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भारत के पास पर्याप्त टैक्स बफर मौजूद, 110 डॉलर प्रति बैरल तक कच्चे तेल की कीमतों को वहन करने में सक्षम : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 15 मार्च : भारत के पास बढ़ी हुई कच्चे तेल की कीमतों को वहन करने के लिए पर्याप्त टैक्स बफर मौजूद है। और सरकार पेट्रोल पर 19.9 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 15.8 रुपए प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी को कम करके करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक खुदरा ईंधन की कीमतों को यथावत रख सकती है। यह जानकारी सोमवार को जारी की गई रिपोर्ट में दी गई।
एलारा कैपिटल की रिपोर्ट में कहा गया है कि खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतों को एक्साइज ड्यूटी में कटौती के जरिए लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है, जिसके बाद डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी अनिवार्य हो जाएगी।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत कच्चे तेल की कीमतों में 40-45 डॉलर की बढ़ोतरी को कर के जरिए सहन कर सकता है, लेकिन 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर की कीमतों में बढ़ोतरी होने पर यह बोझ सरकार से उपभोक्ताओं पर आ जाएगा।
कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की वृद्धि होने पर, तेल विपणन कंपनियों के डीजल और गैसोलीन मार्जिन में 6.3 रुपए प्रति लीटर की गिरावट आएगी और एलपीजी की कीमत में 10.2 रुपए प्रति किलोग्राम की वृद्धि होगी।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस स्थिति के कारण एलपीजी अंडर रिकवरी वार्षिक आधार पर लगभग 328 अरब रुपए पहुंच जाएगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की वृद्धि होने पर तेल विपणन कंपनियों का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन लगभग 5 डॉलर प्रति बैरल बढ़ सकता है, लेकिन इससे उनके विपणन और एलपीजी संबंधी नुकसान की पूरी तरह भरपाई नहीं हो पाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल होने पर, खुदरा कीमतों में वृद्धि, कर कटौती या एलपीजी सब्सिडी में बढ़ोतरी के अभाव में, आय में 90-190 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है।
उच्च रिफाइनिंग हिस्सेदारी के कारण आईओसीएल, ओएमसी कंपनियों में बेहतर स्थिति में है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और खुदरा कीमतों में कोई बदलाव न होने की स्थिति में यह अभी भी जोखिम में है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत के एलएनजी आयात का दो-तिहाई हिस्सा होर्मुज मार्ग से होकर गुजरता है, जिससे गैस आपूर्ति में जोखिम बढ़ जाता है।
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आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल का पहली तिमाही में घाटा बढ़ा, 249 करोड़ रुपए का हुआ नुकसान

फैशन और लाइफस्टाइल क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में घाटे का सामना करना पड़ा। कंपनी का समेकित शुद्ध घाटा (कंसो. नेट लॉस) सालाना आधार पर 6.4 प्रतिशत बढ़कर 248.73 करोड़ रुपए हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 233.73 करोड़ रुपए था।
स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, कंपनी का कर-पूर्व घाटा भी बढ़कर 320.26 करोड़ रुपए पहुंच गया, जो एक वर्ष पहले इसी अवधि में 259.50 करोड़ रुपए था।
हालांकि, कंपनी की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई। जून तिमाही में परिचालन से प्राप्त राजस्व (रेवेन्यू) 10.6 प्रतिशत बढ़कर 2,025.56 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 1,831.46 करोड़ रुपए था।
इसके बावजूद कंपनी की कुल आय की तुलना में खर्चों में अधिक वृद्धि हुई। तिमाही के दौरान कुल खर्च बढ़कर 2,395.45 करोड़ रुपए हो गया, जबकि एक साल पहले यह 2,148.75 करोड़ रुपए था। खर्चों की तेज बढ़ोतरी के कारण कंपनी का घाटा और बढ़ गया।
अन्य आय को शामिल करने के बाद कंपनी की कुल आय 2,081.58 करोड़ रुपए रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,895 करोड़ रुपए थी।
कंपनी के मालिकाना हिस्सेदारों के खाते में दर्ज शुद्ध घाटा 215.24 करोड़ रुपए रहा।
कंपनी के प्रदर्शन पर सबसे अधिक दबाव उसके एथनिक वियर और अन्य व्यवसायों से जुड़े सेगमेंट में देखने को मिला। इस सेगमेंट का घाटा बढ़कर 188.54 करोड़ रुपए हो गया, जो एक साल पहले 178.82 करोड़ रुपए था। हालांकि इस सेगमेंट का रेवेन्यू बढ़कर 830.79 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 754.57 करोड़ रुपए था।
दूसरी ओर, पैंटालून्स कारोबार ने मामूली लाभ दर्ज किया। इस सेगमेंट का मुनाफा 3.48 करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 3.67 करोड़ रुपए था। पैंटालून्स का राजस्व बढ़कर 1,204.39 करोड़ रुपए हो गया, जो एक साल पहले 1,094.13 करोड़ रुपए था।
जून तिमाही में अंतर-सेगमेंट समायोजन से पहले कंपनी का कुल सेगमेंट राजस्व 2,035.18 करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 1,848.70 करोड़ रुपए था।
शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर रहा। शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल का शेयर लगभग सपाट बंद हुआ और 63.41 रुपए पर कारोबार समाप्त किया। बीते 52 सप्ताह में कंपनी के शेयर ने 94.95 रुपए का उच्चतम स्तर और 53.51 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ है।
व्यापार
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और बेहतर तिमाही नतीजों से घरेलू बाजार ने दर्ज की लगातार दूसरी हफ्ते बढ़त, निवेशकों का भरोसा मजबूत

कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर कॉरपोरेट नतीजों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया, जिसके चलते भारतीय शेयर बाजार ने लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त दर्ज की है। हालांकि सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन मुनाफावसूली देखने को मिली, फिर भी प्रमुख सूचकांक साप्ताहिक आधार पर सकारात्मक बढ़त के साथ बंद हुए।
सप्ताह के दौरान निफ्टी 0.77 प्रतिशत मजबूत हुआ, लेकिन शुक्रवार को इसमें 0.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,570 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 455 अंक यानी 0.58 प्रतिशत गिरकर 78,499 पर बंद हुआ। इसके बावजूद पूरे सप्ताह में सेंसेक्स ने 0.52 प्रतिशत की बढ़त हासिल की।
वहीं, व्यापक बाजार ने मुख्य सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। सप्ताह के दौरान निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 2.73 प्रतिशत उछल गया। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान बड़े शेयरों के साथ-साथ मध्यम और छोटी कंपनियों की ओर भी बढ़ रहा है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। मजबूत तिमाही नतीजों और कंपनियों से जुड़े सकारात्मक घटनाक्रमों के चलते निवेशकों का रुझान इस श्रेणी की कंपनियों की ओर बना रहा। दूसरी ओर, पीएसयू बैंकिंग शेयरों में बेहतर बुनियादी स्थिति और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के कारण अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
मेटल सेक्टर को देश में मजबूत मांग और आर्थिक विकास की बेहतर संभावनाओं का फायदा मिला। वहीं ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी तेजी रही, क्योंकि बाजार को उम्मीद है कि आगामी त्योहारी सीजन में वाहनों की मांग मजबूत रहेगी।
सप्ताह की शुरुआत कुछ उतार-चढ़ाव के साथ हुई थी, जिसका कारण फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) सेगमेंट में नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) व्यवस्था का लागू होना था। हालांकि निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों के नई व्यवस्था के अनुरूप ढलने के बाद बाजार में स्थिरता लौट आई।
विश्लेषकों का कहना है कि बाजार की धारणा को सबसे अधिक समर्थन कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट से मिला। तेल सस्ता होने से भारत के लिए महंगाई और आयात लागत संबंधी चिंताओं में कमी आई है। इससे आर्थिक परिदृश्य बेहतर हुआ और निवेशकों का विश्वास बढ़ा।
वैश्विक स्तर पर भी बाजार को सहारा मिला। अमेरिका के श्रम बाजार से जुड़े अपेक्षाकृत नरम आंकड़ों के बाद निकट भविष्य में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना कम हुई है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों में नरमी आई, जिससे उभरते बाजारों, विशेषकर भारत, के लिए निवेश माहौल बेहतर हुआ।
घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं किया, साथ ही विकास दर (जीडीपी ग्रोथ) का अनुमान थोड़ा बढ़ाया और महंगाई का अनुमान कुछ कम किया, जिससे यह संदेश गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है।
इसके अलावा, जारी तिमाही नतीजों के सीजन ने भी बाजार को मजबूती दी है। अधिकांश कंपनियों के परिणाम बाजार की अपेक्षाओं से बेहतर रहे हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में खरीदारी बढ़ी और निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ।
आगे की दिशा को लेकर बाजार की नजर अब अमेरिका के रोजगार और महंगाई आंकड़ों पर रहेगी, जिनसे फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियों के बारे में संकेत मिल सकते हैं। वहीं घरेलू स्तर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई), थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) और बैंक ऋण वृद्धि (क्रेडिट ग्रोथ) के आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और महंगाई के रुख को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और कंपनियों के नतीजे मजबूत बने रहते हैं, तो आने वाले हफ्तों में भारतीय शेयर बाजार को और समर्थन मिल सकता है।
व्यापार
सोना इस हफ्ते 6 हजार रुपए से अधिक महंगा हुआ, चांदी 2.3 लाख के पार

GOLD
डॉलर इंडेक्स पर दबाव और महंगाई कम होने की संभावना के चलते सोने और चांदी में इस हफ्ते तेजी देखने को मिली, जिससे सोना और चांदी क्रमशः 6 हजार रुपए और 13 हजार रुपए से अधिक महंगे हो गए हैं।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम इस हफ्ते 6,761 रुपए बढ़कर 1,49,621 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि पहले यह 1,42,860 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
22 कैरेट सोने की कीमत बढ़कर 1,37,053 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,30,860 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम बढ़कर 1,12,216 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,07,145 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
इस हफ्ते सोने में सबसे न्यूनतम दाम 3 अगस्त को शाम के सत्र में 1,42,557 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 7 अगस्त को शाम के सत्र में 1,49,621 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया।
सोने के साथ चांदी की कीमत में भी तेजी देखने को मिली है।
चांदी का दाम 13,086 रुपए बढ़कर 2,31,381 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,18,295 रुपए प्रति किलो था।
इस हफ्ते चांदी में उच्चतम दाम 7 अगस्त को शाम के सत्र में 2,31,381 रुपए प्रति किलो देखा गया। वहीं, न्यूनतम दाम 3 अगस्त को शाम के सत्र में 2,17,287 रुपए प्रति किलो देखा गया।
आईबीजेए की ओर से दिन में दो बार सुबह और शाम के सत्र में सोने और चांदी की कीमतों को जारी किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का दाम 4,400 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 63 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में तेजी की वजह कच्चे तेल में कमजोरी आने के कारण महंगाई की संभावना कम होना है। इससे साथ ही डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने से कीमती धातुओं में तेजी को सहारा मिला है।
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