व्यापार
भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में बंद, सेंसेक्स 899 अंक उछला
मुंबई, 5 मार्च : भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 899.71 अंक या 1.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 80,015.90 और निफ्टी 285.40 अंक या 1.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,765.90 पर बंद हुआ।
बाजार में तेजी भरने का काम डिफेंस शेयरों ने किया। सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.55 प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर था। इसके बाद निफ्टी मेटल (2.29 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (2.22 प्रतिशत), निफ्टी इन्फ्रा (2.21 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (2.10 प्रतिशत), निफ्टी कमोडिटीज (2.05 प्रतिशत) और निफ्टी एनर्जी (1.92 प्रतिशत) की बढ़त के साथ बंद हुआ।
केवल निफ्टी आईटी इंडेक्स ही 0.59 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 867.40 अंक या 1.52 प्रतिशत की तेजी के साथ 57,792.55 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 257.30 अंक या 1.58 प्रतिशत की मजबूती के साथ 16,538.80 पर था।
सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, एलएंडटी, एनटीपीसी, बीईएल, इंडिगो, एमएंडएम, पावर ग्रिड, मारुति सुजुकी, टाटा स्टील, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, ट्रेंट, एशियन पेंट्स और भारती एयरटेल गेनर्स थे। टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, एचयूएल, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, इन्फोसिस, इटरनल, टीसीएस, आईटीसी और एक्सिस बैंक लूजर्स थे।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, शेयर बाजार में तेजी की वजह निचले स्तरों पर निवेशकों की वैल्यू आधारित खरीदारी है। निवेशकों ने मेटल, सरकारी शेयरों और इन्फ्रा से जुड़े शेयरों में जमकर खरीदारी की है। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में बड़ी तेजी के घरेलू बाजार भावना में सुधार हुआ है।
इसके अतिरिक्त, बाजार में खरीदारी की वजह इंडिया विक्स में गिरावट को माना जा रहा है, जो कि सत्र में 15.56 प्रतिशत गिरकर 17.85 पर बंद हुआ।
इंडिया विक्स बाजार में स्थिरता को दिखाता है, इसमें गिरावट को बाजार के लिए सकारात्मक माना जाता है।
व्यापार
मध्य पूर्व तनाव का असर: निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, पेट्रोल 5 रुपए और डीजल 3 रुपए महंगा

petrol
नई दिल्ली, 26 मार्च : निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल के दाम 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ाए हैं।
इस फैसले के साथ नायरा एनर्जी उन शुरुआती कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करके वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया है।
हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट (वीएटी) जैसे स्थानीय टैक्स के कारण कीमतों में थोड़ा फर्क हो सकता है। कुछ जगहों पर पेट्रोल की कीमत 5.30 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गई है।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज उछाल आया है। फरवरी के आखिर से अब तक कच्चे तेल की कीमतें करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।
इस दौरान इजरायल द्वारा ईरान पर हमले और उसके जवाबी कदमों के चलते तेल सप्लाई में बाधा की आशंका बढ़ गई थी। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो बाद में घटकर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अभी तक पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया है।
ये सरकारी कंपनियां देश के लगभग 90 प्रतिशत फ्यूल रिटेल मार्केट को नियंत्रित करती हैं और अप्रैल 2022 से कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है और करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आता है। इसमें से बड़ी मात्रा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है, जो इस समय तनाव के कारण प्रभावित हो रहा है।
इस बीच सरकार ने कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सभी पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि देश भर में पीएनजी कनेक्शन तेजी से बढ़ाए जा रहे हैं और सभी रिफाइनरी उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं।
कुछ क्षेत्रों में अफवाहों के कारण घबराहट में खरीदारी देखी गई, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि किसी तरह की कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
राष्ट्रीय
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार

oil
मुंबई, 26 मार्च : ईरान ने युद्ध को जारी रखने और अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। इस घटनाक्रम का असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। गुरुवार को वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।
ब्रेंट क्रूड वायदा 1.21 प्रतिशत बढ़कर 103.46 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 1.35 प्रतिशत उछलकर 91.54 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इसका कारण मध्य पूर्व में लगातार तनाव बढ़ना है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थों के जरिए होने वाले संपर्क को बातचीत के तौर पर नहीं समझा जाना चाहिए। तेहरान की ओर से अमेरिका समर्थित संघर्ष-विराम प्रस्ताव को भी खारिज किए जाने की संभावना थी।
इससे पहले, बुधवार को पश्चिम एशिया क्षेत्र में संघर्ष-विराम की बढ़ती उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट से भारत के महंगाई और चालू खाता घाटा (सीएडी) जैसे मैक्रोइकोनॉमिक संकेतकों को कुछ राहत मिल सकती है, हालांकि तकनीकी संकेतक बताते हैं कि प्रमुख समर्थन स्तरों की जांच की जा रही है।
भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल का हर बदलाव आमतौर पर जीडीपी के 0.3–0.5 प्रतिशत अंकों तक चालू खाता घाटे को प्रभावित करता है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति को 20–30 आधार अंकों तक बढ़ाता है, जो कि कीमतों के आगे बढ़ने पर निर्भर करता है।
इसी बीच, ईरान ने घोषणा की है कि वह भारत समेत पांच ‘मित्र’ देशों के जहाजों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगा, जिससे उन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलमार्ग से गुजरने की अनुमति होगी, जबकि दूसरों के लिए पहुंच सीमित रहेगी।
भारत के साथ-साथ रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक के जहाजों को इस क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के बावजूद इस प्रमुख समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई है। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि जिन देशों को विरोधी माना जाता है, या जो चल रहे संघर्ष में शामिल हैं, उनसे जुड़े जहाजों को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका, इजरायल और कुछ खाड़ी देशों के जहाजों को, जो मौजूदा संकट में भूमिका निभा रहे हैं, इस जलमार्ग से गुजरने के लिए मंजूरी नहीं दी जाएगी।
राष्ट्रीय समाचार
भारत की डेटा सेंटर क्षमता वित्त वर्ष 30 तक करीब चार गुना बढ़ेगी, 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश होने की उम्मीद: रिपोर्ट

भारत की डेटा सेंटर क्षमता वित्त वर्ष 30 तक करीब चार गुना बढ़कर 4 गीगावाट हो सकती है। इसमें 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश होने की संभावना है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्रति मिलियन इंटरनेट उपभोक्ताओं पर 1.2 मेगावाट की डेटा सेंटर क्षमता मौजूद है, जो कि वैश्विक औसत प्रति मिलियन 5 मेगावाट की क्षमता से काफी कम है।
रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटलीकरण, लागत प्रतिस्पर्धा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का बढ़ता उपयोग भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र में मजबूत वृद्धि के कारक हैं। वैश्विक डेटा सेंटर बाजार में भारत की हिस्सेदारी 2025 तक लगभग 4 प्रतिशत और क्षमता 1.2 गीगावाट होने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2022-2025 के दौरान देश की को-लोकेशन डेटा सेंटर क्षमता दोगुनी होकर 1.2 गीगावाट हो गई, साथ ही उच्च उपयोग स्तर (औसतन 90 प्रतिशत से अधिक) ने भी इसमें योगदान दिया।
रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026-2030 के दौरान उद्योग के राजस्व में लगभग 24 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) का अनुमान लगाया है, जिसमें ईबीआईटीडीए मार्जिन लगभग 40-42 प्रतिशत पर स्थिर रहेगा। हालांकि, विकास चरण में उच्च पूंजीगत व्यय चक्र के कारण लीवरेज स्तर अपेक्षाकृत उच्च बना रह सकता है।
लंबी अवधि के समझौतों के माध्यम से इस क्षेत्र में राजस्व की मजबूत स्पष्टता है, जो स्थिर नकदी प्रवाह सुनिश्चित करती है और ग्राहकों की उच्च स्तर की प्रतिबद्धता को बढ़ावा देती है।
केयरएज रेटिंग्स की निदेशक पूजा जालान ने कहा, “उच्च पूंजीगत व्यय, मजबूत प्रायोजकों की धन जुटाने की क्षमता और भारतीय डेटा सेंटर संस्थाओं को लक्षित बड़े इक्विटी निवेशों के साथ यह उद्योग तेजी से विकास कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि एआई-आधारित मांग विकास की रफ्तार को गति देगी, जबकि उद्योग की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए विद्युत अवसंरचना का समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती लागत और कमीशनिंग की समयसीमा में वृद्धि के बीच नकदी प्रवाह को प्रबंधित करने की क्षमता निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण होगी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के वर्षों में डेटा सेंटर की लागत में 50-70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण भूमि की ऊंची कीमतें, एडवांस कूलिंग टेक्नोलॉजी को अपनाना और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश है। इसके साथ ही, कार्यक्षेत्र में बदलाव और मंजूरी मिलने में देरी के कारण कमीशनिंग की समयसीमा भी बढ़ गई है।
केयरएज रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर तेज किरण ने कहा कि डेटा सेंटर की मांग वर्तमान में एंटरप्राइज आईटी और क्लाउड स्टोरेज द्वारा संचालित है, लेकिन अगले 5-7 वर्षों में एआई-आधारित कार्यभार विकास के अगले चरण को गति प्रदान करेगा।
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