राजनीति
तेलंगाना निकाय चुनावों में जीत पर राहुल गांधी ने जताई खुशी, बोले- ‘प्रजाला तेलंगाना’ का विजन अटल
नई दिल्ली, 14 फरवरी : तेलंगाना के स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस की जीत पर पार्टी सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि हमारा ‘प्रजाला तेलंगाना’ का विजन अटल है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “तेलंगाना में स्थानीय निकाय चुनावों में जीत कांग्रेस सरकार की ‘पीपल-फर्स्ट’ यानी जनता को प्राथमिकता देने वाली नीतियों की पुष्टि है, जो सामाजिक न्याय, सम्मान और सबको साथ लेकर चलने वाले विकास पर आधारित हैं।”
राहुल गांधी ने आगे लिखा, “हर कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता को दिल से धन्यवाद। यह जीत आपकी और तेलंगाना के लोगों की है। हमारा ‘प्रजाला तेलंगाना’ का विजन, जहां विकास हर परिवार तक पहुंचे, अटल है।”
सभी नगर पालिकाओं में कांग्रेस ने अब तक 2,582 वार्ड में से 1,347 जीते, जबकि बीआरएस को 717 मिले। सत्तारूढ़ कांग्रेस ने शहरी निकाय चुनावों में करीब 60 प्रतिशत वोट हासिल किए, जिसमें 116 नगर पालिकाओं में से 64 और सात नगर निगमों में से तीन में जीत हासिल की।
कांग्रेस को मंचेरियल, रामागुंडम और नलगोंडा नगर निगमों में जीत मिली है। 60 सदस्यीय वाली कोठागुडेम निगम में कांग्रेस और सीपीआई ने 22-22 सीटें जीतीं। यहां दोनों दलों के नेताओं के बीच ‘फ्रेंडली-फाइट’ देखी गई। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि पार्टी लगभग तीन-चौथाई नगर पालिकाओं पर जीत हासिल करने की स्थिति में है।
मुख्य विपक्षी पार्टी बीआरएस ने 13 नगर पालिकाओं और तीन निगमों में जीत हासिल की, जबकि 38 नगर पालिकाओं में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। 2020 के पिछले नगरपालिका चुनावों में बीआरएस ने 100 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों में जीत हासिल की थी।
भाजपा को एक भी निगम में जीत नहीं मिली, लेकिन 66 सदस्यीय वाली बॉडी में 30 सीटों के साथ करीमनगर नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। भाजपा निजामाबाद कॉर्पोरेशन में भी सबसे बड़ी पार्टी बनी।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु: सांबा धान की खेती पर संकट, त्रिची के किसानों ने की 17 नहरों में कावेरी का पानी छोड़ने की मांग

त्रिची जिले के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से सभी 17 सिंचाई नहरों में कावेरी का पानी छोड़ने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि मेट्टूर से पानी के कराइकल पहुंचने के बाद सांबा धान की नर्सरी सूख सकती हैं।
किसानों ने बताया कि नहरों के माध्यम से लगातार पानी की आपूर्ति की उम्मीद में उन्होंने नर्सरी लगाई थीं। कई खेतों तक अभी तक पानी नहीं पहुंचा है, जिससे किसान इस मौसम में अपनी फसल की रोपाई को लेकर अनिश्चित हैं।
मेट्टूर से पानी छोड़ने का काम 1 सितंबर को शुरू हुआ था और रविवार को पानी कराइकल पहुंचा। उन्होंने यह भी मांग की कि अगर मौजूदा बहाव को बनाए नहीं रखा जा सका, तो इसके लिए कोई वैकल्पिक योजना बनाई जाए।
मंगलवार शाम को मेट्टूर जलाशय का जलस्तर 84.16 फीट था और इसमें 46.228 हजार मिलियन घन फीट पानी जमा था। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पानी की आवक 3,867 क्यूसेक थी, जबकि 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। पानी के प्रवाह और छोड़े जाने के बीच के अंतर ने इस चिंता को बढ़ाया है कि सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति कब तक जारी रह सकती है।
किसानों ने कहा कि मौजूदा जल प्रवाह शायद सिर्फ 25 दिनों तक ही चलेगा। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि नहरों से पानी की आपूर्ति कम होने की स्थिति में वह फसलों को कैसे बचाएगी।
पिछले साल त्रिची जिले में 54,929 हेक्टेयर जमीन पर सांबा धान की खेती की गई थी। किसानों ने कहा कि कृषि विभाग ने अभी तक मौजूदा सीजन के लिए खेती का लक्ष्य स्पष्ट नहीं किया है, जिससे रोपाई की योजना बनाने में मुश्किल हो रही है।
कुछ किसानों ने कहा कि बिजली कटौती के कारण वे अपनी नर्सरी की सिंचाई के लिए इलेक्ट्रिक पंपों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने ईंधन पर सब्सिडी की मांग की, ताकि नर्सरी को बचाने के लिए डीजल पंप सेट का इस्तेमाल किया जा सके।
थिरुप्पराईथुरई के किसानों ने कहा कि कावेरी से पानी छोड़े जाने के तीन हफ्ते बाद भी पुथु अय्यन नहर तक पानी नहीं पहुंचा है, जो उनकी जमीन की सिंचाई करती है। उन्होंने राज्य प्रशासन से यह बताने को कहा है कि वह पूरे जिले में फसल के नुकसान को रोकने के लिए क्या कदम उठाएगा।
उधर, तमिलनाडु अखिल किसान संघ समन्वय समिति के अध्यक्ष पीआर पांडियन ने सरकार से अपील की कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत कावेरी के पानी में राज्य का हिस्सा हासिल करने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण से संपर्क करे।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उय्याकोंडन समेत कुछ नहरों में पानी छोड़ा गया है। उम्मीद है कि बुधवार तक यह खेतों तक पहुंच जाएगा। डेल्टा में खेती के लिए कल्लनाई से पानी छोड़े जाने के एक दिन बाद 7 सितंबर को नहरों में पानी छोड़ा गया था। अधिकारियों ने कहा कि पानी के अलग-अलग चरणों में वितरण के कारण इसे खेतों तक पहुंचने में एक या दो दिन और लग सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल: भारी बारिश का अलर्ट, टूरिज्म बोर्ड ने यात्रा संबंधी चेतावनी जारी की

नेपाल टूरिज्म बोर्ड (एनटीबी) ने पर्यटकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। मौसम विभाग के हवाले से चेतावनी दी गई है कि 25 से 27 सितंबर के बीच देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
26 अगस्त को ही नेपाल में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई थी। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, मंगलवार शाम तक इस बाढ़ में 1,451 लोगों की मौत हो गई थी और 5,705 लोग लापता हो गए थे, इनमें 636 विदेशी भी शामिल हैं।
मंगलवार को ही जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग (डीएचएम) ने शुक्रवार से रविवार तक पूर्वी कोशी, दक्षिणी मधेश, मध्य बागमती और पश्चिमी सुदूरपश्चिम प्रांतों के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। कर्णाली, गंडकी और लुंबिनी समेत पश्चिमी प्रांतों में भी गरज-चमक के साथ बौछार पड़ने का अनुमान लगाया है। इन्हीं सब हालात को देखते हुए एनटीबी ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है।
एनटीबी ने अपनी एडवाइजरी में कहा, “नदी घाटियों के पास पहाड़ी और ज्यादा ऊंचे इलाकों में जाने वाले पर्यटकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, क्योंकि वहां मौसम तेजी से बदल सकता है और ऊंचे इलाकों में बर्फबारी भी हो सकती है।”
भोटे कोशी और त्रिशूली नदी बेसिन इलाके में कई पर्यटक 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ का शिकार हुए थे।
बोर्ड ने यात्रियों को सलाह दी कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की ताज़ा जानकारी और आधिकारिक सलाह देख लें और सड़क, फ़्लाइट और ट्रेकिंग-रूट की स्थितियों के बारे में अपडेट रहें।
इसने यात्रियों को यह भी सलाह दी कि वे खराब मौसम से प्रभावित या ज़्यादा जोखिम वाले इलाकों में जाने से बचें। सलाह में कहा गया है, “नदियों, झरनों, खड़ी ढलानों और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की आशंका वाले इलाकों के पास खास सावधानी बरतें।”
पर्यटन बोर्ड ने यात्रियों से यह भी कहा कि वे असुरक्षित मौसम में ट्रेकिंग, पर्वतारोहण और दूसरी आउटडोर गतिविधियों से बचें।
उन्होंने कहा, “स्थानीय अधिकारियों, सुरक्षा एजेंसियों, पर्यटन पेशेवरों और अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और मौसम की स्थिति व टूर ऑपरेटरों की सलाह के आधार पर पहले से ही सुरक्षित जगहों पर रहें या वहां चले जाएं।”
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र यूसीसी कमेटी से पूर्व जज के इस्तीफे पर जयराम रमेश बोले-‘हर राज्य का अलग यूसीसी संविधान की भावना के खिलाफ’

महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित समिति से हाईकोर्ट के एक पूर्व जज के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव (संचार) और सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि इस इस्तीफे ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं और समिति के कामकाज पर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि क्या संविधान सभा ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना की थी, जिसमें हर राज्य अपना अलग-अलग समान नागरिक संहिता बनाए? इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। क्या डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नेतृत्व में संविधान निर्माताओं ने कभी सोचा था कि एक राजनीतिक दल की राजनीतिक चालों के हिसाब से राज्य अलग-अलग यूसीसी बनाने की होड़ करेंगे? इसका जवाब भी नहीं है।
कांग्रेस नेता ने 21वें विधि आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 17 जून 2016 को मोदी सरकार ने ही यूसीसी के सवाल को विस्तृत अध्ययन के लिए विधि आयोग के पास भेजा था। आयोग ने व्यापक रिसर्च के बाद 31 अगस्त 2018 को अपना कंसल्टेशन पेपर प्रकाशित किया था। इसके पेज 7 के पैराग्राफ 1.15 में स्पष्ट कहा गया था कि “इस स्तर पर समान नागरिक संहिता बनाना न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय।” आयोग ने अलग-अलग पारिवारिक कानूनों में मौजूद भेदभाव को दूर करने की सिफारिश की थी।
रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने उसी आयोग की सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया, जिसे उसने खुद जिम्मा सौंपा था क्योंकि तथ्य उसके राजनीतिक एजेंडे से मेल नहीं खाते थे। पिछले तीन वर्षों में भाजपा शासित राज्यों ने यूसीसी के अपने-अपने वर्जन जबरन पारित कराए हैं। उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू हो गया जबकि गुजरात में 24 मार्च 2026, असम में 27 मई 2026 और मध्य प्रदेश में 21 जुलाई 2026 को विधानसभा में विधेयक पारित किया गया।
उन्होंने कहा कि ये राज्यस्तरीय यूसीसी एक जैसे भी नहीं हैं। इनमें अलग-अलग प्रावधान, अलग-अलग दंड और कई छूट हैं। उत्तराखंड का यूसीसी कई पितृसत्तात्मक परंपराओं को आज भी जारी रखे हुए है और कानून का पालन करने वाले निवासियों के लिए भी समस्याएं पैदा कर रहा है।
जयराम रमेश ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। एनडीए के बाकी दलों की आवाज को दबा दिया गया है। कांग्रेस के अनुसार, मोदी सरकार के लिए यूसीसी कोई कानूनी सुधार नहीं बल्कि विभाजन, व्यवधान और ध्यान भटकाने का औजार है, जो समाज को स्थायी ध्रुवीकरण में बनाए रखने का साधन है।
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