राजनीति
पीएम मोदी के इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ फॉलोअर, सीएम रेखा गुप्ता समेत अन्य ने दी शुभकामनाएं
नई दिल्ली, 26 फरवरी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वे जितना ऑफलाइन लोकप्रिय हैं। उससे कहीं ज्यादा ऑनलाइन। पीएम मोदी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 100 मिलियन फॉलोअर्स हो चुके हैं। इस उपलब्धि को लेकर दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता समेत अन्य नेताओं ने शुभकामनाएं दी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पीएम मोदी का इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन फॉलोअर्स का आंकड़ा पार करना विश्व पटल पर उनके प्रति अटूट जनविश्वास और गहरे जुड़ाव का परिचायक है। इस विशिष्ट उपलब्धि तक पहुंचने वाले वह दुनिया के पहले राजनेता हैं। यह उनके प्रभावशाली नेतृत्व तथा समाज के हर वर्ग के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की उनकी अनूठी कार्यशैली को दर्शाती है।
प्रधानसेवक के रूप में उनकी यह वैश्विक लोकप्रियता भारत के बढ़ते सम्मान और सामर्थ्य का प्रतीक भी है। करोड़ों नागरिकों, विशेषकर युवाओं के साथ डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से निरंतर जुड़े रहने और डायरेक्ट कनेक्ट बनाए रखने की उनकी सहज पद्धति लोकतंत्र को नई शक्ति प्रदान करती है।
दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स के साथ नया कीर्तिमान स्थापित करना यह दर्शाता है कि उनका नेतृत्व सीमाओं से परे जन-जन तक पहुंचा है। यह उपलब्धि किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और विश्व मंच पर सशक्त उपस्थिति का प्रतीक है। आज डिजिटल युग में संवाद ही सबसे बड़ी शक्ति है और प्रधानमंत्री मोदी ने तकनीक को सुशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी का प्रभावी माध्यम बनाया है। उनकी कार्यशैली ने लोकतंत्र को अधिक सहभागी, अधिक उत्तरदायी और अधिक सशक्त बनाया है, विशेषकर युवाओं के साथ उनका सीधा संवाद भारत की ऊर्जा और आकांक्षाओं को दिशा दे रहा है।
भाजपा सांसद रामवीर सिंह बिधूडी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी डिजिटल नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं। इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन फॉलोअर्स का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर वे इस उपलब्धि को हासिल करने वाले विश्व के पहले नेता बन गए हैं। यह न केवल उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है, बल्कि कई इंडी अलायंस के नेताओं की संयुक्त फॉलोइंग से भी अधिक प्रभावशाली डिजिटल पहुंच को साबित करता है, जो उनके मजबूत जनसंपर्क और वैश्विक प्रभाव का स्पष्ट प्रमाण है। डिजिटल युग में नेतृत्व केवल पद से नहीं, बल्कि संवाद, भरोसे और जनभागीदारी से मापा जाता है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्रधानमंत्री मोदी सीधे जनता से जुड़ने, उनकी बात सुनने और अपने विचार साझा करने में एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं।
राजनीति
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी वितरित की

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल में ‘थाई मामन गोल्ड रिंग स्कीम’ की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने नवजात शिशुओं को एक-ग्राम सोने की अंगूठियां भेंट कीं और उनके परिवारों से मुलाकात की। उनके इस दौरे के दौरान शहरभर में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
सीएम विजय ने इस योजना की शुरुआत तीन बच्चों की उंगलियों में अंगूठियां पहनाकर की। इस दौरान, नवजात की माएं उनके बगल में बैठी थी। उन्होंने कई बच्चों को अपनी गोद में लिया और उनके माता-पिता से बात की। कुछ माता-पिता ने मुख्यमंत्री से अपने बच्चों का नाम रखने का अनुरोध किया।
विजय ने उनके अनुरोध स्वीकार किए, बच्चों को गोद में लिया और पारंपरिक नामकरण रीति का पालन करते हुए हर नाम को तीन बार दोहराया। उन्होंने सेल्फी भी खिंचवाईं और उनके पास आने वाली माताओं से हाथ मिलाया।
बाद में मुख्यमंत्री ने अस्पताल के इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट वार्ड का दौरा किया, जहां उन्होंने 10 और बच्चों को अंगूठियां दी। बच्चों के साथ समय बिताते और उनके माता-पिता के साथ हंसी-मजाक करते हुए डॉक्टर भी वहां मौजूद थे। राजाजी अस्पताल में वितरण कार्यक्रम सीएम विजय की मदुरै यात्रा का मुख्य कार्यक्रम था।
मुख्यमंत्री के चेन्नई से मदुरै हवाई अड्डे पहुंचने पर सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ता ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। जब उनका काफिला अस्पताल की ओर बढ़ा, तो समर्थकों और स्थानीय लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया और गाड़ियों पर फूल बरसाए।
सरकारी राजाजी अस्पताल पहुंचने पर सीएम विजय लोगों के उत्साह के बीच कार्यक्रम स्थल तक गए। रास्ते में उन्होंने अस्पताल के कर्मचारियों सहित कई लोगों का अभिवादन करने के लिए कई बार रुककर उनसे बात की और उनमें से कुछ के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
अस्पताल परिसर में अलग-अलग जगहों पर तैनात नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ ने भी उनका अभिवादन किया और उनके साथ सेल्फी ली। अस्पताल के अंदर सभी का ध्यान नवजात शिशुओं और उनके परिवारों पर केंद्रित हो गया। सीएम ने इस योजना के तहत पहली अंगूठियां बांटी।
राजनीति
अखिलेश यादव का चुनावी ऐलान : सत्ता में आए तो पुरानी पेंशन बहाल, शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने का वादा

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को विधानसभा चुनाव को लेकर कई बड़े चुनावी वादे किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा और शिक्षामित्रों को शिक्षक के रूप में सम्मान देने के साथ उनकी स्थिति बेहतर की जाएगी। उन्होंने मदरसा शिक्षकों के बकाया वेतन के भुगतान और संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं के समाधान का भी भरोसा दिया।
लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर समाज को बांटने और शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास लोगों को बांटने के अलावा कोई दूसरा काम नहीं है। मदरसों के साथ भेदभाव किया गया है। भाजपा को केवल समाज को तोड़ना आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने आधी-अधूरी नौकरियां और आधी-अधूरी शिक्षा देने का काम किया।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में उनकी पार्टी की सरकार बनने पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। शिक्षामित्रों के संबंध में उन्होंने कहा कि उन्हें बेहतर बनाने के साथ शिक्षक के रूप में सम्मान देने का काम किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि शिक्षामित्रों की समस्या का समाधान होने से बंद पड़े स्कूलों को भी फिर से संचालित करने में मदद मिलेगी। अखिलेश यादव ने कहा कि 2027 में सपा की सरकार बनने पर कर्मचारियों की पुरानी पेंशन की मांग पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के साथ मंथन कर पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने मदरसा शिक्षकों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आधुनिक मदरसा शिक्षकों का लंबे समय से लंबित वेतन दिलाने का काम किया जाएगा। साथ ही संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं का भी समाधान करने का उन्होंने आश्वासन दिया। अखिलेश यादव ने 2022 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान सपा समर्थकों के बड़ी संख्या में वोट काटे गए, जिसके कारण प्रदेश में सपा की सरकार नहीं बन सकी।
उन्होंने कहा कि 2017 में पार्टी इस तरह की गड़बड़ियों को समझ नहीं सकी थी और तब वह मानते थे कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां लंबे समय से होती रही हैं, लेकिन अब इससे जुड़ी बातें सामने आ रही हैं। अखिलेश ने दावा किया कि भाजपा के लोगों ने गांव-गांव से वोट कटवाने के प्रयास किए और बड़ी संख्या में फॉर्म-7 भरकर भेजे गए। उन्होंने लखनऊ का उदाहरण देते हुए दावा किया कि एक व्यक्ति ने 100 से अधिक वोट कटवाने के लिए फॉर्म-7 भरवाए, जबकि एक व्यक्ति के लिए पांच लोगों के संबंध में ही ऐसा आवेदन करने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों के बीच चुनाव आयोग का बचाव कर रहे हैं तो इससे सवाल उठता है कि वह भी कथित घोटाले में शामिल हैं। सपा अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव में वोटों की कथित चोरी और बेईमानी का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। उनके मुताबिक, 2022 में सपा समर्थकों के बड़ी संख्या में वोट काटे गए और अब इस तरह की खबरें सार्वजनिक होने के बाद लोगों को चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जानकारी हो रही है। उन्होंने नोएडा में अभी भी फर्जी वोट बनाए जाने का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव ने कहा कि वोट चोरी से जुड़ी खबरों का स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत को पश्चिम बंगाल और बिहार में दोबारा चुनाव कराने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराया और 2027 में उत्तर प्रदेश से भाजपा का सफाया कर दिया जाएगा। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वह पूंजीपतियों और बड़े कारोबारियों के हित में काम करती है।
राष्ट्रीय समाचार
सरकार 25 करोड़ लोगों को दे रही ईएसआईसी हेल्थ सिक्योरिटी : डॉ. मनसुख मंडाविया

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को कहा कि भारत ‘कर्मचारी राज्य बीमा निगम’ (ईएसआईसी) के जरिए 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा दे रहा है। उन्होंने सरकार के सामाजिक सुरक्षा और कल्याण कार्यक्रमों का भी जिक्र किया।
‘औद्योगिक संबंध और श्रम एवं पुरस्कार 2026’ पर सीआईआई-ईएफआई राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, मंडाविया ने कहा कि सरकार 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज भी उपलब्ध करा रही है।
उन्होंने कहा कि 10 करोड़ किसानों को हर चार महीने में उनके बैंक खातों में सीधे 2,000 रुपए मिलते हैं।
मंत्री ने कहा, “आज देश में 10 ऐसे राज्य हैं जो महिलाओं के खातों में हर महीने 2,000 रुपए, 1,500 रुपए या 1,200 रुपए जैसी रकम जमा करते हैं।”
केंद्रीय मंत्री ने औद्योगिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय श्रम तौर-तरीकों एवं भारत की अपनी परंपराओं और प्रणालियों के बीच संतुलन पर बात करते हुए कहा, “जब हम औद्योगिक संबंधों की बात करते हैं… तो एक तरफ आईएलओ के अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीके और अंतरराष्ट्रीय ढांचे होते हैं, और दूसरी तरफ भारत की अपनी परंपराएं और संबंध; तो मुझे यह थोड़ा अलग लगता है।”
मांडविया ने कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में कई मंत्रालयों में मंत्री के तौर पर काम करने के उनके अनुभव ने उन्हें भारत और विदेशों में विभिन्न मंचों और हितधारकों के साथ जुड़ने का मौका दिया है।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक संबंधों के प्रति भारत के दृष्टिकोण में अंतरराष्ट्रीय ढांचे और देश के अपने सामाजिक और आर्थिक संदर्भ, दोनों को ध्यान में रखने की जरूरत है।
इससे पहले सितंबर में, मंत्री ने राज्य सरकारों से कहा था कि वे सेस फंड के मौजूदा इस्तेमाल का विस्तृत आकलन करें, कमियों की पहचान करें और श्रमिकों के दीर्घकालिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनके प्रभावी इस्तेमाल के नए तरीके खोजें।
मंत्री ने राज्यों से आगे कहा कि वे श्रम संहिताओं के लागू होने के एक साल बाद उनके असर का व्यापक आकलन करें और उन क्षेत्रों की पहचान करें जहां उन्हें और बेहतर ढंग से लागू करने की जरूरत हो सकती है।
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