राष्ट्रीय
महाराष्ट्र सरकार ने केवल आधार के आधार पर जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्र रद्द किए; देरी से हुए पंजीकरण की सख्त जांच के आदेश दिए
मुंबई: महाराष्ट्र में विलंबित जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए आधार कार्ड को दस्तावेज नहीं माना जाएगा और जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 के बाद केवल आधार कार्ड के माध्यम से बनाए गए सभी जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिए जाएंगे, राज्य राजस्व विभाग द्वारा जारी एक नोटिस में यह जानकारी दी गई है।
सरकार ने यह फैसला फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों के अवैध इस्तेमाल को रोकने के लिए लिया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आधार कार्ड का इस्तेमाल करके जारी किए गए सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों को रद्द करने का आदेश दिया है।
अब तक ये प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्व विभाग द्वारा 16 सूत्रीय सत्यापन दिशा-निर्देश में कहा गया है कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में 11 अगस्त, 2023 को किए गए संशोधन के बाद उप तहसीलदार द्वारा जारी आदेशों को वापस लिया जाए तथा वापस लिए गए आदेश का सत्यापन सक्षम प्राधिकारी या जिला कलेक्टर के स्तर पर कराया जाए।
चूंकि राज्य में निलंबित लंबित आवेदनों पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक है, इसलिए सभी संबंधित कार्यालयों की जाँच की जाए और लोक स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, जो आवेदन इस मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार नहीं हैं, उन्हें तत्काल रद्द किया जाए और नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) पोर्टल पर उनकी प्रविष्टि तुरंत हटा दी जाए, ऐसा दिशानिर्देशों में कहा गया है।
दिशानिर्देशों के अनुसार, आधार कार्ड को किसी भी विषय या मामले के साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है, और लंबित आवेदन की जांच के दौरान आधार संख्या और जन्म तिथि प्रमाण पत्र के बीच कोई विसंगति पाए जाने पर पुलिस शिकायत दर्ज की जानी चाहिए।
नोटिस में अमरावती, सिल्लोड, अकोला, संभाजीनगर शहर, लातूर, अंजनगांव सुर्जी, अचलपुर, पुसाद, परभणी, बीड, गेवराई, जालनाक्सी, अर्धपुर और परली सहित बड़ी संख्या में अनधिकृत जन्म-मृत्यु के मामलों वाले 14 क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है और सभी संबंधित तहसीलदारों/पुलिस स्टेशनों को मामलों की “गंभीरता से जांच” करने के लिए कहा गया है।
दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि तहसीलदारों द्वारा दिए गए आदेश के बाद सभी संबंधित नगर पालिकाओं/नगरपालिकाओं को विलंबित जन्म रिकॉर्ड का मिलान करना चाहिए।
यह देखा गया है कि कुछ कार्यालयों द्वारा प्रमाण-पत्र जारी कर दिए गए हैं, जबकि तहसीलदारों ने विलंबित जन्म अभिलेख लेने के आदेश नहीं दिए हैं। अतः उक्त प्रमाण-पत्रों के सत्यापन हेतु सभी संबंधित नगर पालिकाओं/नगरपालिकाओं के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
कई तहसीलदार कार्यालयों ने बिना किसी स्कूल प्रमाण पत्र या जन्मतिथि या स्थान के प्रमाण के, केवल आधार कार्ड को प्रमाण के रूप में स्वीकार करके आवेदकों को जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए हैं। विलंबित जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के लिए जारी आदेश त्रुटिपूर्ण हैं और ऐसे आदेशों पर पुनर्विचार करना कार्यपालक मजिस्ट्रेट या तहसीलदार की ज़िम्मेदारी है।
कार्यपालक मजिस्ट्रेट और उपखंड अधिकारी को विसंगतियों की सूची बनाकर पुलिस को देनी होगी। ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाए।
तहसीलदार या उप-विभागीय कार्यालय को ऐसे व्यक्तियों की सूची तुरंत प्रस्तुत करनी होगी, यदि केवल आधार कार्ड को मूल जन्म प्रमाण पत्र के लिए मूल महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है, और उन लोगों की सूची जिनकी जन्मतिथि आवेदक द्वारा आवेदन में दी गई जानकारी या साक्ष्य से भिन्न है, पुलिस स्टेशन को। जिस तहसील में कोई पुलिस शिकायत नहीं की गई है या कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, वहां जन्मतिथि में ऐसी विसंगतियों के लिए आवेदक के खिलाफ मामला दर्ज करना तहसीलदार की जिम्मेदारी है, जो जालसाजी या धोखाधड़ी है।
नोटिस में आगे कहा गया है कि जिन जन्म प्रमाण-पत्र आदेशों को रद्द किया गया है, उनके लिए तहसीलदार और स्थानीय स्वशासन निकायों के अधिकारी आपस में समन्वय स्थापित कर आवेदक से इन सभी मूल आदेशों की प्रति प्राप्त करें। यदि यह मूल प्रमाण-पत्र वापस नहीं किया जाता है, तो स्थानीय पुलिस की सहायता ली जाए।
नोटिस में कहा गया है कि संभागीय आयुक्तों को जिला कलेक्टर, सभी संबंधित तहसीलदारों, सभी संबंधित नगर निगमों/नगर पालिकाओं/जिला परिषदों/पुलिस के साथ समन्वय में उनकी अध्यक्षता में एक दिवसीय बैठक आयोजित करने के लिए कहा गया है।
राष्ट्रीय
मध्य प्रदेश में दुर्लभ कछुए के अंतरराष्ट्रीय तस्कर रहेंगे जेल में

भोपाल, 11 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में दुर्लभ कछुआ की तस्करी करने वाले आरोपी जेल में ही रहेंगे, क्योंकि सागर के अपर सत्र न्यायालय ने दोनों आरोपियों की अपील खारिज करते हुए सजा और अर्थ दंड को बरकरार रखा है। दरअसल, स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) ने अत्यंत दुर्लभ जलीय जीव रेड-क्राउंड रूफ कछुओं की अंतर्राष्ट्रीय तस्करी के मामले में शेखर दास और मोहम्मद सुल्तान को गिरफ्तार किया था, जिस पर उन्होंने अपील की थी।
इस अपील को विशेष न्यायालय द्वारा खारिज किया गया है। सजा एवं अर्थदंड को बरकरार रखा है। न्यायालय ने आरोपियों की अपील को निरस्त करते हुए उन दोनों को 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भुगतने के लिए केंद्रीय जेल सागर भेजने के आदेश जारी किए हैं। दोनों आरोपियों पर 10-10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग की संयुक्त टीम ने वर्ष 2017 में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य एवं उसके पारिस्थितिकी क्षेत्र से दुर्लभ लाल तिलकधारी कछुओं तथा पैंगोलिन शल्क की तस्करी का पर्दाफाश किया था। जांच में सामने आया कि आरोपी एक अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा थे, जो चंबल नदी से इन दुर्लभ कछुओं को एकत्र कर कोलकाता तथा भारत-बांग्लादेश सीमा के माध्यम से विदेशों में अवैध रूप से भेजता था। गिरोह द्वारा वन्यजीव तस्करी के साथ हवाला के जरिये अवैध वित्तीय लेनदेन का नेटवर्क भी संचालित किया जा रहा था।
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्य प्रदेश द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, बयानों और जांच रिपोर्ट के आधार पर विशेष न्यायालय सागर ने 29 मार्च 2022 को दोनों आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधन 2022) के उल्लंघन का दोषी पाते हुए 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध आरोपियों ने अपील की थी।
अपीलीय न्यायालय ने एसटीएसएफ द्वारा की गई विवेचना और प्रस्तुत साक्ष्यों को तथ्यपरक मानते हुए कहा कि विशेष न्यायालय के निर्णय में कोई वैधानिक त्रुटि नहीं है। अपीलीय न्यायालय ने दोनों आरोपियों की अपीलें निरस्त कर उन्हें सजा भुगतने के लिए केंद्रीय जेल सागर भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं।
दुर्घटना
जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर चार वाहनों की टक्कर, 18 अमरनाथ यात्री हुए घायल

जम्मू, 13 जुलाई: रामबन जिले में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर सोमवार को भीषण सड़क हादसा हो गया। अधिकारियों ने बताया कि इस सड़क हादसे में अमरनाथ यात्रा के 18 यात्री घायल हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, रामबन के चंदरकोट में लंगर पॉइंट पर पहलगाम जा रहे काफिले में शामिल दो एसआरटीसी बसों, एक कार और एक प्राइवेट बस की टक्कर हो गई।
अधिकारियों के मुताबिक, पहले एसआरटीसी की बस (जेके 01वाई-1044) दूसरी एसआरटीसी (जेके 01 वाई-1052) बस से टकरा गई। टक्कर की वजह से दूसरी बस एक कार (जेके21के-8115) से जा टकराई और फिर उस कार ने एक प्राइवेट बस (जेके02 सीएल-5499) को टक्कर मार दी। 4 वाहनों में टक्कर के कारण 18 अमरनाथ यात्री घायल हो गए।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी 18 घायल तीर्थयात्रियों को इलाज के लिए तुरंत रामबन के ज़िला अस्पताल पहुंचाया। अधिकारियों ने बताया कि सभी को मामूली चोटें आई हैं और उनकी हालत स्थिर है।
अभी तक 10 घायलों की पहचान हुई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले कमलेश राजपूत के 23 वर्षीय बेटे हर्ष राजपूत, सुरेश गुप्ता के 18 वर्षीय बेटे विशाल गुप्ता, हीरा लाल शंकर के 23 वर्षीय बेटे पंकज सुवनकर, महाराष्ट्र के यवतमाल के जीवन मोवाडे के 29 वर्षीय बेटे सुहास जीवन मोवाडे, राजस्थान के गंगानगर के रतन के 45 वर्षीय बेटे भारत भूषण, शिव के 51 वर्षीय बेटे विनोद कुमार घायल हुए हैं। वहीं, राजस्थान के बीकानेर के सत्तासर के रतन, राजस्थान के विनोद बागला की 48 वर्षीय पत्नी किरण, पंजाब के अक्षय कुमार की 50 वर्षीय पत्नी सीमा रानी, राजस्थान के शिव रतन के 67 वर्षीय बेटे पवन कुमार और राजस्थान के जनता सिंघा के 41 वर्षीय बेटे गंगा सिन्हा भी हादसे में घायल हुए हैं। बाकी 8 घायलों की पहचान अभी नहीं हो पाई है।
हादसे के बाद जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक कुछ देर के लिए प्रभावित हुआ। पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और आगे की जांच चल रही है।
3 जुलाई को शुरू हुई श्री अमरनाथ यात्रा 57 दिनों के बाद 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के त्योहारों के साथ संपन्न होगी। इस साल की यात्रा शुरू होने के बाद से, कश्मीर हिमालय में समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर में 2.45 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं।
अपराध
कर्नाटक: ब्लैकमेल कर व्यापारी से 2.77 करोड़ रुपए वसूलने के आरोप में यूथ कांग्रेस नेता और उसका साथी गिरफ्तार

मंगलुरु, 9 जून: कर्नाटक के मंगलुरु में जबरन वसूली का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने एक प्रमुख व्यापारी को ब्लैकमेल करने और लगभग दो साल में 2.77 करोड़ रुपए वसूलने के आरोप में यूथ कांग्रेस के एक पदाधिकारी और उसके साथी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान मंगलुरु यूथ कांग्रेस के महासचिव निजाम और जितेश के तौर पर हुई है। आरोप है कि जितेश ने पहले व्यापारी को अपने जाल में फंसाया और बाद में उसकी अश्लील तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल करके उसे ब्लैकमेल किया। पुलिस ने बताया कि जितेश ने शुरू में 35 लाख की मांग की और वीडियो को पीड़ित की पत्नी को दिखाने की धमकी दी। अपनी बदनामी के डर से व्यापारी ने चेक के जरिए यह रकम दे दी।
जब पैसों की मांग जारी रही तो व्यापारी ने मदद के लिए निजाम से संपर्क किया, हालांकि पुलिस का आरोप है कि निजाम ने मदद करने के बजाय जितेश का साथ दिया और जबरन वसूली के इस रैकेट में शामिल हो गया।
इसके बाद दोनों ने आत्महत्या की एक झूठी कहानी रची। निजाम ने मई 2024 में व्यापारी को बताया कि जितेश ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में पीड़ित का नाम लिखा है। कहानी को सच साबित करने के लिए आरोपियों ने जितेश की मौत और अंतिम संस्कार की तस्वीरें दिखाईं और व्यापारी को आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी दी।
गिरफ्तारी और सामाजिक बदनामी के डर से व्यापारी पैसे देता रहा। पुलिस ने बताया कि 2024 से 2026 के बीच पीड़ित से कुल 2.77 करोड़ रुपए वसूले गए। यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब जून 2026 में व्यापारी ने जितेश को मंगलुरु में जिंदा देखा। जिस व्यक्ति को वह मरा हुआ समझ रहा था, उसे जिंदा देखकर वह हैरान रह गया और उसने उरवा पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने निजाम और जितेश दोनों को गिरफ्तार कर लिया। मामले की और जानकारी के लिए आगे की जांच चल रही है। इस बीच गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर मंगलुरु और पूरे कर्नाटक के कई राजनीतिक नेताओं के साथ निजाम की तस्वीरें वायरल हो गई हैं।
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