व्यापार
सोने की कीमतें इस हफ्ते गिरीं, चांदी 2 लाख रुपए प्रति किलो के पार
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नई दिल्ली, 20 दिसंबर : सोने और चांदी में इस हफ्ते मिलाजुला कारोबार देखने को मिला है। सोने का दाम 931 रुपए प्रति 10 ग्राम कम हुआ है और चांदी की कीमतों में करीब 4,887 रुपए प्रति किलो का इजाफा हुआ है।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,31,779 रुपए प्रति 10 ग्राम है, जो कि पिछले हफ्ते इसी दिन 1,32,710 रुपए प्रति 10 ग्राम था। यह दिखाता है कि सोने की कीमतों में बीते एक हफ्ते के दौरान 931 रुपए प्रति 10 ग्राम की कमी हुई है।
22 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,20,710 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,21,562 रुपए था। वहीं, 18 कैरेट सोने की कीमत 99,533 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 98,834 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है।
चांदी की कीमतों में भी तेजी बनी हुई है। चांदी की कीमत एक हफ्ते में 4,887 रुपए बढ़कर 2,00,067 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि बीते हफ्ते 1,95,180 रुपए प्रति किलो थी।
इस हफ्ते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। सोना और चांदी का दाम क्रमश: 4,387 डॉलर प्रति औंस और 67.489 डॉलर प्रति औंस थी।
इससे पहले शुक्रवार को सोने की कीमत में 695 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत में 1,053 रुपए प्रति किलो की कमी देखने को मिली है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि शुक्रवार के सत्र के दौरान सोने ने एक सीमित दायरे में कारोबार किया। इसकी एक वजह डॉलर के मुकाबले रुपए में मजबूती थी। बाजार का फोकस आने वाले समय में अमेरिका में घरों की बिक्री के आंकड़े और अन्य आर्थिक आंकड़ों पर होगा। आने वाले समय में सोना 1,31,500 रुपए से लेकर 1,34,000 रुपए की रेंज में रह सकता है।
मौजूदा समय में घरेलू सोने और चांदी की कीमतों में डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू अहम भूमिका निभा रही है। इस कारण आने वाले समय में रुपए की चाल सोने और चांदी की कीमतों में अहम भूमिका निभाएगी।
व्यापार
महाराष्ट्र दिवस के चलते शेयर बाजार बंद, नहीं होगी खरीद-बिक्री

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस के चलते बंद रहेगा। इस दौरान दोनों मुख्य स्टॉक एक्सचेंज- बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं होगी।
अवकाश के चलते इक्विटी, डेरिवेटिव्स और एसएलबी सेगमेंट तीनों में कारोबार बंद रहेगा। सामान्य ट्रेडिंग अलगे सत्र यानी सोमवार, 4 मई को होगी।
कमोडिटी मार्केट आंशिक रूप से छुट्टी रहेगी। सुबह के सत्र (9 बजे से लेकर 5 बजे तक) में ट्रेडिंग बंद रहेगी, लेकिन शाम के सत्र (5 बजे से लेकर रात 11:55 तक) में कारोबार सामान्य रहेगा।
इसके अतिरिक्त, देश का प्रमुख कृषि-वस्तु बाजार, नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (एनसीडीईएक्स), सुबह और शाम दोनों सत्रों के लिए बंद रहेगा।
महाराष्ट्र दिवस के साथ-साथ आज अंतरराष्ट्रीय लेबर डे भी है, जिसके कारण एशिया के करीब सभी शेयर बाजार बंद हैं, जिसमें चीन, हांगकांग, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, मॉरीशस, मलेशिया, वियतनाम, ताइवान, पाकिस्तान और श्रीलंका का नाम शामिल हैं।
यूरोप में फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, पोलैंड और अन्य देशों के बाजार भी आज अंतरराष्ट्रीय लेबर डे के कारण बंद रहेंगे।
इसके अतिरिक्त, वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान सेंसेक्स 582.86 अंक या 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,913.50 और निफ्टी 180.10 अंक या 0.74 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,997.55 पर था।
लार्जकैप के साथ स्मॉलकैप और मिडकैप में भी कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 592.05 अंक या 0.98 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 59,784.85 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 86 अंक या 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,007.15 पर बंद हुआ।
इस दौरान सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, इन्फोसिस, अदाणी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा, मारुति सुजुकी और टीसीएस गेनर्स थे। इटरनल, एचयूएल, टाटा स्टील, एलएंडटी, ट्रेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, एसबीआई, एक्सिस बैंक, बीईएल, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, इंडिगो, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और पावर ग्रिड लूजर्स थे।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका: रिटायरमेंट सेविंग्स को विस्तार, ट्रंप ने जारी किया नया कार्यकारी आदेश

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लाखों अमेरिकियों, खासकर कम आय वाले और नियोक्ता-प्रायोजित योजनाओं से वंचित कामगारों के लिए रिटायरमेंट सेविंग्स खातों तक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए।
इसे “ऐतिहासिक कार्यकारी आदेश” बताते हुए ट्रंप ने कहा कि यह पहल आम नागरिकों को संघीय कर्मचारियों जैसी उच्च गुणवत्ता वाली रिटायरमेंट सेविंग्स योजनाओं का लाभ देगी।
उन्होंने कहा, “आज दोपहर मैं लाखों अमेरिकियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रिटायरमेंट सेविंग्स खातों तक पहुंच बढ़ाने वाले एक ऐतिहासिक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए बेहद उत्साहित हूं।”
ट्रंप के अनुसार, कम आय वाले अमेरिकियों को उनके खातों में सरकार की ओर से “प्रति वर्ष 1,000 डॉलर तक का मैचिंग फंड” मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पारंपरिक रोजगार संरचनाओं से बाहर काम करने वाले लोगों के लिए बेहद अहम साबित होगा। उन्होंने कहा, “जिन लाखों अमेरिकियों के पास नियोक्ता-प्रायोजित योजनाएं नहीं हैं, उनके लिए यह क्रांतिकारी होगा क्योंकि अब वे भी इसके दायरे में होंगे।”
ट्रंप ने इसके दीर्घकालिक लाभ का उदाहरण देते हुए कहा, “अगर 25 साल का कोई व्यक्ति हर महीने सिर्फ 165 डॉलर निवेश करता है, तो 65 साल की उम्र तक उसके खाते में अनुमानित 4,65,000 डॉलर हो सकते हैं… दूसरे शब्दों में, वह समृद्ध हो सकता है।”
राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने कहा कि यह नीति रिटायरमेंट सेविंग्स तक पहुंच में मौजूद संरचनात्मक खामियों को दूर करने के लिए तैयार की गई है। उन्होंने कहा, “आपने कम आय वाले, 35,000 डॉलर से कम आय वाले लोगों को यह मैचिंग सुविधा दी है।”
हैसेट ने बताया कि प्रशासन इस योजना के विस्तार पर भी काम कर रहा है। “हम कांग्रेस के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को काफी विस्तार देने की दिशा में काम कर रहे हैं,” उन्होंने कहा, साथ ही यह भी जोड़ा कि इसे मध्यम आय वर्ग तक बढ़ाने पर विचार हो रहा है।
ट्रंप ने माना कि योजना को और आगे बढ़ाने के लिए विधायी मंजूरी जरूरी होगी। उन्होंने कहा, “अगले स्तर तक ले जाने के लिए हमें कांग्रेस की मंजूरी चाहिए… यह द्विदलीय समर्थन से होना चाहिए।”
इस कार्यक्रम के तहत चैरिटेबल संगठनों को भी इंडिविजुअल रिटायरमेंट अकाउंट यानी व्यक्तिगत रिटायरमेंट खातों (आईआरए) में योगदान देने की अनुमति होगी, जिससे भागीदारी का दायरा और बढ़ेगा। हैसेट ने कहा, “ट्रंपआईआरए के तहत चैरिटी भी दूसरों के खातों में योगदान कर सकती हैं।”
ट्रंप ने इस पहल को व्यापक आर्थिक प्रदर्शन से भी जोड़ा और रोजगार व निवेश में वृद्धि का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “इस समय हमारे देश के इतिहास में सबसे ज्यादा लोग काम कर रहे हैं।”
अमेरिका की रिटायरमेंट प्रणाली लंबे समय से नियोक्ता-आधारित योजनाओं पर निर्भर रही है, जिससे गिग वर्कर्स और असंगठित श्रमिकों का एक बड़ा वर्ग इससे बाहर रह जाता है। हाल के वर्षों में इस खाई को पाटने के प्रयासों को दोनों दलों का समर्थन मिलता रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
एयर इंडिया ने ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल लागू करने के फैसले का किया स्वागत, कहा- इससे भारत के एविएशन सेक्टर में आएगा बड़ा बदलाव

एयर इंडिया ने बुधवार को सरकार के ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल को अपनाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश के एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव आएगा।
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन के सीईओ और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने सरकार की इस पहल को एविएशन सेक्टर के लिए एक ‘परिवर्तनकारी कदम’ बताया और कहा कि इससे कनेक्टिविटी मजबूत होगी और देश भर में एयरपोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर का अधिकतम उपयोग संभव होगा।
इस दौरान एयर इंडिया ने ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल के अंतर्गत वाराणसी से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लॉन्च किया।
विल्सन ने आगे कहा,“यह भारतीय एविएशन के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। भारत को वैश्विक विमानन केंद्र बनाने और पूरे एविएशन इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी प्रयासों के लिए हम उन्हें धन्यवाद देना चाहते हैं।”
साथ ही, उन्होंने एक बड़े एविएशन इकोसिस्टम के विकास और वैश्विक हवाई यात्रा में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की दूरदृष्टि की सराहना की।
इस मॉडल के अनुरूप अपनी विस्तार रणनीति के तहत, एयर इंडिया वाराणसी से अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी शुरू करने की तैयारी कर रही है, जिसका उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी क्षेत्रों के यात्रियों के लिए सुगम्य यात्रा सुनिश्चित करना है।
एयर इंडिया के गवर्नेंस, रिस्क, कंप्लायंस और कॉर्पोरेट अफेयर्स के ग्रुप हेड पी. बालाजी ने कहा कि इस कदम से भारत के ग्लोबल एविएशन को महानगरों से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और टियर 2 और टियर 3 शहरों के यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अधिक सुलभ हो जाएगी।
इसी महीने की शुरुआत में, नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने हब-एंड-स्पोक संचालन को लागू करने के लिए दिल्ली हवाई अड्डे की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए प्रमुख हितधारकों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
मंत्री ने कहा कि यह मॉडल उड़ान योजना के तहत विकसित टियर-II और टियर-III हवाई अड्डों और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी को सक्षम करेगा।
उन्होंने बताया कि भारत से लगभग 35 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय यात्री वर्तमान में दुबई, लंदन और सिंगापुर जैसे विदेशी हब के माध्यम से पारगमन करते हैं। उन्होंने आगे कहा, “हमारा लक्ष्य दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता और चेन्नई जैसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय केंद्रों का विकास करके इस ट्रेंड को पलटना है।”
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