज के कुख्यात हत्यारों तक, नसरल्लाह, हनियेह, डेइफ़, सिनवार और कई अन्य तक।
मिस्र की दस विपत्तियों के बाद भी फ़िरऔन ने इजरायल के लोगों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी और हम सभी जानते हैं उसका अंत क्या हुआ। यही स्थिति ईरानी ‘बुराई के धुरी’ के खिलाफ अभियान में भी है। यह अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन अभी भी यह कहा जा सकता है कि हमारे दुश्मनों पर आई इन दस विपत्तियों के मुकाबले, हमने ‘राइजिंग लॉयन’ और ‘रोअरिंग लॉयन’ अभियानों तथा पूरे ‘मोचन युद्ध’ में दस बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।
पहला हमने एक रणनीतिक बदलाव किया। इन दोनों अभियानों से पहले, ईरान हमें घेरने की कोशिश कर रहा था। आज हम उन्हें घेर रहे हैं। ईरान का आयतुल्ला शासन पहले से कहीं अधिक कमजोर है और इजरायल पहले से कहीं अधिक मजबूत।
दूसरा, हमने दुनिया को ईरान के खतरे के प्रति जागरूक किया। पहले दुनिया ने हमारी चेतावनियों को नजरअंदाज किया। आज कोई भी इस खतरे की गंभीरता को नहीं नकार सकता।
तीसरा, पहले हम अकेले लड़ रहे थे। आज हम अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे हैं- एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक सहयोग में।
चौथा, हमने उस आतंकी शासन की नींव हिला दी, जो पहले अजेय लगता था। अब यह शासन डगमगा रहा है, और देर-सबेर गिर जाएगा।
पांचवां, हमने दो अस्तित्वगत खतरों को समाप्त किया- परमाणु हथियार और बैलिस्टिक मिसाइलों का खतरा।
छठा, हमने ईरान की आतंकी सेनाओं की ताकत तोड़ दी, जो हमें चारों ओर से घेर रही थीं।
सातवां, हमने अपनी सीमाओं से परे गहरे सुरक्षा क्षेत्र स्थापित किए। आठवां, हमने अपनी सुरक्षा नीति बदली-अब हम पहल करते हैं और अपने दुश्मनों को चौंकाते हैं।
नौवाँ, हमने साबित किया कि हमारी वायु रक्षा प्रणाली दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है। दसवाँ, हमने इजरायल की जनता और अर्थव्यवस्था की अद्भुत मजबूती दिखाई।
इजरायल के नागरिकों, ये उपलब्धियां आपकी वजह से संभव हुई हैं-आपके विश्वास और शक्ति के कारण। दुश्मन आते-जाते रहेंगे लेकिन उनका सामना करने की हमारी क्षमता और दृढ़ संकल्प ही हमारे भविष्य को सुरक्षित करता है। मिलकर हमने इजरायल को एक क्षेत्रीय शक्ति, और कुछ क्षेत्रों में वैश्विक शक्ति बना दिया है।
कई बार पिछले ढाई वर्षों में, मुझे कठिन निर्णय लेने पड़े- रफ़ाह, फिलाडेल्फ़ी, गाज़ा सिटी में प्रवेश, बंधकों की वापसी, सीरिया में हस्तक्षेप और ‘राइजिंग लॉयन’ व ‘रोअरिंग लॉयन’ जैसे साहसी कदम। इन सभी में मैंने आपकी आवाज़ सुनी, नागरिकों की और सैनिकों की।
आपने मुझसे कहा: “हम समझते हैं क्या दांव पर है। हम मजबूत हैं। प्रधानमंत्री, कमजोरी की आवाज़ों के सामने मत झुको। लड़ाई जारी रखो, हमें जीत की ओर ले चलो।” और हम वही कर रहे हैं।
गाज़ा और लेबनान में आगे बढ़ते सैनिक से लेकर तेहरान के आसमान में उड़ते पायलट तक-इस्राइली योद्धा चीते की तरह तेज, चील की तरह हल्के और शेर की तरह बहादुर हैं। हम आतंकी शासन को कुचलते रहेंगे, अपनी सुरक्षा को मजबूत करेंगे और अपने लक्ष्य हासिल करेंगे।
पासओवर हग्गादा में कहा गया है: “हर पीढ़ी में कोई न कोई हमें नष्ट करने उठ खड़ा होता है लेकिन ईश्वर हमें उनके हाथों से बचाते हैं।” यही विरासत हमें संभाले हुए है। राष्ट्र अडिग खड़ा है, और हमें भी अडिग रहना होगा। ईश्वर की कृपा से हम इजरायल की अनंतता सुनिश्चित करेंगे।
पूरे इजरायल को स्वतंत्रता पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।
अंतरराष्ट्रीय
हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।
सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय
चीनी राज्य परिषद ने ‘भीतरी मंगोलिया पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए समग्र योजना’ की जारी

बीजिंग, 10 अप्रैल : चीनी राज्य परिषद द्वारा जारी ‘चीन (भीतरी मंगोलिया) पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए समग्र योजना’ 9 अप्रैल को सार्वजनिक की गई। इसके साथ ही चीन में पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्रों की कुल संख्या 23 हो गई है।
समग्र योजना भीतरी मंगोलिया पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र को सुधारों में अधिक स्वायत्तता प्रदान करती है, जिससे इसे प्रायोगिक परियोजनाएं संचालित करने और व्यापक क्षेत्रों में गहन स्तर पर मौलिक, एकीकृत और विशिष्ट अन्वेषण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इसमें 19 सुधार और नवाचार उपायों की रूपरेखा दी गई है, जिनमें सीमा व्यापार में नवाचार और विकास, अंतरराष्ट्रीय रसद सेवाओं को मजबूत करना, वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों के रूपांतरण और अनुप्रयोग की दक्षता में सुधार करना और विभिन्न क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान का विस्तार करना शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय
वेंस की पाकिस्तान यात्रा से पहले सुरक्षा को लेकर चिंता, सालों बाद यूएस के किसी शीर्ष अधिकारी का पाक दौरा

नई दिल्ली, 10 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच इस हफ्ते के अंत में पाकिस्तान में बातचीत होने वाली है। अमेरिका की तरफ से इस बैठक में शामिल होने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपने डेलिगेशन के साथ इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति के इस दौरे से संबंधित सुरक्षा को लेकर काफी चिंताएं हैं। सालों के बाद अमेरिका का कोई आला अधिकारी पाकिस्तान का दौरा कर सकता है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान के दौरे को लेकर गहरी चिंता है। व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सुरक्षा चिंता की वजह से वेंस को पाकिस्तान ना जाने की सलाह दी है।
फिलहाल यह कन्फर्म नहीं है कि जेडी वेंस इस बैठक में शामिल होने जाएंगे या नहीं, लेकिन व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद जाएंगे।
किसी भी अमेरिकी अधिकारी के लिए पाकिस्तान के दौरे पर जाने से पहले उनके लिए सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद है। पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों की सक्रियता की वजह से वहां पर किसी भी दूसरे देश के नेता की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगता है।
वेंस ऐसे समय में पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं, जब अमेरिका ने खुद इस देश के लिए ‘लेवल 3: यात्रा पर पुनर्विचार करें’ की एडवाइजरी जारी की हुई है। इसकी मुख्य वजह आतंकवाद, अपराध और अशांति का खतरा है।
इसके अलावा अमेरिका ने हाल ही में लाहौर और कराची के वाणिज्य दूतावास से गैर-जरूरी अमेरिकी कर्मचारियों को सुरक्षा कारणों से हटा लिया गया था। यही सब कारण हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी के कोई भी नेता या अधिकारी पाकिस्तान जाने से बचते हैं।
पाकिस्तान में अमेरिकी अधिकारियों और दूतावास पर हमले की कई घटनाएं इतिहास में सामने आई हैं। ताजा मामला, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देखने को मिला था, जब उग्र भीड़ ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को घेरा और उसमें तोड़फोड़ की। इसके बाद पेशावर में अमेरिकी कांसुलेट बंद कर दिया गया और कराची और लाहौर में वीजा सेवाएं निलंबित हुईं।
आतंकवाद और सुरक्षा कारणों की वजह से अब तक केवल पांच अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ही पाकिस्तान का दौरा किया, जिनमें ड्वाइट डी. आइजनहावर, लिंडन बी. जॉनसन, रिचर्ड निक्सन, बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश शामिल हैं। 2006 के बाद किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया।
हालांकि, इसके पीछे एक कारण अमेरिका में हुए 26/11 का वो हमला भी है। अमेरिका को संदेह था कि इस हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने पनाह दी है। हालांकि, पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा। फिर अमेरिका ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में काफी दूरी आई।
इसके अलावा, पाकिस्तान में चीन का दबदबा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यह भी एक कारण हो सकता है कि अमेरिका इस देश से दूरी बनाकर रखे हुए है। वहीं 2011 के बाद पहली बार अमेरिकी के किसी शीर्ष अधिकारी का पाकिस्तान का दौरा होने वाला है।
द संडे गार्जियन के अनुसार, सिक्योरिटी प्लानर्स ने आने वाले डेलिगेशन की सुरक्षा के लिए एक बड़ा मोटरकेड सिस्टम तैयार करना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि अमेरिकी मिलिट्री एयरक्राफ्ट के लॉजिस्टिक्स टीम और इक्विपमेंट लेकर आने के बाद तैयारियां और तेज हो गईं। इस तरह के बड़े इंतजाम इस दौरे की सांकेतिक अहमियत और युद्ध के समय की डिप्लोमेसी से जुड़े असली सुरक्षा खतरों, दोनों को दिखाते हैं।
बीते दिन पाकिस्तान में ईरानी राजदूत रेजा अमीरी मोगादम ने ईरानी डेलिगेशन के पाकिस्तान पहुंचने को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी दी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया।
ईरानी राजदूत ने अपने पोस्ट में अमेरिकी वार्ताकारों के साथ सीजफायर के मुद्दे पर बातचीत के लिए ईरान के एक डेलिगेशन के पाकिस्तान आने की घोषणा की थी। यह पोस्ट पहले रेजा अमीरी मोगादम के सोशल मीडिया हैंडल पर थी, जो अब नजर नहीं आ रही है। इसकी पीछे की वजह सुरक्षा से संबंधित हो सकती है।
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