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बजट 2026 में सरकार का फोकस सुधारों पर रहने की उम्मीद
नई दिल्ली, 20 जनवरी : बजट 2026-27 में सरकार का फोकस सुधारों पर रहने की उम्मीद है। यह जानकारी मंगलवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई थी।
एचएसबीसी की रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार हाल के महीनों में शुरू किए गए सुधारों के क्रम को आने वाले बजट में जारी रखेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से एक फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश किया जाएगा।
रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार इस बजट में दो चीजों पर फोकस करेगी, जिसमें पहला- राजकोषीय नियंत्रण और दूसरा- सुधार है।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि सरकार वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा कर लेगी। कर दरों में कटौती के कारण राजस्व में आई गिरावट की भरपाई संभवतः आरबीआई और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के मजबूत लाभांश से और आंशिक रूप से चालू व्यय में कमी से हो जाएगी।
एचएसबीसी की रिपोर्ट में कहा गया, “योजनाओं में कटौती से सरकार को वित्त वर्ष 2027 में अपना खर्च कम करने में मदद मिलेगी और राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.2 प्रतिशत पर रहने की उम्मीद है।”
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 में शुद्ध उधार बिल के 11.5 लाख करोड़ रुपए पर अपरिवर्तित रहने का अनुमान है। हालांकि, उच्च मोचन बिल (कुछ बदलावों की संभावना के बावजूद) सकल उधार को बढ़ाकर 16 लाख करोड़ रुपए कर देगा।
रिपोर्ट में कहा गया है, “लेकिन उधार में वृद्धि नॉमिनल जीडीपी वृद्धि से कम रहेगी, जिससे इसे नियंत्रित किया जा सकेगा। राजकोषीय समेकन के बावजूद राजकोषीय प्रोत्साहन लगभग तटस्थ रहने की संभावना है, क्योंकि आरबीआई के लाभांश से प्राप्तियां फिर से अधिक होंगी।”
हालांकि, राज्य सरकारों के सार्वजनिक ऋण अनुपात में अगले कुछ वर्षों तक वृद्धि देखने को मिल सकती है, क्योंकि उनके पास समान समेकन का मार्ग नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया कि अच्छी बात यह है कि राज्यों को शामिल करने के बाद भी, कुल सकल बाजार उधार नॉमिनल जीडीपी वृद्धि से थोड़ा कम बढ़ सकता है। यह वित्त वर्ष 26 की तुलना में अच्छी स्थिति है, जब उधार में वृद्धि नॉमिनल जीडीपी से कहीं अधिक थी।
रिपोर्ट में कहा गया कि एचएसबीसी घरेलू मोर्चे पर राज्य और केंद्र द्वारा उदारीकरण अभियान जारी रखने, लघु फर्मों के लिए विनिर्माण प्रोत्साहन, राज्यों को पूंजीगत ऋण देने के लिए पूंजीगत व्यय विविधीकरण और सब्सिडी एवं केंद्र प्रायोजित योजनाओं में कुछ युक्तिकरण की उम्मीद करता है।
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मार्केट आउटलुक : फेड, कच्चा तेल, ईरान-अमेरिका वार्ता और आर्थिक आंकड़े अगले हफ्ते निर्धारित करेंगे शेयर बाजार की चाल

भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होने वाला है। अमेरिकी फेड की बैठक, चौथी तिमाही के नतीजे, ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता की दिशा, कच्चे तेल की कीमत और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से शेयर बाजार की चाल निर्धारित होगी।
ब्याज दरों पर अमेरिकी फेड की बैठक 28-29 अप्रैल के बीच प्रस्तावित है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है, जब ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है।
इसके अलावा, ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता पर नए अपडेट भी बाजार को प्रभावित करेंगे। फिलहाल के लिए दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को टाल दिया गया है। वहीं, अगले हफ्ते कच्चे तेल की चाल पर भी निवेशकों की निगाहें होंगी। फिलहाल वैश्विक अस्थिरता के कारण उच्च स्तर पर बना हुआ है।
नतीजों के सीजन के चलते घरेलू बाजारों में आगामी हफ्ते में हलचल बनी रहने उम्मीद है। इस दौरान एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, बजाज हाउसिंग फाइनेंस, कोल इंडिया, पंजाब एंड सिंध बैंक, एसबीआई कार्ड्स, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस, इटरनल, मारुति सुजुकी, अदाणी पावर, एसीसी, अदाणी एंटरप्राइजेज और गोदरेज एग्रोवेट जैसी कंपनियां अपने वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी।
इसके अतिरिक्त,सरकार द्वारा इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्शन के आंकड़े 28 अप्रैल को जारी किए जाएंगे, जिस पर निवेशकों की निगाहें होंगी।
बीता हफ्ता भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। इस दौरान सेंसेक्स 1,829.33 अंक या 2.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,664.21 और निफ्टी 455.60 अंक या 1.87 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,897.95 पर था।
बाजार में गिरावट का नेतृत्व आईटी शेयरों ने किया। निफ्टी आईटी में 10.31 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई। निफ्टी ऑटो 2.96 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 2.54 प्रतिशत,निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 2.49 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.37 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.13 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 1.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ लाल निशान में था।
वहीं, निफ्टी एनर्जी 2.63 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 2.23 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 1.56 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.53 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
व्यापार
भारत में 7 हफ्तों में पहली बार 106 मिलियन डॉलर का आया निवेश: रिपोर्ट

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले सप्ताह के दौरान 106 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश (इनफ्लो) दर्ज किया गया है, जो पिछले सात हफ्तों में पहली बार सकारात्मक रहा है।
एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, यह इनफ्लो पिछले छह हफ्तों में करीब 5 अरब डॉलर की निकासी (आउटफ्लो) के बाद आया है, जिससे संकेत मिलता है कि भारत-केंद्रित फंड्स से बिकवाली का दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि साप्ताहिक आउटफ्लो पहले के 1.2 अरब डॉलर के उच्च स्तर से घटकर करीब 180 मिलियन डॉलर रह गया है।
इस बीच, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) ने रिकवरी में अहम भूमिका निभाई और इस हफ्ते 220 मिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित किया, जबकि लॉन्ग-ओनली फंड्स में अभी भी लगभग 400 मिलियन डॉलर की निकासी देखी गई।
खास बात यह रही कि अमेरिका स्थित फंड्स, जो हाल के हफ्तों में भारी बिकवाली कर रहे थे, उन्होंने सात हफ्तों की लगातार निकासी (कुल 3.3 अरब डॉलर) के बाद इस हफ्ते 225 मिलियन डॉलर का निवेश किया।
हालांकि, सुधार के बावजूद भारत-केंद्रित निवेश रणनीतियों में लगातार नौ हफ्तों से निकासी जारी है।
वैश्विक स्तर पर तरलता की स्थिति चौथे हफ्ते भी मजबूत बनी रही, जिसमें प्रमुख फंड कैटेगरी में लगातार निवेश आ रहा है।
अमेरिकी इक्विटी फंड्स में पिछले एक महीने में हर हफ्ते 10 अरब से 22 अरब डॉलर तक का निवेश आया, जबकि ग्लोबल फंड्स में 16 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया।
ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट (जीईएम) फंड्स में हर हफ्ते करीब 2 अरब डॉलर तक का निवेश जारी रहा, जबकि इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ फंड्स में 1.4 अरब डॉलर का निवेश आया।
इसके विपरीत, यूरोप और चीन में पिछले पांच हफ्तों से लगातार निवेश निकल रहा है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रुझान दिखाता है।
कमोडिटी से जुड़े इक्विटी फंड्स में हाल के समय में तेजी के बाद अब निवेश की रफ्तार धीमी हो गई है।
साथ ही, ऊर्जा सेक्टर के फंड्स में निकासी कम हुई है, सोने में निवेश की गति धीमी गति से स्थिर हुई है, जबकि चांदी से जुड़े फंड्स में निवेश कमजोर बना हुआ है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में एआई इंजीनियरिंग भर्तियां 59.5 प्रतिशत बढ़ी, छोटे शहरों में मांग ने पकड़ी रफ्तार

भारत में एआई इंजीनियरिंग भर्तियों में सालाना आधार पर 59.5 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है। यह यूएस,यूके, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में एआई इंजीनियर्स की भर्तियों से ज्यादा है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
लिंक्डइन ने एक रिपोर्ट में बताया कि बेंगलुरु और हैदराबाद एआई हायरिंग में शीर्ष पर बने हुए हैं। हालांकि, विजयवाडा जैसे शहरों में भी एआई भर्तियों में तेजी देखी जा रही है।
एआई इंजीनियरिंग भर्तियों में सालाना आधार पर हैदराबाद में 51 प्रतिशत और विजयवाडा में 45.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लघु एवं मध्यम आकार के व्यवसायों (एसएमबी) के बीच सबसे तेजी से विकसित हो रहे एआई कौशल में एआई एजेंट, एआई उत्पादकता और एज्योर एआई स्टूडियो शामिल हैं, जो व्यावहारिक और निष्पादन-केंद्रित क्षमताओं की बढ़ती मांग को दर्शाते हैं।
मैन्युफैक्चरिंग जैसे उद्योगों में, एआई एजेंट और एआई प्रॉम्प्टिंग रोजगार क्षमता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कौशल के रूप में उभर रहे हैं।
सभी आकार के संगठनों में एआई को तेजी से अपनाने के कारण एआई इंजीनियरिंग में भर्ती में वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े उद्यम बुनियादी ढांचे, शासन और बड़े पैमाने पर तैनाती में निवेश कर रहे हैं, जिसके चलते वे एआई प्रतिभाओं को सबसे अधिक संख्या में नियुक्त कर रहे हैं।
वहीं, छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ता जा रहा है, विभिन्न उद्योगों में एआई प्रतिभाओं की आपूर्ति भी बढ़ रही है। विनिर्माण क्षेत्र में, भारत में एआई इंजीनियरिंग प्रतिभाओं की संख्या चार गुना बढ़कर 2025 में कार्यबल का 2 प्रतिशत हो गई है।
लिंक्डइन इंडिया इंजीनियरिंग के प्रमुख मलाई लक्ष्मणन ने कहा, “हम एआई एजेंटों और उत्पादकता उपकरणों जैसे व्यावहारिक एआई कौशल में मजबूत वृद्धि देख रहे हैं, जो सीधे वास्तविक दुनिया में उपयोग से जुड़े हैं।”
लक्ष्मणन ने आगे कहा, “इंजीनियरों के लिए, यह एक स्पष्ट संकेत है कि वे व्यावहारिक, प्रायोगिक क्षमताओं के निर्माण और एआई को रोजमर्रा के कार्यप्रवाह में एकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित करें। जैसे-जैसे सभी आकार के उद्योगों और संगठनों में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, प्रयोग से क्रियान्वयन की ओर बढ़ने वाले लोग इस अवसर का लाभ उठाने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में होंगे।”
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