अंतरराष्ट्रीय
इमरान खान के बेटे कासिम पिता से मिलने की गुहार लेकर पहुंचे यूएनएचआरसी, पाकिस्तान सरकार को घेरा
imran khan
नई दिल्ली, 26 मार्च : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान दो साल से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं। इस दौरान उन्हें अपने बेटे से मिलने नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में पीटीआई प्रमुख खान के बेटे कासिम खान ने बुधवार को यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल (यूएनएचआरसी) में अपने पिता का मामला उठाया। कासिम ने कहा कि अधिकारियों का पूर्व प्रधानमंत्री के साथ बर्ताव अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कन्वेंशन का उल्लंघन है।
बता दें, इमरान खान को तोशखाना और भ्रष्टाचार मामले में 14 और 17 साल की सजा सुनाई गई है और 2023 से वह जेल में हैं। खान के कैद में जाने के बाद से उनकी पार्टी के लोग लगातार ये आरोप लगा रहे हैं कि पीटीआई चीफ को गलत इरादे से अकेले रखा जा रहा है; उन्हें किसी से भी मिलने नहीं दिया जा रहा है। जनवरी में यह बात सामने आने के बाद कि उन्हें आंख की बीमारी है, उनके मेडिकल ट्रीटमेंट पर बार-बार चिंता जताई गई है।
ऐसे में यूएनएचआरसी में उनके बेटे कासिम खान ने यूएनएचआरसी में इस मुद्दे को उठाया और कहा कि इमरान का मामला कोई अलग-थलग घटना नहीं थी। असल में, यह 2022 के बाद से पाकिस्तान में दमन के एक बहुत बड़े पैटर्न का सबसे साफ उदाहरण था। इस सिलसिले में उन्होंने राजनीतिक कैदियों की हिरासत, मिलिट्री कोर्ट द्वारा आम लोगों पर मुकदमा चलाने और उन्हें सजा देने और पत्रकारों को चुप कराने, किडनैप करने या देश निकाला देने का जिक्र किया।
इस दौरान कासिम ने फरवरी 2024 के आम चुनावों का भी थोड़ा जिक्र किया और पीटीआई के इन आरोपों को दोहराया कि चुनाव में धांधली हुई थी। कासिम ने कहा कि पाकिस्तान ने जीएसपी प्लस फ्रेमवर्क के तहत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कन्वेंशन को बनाए रखने के लिए जरूरी कमिटमेंट किए हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कवनेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स और यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट टॉर्चर शामिल हैं।
उन्होंने दावा किया कि इमरान को मनमाने तरीके से हिरासत में लिया गया था और उन्हें अकेले कैद में रखा जा रहा है। कासिम ने आगे बताया कि उनके परिवार को उनसे मिलने पर रोक है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इमरान खान को मेडिकल केयर देने से मना किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसने, मिलिट्री कोर्ट में आम लोगों के ट्रायल के साथ उन ट्रीटी की शर्तों का उल्लंघन किया।
उन्होंने कहा, “मैं और मेरा भाई राजनीतिक लोग नहीं हैं। हम कभी भी इस तरह के संगठनों के सामने नहीं आना चाहते थे लेकिन मेरे पिता की जिंदगी की मांग है कि हम एक्शन लें। हम चुपचाप खड़े नहीं रह सकते क्योंकि उसकी सेहत बिगड़ रही है और उन्हें हमसे दूर रखा जा रहा है। अगर हालात उल्टे होते, तो हम जानते हैं कि वह तब तक लड़ना बंद नहीं करेंगे जब तक हम आजाद नहीं हो जाते। हम उनके लिए कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं।”
कासिम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इमरान का एक मैसेज भी साझा किया। यह मैसेज तब आया जब सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने कहा कि इमरान को ईद-उल-फितर पर अपने बच्चों से बात करने की इजाजत दी जाएगी।
कासिम ने कहा कि उन्होंने शनिवार को इमरान से बात की थी। कासिम द्वारा शेयर किए गए मैसेज में इमरान ने न्यायपालिका पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने “अपनी ईमानदारी बेच दी है”।
कासिम और उनके बड़े भाई सुलेमान अपनी मां के साथ लंदन में रहते हैं और उन्हें इमरान से मिलने के लिए पाकिस्तान जाना होगा। दोनों ने दिसंबर 2025 में कहा था कि उन्होंने अपने वीजा के लिए अप्लाई कर दिया है और जनवरी में पाकिस्तान जाने का प्लान बना रहे हैं। हालांकि, इससे पहले भी इमरान खान की पूर्व पत्नी ने बताया था कि पाकिस्तानी सरकार उनके बेटों के वीजा एप्लिकेशन को रिजेक्ट कर रही है।
इस सिलसिले में कासिम ने यूएनएचआरसी में अपना आरोप दोहराया कि पाकिस्तानी सरकार ने “जानबूझकर” उनके और उनके भाई के वीजा को अप्रूव करने से मना कर दिया था। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, “किसी कैदी के बच्चों को उससे मिलने का हक न देना, पूरे परिवार के लिए सजा की तरह है। हमारे बीच जो कम बातचीत हुई, उससे मुझे पता है कि मेरे पिता परेशान थे लेकिन वह अपनी हालत के बारे में बात करने से मना कर रहे हैं। इसलिए वह जो कुछ भी झेल रहे हैं, उसकी डिटेल उनसे नहीं बल्कि इंडिपेंडेंट सोर्स और खुद संयुक्त राष्ट्र से मिली है।”
अंतरराष्ट्रीय
कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।
कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।
इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।
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मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
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ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
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