व्यापार
भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 296 अंक फिसला
मुंबई, 30 जनवरी : भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 296.59 अंक या 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,269.78 और निफ्टी 98.25 अंक या 0.39 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,320.65 पर बंद हुआ।
बाजार में गिरावट का नेतृत्व मेटल स्टॉक्स ने किया। निफ्टी मेटल इंडेक्स 5.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी कमोडिटीज 2.13 प्रतिशत, निफ्टी आईटी 1.03 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.90 प्रतिशत और निफ्टी सर्विसेज 0.64 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
दूसरी तरफ निफ्टी मीडिया 1.85 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.43 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 1.37 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.08 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 0.84 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 0.73 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 109 अंक या 0.19 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 58,432 अंक और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 54.10 अंक या 0.32 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,879.10 पर था।
सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, एसबीआई, आईटीसी, बीईएल, एचयूएल, टाइटन, मारुति सुजुकी, एशिनय पेंट्स, एक्सिस बैंक, सन फार्मा और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। टाटा स्टील, आईसीआईसीआई बैंक, पावर ग्रिड, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट और टीसीएस लूजर्स थे।
बाजार के जानकारों ने कहा कि आम बजट से पहले भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। मेटल शेयरों में तेज बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाने का काम किया। डॉलर में मजबूती के चलते सोने और चांदी में तेज गिरावट देखने को मिली।
उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी सरकार के हालिया कामकाज ठप होने को टालने के लिए हुए समझौते ने अस्थायी राहत प्रदान की, लेकिन नए फेड अध्यक्ष की नियुक्ति से पहले बाजार सतर्क बने हुए हैं, क्योंकि अधिक सख्त रुख से तरलता कम हो सकती है और उभरते बाजारों पर दबाव पड़ सकता है।
कमजोर ग्लोबल संकेतों से भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ खुला। सुबह 9:19 पर सेंसेक्स 444 अंक या 0.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 82,100 और निफ्टी 157 अंक या 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,261 पर था।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में एआई इंजीनियरिंग भर्तियां 59.5 प्रतिशत बढ़ी, छोटे शहरों में मांग ने पकड़ी रफ्तार

भारत में एआई इंजीनियरिंग भर्तियों में सालाना आधार पर 59.5 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है। यह यूएस,यूके, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में एआई इंजीनियर्स की भर्तियों से ज्यादा है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
लिंक्डइन ने एक रिपोर्ट में बताया कि बेंगलुरु और हैदराबाद एआई हायरिंग में शीर्ष पर बने हुए हैं। हालांकि, विजयवाडा जैसे शहरों में भी एआई भर्तियों में तेजी देखी जा रही है।
एआई इंजीनियरिंग भर्तियों में सालाना आधार पर हैदराबाद में 51 प्रतिशत और विजयवाडा में 45.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लघु एवं मध्यम आकार के व्यवसायों (एसएमबी) के बीच सबसे तेजी से विकसित हो रहे एआई कौशल में एआई एजेंट, एआई उत्पादकता और एज्योर एआई स्टूडियो शामिल हैं, जो व्यावहारिक और निष्पादन-केंद्रित क्षमताओं की बढ़ती मांग को दर्शाते हैं।
मैन्युफैक्चरिंग जैसे उद्योगों में, एआई एजेंट और एआई प्रॉम्प्टिंग रोजगार क्षमता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कौशल के रूप में उभर रहे हैं।
सभी आकार के संगठनों में एआई को तेजी से अपनाने के कारण एआई इंजीनियरिंग में भर्ती में वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े उद्यम बुनियादी ढांचे, शासन और बड़े पैमाने पर तैनाती में निवेश कर रहे हैं, जिसके चलते वे एआई प्रतिभाओं को सबसे अधिक संख्या में नियुक्त कर रहे हैं।
वहीं, छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ता जा रहा है, विभिन्न उद्योगों में एआई प्रतिभाओं की आपूर्ति भी बढ़ रही है। विनिर्माण क्षेत्र में, भारत में एआई इंजीनियरिंग प्रतिभाओं की संख्या चार गुना बढ़कर 2025 में कार्यबल का 2 प्रतिशत हो गई है।
लिंक्डइन इंडिया इंजीनियरिंग के प्रमुख मलाई लक्ष्मणन ने कहा, “हम एआई एजेंटों और उत्पादकता उपकरणों जैसे व्यावहारिक एआई कौशल में मजबूत वृद्धि देख रहे हैं, जो सीधे वास्तविक दुनिया में उपयोग से जुड़े हैं।”
लक्ष्मणन ने आगे कहा, “इंजीनियरों के लिए, यह एक स्पष्ट संकेत है कि वे व्यावहारिक, प्रायोगिक क्षमताओं के निर्माण और एआई को रोजमर्रा के कार्यप्रवाह में एकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित करें। जैसे-जैसे सभी आकार के उद्योगों और संगठनों में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, प्रयोग से क्रियान्वयन की ओर बढ़ने वाले लोग इस अवसर का लाभ उठाने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में होंगे।”
महाराष्ट्र
सेंसेक्स 77,000 के नीचे फिसला; आईटी सेक्टर, महंगा कच्चा तेल जैसे कारणों से तीन सत्रों से लगातार हो रही बिकवाली

मुंबई, भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीन कारोबारी सत्रों से बिकवाली देखी जा रही है। शुक्रवार को दोपहर 12:50 बजे सेंसेक्स 1,007 अंक या 1.30 तिशत की गिरावट के साथ 76,656 और निफ्टी 278 अंक या 1.15 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,895 पर था।
बाजार में चौतरफा बिकवाली देखी जा रही है। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी कमजोर बने हुए थे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 728.65 अंक या 1.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,219 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 200 अंक या 1.13 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,520 पर था।
बाजार में कमजोरी की एक बड़ी वजह आईटी सेक्टर का कमजोर प्रदर्शन करना है। इन्फोसिस और एसीएल टेक जैसी कंपनियों के कमजोर नतीजों के कारण पूरे आईटी सेक्टर में बिकवाली है और इस कारण से आईटी इंडेक्स 4 प्रतिशत से अधिक फिसल गया है।
कच्चे तेल की कीमतों का उच्च स्तर पर होना, बाजार में निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर डाल रहा है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसके साथ ही निकट अवधि में महंगाई भी बढ़ने का खतरा है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली भी बाजार को निचले स्तर पर धकेल रही है। गुरुवार को लगातार चौथ दिन विदेशी निवेशक शुद्ध विक्रेता थे और इस दौरान उन्होंने 3,200 करोड़ रुपए से अधिक की इक्विटी में बिकवाली की।
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पर अनिश्चितता के कारण मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है। वहीं, अमेरिका ने भी हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई और भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी बिकवाली देखी जा रही है।
भारत में अस्थिरता दर्शाने वाले इंडिया विक्स में भी तेजी देखी जा रही है। इंडिया विक्स 3.50 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19.24 पर था, जब भी इसमें तेजी देखने को मिलती है, तो आमतौर पर बाजार में गिरावट आती है।
व्यापार
शेयर बाजार वैश्विक बाजारों से मिलेजुले संकेतों के बीच लाल निशान में खुला, कंज्यूमर सेक्टर पर दबाव

वैश्विक बाजारों से मिलेजुले संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को लाल निशान में हुई। सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 625 अंक या 0.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,891 और निफ्टी 162 अंक या 0.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,215 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार में गिरावट का नेतृत्व कंज्यूमर सेक्टर कर रहा था। सूचकांकों में निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स टॉप लूजर था। इसके अलावा, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी और निफ्टी रियल्टी भी लाल निशान में थे। वहीं, निफ्टी फार्मा, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी पीएसई हरे निशान में थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी मिलाजुला कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंक या 0.28 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 60,035 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 7 अंक की मामूली तेजी के साथ 17,832 पर था।
सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, इंडिगो, इटरनल, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाइटन, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट और टाटा स्टील लूजर्स थे। वहीं, पावर ग्रिड और सन फार्मा गेनर्स थे।
वैश्विक बाजारों से मिलेजुले संकेत मिल जुले थे। टोक्यो, बैंकॉक, सोल, जकार्ता, हांगकांग और शंघाई लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बुधवार को तेजी के साथ बंद हुए, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.69 प्रतिशत और नैस्डैक 1.64 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
ईरान-अमेरिका तनाव के कारण कच्चे तेल में फिर से तेजी देखने को मिल रही है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया है।
कच्चे तेल में तेजी की वजह ईरान के उस बयान को माना जा रहा है, जिसमें ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
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