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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दी

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नई दिल्ली, 14 फरवरी : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साउथ ब्लॉक में अंतिम बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। ये सिर्फ स्थान परिवर्तन का क्षण नहीं है, यह इतिहास और भविष्य के संगम के भी पल हैं। इस परिसर ने गुलामी से आजादी और फिर स्वतंत्र भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है, गढ़ा है।

मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से नया प्रधानमंत्री कार्यालय, जिसे अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा, राष्ट्र को समर्पित किया गया है। साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों ने भारत को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखने के लिए किया था। 1947 में भारत को गुलामी से तो मुक्ति मिली, लेकिन इन भवनों को तत्कालीन सरकार की ओर से अपने कार्यों के निष्पादन के लिए बनाए रखा गया। स्वतंत्रता के बाद से ही प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक के इस भवन से कार्य करता रहा है।”

उन्होंने कहा कि इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में बनी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले होते देखे हैं। इसकी सीढ़ियों पर जवाहरलाल नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक के पदचिन्ह हैं। इस भवन की सीढ़ियों पर चढ़ते कदमों ने देश को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। उन्होंने कहा, “बीते दशकों में यहां कैबिनेट की बैठकों में, संविधान के आदर्शों, जनता से मिले जनादेश और राष्ट्र की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। यहां भारत की सफलताओं का उत्सव भी मनाया गया, असफलताओं का आंकलन भी हुआ और साथ ही संकटों और चुनौतियों से निपटने के लिए कड़े और बड़े फैसले भी लिए गए।”

मीडिया को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के इन कमरों ने विभाजन की विभीषिका भी देखी, युद्ध और आपातकाल की चुनौतियों को भी देखा और शांतिकाल की नीतियों पर भी चिंतन और मनन किया। इन्होंने टाइपराइटर से लेकर डिजिटल गवर्नेंस तक, तकनीक की लंबी छलांग को महसूस किया है। यहां बैठकर अधिकारियों की कई पीढ़ियों ने ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने भारत को आजादी के तुरंत बाद की अनिश्चितता से निकालकर स्थिरता की राह पर आगे बढ़ाया। सबके प्रयासों का परिणाम है कि आर्थिक चुनौतियों और संकटों से निकलकर, आज भारत एक आत्मविश्वासी राष्ट्र बनकर खड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा, “बीते एक दशक में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में साउथ ब्लॉक राष्ट्र के अनेक ऐतिहासिक निर्णयों का केंद्र रहा। ये स्थान मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस की प्रेरणा स्थली बना। यहां से रिफॉर्म एक्सप्रेस को पूरे देश में प्रोत्साहन मिला है। यहीं से डीबीटी, ‘स्वच्छ भारत अभियान’, गरीब कल्याण से जुड़े अभियान, ‘डिजिटल इंडिया’ और जीएसटी जैसे व्यापक सुधारों को आकार मिला। यहां से ही आर्टिकल-370 की दीवार गिराने और तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने जैसे सामाजिक न्याय के साहसिक और संवेदनशील निर्णय लिए गए। यहीं लिए गए ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘एयर स्ट्राइक’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के निर्णयों के माध्यम से भारत ने अपनी दृढ़ और आत्मविश्वासी सुरक्षा नीति का स्पष्ट संदेश विश्व को दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री ने कहा, “आज का भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत आज एक सुरक्षित और सक्षम राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आया है और वैश्विक मंचों पर अपनी स्पष्ट और प्रभावशाली आवाज रख रहा है। आज देश विकसित भविष्य के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके लिए एक आधुनिक, तकनीकी और पर्यावरण के प्रति अनुकूल कार्यालय की आवश्यकता थी। एक ऐसा कार्यक्षेत्र, जो यहां काम करने वाले हर कर्मयोगी की उत्पादकता को बढ़ाए, सेवाभाव के उसके संकल्प को प्रोत्साहित करे।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के उ‌द्घाटन के करीब 95 साल के बाद शुक्रवार को भारत सरकार ने इन भवनों को खाली किया है और ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरित हुई है। यह प्रतीकात्मक रूप से गुलामी के अतीत से ‘विकसित भारत’ के भविष्य की ओर बढ़ने की ओर देश का एक और कदम है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में देश में ‘सत्ता भाव’ के बजाय ‘सेवा भाव’ की संस्कृति सशक्त हुई है। आज का ये स्थानांतरण, इन संस्कारों को और मजबूती देगा।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “शनिवार को कैबिनेट ने यह संकल्प भी लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ का हिस्सा बनाया जाए, जो हमारी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता से पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ये संग्रहालय, हमारी कालातीत और शाश्वत सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाएगा और हमारे गौरवशाली अतीत को समृद्ध भविष्य से जोड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

‘ईरान के खिलाफ युद्ध में भागीदारी के ल‍िए यूरोप की जवाबदेही तय होनी चाह‍िए’, नाटो महासचिव के बयान पर बाघेई

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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि नाटो महासचिव मार्क रुटे के बयान ने साफ कर द‍िया है क‍ि यूरोप ने अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के खिलाफ युद्ध में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया है।

उन्होंने ईयू और नाटो देशों की जवाबदेही तय करने और रुटे की भूमिका की जांच की मांग की है।

ईरान के व‍िदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता इस्‍माइल बाघेई ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर मार्क रुटे का एक वीडियो पोस्‍ट करते हुए ल‍िखा, ”यह नाटो के महासचिव मार्क रुटे की ओर से एक और साफ स्वीकारोक्ति है कि यूरोप ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के हमले वाले युद्ध में जानबूझकर और सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था, जबकि पूरे युद्ध के दौरान बार-बार इससे इनकार किया जाता रहा।”

उन्‍होंने पोस्‍ट में कहा क‍ि यूरोपीय संघ (ईयू), उसके सदस्य देशों और नाटो के सदस्य देशों की इस मामले में भूमिका के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसमें किसी भी तरह की राजनीतिक, सैन्य, लॉजिस्टिक या दूसरी मदद शामिल है, जिसने जान-माल के नुकसान में योगदान दिया। साथ ही उन नतीजों की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए जिनका असर आज भी महसूस किया जा रहा है।

बाघेई ने कहा क‍ि यूरोप के नागरिकों को अपनी सरकारों से यह जवाब मांगने का पूरा अधिकार है कि उन्होंने इस हमले का समर्थन करने या इसमें शामिल होने के फैसले क्यों लिए।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने खास तौर पर जिक्र किया कि इस गैरकानूनी युद्ध की वजह से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और लोगों के सामने आई दूसरी मुश्किलों को भी इस नजरिए से देखा जाना चाहिए कि यूरोपीय सरकारों ने इस युद्ध को संभव बनाने और उसका समर्थन करने में क्या भूमिका निभाई।

उन्‍होंने कहा क‍ि नाटो महासचिव के तौर पर मार्क रुटे की भूमिका और उनके अधिकार में उठाए गए कदमों की भी जांच और समीक्षा होनी चाहिए।

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राष्ट्रीय समाचार

रेलवे में नौकरी का सुनहरा मौका: स्टेशन मास्टर सहित 1,465 पदों पर आवेदन शुरू, 15 अक्टूबर तक भरें फॉर्म

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रेलवे भर्ती सेल (आरआरसी) ने पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर) में जनरल डिपार्टमेंटल कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन (जीडीसीई), 2026 के तहत स्टेशन मास्टर सहित विभिन्न 1,465 पदों पर भर्ती के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।

आरआरसी की ओर से जारी कुल 1,465 रिक्तियों में असिस्टेंट लोको पायलट (एएलपी), इलेक्ट्रिकल के 910; टेक्नीशियन III – ब्लैकस्मिथ, इंजीनियरिंग के 2; टेक्नीशियन III – फिटर, इंजीनियरिंग का 1; टेक्नीशियन III – मेसन, इंजीनियरिंग का 1; टेक्नीशियन III – वेल्डर, इंजीनियरिंग के 2; टेक्नीशियन III – इलेक्ट्रिकल जनरल, इलेक्ट्रिकल के 2; टेक्नीशियन III – टीआरएस, इलेक्ट्रिकल का 1; टेक्नीशियन III – मैकेनिकल पावर, मैकेनिकल के 6; टेक्नीशियन III – सी एवं डब्ल्यू, वेल्डर (मैकेनिकल) के 19; टेक्नीशियन III – सिग्नल, एस एवं टी के 8; टेक्नीशियन III – टेली, एस एवं टी के 3; जूनियर इंजीनियर – सी एवं डब्ल्यू, मैकेनिकल के 15; जूनियर इंजीनियर – डीजल मैकेनिकल, मैकेनिकल के 6; जूनियर इंजीनियर – इलेक्ट्रिकल जनरल, इलेक्ट्रिकल के 3; जूनियर इंजीनियर – इलेक्ट्रिकल टीआरडी, इलेक्ट्रिकल का 1; जूनियर इंजीनियर – पी वे, इंजीनियरिंग के 7; जूनियर इंजीनियर – वर्क्स, इंजीनियरिंग के 5; डिपो मटीरियल सुपरिटेंडेंट, स्टोर्स के 19; चीफ कमर्शियल कम टिकट सुपरवाइजर (सीसीटीएस), कमर्शियल के 5; स्टेशन मास्टर, ऑपरेटिंग के 9; गुड्स ट्रेन मैनेजर, ऑपरेटिंग के 389; सीनियर क्लर्क, जनरल के 6; सेक्शन कंट्रोलर, ऑपरेटिंग के 3; और कमर्शियल कम टिकट क्लर्क (सीसीटीसी), कॉमर्शियल के 42 पद शामिल हैं।

इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 15 सितंबर से जारी है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर तक तय की गई है। एप्लीकेशन फॉर्म भरने के इच्छुक उम्मीदवार आरआरसी या ईसीआर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं।

आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड/संस्थान/विश्वविद्यालय से पद के अनुसार मैट्रिकुलेशन या एसएसएलसी के साथ आईटीआई, तीन वर्ष का डिप्लोमा या संबंधित डिग्री (मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिविल या किसी अन्य निर्दिष्ट इंजीनियरिंग क्षेत्र में), किसी भी विषय में इंजीनियरिंग में तीन वर्ष का डिप्लोमा, डिग्री या उसके समकक्ष योग्यता, कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं उत्तीर्ण आदि योग्यता होनी चाहिए।

आवेदकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 42 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 जनवरी 2027 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

योग्य अभ्यर्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी), कंप्यूटर आधारित एप्टीट्यूड टेस्ट, कंप्यूटर आधारित टाइपिंग कौशल परीक्षण (सीबीटीएसटी), दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल जांच के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी पद के अनुसार 7वें वेतन आयोग के पे मैट्रिक्स लेवल- 2 से 6 के बीच प्रतिमाह होगी।

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महोत्सव

गणेश प्रतिमा हटाए जाने को लेकर भाजपा ने कर्नाटक सरकार की आलोचना की

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प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के खिलाफ किसानों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम हटाने के ऑपरेशन में कर्नाटक पुलिस द्वारा गणेश प्रतिमा हटाए जाने से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर किसानों की चिंताओं और धार्मिक भावनाओं, दोनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

यह पुलिस कार्रवाई शुक्रवार को हुई, जब अधिकारी बिदादी-हारोहल्ली मुख्य सड़क को खाली कराने पहुंचे, जिसे प्रदर्शनकारी किसानों ने ब्लॉक कर दिया था। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें पुलिसकर्मी प्रदर्शन स्थल पर स्थापित गणेश प्रतिमा को उठाते और हटाते दिख रहे हैं।

प्रस्तावित ‘ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप’ प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे किसान 21 सितंबर से बैरामंगला के पास अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे और उन्होंने विरोध स्थल पर प्रतिमा स्थापित की थी, जहां रोजाना पूजा-अर्चना की जा रही थी।

रिपोर्टों के अनुसार, जब प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक्टर, बैलगाड़ियों और अन्य वाहनों का इस्तेमाल करके सड़क को ब्लॉक कर दिया, तो पुलिस ने हस्तक्षेप किया। ट्रैफिक बहाल करने के ऑपरेशन के तहत, पुलिस ने सड़क पर रखी प्रतिमा को हटा दिया और स्थल से अन्य रुकावटों को भी साफ कर दिया। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई के दौरान महिला किसानों समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

शनिवार को घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने कहा कि सरकार को विरोध स्थल से गणेश प्रतिमा हटाने के बजाय किसानों की जायज मांगों को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए था।

अशोक ने कहा कि जहां किसान अपनी जायज मांगों के लिए सत्याग्रह कर रहे हैं, वहां स्थापित गणेश प्रतिमा को हटाना किसानों की भावनाओं और हिंदू धार्मिक रीति-रिवाजों को आहत करने वाला है।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकार के पास प्रतिमा हटाने का समय तो था, लेकिन वह किसानों की शिकायतों का समाधान करने में विफल रही।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले प्रशासन की आलोचना करते हुए अशोक ने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत करनी चाहिए, धार्मिक रीति-रिवाजों का सम्मान करना चाहिए और टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए तुरंत बातचीत करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। उसे तुरंत बिदादी के किसानों की मांगें सुननी चाहिए और उन्हें न्याय देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के आंदोलन और उनकी धार्मिक आस्था को दबाया नहीं जा सकता।

इस विवाद ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यकाल की एक पुरानी घटना की यादें भी ताजा कर दी हैं, जब पुलिस द्वारा गणेश प्रतिमा को जब्त करने और उसे पुलिस वाहन में रखने की घटना की तस्वीरों और वीडियो के ऑनलाइन वायरल होने के बाद भारी आलोचना हुई थी।

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