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सुप्रीम कोर्ट में बंगाल एसआईआर के खिलाफ सीएम ममता की याचिका पर सुनवाई आज

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नई दिल्ली, 9 फरवरी : सुप्रीम कोर्ट सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने इलेक्टोरल रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर पब्लिश कॉज लिस्ट के अनुसार, भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और एनवी अंजारिया वाली बेंच सोमवार को सीएम ममता की याचिका के साथ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद डोला सेन और डेरेक ओ ब्रायन द्वारा दायर इसी तरह की याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

एसआईआर प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी याचिका में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर राजनीतिक पक्षपात से काम करने का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि जिस तरह से वोटर रिविजन एक्सरसाइज की जा रही है, उससे समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के लाखों वोटरों के नाम हटा दिए जाएंगे।

उन्होंने चुनाव निकाय को एसआईआर एक्सरसाइज के दौरान किसी भी वोटर का नाम हटाने से रोकने के लिए अंतरिम निर्देश मांगे हैं, खासकर उन लोगों के नाम जो ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ कैटेगरी में रखे गए हैं। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सीएम ममता की याचिका पर ईसीआई को नोटिस जारी किया था। साथ ही, इस मामले को सोमवार को आगे की सुनवाई के लिए लिस्ट किया था।

सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि स्थानीय बोलियों के कारण स्पेलिंग में अंतर पूरे भारत में होता है और यह असली वोटरों को बाहर करने का आधार नहीं हो सकता।

सुप्रीम कोर्ट को संबोधित करते हुए सीएम बनर्जी ने दावा किया कि शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाओं और घर बदलने वाले लोगों पर इसका असमान रूप से असर पड़ रहा है।

विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि असम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में इसी तरह के वोटर रिवीजन एक्सरसाइज नहीं किए जा रहे हैं और ईसीआई को बार-बार दिए गए रिप्रेजेंटेशन का कोई जवाब नहीं मिला है।

इन दलीलों पर जवाब देते हुए सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने भरोसा दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट एक व्यावहारिक समाधान ढूंढेगा। साथ ही, किसी भी असली वोटर का अधिकार छीना नहीं जा सकता।

राष्ट्रीय समाचार

भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सचिव से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात

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नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की है। यह प्रतिनिधिमंडल, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष ब्रायन मस्त के नेतृत्व में आया है। द्विदलीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में महत्वपूर्ण विषयों पर वार्ता हुई। बैठक में तेजी से विकसित हो रही भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।

बैठक का प्रमुख केंद्र रक्षा औद्योगिक और तकनीकी सहयोग रहा। दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने, तकनीकी क्षमताओं को साझा करने और दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ाने से जुड़े पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार व्यापक हुआ है।

इसमें सैन्य सहयोग के साथ-साथ रक्षा उत्पादन, सह-विकास, सह-उत्पादन, अनुसंधान और उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियों में सहयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। भारत-अमेरिका रक्षा औद्योगिक सहयोग के तहत जेट इंजन, युद्ध सामग्री और जमीनी गतिशीलता प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में सहयोग आगे बढ़ाने पर भी दोनों देशों ने पहले प्रतिबद्धता जताई है।

रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच नियमित संवाद जारी है। फरवरी 2026 में भारत-अमेरिका संयुक्त तकनीकी समूह की बैठक में महत्वपूर्ण और उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियों, संयुक्त अनुसंधान तथा विकास और रक्षा प्रयोगशालाओं व उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। ब्रायन मस्त के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब दोनों देश अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के भविष्य की दिशा पर लगातार संवाद कर रहे हैं।

हाल ही में उन्होंने एक द्विदलीय अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री से भी मुलाकात की थी। उस बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों के साथ ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला और समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई यह बैठक रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए जारी उच्चस्तरीय संवाद को दर्शाती है।

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राष्ट्रीय समाचार

एआईआईबी की बैठक में भाग लेने के लिए वित्त मंत्री सीतारमण कतर पहुंचीं

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की 11वीं वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए कतर पहुंच गई हैं। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में सोमवार को दी गई।

दोहा के हमद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कतर में भारत के राजदूत श्रीकर रेड्डी कोप्पुला ने उनका स्वागत किया।

वित्त मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “केंद्रीय वित्त मंत्री अगले दो दिनों के दौरान दोहा में एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की 11वीं वार्षिक बैठक और एआईआईबी इन्वेस्टर्स डायलॉग 2026 में भाग लेंगी।”

वह एआईआईबी के अध्यक्ष के साथ-साथ जॉर्डन, स्विट्जरलैंड, अल्जीरिया, सऊदी अरब और नेपाल के अपने समकक्षों के साथ अन्य महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगी।

वित्त मंत्री एआईआईबी में भारत के गवर्नर के रूप में बैंक की वार्षिक बैठक में भाग लेंगी।

भारत एआईआईबी का दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है।

आधिकारिक यात्रा के दौरान वित्त मंत्री कतर सरकार के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात करेंगी। इसके अलावा, वह कतर के कारोबारी नेताओं और निवेशकों के साथ भी बातचीत करेंगी।

एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक एक बहुपक्षीय विकास बैंक है, जो एशिया और दुनिया भर में आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों में सुधार के लिए सड़कों, स्वच्छ ऊर्जा और जल प्रणालियों जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण के लिए वित्त पोषण करता है। बीजिंग में मुख्यालय वाले इस बैंक जनवरी 2016 में 100 अरब डॉलर की पूंजी के साथ काम शुरू किया था। बैंक के 111 स्वीकृत सदस्य देश हैं।

बैंक के प्रमुख क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पर्यावरण की रक्षा करने वाली परियोजनाओं के लिए वित्त पोषण करना, परिवहन एवं डिजिटल नेटवर्क को बेहतर बनाना और देशों के बीच जल संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना शामिल है।

इसके अलावा, बैंक बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी विकास परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए निजी निवेशकों के साथ भी काम करता है।

भारत और कतर के बीच मजबूत द्विपक्षीय ऊर्जा संबंध हैं। भारत की पेट्रोनेट एलएनजी और कतरएनर्जी के बीच 20 साल का एलएनजी समझौता है, जिसके तहत 2028 से 2048 तक हर साल 75 लाख टन एलएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

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राष्ट्रीय समाचार

सरकार ने कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को उपलब्ध पूरी क्षमता पर चलाने का दिया निर्देश

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बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिजली मंत्रालय ने बिजली अधिनियम की धारा 11 लागू करते हुए 50 मेगावाट और उससे अधिक क्षमता वाले कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अधिकतम बिजली उत्पादन करने का निर्देश दिया है।

मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय मौजूदा मांग-आपूर्ति की स्थिति और बिजली की खपत में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए लिया गया है।

मंत्रालय के अनुसार, देशभर के उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं।

बिजली अधिनियम की धारा 11 के तहत सरकार को असाधारण परिस्थितियों में बिजली उत्पादन कंपनियों को आधिकारिक निर्देशों के अनुरूप अपने बिजली संयंत्र संचालित करने का निर्देश देने का अधिकार है।

इन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मंत्रालय ने पात्र कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी उपलब्ध क्षमता का अधिकतम उपयोग करते हुए बिजली उत्पादन करने को कहा है।

मंत्रालय ने कहा कि देश में बिजली की कुल उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए कैप्टिव बिजली संयंत्रों समेत बिजली उत्पादन के सभी स्रोतों की क्षमता का पूरी तरह उपयोग करना जरूरी है।

निर्देशों के अनुसार, बिजली उत्पादकों को अपनी कैप्टिव जरूरतें पूरी करने के बाद बची हुई बिजली को लागू बाजार नियमों और प्रक्रियाओं के तहत पावर एक्सचेंजों पर बेचने की पेशकश करनी होगी।

इस कदम से बाजार में बिजली की उपलब्धता बढ़ने और पीक डिमांड को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

यह आदेश 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगा। इस अवधि के दौरान बिजली उत्पादन कंपनियों को पर्याप्त कोयला भंडार बनाए रखने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हो और अधिकतम बिजली उत्पादन जारी रखा जा सके।

निगरानी को सुगम बनाने के लिए मंत्रालय ने बिजली उत्पादकों को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को साप्ताहिक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इन रिपोर्टों में बिजली उत्पादन, कैप्टिव खपत, पावर एक्सचेंजों और अन्य स्वीकृत माध्यमों से बिजली की बिक्री, उपलब्ध उत्पादन क्षमता तथा कोयला भंडार के स्तर की जानकारी शामिल होगी।

सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से देशभर में बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और साल की अंतिम तिमाही में बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके तहत अतिरिक्त कैप्टिव बिजली उत्पादन क्षमता को ग्रिड में लाया जाएगा।

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